डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा बोले- स्वास्थ्य क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों के साथ रोजगार के नए रास्ते खोलेगा संस्थान, सात करोड़ के उपकरणों की खरीद को मंजूरी
हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। हमीरपुर में उत्तर भारत का पहला पूर्णतः स्वतंत्र एलाइड एंड हेल्थकेयर कॉलेज स्थापित किया गया है। इस संस्थान के शुरू होने से हिमाचल प्रदेश के साथ-साथ उत्तर भारत के अन्य राज्यों के विद्यार्थियों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े व्यावसायिक और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों में शिक्षा हासिल करने का नया अवसर उपलब्ध होगा।
हमीरपुर विधानसभा क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने इस पहल को क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू की स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर दूरगामी सोच के परिणामस्वरूप यह संस्थान अस्तित्व में आया है। उन्होंने कहा कि बदलती स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरतों को देखते हुए प्रशिक्षित एलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे समय में हमीरपुर में इस प्रकार के विशिष्ट संस्थान की स्थापना युवाओं और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।
पत्रकारों से बातचीत में डॉ. वर्मा ने बताया कि संस्थान के प्रारंभिक चरण में चार स्नातक स्तर के पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इनमें बैचलर ऑफ रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी, बैचलर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी, बैचलर ऑफ एनेस्थीसिया एंड ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी तथा बैचलर ऑफ डायलिसिस थेरेपी टेक्नोलॉजी शामिल हैं।
रेडियोलॉजी एंड इमेजिंग टेक्नोलॉजी में 60 विद्यार्थियों के लिए सीटें उपलब्ध होंगी। इसी तरह मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी में भी 60 सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। एनेस्थीसिया एंड ऑपरेशन थिएटर टेक्नोलॉजी में 60 सीटें निर्धारित की गई हैं, जबकि डायलिसिस थेरेपी टेक्नोलॉजी में 30 विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेगा। इस तरह शुरुआती दौर में इन चारों पाठ्यक्रमों को मिलाकर हर वर्ष कुल 210 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण और उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
डॉ. वर्मा के अनुसार, संस्थान की योजना केवल मौजूदा चार पाठ्यक्रमों तक सीमित नहीं है। आने वाले वर्ष में तीन से चार अन्य रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाने की संभावना है। इससे विद्यार्थियों को स्वास्थ्य सेवाओं के अलग-अलग विशिष्ट क्षेत्रों में करियर बनाने के लिए और अधिक विकल्प मिल सकेंगे।
उन्होंने कहा कि आज स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा केवल डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ तक सीमित नहीं रह गया है। किसी भी आधुनिक अस्पताल में जांच, इमेजिंग, ऑपरेशन थिएटर, एनेस्थीसिया, डायलिसिस और अन्य तकनीकी सेवाओं को संचालित करने के लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों की जरूरत होती है। इन सेवाओं की गुणवत्ता काफी हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि अस्पतालों में कितने कुशल और प्रशिक्षित एलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स उपलब्ध हैं।
रेडियोलॉजी और इमेजिंग के क्षेत्र में तकनीक के तेजी से विस्तार के साथ प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता बढ़ रही है। मेडिकल लेबोरेटरी सेवाएं भी आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। मरीज की बीमारी की पहचान से लेकर उपचार की निगरानी तक विभिन्न प्रकार की जांचों में लैब तकनीशियनों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। इसी प्रकार ऑपरेशन थिएटर और एनेस्थीसिया सेवाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त मानव संसाधन आवश्यक है।
