संगठन में नई जिम्मेदारियों के लिए नेताओं ने लगाया जोर, राहुल-प्रियंका ने लिए इंटरव्यू; तीन राष्ट्रीय सचिवों के नामों पर जल्द लग सकती है मुहर
हरियाणा में करीब 12 वर्षों से सत्ता से दूर चल रही कांग्रेस में भले ही सरकार बनाने की स्थिति नहीं है, लेकिन संगठन के भीतर महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को लेकर उत्साह लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है। प्रदेश कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की कवायद के बीच अब पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में हरियाणा की हिस्सेदारी बढ़ाने को लेकर नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी यानी एआइसीसी में राष्ट्रीय सचिव के पद के लिए प्रदेश के 15 नेताओं ने अपनी दावेदारी पेश की है।
इस बार हरियाणा से तीन राष्ट्रीय सचिव बनाए जाने हैं। खास बात यह है कि पार्टी ने इन नियुक्तियों की प्रक्रिया को पहले की तुलना में अधिक औपचारिक और प्रतिस्पर्धी बनाया है। राष्ट्रीय सचिव पद के इच्छुक नेताओं के लिए बाकायदा इंटरव्यू आयोजित किए गए और इस प्रक्रिया में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की सीधी भागीदारी रही। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने स्वयं दावेदारों से बातचीत कर उनके अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और पार्टी के लिए किए गए कामकाज के बारे में जानकारी ली।
इंटरव्यू की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब हरियाणा कांग्रेस के नेताओं और उनके समर्थकों की निगाहें हाईकमान के फैसले पर टिक गई हैं। पार्टी के भीतर इस बात को लेकर भी चर्चा है कि राष्ट्रीय सचिवों के चयन में संगठन के प्रति सक्रियता, चुनावी अनुभव, युवा नेतृत्व, सामाजिक समीकरण और अलग-अलग क्षेत्रों में पकड़ जैसे पहलुओं को कितना महत्व दिया जाता है।
प्रदेश प्रभारी के दौरों के बाद बढ़ी संगठनात्मक हलचल
हरियाणा में कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त के प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में दौरों के बाद पार्टी के अंदर संगठनात्मक गतिविधियों में तेजी आई है। कार्यकर्ताओं से संवाद और नेताओं के साथ बैठकों के जरिए पार्टी संगठन को सक्रिय करने की कोशिश कर रही है। लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने के बावजूद कांग्रेस के भीतर पदों और जिम्मेदारियों के लिए नेताओं की सक्रियता इस बात का संकेत मानी जा रही है कि पार्टी संगठन में अपनी भूमिका को लेकर नेतृत्व स्तर पर काफी गंभीरता है।
राष्ट्रीय सचिव का पद कांग्रेस संगठन में महत्वपूर्ण माना जाता है। इन पदों पर नियुक्त नेता पार्टी के केंद्रीय संगठन और प्रदेश इकाइयों के बीच समन्वय में भूमिका निभाते हैं। चुनावी राज्यों में संगठनात्मक गतिविधियों की निगरानी से लेकर पार्टी कार्यक्रमों को जमीन तक पहुंचाने में भी राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों की जिम्मेदारी रहती है। ऐसे में हरियाणा से तीन नामों के चयन को प्रदेश कांग्रेस के कई नेताओं के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक भविष्य से जोड़कर देखा जा रहा है।
पहली बार इंटरव्यू के जरिए चयन की कवायद
राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति की मौजूदा प्रक्रिया इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पहली बार इस पद के लिए दावेदारों के चयन में बाकायदा इंटरव्यू का तरीका अपनाया गया। इससे पहले संगठन में नियुक्तियां मुख्य रूप से राजनीतिक अनुभव, संगठनात्मक सक्रियता और पार्टी नेतृत्व की पसंद जैसे विभिन्न पहलुओं के आधार पर होती रही हैं।
