एनसीआर में पुराने वाहनों पर शिकंजे की तैयारी, 4 जिलों में लगेंगे 775 एएनपीआर कैमरे

एनसीआर में पुराने वाहनों पर शिकंजे की तैयारी, 4 जिलों में लगेंगे 775 एएनपीआर कैमरे

हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते वायु प्रदूषण और पुराने वाहनों से जुड़े नियमों के पालन को लेकर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र में पेट्रोल पंपों पर ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रिकग्निशन (एएनपीआर) कैमरे लगाए जाएंगे। पहले चरण में गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में कुल 775 कैमरे स्थापित किए जाने हैं। इस परियोजना पर करीब 41 करोड़ 74 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है।

परिवहन मंत्री अनिल विज ने बताया कि कैमरे लगाने से संबंधित प्रस्ताव को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मंजूरी मिल चुकी है। अब विभाग की ओर से इसे निर्धारित समय-सीमा में लागू करने की प्रक्रिया तेज की जा रही है। एएनपीआर प्रणाली के जरिए वाहनों की नंबर प्लेट को स्वचालित रूप से पढ़कर उनकी पहचान की जा सकेगी। इसका इस्तेमाल विशेष रूप से उन वाहनों की पहचान के लिए किया जाएगा, जो निर्धारित जीवन-अवधि पूरी कर चुके हैं।

सरकार की योजना केवल कैमरे लगाने तक सीमित नहीं है। इन कैमरों को ऐसी निगरानी व्यवस्था से जोड़ा जाएगा, जिसके माध्यम से एनसीआर क्षेत्र में पुराने वाहनों की पहचान और उनके संबंध में लागू पर्यावरणीय नियमों की निगरानी को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सके। परिवहन विभाग का मानना है कि तकनीक आधारित निगरानी से नियमों के अनुपालन की प्रक्रिया को गति मिलेगी और पुराने वाहनों के संचालन पर प्रभावी नजर रखी जा सकेगी।

चार जिलों में अलग-अलग संख्या में लगेंगे कैमरे

पहले चरण के लिए एनसीआर के चार प्रमुख जिलों का चयन किया गया है। विभाग की योजना के अनुसार गुरुग्राम में सबसे अधिक 249 एएनपीआर कैमरे लगाए जाएंगे। इसके बाद सोनीपत में 215, झज्जर में 195 और फरीदाबाद में 116 कैमरे स्थापित किए जाएंगे।

इस तरह चारों जिलों में कुल 775 कैमरों का नेटवर्क तैयार होगा। ये कैमरे मुख्य रूप से पेट्रोल पंपों पर लगाए जाएंगे, ताकि ईंधन लेने पहुंचने वाले वाहनों की पहचान की जा सके। नंबर प्लेट की स्वचालित पहचान के माध्यम से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि संबंधित वाहन निर्धारित जीवन-अवधि पूरी कर चुका है या नहीं।

गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे बड़े शहरी केंद्रों के साथ सोनीपत और झज्जर के एनसीआर क्षेत्रों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। सरकार की ओर से इन चार जिलों को पहले चरण में शामिल करने का उद्देश्य एनसीआर के प्रमुख हिस्सों में निगरानी तंत्र को जल्दी सक्रिय करना है।

प्रदेश में करीब 2780 कैमरों की जरूरत

परिवहन मंत्री के अनुसार हरियाणा में इस प्रकार की निगरानी व्यवस्था के लिए कुल मिलाकर करीब 2,780 एएनपीआर कैमरों की आवश्यकता आंकी गई है। हालांकि सरकार ने इसकी शुरुआत एनसीआर के चार प्रमुख जिलों से करने का फैसला किया है।

पहले चरण में 775 कैमरों की स्थापना के बाद आवश्यकता और व्यवस्था के अनुसार आगे के चरणों में अन्य क्षेत्रों को भी इस नेटवर्क में शामिल किया जा सकता है। फिलहाल सरकार का मुख्य फोकस एनसीआर क्षेत्र में कैमरा आधारित निगरानी व्यवस्था को निर्धारित समय के भीतर लागू करना है।