डायलिसिस के क्षेत्र में भी विशेषज्ञ प्रशिक्षित कर्मचारियों की मांग बढ़ी है। ऐसे में इन चारों क्षेत्रों को शुरुआती पाठ्यक्रमों में शामिल करना रोजगार की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। डॉ. वर्मा ने कहा कि संस्थान से निकलने वाले विद्यार्थी सरकारी और निजी अस्पतालों के अलावा विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों और संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर तलाश सकेंगे।
स्वतंत्र संस्थान के रूप में होगा संचालन
डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने बताया कि हमीरपुर में स्थापित किया जा रहा एलाइड एंड हेल्थकेयर कॉलेज किसी अन्य संस्थान की केवल एक शाखा के रूप में संचालित नहीं होगा, बल्कि इसे पूर्णतः स्वतंत्र संस्थान के तौर पर विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे संस्थान को अपनी शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
संस्थान के संचालन के लिए आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध करवाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। प्रधानाचार्य, सहायक प्राध्यापकों और ट्यूटर्स समेत फैकल्टी से जुड़े कुल 16 नए पद सृजित किए गए हैं। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए आवश्यक शैक्षणिक ढांचा तैयार किया जा सकेगा।
डॉ. वर्मा ने कहा कि किसी भी व्यावसायिक स्वास्थ्य पाठ्यक्रम की सफलता केवल कक्षाओं में पढ़ाई तक सीमित नहीं होती। विद्यार्थियों को आधुनिक उपकरणों के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण देना भी उतना ही जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए कॉलेज में आवश्यक इंस्ट्रूमेंट और उपकरणों की खरीद के लिए सात करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक उपकरणों से विद्यार्थियों को अपने विषय से जुड़े तकनीकी पहलुओं को व्यवहारिक रूप से समझने में मदद मिलेगी। इससे उनकी पेशेवर क्षमता बढ़ेगी और वे प्रशिक्षण पूरा करने के बाद स्वास्थ्य संस्थानों में बेहतर तरीके से अपनी जिम्मेदारियां निभा सकेंगे।
राष्ट्रीय कानून के बाद नई दिशा
डॉ. वर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य देखरेख वृत्ति आयोग अधिनियम, 2021 के लागू होने के बाद एलाइड और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स की शिक्षा एवं प्रशिक्षण को एक नई दिशा मिली है। इसी व्यापक व्यवस्था के तहत हमीरपुर में पूर्णतः स्वतंत्र एलाइड एंड हेल्थकेयर कॉलेज की स्थापना को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी विशेषज्ञता रखने वाले कर्मचारियों की भूमिका आने वाले वर्षों में और बढ़ने वाली है। चिकित्सा तकनीक में लगातार हो रहे बदलावों के कारण अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेवाओं में ऐसे युवाओं की आवश्यकता बढ़ रही है, जिन्हें आधुनिक उपकरणों और प्रक्रियाओं का व्यवस्थित प्रशिक्षण मिला हो।
उनके मुताबिक हमीरपुर में इस तरह का संस्थान स्थापित होने से प्रदेश के विद्यार्थियों को इन पाठ्यक्रमों के लिए दूसरे राज्यों का रुख करने की जरूरत कम होगी। वहीं उत्तर भारत के अन्य हिस्सों से भी विद्यार्थी यहां शिक्षा प्राप्त करने के लिए आ सकते हैं। इससे हमीरपुर की पहचान शिक्षा और स्वास्थ्य प्रशिक्षण के एक नए केंद्र के रूप में विकसित होने की संभावना है।
युवाओं के लिए रोजगार की नई संभावनाएं
डॉ. वर्मा ने कहा कि आज युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक ऐसा व्यावसायिक प्रशिक्षण हासिल करना है, जिसके बाद उन्हें रोजगार के वास्तविक अवसर मिल सकें। स्वास्थ्य क्षेत्र में तकनीकी और सहायक सेवाओं से जुड़े पाठ्यक्रम इस दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को लगातार प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता रहती है।
उन्होंने कहा कि एलाइड हेल्थकेयर के क्षेत्र में प्रशिक्षण प्राप्त युवा विभिन्न संस्थानों में नौकरी के साथ-साथ भविष्य में स्वरोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ डायग्नोस्टिक सेंटर, लैबोरेटरी, डायलिसिस सेंटर और अन्य चिकित्सा सुविधाओं में प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत भी बढ़ रही है।
इससे ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं के लिए अपने क्षेत्र के आसपास रोजगार तलाशने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। डॉ. वर्मा ने कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने से युवाओं को बेहतर करियर विकल्प मिलेंगे और उन्हें रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन करने की आवश्यकता भी कम हो सकती है।