इस बार इंटरव्यू के जरिए दावेदारों की क्षमता को परखने की कोशिश ने पूरी प्रक्रिया को अलग बना दिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी द्वारा स्वयं इंटरव्यू लिए जाने से भी इन नियुक्तियों के महत्व का अंदाजा लगाया जा रहा है। पार्टी के अंदर माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व ऐसे चेहरों को आगे लाना चाहता है जो संगठनात्मक जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं के बीच सक्रिय रह सकें और चुनावी परिस्थितियों में पार्टी की रणनीति को प्रभावी तरीके से लागू करा सकें।
डीयू चुनाव के बाद हो सकता है ऐलान
राष्ट्रीय सचिवों की नियुक्ति को लेकर एक और चर्चा यह है कि घोषणा की तारीख दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव से जुड़ सकती है। 18 सितंबर को डीयू छात्रसंघ के चुनाव प्रस्तावित हैं और इसमें कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआइ भी सक्रिय भूमिका निभाएगी। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि पार्टी हाईकमान छात्रसंघ चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद हरियाणा से राष्ट्रीय सचिवों के नामों की घोषणा करे।
हालांकि अंतिम निर्णय कांग्रेस नेतृत्व को ही लेना है, लेकिन पार्टी के अंदर नियुक्तियों को लेकर उत्सुकता लगातार बढ़ रही है। दावेदारों के साथ-साथ उनके समर्थक भी दिल्ली में होने वाली गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।
फिलहाल हरियाणा से विनीत पुनिया, चिरंजीव राव और चेतन चौहान एआइसीसी में राष्ट्रीय सचिव के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब तीन नए चेहरों को राष्ट्रीय टीम में जगह मिलने से प्रदेश के संगठनात्मक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।
15 नेताओं ने पेश की दावेदारी
राष्ट्रीय सचिव पद के लिए जिन नेताओं ने इंटरव्यू दिया है, उनमें प्रदेश कांग्रेस के अलग-अलग क्षेत्रों और संगठनों से जुड़े चेहरे शामिल हैं। इनमें डबवाली के पूर्व विधायक और युवक कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अमित सिहाग, कांग्रेस एससी सेल के प्रदेश अध्यक्ष मनोज बागड़ी, करनाल ग्रामीण कांग्रेस के जिला प्रधान राजेश वैध, युवक कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव खुशबू शर्मा, करनाल लोकसभा चुनाव लड़ चुके युवक कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिव्यांशु बुद्धिराजा शामिल हैं।
इसके अलावा अजय छिक्कारा, अनंत दहिया, सुधीर चौधरी, अनिल सैनी, चक्रवर्ती शर्मा, विनीत कांबोज, योगेंद्र योगी, सुधा भारद्वाज, नीतिन सिंगला और हिम्मत सिंह ने भी राष्ट्रीय सचिव पद के लिए अपनी दावेदारी पेश की है।
इन नामों में पार्टी के पुराने संगठनात्मक कार्यकर्ताओं के साथ युवा चेहरे भी शामिल हैं। यही वजह है कि नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस के भीतर कई तरह के समीकरणों पर चर्चा चल रही है। अलग-अलग क्षेत्रों से आने वाले नेताओं की दावेदारी के चलते यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि हाईकमान तीन नामों के चयन में क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को किस तरह साधता है।
चार चेहरों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा
हालांकि कुल 15 नेताओं ने इंटरव्यू दिया है, लेकिन पार्टी के अंदर चार नामों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा बताई जा रही है। इनमें खुशबू शर्मा, अमित सिहाग, दिव्यांशु बुद्धिराजा और अनिल सैनी प्रमुख हैं।
खुशबू शर्मा युवक कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव हैं और गुरुग्राम में रहकर संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रही हैं। मूल रूप से झारखंड से आने वाली खुशबू को राष्ट्रीय स्तर के संगठन में काम करने का अनुभव हासिल है। ऐसे में राष्ट्रीय सचिव के लिए उनकी दावेदारी को संगठनात्मक अनुभव के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दूसरी ओर अमित सिहाग हरियाणा कांग्रेस के युवा और सक्रिय नेताओं में गिने जाते हैं। वह डबवाली से विधायक रह चुके हैं और युवक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। विधानसभा और संगठन दोनों स्तर पर काम करने का अनुभव उनकी दावेदारी का प्रमुख आधार माना जा रहा है।
