विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर आज देशभर में भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना की जा रही है। विशेष रूप से कारखानों, वर्कशॉप, निर्माण स्थलों, दुकानों और औद्योगिक संस्थानों में इस पर्व को उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की जाती है। साथ ही काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों, मशीनों, उपकरणों और वाहनों की भी पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि का दिव्य शिल्पकार, वास्तुकार और निर्माण कला का अधिष्ठाता माना गया है। मान्यता है कि उन्होंने देवताओं के लिए अनेक भव्य भवनों, अस्त्र-शस्त्रों और नगरों का निर्माण किया था। इसलिए निर्माण, इंजीनियरिंग, तकनीकी और शिल्प से जुड़े लोगों के लिए विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
यह पर्व उस समय मनाया जाता है जब सूर्य देव कन्या राशि में प्रवेश करते हैं। इस दिन लोग अपने कार्यस्थल को साफ-सुथरा करके भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए पूजा करते हैं। धार्मिक विश्वास के अनुसार मशीनों और औजारों की पूजा करने से काम में आने वाली बाधाओं को दूर करने और कार्यक्षेत्र में सुख-समृद्धि बनाए रखने की कामना की जाती है।
विश्वकर्मा पूजा 2026 के शुभ मुहूर्त
विश्वकर्मा पूजा के दिन अलग-अलग समय पर पूजा के लिए शुभ अवधि बताई गई है। अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार श्रद्धालु इन समयों में पूजा कर सकते हैं।
- सुबह का शुभ समय: सुबह 07:58 बजे से 10:43 बजे तक
- दोपहर का शुभ समय: दोपहर 12:15 बजे से 01:48 बजे तक
- शाम का शुभ समय: शाम 04:52 बजे से 06:24 बजे तक
पूजा के दौरान साफ-सफाई और विधि-विधान का विशेष ध्यान रखने की परंपरा है। औद्योगिक प्रतिष्ठानों में कर्मचारी और कारोबारी मिलकर मशीनों और उपकरणों की पूजा करते हैं, जबकि घरों में भी लोग अपने काम से जुड़े औजारों की पूजा कर सकते हैं।
भगवान विश्वकर्मा को विशेष क्यों माना जाता है?
हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और शिल्पकला से जोड़ा जाता है। उन्हें देवताओं के वास्तुकार के रूप में भी वर्णित किया गया है। इसी कारण इंजीनियर, कारीगर, बढ़ई, लोहार, मैकेनिक, तकनीकी कर्मचारी, उद्योगपति और मशीनों से जुड़े अन्य लोग इस दिन विशेष रूप से उनकी आराधना करते हैं।
विश्वकर्मा पूजा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहती। कई जगहों पर इस अवसर पर कारखानों और प्रतिष्ठानों में विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। मशीनों और उपकरणों को साफ किया जाता है, उन्हें सजाया जाता है और पूजा के बाद प्रसाद वितरित किया जाता है।
विश्वकर्मा पूजा की सरल विधि
विश्वकर्मा पूजा शुरू करने से पहले कार्यस्थल, दुकान, वर्कशॉप या घर में मौजूद मशीनों और उपकरणों की सफाई कर लें। पूजा के लिए एक साफ स्थान निर्धारित करें। इसके बाद पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव कर उसे पवित्र करने की परंपरा है।
एक चौकी पर पीले रंग का कपड़ा बिछाएं। इसके ऊपर कुमकुम या रोली से स्वास्तिक बनाएं। इसके बाद सबसे पहले भगवान गणेश का पूजन करें। गणेश जी की पूजा के बाद भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर को पूजा स्थल पर स्थापित करें।
भगवान विश्वकर्मा को रोली, हल्दी, अक्षत, फूल, फल और मिठाई अर्पित करें। इसके बाद काम में इस्तेमाल होने वाले औजारों, मशीनों और अन्य उपकरणों पर तिलक लगाएं। उन पर अक्षत और फूल चढ़ाएं। यदि किसी मशीन या उपकरण की पूजा की जा रही है तो सुरक्षा का ध्यान रखते हुए ही उसके पास पूजा सामग्री रखें।
पूजा के दौरान भगवान विश्वकर्मा के मंत्र का जाप किया जा सकता है। इसके बाद भगवान की आरती करें। आरती पूरी होने के बाद परिवार के सदस्यों या कर्मचारियों के बीच प्रसाद बांटे। अंत में पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए भगवान से क्षमा मांगने की परंपरा है।
पूजा में इस मंत्र का जाप करें
विश्वकर्मा पूजा के दौरान भगवान विश्वकर्मा के सरल मंत्र का जाप किया जाता है।
“ॐ विश्वकर्मणे नमः”
