टाटा ग्रुप की सबसे अहम कंपनी टाटा संस के शेयर बाजार में आने की संभावना एक बार फिर चर्चा में है। अगर यह कंपनी आईपीओ लेकर बाजार में उतरती है, तो भारतीय शेयर बाजार को अब तक का सबसे बड़ा पब्लिक इश्यू मिल सकता है। अनुमान है कि टाटा संस की संभावित वैल्यूएशन करीब 9 लाख करोड़ रुपये से लेकर 12.5 लाख करोड़ रुपये तक हो सकती है। इस स्तर पर कंपनी की छोटी सी हिस्सेदारी भी हजारों करोड़ रुपये की होगी।
टाटा संस की ओर से अपने कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी यानी CIC का रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने का अनुरोध किया गया था, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक ने इसे मंजूरी नहीं दी। आरबीआई के इस फैसले के बाद कंपनी के भविष्य के स्ट्रक्चर और संभावित लिस्टिंग को लेकर बाजार में चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि अगर नियामकीय परिस्थितियों के चलते टाटा संस को लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ना पड़ता है, तो इसका आकार भारतीय बाजार के लिए ऐतिहासिक हो सकता है।
5% हिस्सेदारी बेचने पर जुट सकते हैं 60 हजार करोड़ रुपये तक
टाटा संस की संभावित वैल्यूएशन को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आ रहे हैं। इन अनुमानों के ऊपरी स्तर यानी 12.5 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन को आधार माना जाए तो कंपनी की सिर्फ 5 प्रतिशत हिस्सेदारी की कीमत करीब 62,500 करोड़ रुपये बैठती है। वहीं 9 लाख करोड़ रुपये के वैल्यूएशन पर यही हिस्सेदारी करीब 45,000 करोड़ रुपये की होगी।
इसका मतलब है कि लगभग 5 प्रतिशत इक्विटी बाजार में उतारने की स्थिति में टाटा संस 45,000 करोड़ रुपये से लेकर 60,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाने की क्षमता रख सकती है। इसी वजह से संभावित इश्यू को देश के सबसे बड़े आईपीओ के तौर पर देखा जा रहा है।
ईटी की एक रिपोर्ट में निवेश बैंकिंग और वैल्यूएशन से जुड़े विशेषज्ञों के हवाले से टाटा संस के संभावित बाजार मूल्य का अनुमान लगाया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक कंपनी की असली कीमत तय करना सामान्य कंपनियों की तुलना में काफी जटिल होगा, क्योंकि टाटा संस के पास कई बड़ी लिस्टेड कंपनियों में हिस्सेदारी है और इसके अलावा कई ऐसे कारोबार भी हैं जो अभी शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं हैं।
टाटा संस के पास कितनी संपत्ति?
टाटा संस को समझने के लिए उसकी होल्डिंग कंपनियों और अलग-अलग कारोबारों की कीमत को अलग-अलग देखना जरूरी है। उपलब्ध अनुमान के मुताबिक टाटा संस के पूरे पोर्टफोलियो की अंडरलाइंग वैल्यू करीब 15 से 16 लाख करोड़ रुपये तक हो सकती है।
इसमें सबसे बड़ा हिस्सा उन कंपनियों का है जिनके शेयर पहले से शेयर बाजार में कारोबार करते हैं। लिस्टेड कंपनियों में मौजूद हिस्सेदारी की कुल कीमत लगभग 12 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके अलावा करीब 4 लाख करोड़ रुपये की वैल्यू उन कारोबारों और संपत्तियों से जुड़ी मानी जा रही है जो अभी सूचीबद्ध नहीं हैं।
हालांकि, इन सभी संपत्तियों को जोड़कर सीधे 15-16 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन टाटा संस को नहीं दी जा सकती। इसकी वजह यह है कि होल्डिंग कंपनियों को आम तौर पर उनकी अंडरलाइंग संपत्तियों की तुलना में कम मूल्य पर आंका जाता है।
होल्डिंग कंपनी को क्यों मिलता है डिस्काउंट?
