भारतीय जूनियर पुरुष हॉकी टीम ने जूनियर एशिया कप 2026 के फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है। चीन के मोकी में शुक्रवार को खेले गए सेमीफाइनल मुकाबले में भारत ने मलेशिया को 3-1 के अंतर से शिकस्त देकर खिताबी मुकाबले का टिकट हासिल किया। इस जीत में भारतीय टीम के कप्तान अनमोल एक्का की भूमिका बेहद अहम रही। उन्होंने मुकाबले में दो गोल दागकर टीम की जीत की नींव मजबूत की। सुखविंदर ने भी भारत के लिए एक गोल किया, जबकि मलेशिया की ओर से एम. राहुल एकमात्र गोल करने में सफल रहे।
इस जीत के बाद भारतीय टीम की नजर अब ट्रॉफी पर है। फाइनल मुकाबला 13 सितंबर को खेला जाएगा, जहां भारत का सामना पाकिस्तान और साउथ कोरिया के बीच होने वाले दूसरे सेमीफाइनल के विजेता से होगा। मौजूदा चैंपियन भारत के पास इस बार लगातार तीसरी बार जूनियर एशिया कप का खिताब अपने नाम करने का शानदार मौका है।
फाइनल से पहले भारत का दमदार प्रदर्शन
भारतीय टीम ने पूरे टूर्नामेंट में जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उससे उसकी दावेदारी और मजबूत दिखाई देती है। पूल चरण में शानदार प्रदर्शन करने के बाद टीम ने सेमीफाइनल में भी अपने खेल की लय बरकरार रखी। मलेशिया के खिलाफ मुकाबले में भारत ने शुरुआत से ही आक्रामक हॉकी खेलने की कोशिश की और लगातार विपक्षी टीम के डिफेंस पर दबाव बनाया।
कप्तान अनमोल एक्का ने एक बार फिर अपनी गोल करने की क्षमता का प्रदर्शन किया। उन्होंने दो बार गेंद को गोल पोस्ट के अंदर पहुंचाकर भारत को महत्वपूर्ण बढ़त दिलाई। सुखविंदर के गोल ने भारतीय टीम की स्थिति और मजबूत कर दी। मलेशिया ने वापसी की कोशिश करते हुए एक गोल जरूर किया, लेकिन भारतीय डिफेंस ने बाकी समय में उसे ज्यादा मौके नहीं दिए।
आखिरकार भारत ने मुकाबला 3-1 से अपने नाम किया और फाइनल में पहुंच गया।
कप्तान अनमोल एक्का बने टीम की ताकत
इस टूर्नामेंट में भारतीय टीम के लिए अनमोल एक्का लगातार प्रभावशाली साबित हुए हैं। कप्तान ने अलग-अलग मुकाबलों में महत्वपूर्ण मौकों पर गोल किए हैं और सेमीफाइनल में भी उनका प्रदर्शन निर्णायक रहा।
मलेशिया के खिलाफ दो गोल करने के साथ उन्होंने एक बार फिर साबित किया कि भारतीय आक्रमण की अगुवाई करने की जिम्मेदारी वह बखूबी निभा रहे हैं। पूल चरण में भी उनके नाम कई गोल रहे थे। खासकर चीनी ताइपे के खिलाफ उनका प्रदर्शन यादगार रहा, जब उन्होंने अकेले छह गोल दागे थे।
अनमोल की गोल करने की क्षमता भारतीय टीम के लिए फाइनल से पहले बड़ी सकारात्मक बात है। उनके अलावा टीम के दूसरे खिलाड़ियों ने भी अलग-अलग मुकाबलों में योगदान दिया है, जिससे भारत का आक्रमण केवल एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं दिखाई देता।
पूल-ए में भारत ने दिखाया था दबदबा
फाइनल तक पहुंचने से पहले भारत ने पूल-ए में शानदार अभियान चलाया। भारतीय टीम को इस ग्रुप में साउथ कोरिया, जापान, चीनी ताइपे और इंडोनेशिया के साथ रखा गया था। चार लीग मुकाबलों के बाद भारत ने तीन मैच जीते और एक मुकाबला ड्रॉ खेला। इस प्रदर्शन के दम पर टीम ने 10 अंक जुटाए और अपने पूल में पहला स्थान हासिल किया।
