16 की उम्र में राज कपूर की फिल्म का हिस्सा बनी थीं मंदाकिनी, ‘राम तेरी गंगा मैली’ के चर्चित सीन पर अब किया खुलासा

16 की उम्र में राज कपूर की फिल्म का हिस्सा बनी थीं मंदाकिनी, ‘राम तेरी गंगा मैली’ के चर्चित सीन पर अब किया खुलासा

80 और 90 के दशक में अपनी खूबसूरती और फिल्मों के कारण पहचान बनाने वाली अभिनेत्री मंदाकिनी आज भी ‘राम तेरी गंगा मैली’ के लिए खास तौर पर याद की जाती हैं। राज कपूर के निर्देशन में बनी इस फिल्म ने उन्हें रातोंरात लोकप्रिय बना दिया था। हालांकि, फिल्म के कुछ दृश्यों को लेकर उस समय भी काफी चर्चा हुई और दशकों बाद भी उनसे इन सीन्स के बारे में सवाल किए जाते हैं। अब एक हालिया इंटरव्यू में मंदाकिनी ने फिल्म से जुड़े अपने अनुभवों, राज कपूर के साथ पहली मुलाकात और उस दौर की शूटिंग के बारे में खुलकर बात की है।

बातचीत में अभिनेत्री ने बताया कि ‘राम तेरी गंगा मैली’ उनके करियर की शुरुआत के दिनों की फिल्म थी और उस समय वह खुद अपने फिल्मी फैसले लेने की उम्र में नहीं थीं। उनके मुताबिक, फिल्म में आने का फैसला मुख्य रूप से उनके माता-पिता ने लिया था। वह तब स्कूल में पढ़ती थीं और मुंबई की फिल्म इंडस्ट्री से उनका सीधा कोई परिचय नहीं था।

मंदाकिनी ने बताया कि उनका फिल्मी सफर मेरठ से शुरू होकर मुंबई तक पहुंचा। उन्होंने कहा कि भारद्वाज परिवार से उनके परिवार की पुरानी जान-पहचान थी। गीतकार और लेखक राम भारद्वाज के परिवार से उनका संबंध था। राम भारद्वाज की बेटी और मंदाकिनी की बहन एक ही स्कूल में पढ़ती थीं। इसी पारिवारिक दोस्ती की वजह से मंदाकिनी का परिचय फिल्मी दुनिया के लोगों से हुआ।

उन्होंने बताया कि एक मुलाकात के दौरान भारद्वाज परिवार के सदस्य ने उन्हें देखा और सुझाव दिया कि उन्हें मुंबई ले जाकर कुछ लोगों से मिलवाना चाहिए। इसके बाद मंदाकिनी अपने माता-पिता के साथ मुंबई आईं। उन्हें कुछ नाम बताए गए और उनसे मिलने के लिए कहा गया। इसी सिलसिले में उनकी मुलाकात राज कपूर से हुई।

मंदाकिनी के मुताबिक, राज कपूर ने उनका स्क्रीन टेस्ट लिया और उन्हें पसंद किया। हालांकि, राज कपूर से उनकी पहली बातचीत केवल स्क्रीन टेस्ट तक सीमित नहीं थी। अभिनेत्री ने बताया कि निर्देशक ने उनसे परिवार और छोटे भाई-बहनों से जुड़ी कई बातें पूछीं।

राज कपूर ने मंदाकिनी से पूछा था कि क्या उनके छोटे भाई या बहन हैं। जब उन्होंने बताया कि उनका एक छोटा भाई और एक बहन है, तो उन्होंने आगे पूछा कि क्या वह उन्हें गोद में उठाती हैं और अगर बच्चे रोते हैं तो उन्हें संभाल लेती हैं। उस समय मंदाकिनी को समझ नहीं आया था कि निर्देशक इस तरह के सवाल क्यों कर रहे हैं।

बाद में उन्हें महसूस हुआ कि राज कपूर अपनी फिल्म की नायिका में एक घरेलू और भारतीय व्यक्तित्व तलाश रहे थे। वह चाहते थे कि किरदार में ऐसी सहजता हो जो बच्चों और परिवार के माहौल से जुड़ी हुई लगे। मंदाकिनी के अनुसार, राज कपूर को फिल्म के लिए एक ऐसी लड़की चाहिए थी जिसमें ‘होमली’ और भारतीय एहसास स्वाभाविक रूप से दिखाई दे।