टाटा संस जैसी पैरेंट या होल्डिंग कंपनी की वैल्यूएशन करते समय निवेशक केवल उसके पास मौजूद शेयरों की बाजार कीमत नहीं देखते। इसमें होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट भी लगाया जाता है। इसकी वजह यह है कि किसी निवेशक के पास टाटा संस का शेयर होने का मतलब यह नहीं है कि वह सीधे टाटा समूह की सभी कंपनियों के कारोबार या कैश फ्लो पर नियंत्रण रखता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक टाटा संस के लिस्टेड पोर्टफोलियो पर लगभग 41 से 45 प्रतिशत तक का होल्डिंग कंपनी डिस्काउंट लगाया जा सकता है। वहीं अनलिस्टेड संपत्तियों पर करीब 15 प्रतिशत का डिस्काउंट माना गया है। इसके अलावा संभावित आईपीओ के समय फेयर वैल्यू पर भी करीब 10 से 15 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट रखी जा सकती है।
यही सभी फैक्टर मिलकर टाटा संस की अंतिम आईपीओ वैल्यूएशन को 9 लाख करोड़ रुपये से 12.5 लाख करोड़ रुपये के दायरे में ला सकते हैं।
लिस्टेड कंपनियों की कीमत तय करना आसान, अनलिस्टेड कारोबार चुनौती
टाटा संस के मामले में एक बड़ी खासियत यह है कि उसकी कई महत्वपूर्ण हिस्सेदारियां ऐसी कंपनियों में हैं जो पहले से शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं। इसलिए इन हिस्सेदारियों का एक बड़ा हिस्सा मौजूदा मार्केट प्राइस के आधार पर आसानी से आंका जा सकता है।
लेकिन समस्या उन कारोबारों को लेकर है जो अभी शेयर बाजार में नहीं हैं। इनके लिए वैल्यूएशन किसी मौजूदा शेयर भाव से नहीं निकाली जा सकती। ऐसे कारोबारों की कीमत तय करने के लिए हालिया ट्रांजैक्शन, समान क्षेत्र की कंपनियों और भविष्य की संभावनाओं को आधार बनाया जा सकता है।
Morphis Management Services के पार्टनर विमल टपारिया के मुताबिक इतनी बड़ी और विविध कारोबारी संरचना वाली पैरेंट कंपनी का मूल्यांकन सीधे किसी एक फॉर्मूले से नहीं किया जा सकता। निवेशकों को हर कारोबार और हिस्सेदारी को अलग नजरिए से देखना होगा।
उनके अनुसार लिस्टेड कंपनियों के शेयरों का मूल्यांकन मौजूदा बाजार भाव पर किया जा सकता है, जबकि अनलिस्टेड बिजनेस की कीमत हाल के वास्तविक सौदों या समान कारोबार करने वाली कंपनियों की तुलना से निकाली जानी चाहिए।
सेमीकंडक्टर और डिजिटल कारोबार की भी होगी अहम भूमिका
टाटा ग्रुप पिछले कुछ समय से सेमीकंडक्टर, डिजिटल और नई तकनीक से जुड़े क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है। इन कारोबारों की एक खास बात यह है कि इनकी मौजूदा कमाई के साथ-साथ भविष्य की संभावनाओं को भी काफी महत्व दिया जाता है।
वैल्यूएशन विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे नए कारोबारों के लिए केवल मौजूदा वित्तीय प्रदर्शन को आधार बनाना पर्याप्त नहीं होगा। भविष्य में इनके विस्तार और कमाई की संभावना को देखते हुए अतिरिक्त ‘ऑप्शन वैल्यू’ भी जोड़ी जा सकती है।
दूसरी ओर, निवेशकों को टैक्स से होने वाले संभावित नुकसान और सीमित लिक्विडिटी जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना होगा। इन कारणों से होल्डिंग कंपनी की कुल वैल्यू उसके पास मौजूद संपत्तियों की सकल कीमत से कम रह सकती है।