स्वास्थ्य व्यवस्था को मिलेगा प्रशिक्षित मानव संसाधन
इस संस्थान का महत्व केवल विद्यार्थियों की शिक्षा तक सीमित नहीं है। डॉ. वर्मा ने कहा कि इसका सीधा लाभ राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी मिल सकता है। प्रशिक्षित एलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स उपलब्ध होने से अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में तकनीकी सेवाओं को और प्रभावी ढंग से संचालित किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में मरीज का उपचार कई स्तरों पर होने वाली सेवाओं का परिणाम होता है। डॉक्टर के परामर्श के बाद जांच, इमेजिंग, लैब रिपोर्ट, ऑपरेशन थिएटर की तैयारी, एनेस्थीसिया और जरूरत पड़ने पर डायलिसिस जैसी सेवाएं उपचार प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती हैं। इन सभी क्षेत्रों में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की मौजूदगी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में योगदान देती है।
डॉ. वर्मा ने कहा कि हमीरपुर में कॉलेज की स्थापना इस व्यापक जरूरत को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। आने वाले समय में जब यहां और पाठ्यक्रम जोड़े जाएंगे तो स्वास्थ्य क्षेत्र में विशेषज्ञ प्रशिक्षण का दायरा और बढ़ेगा।
अगले चरण में और पाठ्यक्रमों पर नजर
कॉलेज के प्रारंभिक चरण में चार पाठ्यक्रमों के साथ शुरुआत की जा रही है, लेकिन संस्थान को भविष्य में और व्यापक बनाने की योजना है। डॉ. वर्मा के अनुसार अगले वर्ष तीन से चार अतिरिक्त रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम शुरू किए जाने की संभावना है।
इससे विद्यार्थियों को स्वास्थ्य क्षेत्र के अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार विशेषज्ञता हासिल करने का विकल्प मिलेगा। पाठ्यक्रमों की संख्या बढ़ने के साथ संस्थान में विद्यार्थियों की संख्या भी बढ़ सकती है और इससे हमीरपुर की शैक्षणिक गतिविधियों को भी नया विस्तार मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री का जताया आभार
डॉ. पुष्पेंद्र वर्मा ने हमीरपुर में इस संस्थान की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य शिक्षा के क्षेत्र में इतना बड़ा संस्थान स्थापित होना मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता और भविष्य की जरूरतों को समझने वाली सोच को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र का विकास केवल सड़क, भवन और अन्य बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं होता। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में संस्थानों का निर्माण लंबे समय तक समाज और आने वाली पीढ़ियों को लाभ पहुंचाता है। हमीरपुर में एलाइड एंड हेल्थकेयर कॉलेज भी इसी दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
डॉ. वर्मा ने कहा कि संस्थान के माध्यम से जहां युवाओं को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा मिलेगी, वहीं प्रदेश को स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन भी उपलब्ध होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में कॉलेज अपनी शैक्षणिक गतिविधियों का विस्तार करेगा और हमीरपुर को एलाइड हेल्थकेयर शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि शुरुआती स्तर पर 210 विद्यार्थियों को हर साल प्रवेश मिलने और भविष्य में नए पाठ्यक्रम जोड़े जाने से संस्थान का दायरा लगातार बढ़ेगा। सात करोड़ रुपये के उपकरण बजट और 16 नए फैकल्टी पदों के साथ तैयार हो रहा यह संस्थान स्वास्थ्य शिक्षा को व्यावहारिक प्रशिक्षण से जोड़ने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर हमीरपुर में स्वतंत्र एलाइड एंड हेल्थकेयर कॉलेज की स्थापना क्षेत्र के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार—तीनों मोर्चों पर नई संभावनाएं लेकर आई है। शुरुआती चार पाठ्यक्रमों से 210 विद्यार्थियों को हर वर्ष अवसर मिलने के साथ भविष्य में और पाठ्यक्रमों के विस्तार की योजना इस संस्थान को प्रदेश के युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण करियर केंद्र बना सकती है। वहीं प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होने से हिमाचल की स्वास्थ्य व्यवस्था को भी इसका दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।