साउथ कोरिया 9 अंकों के साथ दूसरे नंबर पर रहा। इस तरह भारत ने पूल चरण में शीर्ष स्थान हासिल करके सेमीफाइनल में जगह बनाई और फिर मलेशिया को हराकर फाइनल का रास्ता तय कर लिया।
भारतीय टीम ने पूल स्टेज के दौरान कुल 39 गोल किए, जबकि उसके खिलाफ सिर्फ छह गोल हुए। आंकड़े बताते हैं कि टीम ने आक्रमण के साथ-साथ डिफेंस में भी अच्छा संतुलन बनाए रखा।
इंडोनेशिया के खिलाफ हुई गोलों की बारिश
भारत ने प्रतियोगिता में अपने अभियान की शुरुआत बेहद धमाकेदार अंदाज में की। पहले ही मैच में भारतीय खिलाड़ियों ने इंडोनेशिया के खिलाफ 14-0 की एकतरफा जीत दर्ज की।
इस मुकाबले में भारतीय फॉरवर्ड लाइन ने विपक्षी डिफेंस को लगातार परेशान किया। कप्तान अनमोल एक्का ने चार गोल किए, जबकि अजीत यादव ने तीन बार गेंद को गोल पोस्ट तक पहुंचाया। प्रभदीप सिंह का प्रदर्शन भी शानदार रहा और उन्होंने पांच गोल अपने नाम किए।
पहले ही मैच में इतनी बड़ी जीत ने भारतीय टीम के इरादे साफ कर दिए थे। इस परिणाम के बाद टीम का आत्मविश्वास बढ़ा और आगे के मुकाबलों में भी उसने आक्रामक रणनीति को जारी रखा।
जापान ने रोकी जीत की रफ्तार
इंडोनेशिया के खिलाफ बड़ी जीत के बाद भारत को अपने दूसरे मुकाबले में जापान से कड़ी चुनौती मिली। यह मैच दोनों टीमों के बीच 3-3 की बराबरी पर समाप्त हुआ।
जापान ने भारतीय टीम को खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया और मुकाबला लगातार रोमांचक बना रहा। भारत ने जीत के लिए कई प्रयास किए, लेकिन निर्धारित समय तक स्कोर बराबर रहा। यह टूर्नामेंट में भारत का एकमात्र ड्रॉ साबित हुआ।
इसके बाद भारतीय टीम ने अगले मुकाबलों में अपनी लय दोबारा हासिल कर ली और लगातार जीत दर्ज करते हुए पूल में शीर्ष स्थान हासिल किया।
साउथ कोरिया के खिलाफ शानदार वापसी
भारत का अगला बड़ा मुकाबला साउथ कोरिया के खिलाफ था। इस मैच में भारतीय टीम ने 7-3 से शानदार जीत हासिल की। मुकाबले के दौरान दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने निर्णायक क्षणों में बेहतर प्रदर्शन किया।
अनमोल एक्का ने इस मैच में भी दो गोल किए। मुकाबले के आखिरी क्वार्टर में भारत ने लगातार तीन गोल दागकर मैच को पूरी तरह अपने पक्ष में कर लिया। इस आक्रामक प्रदर्शन ने साउथ कोरिया की वापसी की उम्मीदों को खत्म कर दिया।
इस जीत के बाद भारत के लिए पूल में शीर्ष स्थान की स्थिति काफी मजबूत हो गई थी।
चीनी ताइपे के खिलाफ रिकॉर्ड जैसी जीत
पूल चरण के अंतिम मुकाबले में भारत ने चीनी ताइपे के खिलाफ 15-0 से बड़ी जीत दर्ज की। इस मुकाबले में भारतीय टीम का दबदबा शुरुआत से लेकर अंत तक कायम रहा।
कप्तान अनमोल एक्का ने इस मैच में अकेले छह गोल किए। खास बात यह रही कि उनके सभी छह गोल पेनल्टी कॉर्नर के जरिए आए। भारतीय टीम ने विपक्षी डिफेंस पर लगातार दबाव बनाए रखा और गोल करने के मौके का भरपूर फायदा उठाया।
15-0 की जीत के साथ भारत ने 10 अंक जुटाकर पूल-ए में पहला स्थान सुनिश्चित किया। इस दौरान टीम ने 39 गोल किए और केवल छह गोल खाए।