श्रद्धालु पूजा के दौरान इस मंत्र का जाप अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार कर सकते हैं। मंत्र जाप के बाद भगवान विश्वकर्मा से कार्य में सफलता, सुरक्षा, उन्नति और समृद्धि की प्रार्थना की जाती है।
भगवान विश्वकर्मा की आरती के बोल
विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की आरती करने की भी परंपरा है। श्रद्धालु पूजा के अंत में आरती गाकर भगवान का स्मरण करते हैं।
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।
आदि सृष्टि में विधि को,
श्रुति उपदेश दिया।
जीव मात्र का जग में,
ज्ञान विकास किया॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।
ऋषि अंगीरा तप से,
शांति नहीं पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का,
सकल सिद्धि आई॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।
रोग ग्रस्त राजा ने,
जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर,
दूर दुख कीना॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।
जब रथकार दंपति,
तुम्हारी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना,
विपत सगरी हरी॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।
एकानन चतुरानन,
पंचानन राजे।
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज,
सकल रूप साजे॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।
ध्यान धरे तब पद का,
सकल सिद्धि आवे।
मन द्विविधा मिट जावे,
अटल शक्ति पावे॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।
श्री विश्वकर्मा की आरती,
जो कोई गावे।
भजत गजानंद स्वामी,
सुख संपति पावे॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा॥
पूजा में किन चीजों का करें इस्तेमाल?
विश्वकर्मा पूजा के लिए पूजा सामग्री को पहले से तैयार रखना सुविधाजनक रहता है। पूजा स्थल के लिए चौकी और पीला कपड़ा रखा जा सकता है। इसके साथ रोली, कुमकुम, हल्दी, अक्षत, फूल, फल, मिठाई और गंगाजल की आवश्यकता होती है।
भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर को साफ करके पूजा स्थल पर स्थापित किया जाता है। इसके अलावा कार्यस्थल पर मौजूद औजारों, मशीनों और उपकरणों को भी साफ करके पूजा में शामिल किया जाता है। पूजा के बाद प्रसाद वितरित करने की परंपरा है।
विश्वकर्मा पूजा में भोग क्या लगाएं?
भगवान विश्वकर्मा को पूजा के दौरान फल, मिठाई और अन्य सात्विक प्रसाद अर्पित किया जा सकता है। घर या कार्यस्थल की परंपरा के अनुसार हलवा, लड्डू, बूंदी, मिठाई और मौसमी फलों का भोग लगाया जा सकता है।
भोग तैयार करते समय साफ-सफाई और सात्विकता का ध्यान रखना चाहिए। पूजा पूरी होने के बाद प्रसाद को परिवार के सदस्यों, कर्मचारियों और अन्य लोगों में बांटा जाता है।
मशीनों और औजारों की पूजा का महत्व
विश्वकर्मा पूजा की एक खास परंपरा कार्य में इस्तेमाल होने वाली मशीनों और औजारों का पूजन करना है। कारखानों और वर्कशॉप में इस दिन मशीनों की अच्छी तरह सफाई की जाती है। इसके बाद उन पर रोली या कुमकुम से तिलक लगाया जाता है और फूल-अक्षत अर्पित किए जाते हैं।
कई संस्थानों में इस अवसर पर मशीनों को कुछ समय के लिए बंद रखकर सामूहिक पूजा की जाती है। इसका उद्देश्य कार्य में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के प्रति सम्मान व्यक्त करना और सुरक्षित एवं सुचारु कार्य की कामना करना भी माना जाता है।
विश्वकर्मा पूजा के दिन क्या करें?
इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल और काम करने की जगह को साफ करें। भगवान विश्वकर्मा की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करके गणेश जी का पूजन करें। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा को पूजा सामग्री अर्पित करें।
मशीनों और औजारों की सफाई करने के बाद उनका पूजन करें। “ॐ विश्वकर्मणे नमः” मंत्र का जाप करें और भगवान विश्वकर्मा की आरती करें। अंत में प्रसाद बांटकर भगवान से कार्यक्षेत्र में उन्नति, सुरक्षा और समृद्धि की प्रार्थना करें।
इस तरह विश्वकर्मा जयंती पर धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपने कार्य, औजारों और तकनीकी साधनों के प्रति सम्मान व्यक्त करने की परंपरा भी निभाई जाती है।
(Photo: AI Generated)