मंदाकिनी ने यह भी बताया कि जब उन्होंने फिल्म की शूटिंग शुरू की थी, तब उनकी उम्र केवल 16 साल थी। फिल्म पूरी होते-होते वह 17 वर्ष की हो गई थीं। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी फिल्म का हिस्सा बनना उनके लिए एक बड़ा अनुभव था, लेकिन उस समय वह खुद अपने करियर को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने की स्थिति में नहीं थीं।

अभिनेत्री ने कहा कि उस समय उनके माता-पिता ही उनके लिए फैसले लेते थे। जब उन्हें ‘राम तेरी गंगा मैली’ में काम करने का प्रस्ताव मिला, तो उनके माता-पिता ने इसे अच्छा अवसर माना। उन्होंने मंदाकिनी से कहा कि अच्छी फिल्म में काम करने का मौका मिल रहा है, इसलिए इसे करना चाहिए। मंदाकिनी ने भी परिवार की बात मान ली और फिल्म का हिस्सा बन गईं।

फिल्म में उनकी उम्र कम होने के बावजूद उनके किरदार को लेकर उनसे ऐसे दृश्य करवाए गए जो बाद में काफी चर्चित हुए। जब उनसे पूछा गया कि इतनी कम उम्र में एक महिला किरदार को ग्लैमरस और आकर्षक अंदाज में पेश किए जाने पर उन्हें असहजता महसूस नहीं हुई, तो मंदाकिनी ने कहा कि उस समय वह पूरी प्रक्रिया में खुद को एक तरह से बहता हुआ महसूस कर रही थीं।

उनके मुताबिक, राज कपूर के साथ काम करने का अनुभव उनके लिए सामान्य फिल्म सेट जैसा नहीं था। वह राज कपूर की कार्यशैली को एक अलग तरह की अनुभूति के रूप में याद करती हैं। उन्होंने कहा कि जब वह उनसे मिलीं तो उन्हें ऐसा लगा जैसे वह किसी खास माहौल का हिस्सा बन गई हों। फिल्म की शूटिंग के दौरान हर सीन को विस्तार से समझाया जाता था और कलाकारों को बताया जाता था कि दृश्य को किस तरह करना है।

मंदाकिनी ने राज कपूर की तारीफ करते हुए कहा कि उनका व्यवहार बेहद नरम और प्यार भरा था। वह कलाकारों को इस तरह समझाते थे कि उन्हें किसी बाहरी व्यक्ति के साथ होने जैसा महसूस नहीं होता था। अभिनेत्री के अनुसार, राज कपूर का तरीका ऐसा था कि उनके सामने सवाल करने या विरोध करने में झिझक महसूस होती थी, लेकिन इसके पीछे डर का माहौल नहीं बल्कि उनके व्यक्तित्व का प्रभाव था।

मंदाकिनी ने कहा कि राज कपूर इतनी शांति और सहजता से सीन समझाते थे कि कलाकार खुद को असहज महसूस नहीं करते थे। उन्हें लगता था कि जैसे परिवार का ही कोई सदस्य उनके साथ बैठकर काम करवा रहा है। यही वजह थी कि वह शूटिंग के दौरान अपने किरदार में आसानी से ढलती चली गईं।

इंटरव्यू में ‘राम तेरी गंगा मैली’ के उस वॉटरफॉल सीन का भी जिक्र हुआ, जिसे फिल्म के सबसे चर्चित दृश्यों में गिना जाता है। इस सीन को लेकर आज भी मंदाकिनी से सवाल किए जाते हैं। अभिनेत्री ने बताया कि उस समय राज कपूर सेट पर मौजूद थे और वह खुद भी उस दृश्य को लेकर पूरी तरह अनजान नहीं थीं।

जब उनसे पूछा गया कि क्या सीन शूट करते समय उन्हें झिझक हुई थी, तो उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी साड़ी को डबल कर लिया था। उनका कहना था कि इस तरह उन्होंने खुद को थोड़ा सुरक्षित महसूस करने की कोशिश की थी। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्हें पूरी तरह अंदाजा नहीं था कि कैमरे में उनका शरीर किस तरह दिखाई देगा।

मंदाकिनी ने कहा कि उन्होंने उस वक्त ज्यादा कुछ सोच-विचार नहीं किया था। जब उनसे पूछा गया कि पानी के भीतर से भी शरीर दिखाई देने की संभावना के बारे में उन्हें पता था या नहीं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें ठीक से नहीं मालूम था। उनके मुताबिक, चीजें उस समय जिस तरह हुईं, वे उसी प्रवाह में आगे बढ़ती चली गईं।