दिव्यांशु बुद्धिराजा भी पार्टी के युवा चेहरों में शामिल हैं। उन्होंने करनाल लोकसभा सीट से केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के खिलाफ चुनाव लड़ा था। बड़े राजनीतिक मुकाबले में उतरने के कारण प्रदेश स्तर पर उनकी पहचान बनी है। युवक कांग्रेस से जुड़े रहने के चलते युवा संगठन के बीच भी उनका संपर्क माना जाता है।
वहीं अनिल सैनी के पक्ष में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रियंका गांधी के साथ काम करने का अनुभव अहम माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राजनीतिक राज्य में संगठनात्मक स्तर पर काम करने का अनुभव उनके लिए राष्ट्रीय संगठन में उपयोगी साबित हो सकता है।
नियुक्ति के साथ बदल सकते हैं संगठन के समीकरण
हरियाणा कांग्रेस के लिए इन नियुक्तियों का महत्व केवल तीन पदों को भरने तक सीमित नहीं है। पार्टी लंबे समय से सत्ता से बाहर है और ऐसे में संगठन के भीतर नई पीढ़ी के नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की कोशिश को आगामी राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय संगठन में हरियाणा के नए चेहरों की एंट्री से प्रदेश कांग्रेस में नेताओं की राजनीतिक हैसियत और संगठनात्मक प्रभाव भी बदल सकता है। जिन्हें राष्ट्रीय जिम्मेदारी मिलेगी, उन्हें न केवल प्रदेश बल्कि केंद्रीय नेतृत्व के साथ सीधे काम करने का अवसर मिलेगा। इसका असर भविष्य में प्रदेश संगठन, चुनावी रणनीति और टिकट वितरण जैसे मुद्दों पर भी पड़ सकता है।
कांग्रेस के भीतर लंबे समय से यह बहस चलती रही है कि पार्टी को संगठन में युवाओं और नए चेहरों को ज्यादा अवसर देना चाहिए। मौजूदा चयन प्रक्रिया में युवक कांग्रेस से जुड़े कई नेताओं का शामिल होना इस दिशा में संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं अनुभवी नेताओं और विभिन्न सामाजिक समूहों से जुड़े चेहरों की मौजूदगी यह भी बताती है कि पार्टी केवल उम्र के आधार पर नहीं बल्कि संगठनात्मक उपयोगिता और राजनीतिक क्षमता को भी महत्व दे रही है।
समर्थकों की सक्रियता भी बढ़ी
राष्ट्रीय सचिव पद के लिए इंटरव्यू पूरा होने के बाद अब सबसे ज्यादा सक्रियता दावेदारों के समर्थकों के स्तर पर दिखाई दे रही है। हर नेता के समर्थक अपने-अपने स्तर पर यह बताने में जुटे हैं कि उनके नेता को राष्ट्रीय जिम्मेदारी क्यों मिलनी चाहिए। सोशल मीडिया से लेकर पार्टी के भीतर अनौपचारिक चर्चाओं तक संभावित नामों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं।
हालांकि अंतिम फैसला कांग्रेस हाईकमान को करना है और इंटरव्यू देने वाले सभी नेताओं में से केवल तीन को ही हरियाणा की ओर से राष्ट्रीय सचिव बनाया जाएगा। इसलिए अगले कुछ दिनों में पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल और तेज होने की संभावना है।
कांग्रेस के सामने चुनौती यह भी होगी कि तीन नामों के चयन के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों, सामाजिक समूहों और संगठनात्मक धाराओं के बीच संतुलन कायम रखा जाए। जिस तरह 15 नेताओं ने इस पद के लिए अपनी दावेदारी जताई है, उससे साफ है कि पार्टी के भीतर राष्ट्रीय संगठन में जगह हासिल करने की होड़ काफी मजबूत है।
अब फैसला कांग्रेस नेतृत्व के हाथ में है। डीयू छात्रसंघ चुनाव के बाद यदि नियुक्तियों की घोषणा होती है तो हरियाणा कांग्रेस को राष्ट्रीय संगठन में तीन नए चेहरे मिलेंगे। इन चेहरों का चयन आने वाले समय में न केवल प्रदेश संगठन की सक्रियता बल्कि कांग्रेस की चुनावी रणनीति और अंदरूनी शक्ति संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।