डिविडेंड से मिलता है बड़ा सहारा
टाटा संस के अनलिस्टेड पोर्टफोलियो से जुड़ी वैल्यूएशन में लगभग 40,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान भी सामने आया है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक कंपनी को मिलने वाली डिविडेंड इनकम इस अंतर को कुछ हद तक संतुलित करती है।
इसका अर्थ यह है कि टाटा संस के पास मौजूद कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड उसके लिए एक महत्वपूर्ण आय स्रोत है। यही आय होल्डिंग कंपनी के खर्च और अन्य वित्तीय जरूरतों को संभालने में भी मदद करती है।
इस तरह टाटा संस की वैल्यूएशन सिर्फ उसके शेयरों की कीमत जोड़कर निकालना पर्याप्त नहीं होगा। कंपनी की आय, निवेश संरचना, अनलिस्टेड कारोबार और भविष्य की योजनाओं को भी इसमें शामिल करना पड़ेगा।
SP ग्रुप की 18.37% हिस्सेदारी भी अहम
टाटा संस की संभावित लिस्टिंग में शापूरजी पलौंजी यानी SP ग्रुप की हिस्सेदारी भी खास महत्व रखती है। मिस्त्री परिवार की अगुवाई वाले इस समूह के पास टाटा संस में करीब 18.37 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी है।
पिछले महीने जारी एक इन्वेस्टर नोट में ‘लुक-थ्रू’ आधार पर SP ग्रुप की टाटा संस में हिस्सेदारी की कीमत लगभग 2.3 लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी। इसका मतलब है कि टाटा संस की कुल वैल्यूएशन में मामूली बदलाव भी SP ग्रुप की हिस्सेदारी के मूल्य पर बड़ा असर डाल सकता है।
अगर भविष्य में टाटा संस की लिस्टिंग होती है, तो इस हिस्सेदारी का बाजार मूल्य भी अधिक स्पष्ट तरीके से सामने आ सकता है। साथ ही, आईपीओ के जरिए कंपनी की कीमत तय होने के बाद निवेशकों को टाटा समूह की पूरी होल्डिंग संरचना को समझने का एक नया मौका मिलेगा।
रिकॉर्ड तोड़ सकता है टाटा संस का आईपीओ
भारतीय शेयर बाजार में अब तक कई बड़े आईपीओ आ चुके हैं, लेकिन टाटा संस का संभावित इश्यू आकार और ब्रांड दोनों लिहाज से अलग होगा। 45,000 करोड़ रुपये से 60,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक की हिस्सेदारी बिक्री होने पर यह देश के सबसे बड़े आईपीओ का रिकॉर्ड अपने नाम कर सकता है।
हालांकि, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि टाटा संस कब और किस संरचना के तहत शेयर बाजार में आएगी। कंपनी की वैल्यूएशन भी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है। आरबीआई के फैसले, कंपनी के नियामकीय ढांचे, हिस्सेदारी की बिक्री और निवेशकों की ओर से दी जाने वाली कीमत जैसे कई पहलू अंतिम तस्वीर तय करेंगे।
फिलहाल बाजार की नजर इस बात पर है कि टाटा संस अपने मौजूदा कारोबारी ढांचे के साथ आगे क्या कदम उठाती है। अगर कंपनी की लिस्टिंग की राह साफ होती है, तो यह न सिर्फ टाटा ग्रुप बल्कि पूरे भारतीय कैपिटल मार्केट के लिए एक बेहद बड़ा घटनाक्रम होगा। संभावित 9 से 12.5 लाख करोड़ रुपये की वैल्यूएशन और 5 प्रतिशत तक हिस्सेदारी की बिक्री इसे आकार के लिहाज से ऐतिहासिक आईपीओ बना सकती है।