अभिनेत्री ने उस दौर को याद करते हुए कहा कि वह एक छोटे शहर से आई थीं और फिल्म इंडस्ट्री उनके लिए बिल्कुल नई दुनिया थी। ऐसे में इतनी बड़ी फिल्म में काम करना अपने आप में एक असाधारण अनुभव था। उन्होंने बताया कि उस समय उनके लिए यह सब अचानक हुआ और उन्होंने परिस्थितियों के साथ आगे बढ़ते हुए फिल्म पूरी कर ली।

वॉटरफॉल सीन पर उठने वाले सवालों को लेकर मंदाकिनी ने यह भी कहा कि उन्हें उस समय ऐसा नहीं लगा कि उन्होंने कोई गलत काम कर दिया है। उनके मुताबिक, फिल्म में इस दृश्य को जिस तरीके से पेश किया गया, उसमें उन्हें अश्लीलता महसूस नहीं हुई। उन्होंने कहा कि राज कपूर की प्रस्तुति में नदी किनारे मौजूद लड़की और पूरे दृश्य को एक तरह की पवित्रता के साथ दिखाया गया था।

मंदाकिनी ने बताया कि उनके माता-पिता ने भी फिल्म को लेकर उस तरह की आपत्ति नहीं जताई थी। इसलिए उन्हें खुद भी ऐसा नहीं लगा कि उनसे कोई बड़ी गलती हो गई है। उनके अनुसार, अगर परिवार की ओर से विरोध या आपत्ति होती तो शायद उनका नजरिया अलग होता, लेकिन उस समय उन्हें अपने माता-पिता का पूरा समर्थन मिला।

इसी बातचीत में मंदाकिनी ने अपने नाम से जुड़ी एक दिलचस्प कहानी भी साझा की। उन्होंने बताया कि उनका असली नाम यास्मिन था। फिल्म में पहले से इसी नाम के कई लोग जुड़े हुए थे, इसलिए उनका स्क्रीन नेम बदलने का फैसला किया गया। इसके बाद उन्हें ‘मंदाकिनी’ नाम दिया गया।

दिलचस्प बात यह है कि यह फिल्मी नाम ही आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया। मंदाकिनी ने कहा कि आज दुनिया उन्हें इसी नाम से जानती है। यानी जिस नाम को शुरुआत में फिल्म की जरूरत के चलते बदला गया था, वही बाद में उनकी स्थायी पहचान बन गया।

‘राम तेरी गंगा मैली’ मंदाकिनी के करियर की ऐसी फिल्म बनी जिसने उन्हें देशभर में पहचान दिलाई। फिल्म की कहानी, राज कपूर का निर्देशन और मंदाकिनी की भूमिका ने उन्हें उस समय की चर्चित अभिनेत्रियों में शामिल कर दिया। हालांकि, फिल्म के कुछ दृश्यों को लेकर विवाद भी हुआ, लेकिन मंदाकिनी आज उन अनुभवों को अपने करियर के शुरुआती दौर का हिस्सा मानती हैं।

मंदाकिनी की हालिया बातचीत से यह भी सामने आता है कि उस समय फिल्म इंडस्ट्री में उनकी एंट्री कितनी कम उम्र में हुई थी। वह अभी स्कूल में थीं और फिल्मी करियर को लेकर उनके अपने फैसले बहुत सीमित थे। परिवार की भूमिका, राज कपूर का प्रभाव और शूटिंग का माहौल—इन सभी चीजों ने मिलकर उनके शुरुआती फिल्मी सफर को आकार दिया।

आज कई दशक बाद भी ‘राम तेरी गंगा मैली’ और मंदाकिनी का नाम एक साथ लिया जाता है। अभिनेत्री के अनुसार, फिल्म के दौरान उन्हें जिस तरह के अनुभव हुए, उनमें से कई बातें उस समय वह पूरी तरह समझ नहीं पाई थीं। लेकिन अब पीछे मुड़कर देखने पर वह उस दौर को एक अलग तरह के अनुभव के रूप में याद करती है। खासकर राज कपूर की निर्देशन शैली और फिल्म के चर्चित दृश्यों को लेकर उनके बयान ने एक बार फिर इस पुरानी फिल्म को चर्चा में ला दिया है।