एनसीआर में प्रदूषण से जुड़े नियमों के अनुपालन की निगरानी पहले से ही विभिन्न स्तरों पर की जाती है। एएनपीआर कैमरों के जुड़ने से वाहन पहचान की प्रक्रिया में तकनीकी सहायता मिलने की उम्मीद है।

30 सितंबर तक स्थापना का लक्ष्य

सरकार ने एएनपीआर कैमरों की स्थापना के लिए 30 सितंबर 2026 की समय-सीमा निर्धारित की है। इसके बाद 1 अक्टूबर 2026 से हरियाणा में पंजीकृत जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहनों को ईंधन नहीं दिए जाने की व्यवस्था लागू की जानी है।

इसी वजह से परिवहन विभाग के सामने कैमरों की स्थापना का काम समय पर पूरा करने की चुनौती है। पेट्रोल पंपों पर कैमरे लगाने, उन्हें स्थापित करने और तकनीकी व्यवस्था को सक्रिय करने के लिए विभागीय स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं।

अनिल विज ने कहा है कि संबंधित अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तय तारीख से पहले पूरी व्यवस्था तैयार हो सके। सरकार का जोर इस बात पर है कि 1 अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था के समय वाहन पहचान में तकनीकी दिक्कत न आए।

पेट्रोल पंपों पर होगी वाहनों की पहचान

एएनपीआर कैमरों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका पेट्रोल पंपों पर सामने आएगी। ईंधन लेने के लिए पहुंचने वाले वाहन का नंबर कैमरे के माध्यम से पढ़ा जा सकेगा। इसके बाद उपलब्ध वाहन संबंधी रिकॉर्ड से उसका मिलान किया जा सकेगा।

यदि वाहन निर्धारित जीवन-अवधि पूरी कर चुका है तो संबंधित नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जा सकेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नियमों के दायरे में आने वाले पुराने वाहनों को सामान्य तरीके से ईंधन उपलब्ध न हो।

तकनीक के इस्तेमाल से वाहन की पहचान प्रक्रिया को मैनुअल जांच पर पूरी तरह निर्भर रखने की जरूरत कम होगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे निगरानी अधिक व्यवस्थित होगी और बड़ी संख्या में वाहनों पर नजर रखना आसान होगा।

पुराने वाहनों से जुड़े नियमों के पालन पर जोर

परिवहन विभाग के अनुसार जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहनों से जुड़े पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित करना इस पूरी व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य है। एनसीआर में वायु गुणवत्ता से संबंधित चुनौतियों को देखते हुए पुराने वाहनों की निगरानी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अनिल विज ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता केवल नियम लागू करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि पर्यावरण से संबंधित निर्धारित प्रावधानों का प्रभावी तरीके से पालन हो। इसी उद्देश्य से एएनपीआर तकनीक को निगरानी व्यवस्था में शामिल किया जा रहा है।

पुराने वाहनों की पहचान में नंबर प्लेट आधारित तकनीक का इस्तेमाल होने से विभाग के पास कार्रवाई के लिए अधिक व्यवस्थित जानकारी उपलब्ध हो सकती है। इससे वाहन की पहचान और उसके रिकॉर्ड की जांच की प्रक्रिया को भी अधिक तकनीकी आधार मिलेगा।

CAQM के निर्देशों के अनुरूप होगी व्यवस्था

कैमरे लगाने की यह पूरी प्रक्रिया वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है। एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए आयोग की ओर से अलग-अलग राज्यों और संबंधित विभागों के लिए समय-समय पर निर्देश जारी किए जाते रहे हैं।

हरियाणा सरकार का कहना है कि इन निर्देशों के तहत निर्धारित समय सीमा में आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी की जा रही हैं। परिवहन विभाग को विशेष रूप से यह सुनिश्चित करना है कि जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहनों की पहचान के लिए तकनीकी निगरानी प्रणाली समय पर काम करने लगे।

30 सितंबर तक कैमरे स्थापित करने का लक्ष्य इसी समयबद्ध व्यवस्था का हिस्सा है। इसके अगले दिन से ईंधन आपूर्ति से जुड़े प्रावधान लागू होने हैं। इसलिए कैमरा नेटवर्क को सक्रिय करना इस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