मलेशिया ने भी आसान नहीं किया सेमीफाइनल का रास्ता
सेमीफाइनल में भारत के सामने पूल-बी की दूसरे स्थान पर रहने वाली मलेशियाई टीम थी। मलेशिया ने ग्रुप चरण में कजाकिस्तान और बांग्लादेश को हराकर अच्छा प्रदर्शन किया था। हालांकि पाकिस्तान के खिलाफ उसे 5-2 से हार का सामना करना पड़ा था।
इसके बाद चीन के खिलाफ मलेशिया ने 1-0 की जीत दर्ज की और सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की। ऐसे में भारत के लिए यह मुकाबला भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था।
लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने दबाव के बावजूद अपने खेल का स्तर बनाए रखा और 3-1 से मुकाबला जीतकर फाइनल में प्रवेश कर लिया।
अब पाकिस्तान या साउथ कोरिया से होगा सामना
भारतीय टीम को फाइनल में पाकिस्तान या साउथ कोरिया में से किसी एक का सामना करना होगा। दूसरा सेमीफाइनल 13 सितंबर को खेला जाएगा। उसी मुकाबले से यह तय होगा कि खिताब के लिए भारत के सामने कौन सी टीम उतरेगी।
भारत की कोशिश अब सेमीफाइनल की सफलता को चैंपियनशिप में बदलने की होगी। टीम पहले ही पूल चरण और सेमीफाइनल में अपने प्रदर्शन से खिताब की मजबूत दावेदार बन चुकी है।
लगातार तीसरी बार चैंपियन बनने का मौका
भारत जूनियर एशिया कप में पहले ही अपनी मजबूत विरासत कायम कर चुका है। टीम ने 2023 में पाकिस्तान को 2-1 से हराकर खिताब जीता था। इसके बाद 2024 में भी भारत ने पाकिस्तान को फाइनल में 5-3 से मात देकर लगातार दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की।
2024 की जीत के साथ भारत के जूनियर एशिया कप खिताबों की संख्या पांच हो गई थी। इससे पहले भारतीय टीम 2004, 2008 और 2015 में भी इस प्रतियोगिता की चैंपियन रह चुकी है।
2023 में पाकिस्तान को पीछे छोड़ने के बाद भारत इस प्रतियोगिता में सबसे ज्यादा खिताब जीतने वाली टीम बन गया था। अब 2026 में उसके पास अपने रिकॉर्ड को और बेहतर करने का अवसर है।
सिर्फ ट्रॉफी नहीं, वर्ल्ड कप का टिकट भी अहम
इस टूर्नामेंट का महत्व केवल जूनियर एशिया कप की ट्रॉफी तक सीमित नहीं है। प्रतियोगिता एशियाई टीमों के लिए एफआईएच जूनियर वर्ल्ड कप के क्वालिफिकेशन से भी जुड़ी हुई है।
भारत के अलावा मलेशिया, पाकिस्तान और साउथ कोरिया ने सेमीफाइनल में पहुंचकर 2027 में होने वाले जूनियर वर्ल्ड कप के लिए अपनी जगह सुनिश्चित कर ली है। ऐसे में टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण का हर मुकाबला खिलाड़ियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
भारतीय टीम अब फाइनल में जीत हासिल कर न सिर्फ तीसरी लगातार एशियाई जूनियर ट्रॉफी जीतना चाहेगी, बल्कि इस पूरे अभियान को यादगार अंदाज में समाप्त करने की कोशिश करेगी। कप्तान अनमोल एक्का की शानदार फॉर्म, मजबूत आक्रमण और पूल चरण से लेकर सेमीफाइनल तक टीम के प्रदर्शन को देखते हुए भारत की नजर अब सिर्फ एक चीज पर है, जूनियर एशिया कप की ट्रॉफी को फिर से अपने नाम करना।