प्रदूषण नियंत्रण की निगरानी में तकनीक का इस्तेमाल

सरकार एएनपीआर कैमरों को प्रदूषण नियंत्रण की निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तकनीकी माध्यम के रूप में देख रही है। नंबर प्लेट को स्वचालित तरीके से पढ़ने वाली यह प्रणाली वाहनों की पहचान का काम तेजी से कर सकती है।

मंत्री के अनुसार, इस तकनीक के इस्तेमाल से विभाग को ऐसे वाहनों की पहचान करने में मदद मिलेगी जो निर्धारित जीवन-अवधि पूरी कर चुके हैं। इससे पर्यावरणीय नियमों के पालन की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

एनसीआर के चार जिलों में अलग-अलग स्थानों पर कैमरे लगाने के बाद वाहनों की आवाजाही और ईंधन लेने के दौरान उनकी पहचान से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा। हालांकि पूरी व्यवस्था की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कैमरों की स्थापना, तकनीकी एकीकरण और संबंधित रिकॉर्ड का संचालन किस तरह किया जाता है।

गुरुग्राम में सबसे बड़ा कैमरा नेटवर्क

चार जिलों में प्रस्तावित कैमरों में गुरुग्राम की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। यहां 249 एएनपीआर कैमरे लगाए जाएंगे। एनसीआर के प्रमुख शहरी और औद्योगिक केंद्रों में शामिल गुरुग्राम में बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही होती है, इसलिए यहां कैमरों की संख्या भी सबसे अधिक रखी गई है।

सोनीपत में 215 और झज्जर में 195 कैमरे लगाए जाने हैं, जबकि फरीदाबाद में 116 कैमरे स्थापित किए जाएंगे। इन चार जिलों को मिलाकर 775 कैमरों की पहली खेप तैयार होगी।

सरकार के अनुसार, यह केवल शुरुआत है। प्रदेश में कुल करीब 2,780 कैमरों की आवश्यकता बताई गई है। ऐसे में आगे चलकर इस तकनीकी निगरानी व्यवस्था का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

विभागों के बीच समन्वय पर जोर

कैमरों की स्थापना और संचालन के लिए परिवहन विभाग के साथ अन्य संबंधित विभागों और पेट्रोल पंप संचालकों के बीच समन्वय भी जरूरी होगा। कैमरों की सही जगह पर स्थापना, बिजली और नेटवर्क जैसी तकनीकी आवश्यकताओं के साथ-साथ वाहन संबंधी डाटा की उपलब्धता भी व्यवस्था का अहम हिस्सा होगी।

सरकार की ओर से संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सभी तैयारियां समय सीमा के भीतर पूरी की जाएं। खास तौर पर 30 सितंबर की अंतिम समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए काम को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने पर जोर है।

1 अक्टूबर से लागू होगी नई व्यवस्था

सरकार द्वारा तय कार्यक्रम के अनुसार 30 सितंबर तक कैमरा व्यवस्था तैयार करने के बाद 1 अक्टूबर 2026 से हरियाणा में पंजीकृत जीवन-अवधि पूरी कर चुके वाहनों को ईंधन उपलब्ध नहीं कराया जाना है। इस प्रावधान को लागू करने के लिए वाहनों की पहचान सबसे अहम कड़ी होगी।

इसी उद्देश्य से एएनपीआर कैमरों का नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। पेट्रोल पंपों पर स्थापित कैमरे वाहन की नंबर प्लेट पहचानने में मदद करेंगे और संबंधित वाहन के रिकॉर्ड के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जा सकेगी।

सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से एनसीआर में पुराने वाहनों पर निगरानी मजबूत होगी और पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन को तकनीकी आधार मिलेगा। फिलहाल परिवहन विभाग के सामने पहला लक्ष्य 775 कैमरों की स्थापना को समय पर पूरा करना है।

इस परियोजना के जरिए हरियाणा सरकार एनसीआर में वाहन निगरानी और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़ी व्यवस्था को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। 41 करोड़ 74 लाख रुपये की अनुमानित लागत से लगाए जाने वाले ये 775 कैमरे पहले चरण में चार जिलों को कवर करेंगे। इसके बाद प्रदेश में प्रस्तावित करीब 2,780 कैमरों की व्यापक व्यवस्था किस चरण में और किस समय लागू होगी, इस पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।