Apple के नए iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max की बिक्री शुरू होने से पहले भारत में इनकी मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में मौजूद Apple की पार्टनर फैक्ट्रियां इन दोनों Pro मॉडल की मांग पूरी करने के लिए लगातार काम कर रही हैं। अमेरिका के लिए तैयार किए गए बड़ी संख्या में डिवाइस को चार्टर्ड फ्लाइट्स के जरिए भेजा जा रहा है।
नए iPhone मॉडल की बिक्री शुक्रवार से शुरू होनी है। ऐसे में Apple ने ग्लोबल लॉन्च के साथ ही अलग-अलग बाजारों में फोन की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दिया है। भारत इस पूरी सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। खास तौर पर अमेरिका के बाजार के लिए भारत से तैयार iPhone 18 Pro और Pro Max की खेप तेजी से भेजी जा रही है।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि नए iPhone लेकर कई चार्टर्ड फ्लाइट्स भारत से रवाना हो चुकी हैं। इनमें से अधिकतर फ्लाइट्स चेन्नई से उड़ान भर रही हैं। इससे संकेत मिलता है कि Apple इस बार भारत में होने वाली असेंबली का इस्तेमाल ग्लोबल लॉन्च के शुरुआती चरण में ही बड़े पैमाने पर कर रहा है।
पहली बार लॉन्च के साथ ही भारत में बने Pro मॉडल
Apple के लिए भारत में iPhone Pro मॉडल की मैन्युफैक्चरिंग एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। कंपनी पहले से ही भारत में कई iPhone मॉडल तैयार करती रही है, लेकिन iPhone 18 Pro और Pro Max के मामले में खास बात यह है कि भारत में बने ये डिवाइस ग्लोबल बिक्री शुरू होने के समय ही बाजार में पहुंचने की तैयारी में हैं।
पिछले साल iPhone 17 के मामले में भी भारत में तैयार यूनिट्स को बिक्री के पहले दिन उपलब्ध कराया गया था। हालांकि Pro और Pro Max मॉडल के लिए यह पहली बार है जब भारत की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स ग्लोबल लॉन्च के शुरुआती चरण में ही सप्लाई का हिस्सा बन रही हैं।
इस बदलाव को भारत में Apple के बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है। पहले भारत में तैयार किए गए iPhone को दूसरे देशों के बाजारों तक पहुंचने में कई दिन या कभी-कभी महीनों तक का समय लग सकता था। अब स्थिति बदल रही है और स्थानीय उत्पादन सीधे ग्लोबल सप्लाई नेटवर्क से जुड़ता दिखाई दे रहा है।
दो कंपनियों की फैक्ट्रियों में बन रहे Pro मॉडल
फिलहाल भारत में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max का उत्पादन दो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में किया जा रहा है। इनमें से एक यूनिट Foxconn की है, जबकि दूसरी Tata Electronics की बताई गई है।
इन दोनों कंपनियों के जरिए Apple ने भारत में अपनी असेंबली क्षमता को लगातार विस्तार दिया है। नए Pro मॉडल के उत्पादन के साथ स्थानीय सप्लाई चेन में भी बदलाव देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, Apple आगे मांग को देखते हुए इन मॉडलों के उत्पादन के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार करने की दिशा में काम कर रहा है।
सूत्रों के मुताबिक, अगर दुनियाभर से मांग मजबूत रहती है तो कंपनी असेंबली लाइन्स की संख्या बढ़ा सकती है। इसे करीब एक दर्जन लाइनों तक ले जाने की संभावना बताई गई है। इसका मकसद अलग-अलग देशों से आने वाली मांग के अनुरूप उत्पादन को तेजी से बढ़ाना है।
अमेरिका के लिए सबसे ज्यादा यूनिट्स भेजे जाने की तैयारी
भारत में बने iPhone 18 Pro और Pro Max का बड़ा हिस्सा घरेलू बाजार में नहीं रहेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बिकने वाले कुल iPhone में Pro और Pro Max मॉडल की हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी ही है। ऐसे में देश में तैयार किए जा रहे इन प्रीमियम मॉडल्स का करीब 80 से 90 फीसदी उत्पादन विदेशी बाजारों में भेजे जाने की संभावना है।
अमेरिका इन निर्यात खेपों का प्रमुख बाजार है। चार्टर्ड विमानों के इस्तेमाल से Apple को लॉन्च के आसपास बड़ी संख्या में फोन कम समय में अमेरिकी बाजार तक पहुंचाने में मदद मिल रही है। सामान्य एयर कार्गो की तुलना में इस तरह की विशेष व्यवस्था से कंपनी सप्लाई टाइमलाइन पर अधिक नियंत्रण रख सकती है।
सूत्रों ने बताया कि ग्लोबल लॉन्च से पहले भी Apple ने चार्टर्ड फ्लाइट्स के जरिए बड़ी संख्या में डिवाइस भारत से बाहर भेजे थे। अब iPhone 18 Pro और Pro Max की बिक्री शुरू होने के साथ ऐसी और उड़ानों की योजना बनाई जा सकती है। इनमें से ज्यादातर शिपमेंट अमेरिका की ओर जाने की संभावना है।
भारत में बेस मॉडल का इंतजार
इस बार Apple ने शुरुआत में iPhone 18 Pro और Pro Max पर फोकस किया है। भारत में इन दोनों प्रीमियम मॉडल का निर्माण शुरू हो चुका है, लेकिन बेस iPhone 18 को लेकर अलग स्थिति है।
इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, भारत में iPhone 18 के बेस मॉडल को अगले साल की पहली तिमाही में लाया जा सकता है। इसका कारण भारत के बाजार में मॉडल्स की मांग का पैटर्न भी है। यहां iPhone की बिक्री में बेस मॉडल की हिस्सेदारी करीब 80 से 85 फीसदी बताई जाती है। इस लिहाज से Apple के लिए बेस मॉडल का स्थानीय उत्पादन और उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि मौजूदा चरण में कंपनी ने Pro और Pro Max की मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई को प्राथमिकता दी है।
Apple का फोल्डेबल डिवाइस भी भारत में तैयार नहीं किया जा रहा है। रिपोर्ट में इसे कंपनी के भारतीय उत्पादन पोर्टफोलियो से अलग रखा गया है। यानी भारत में मैन्युफैक्चरिंग का विस्तार होने के बावजूद कंपनी के सभी नए डिवाइस का उत्पादन देश में नहीं हो रहा है।
ट्रंप प्रशासन के टैरिफ के बाद बदली एक्सपोर्ट रणनीति
अमेरिका और भारत के बीच iPhone सप्लाई का महत्व पिछले कुछ समय में और बढ़ा है। पिछले साल फरवरी में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से टैरिफ लगाए जाने के बाद अमेरिका Apple के लिए भारत से iPhone एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा गंतव्य बन गया।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में Apple ने भारत से अमेरिका को करीब 7 अरब डॉलर मूल्य के iPhone भेजे थे। 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 19.2 अरब डॉलर पहुंच गया। यानी एक साल में अमेरिका भेजे जाने वाले iPhone के मूल्य में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
इस बदलाव ने भारत को Apple की वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग रणनीति में और महत्वपूर्ण बना दिया है। कंपनी लंबे समय से चीन पर अपनी उत्पादन निर्भरता को कम करने और दूसरे देशों में उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। भारत इस रणनीति के प्रमुख केंद्रों में शामिल है।
PLI योजना से भी मिला उत्पादन को बढ़ावा
भारत में Apple के बढ़ते उत्पादन को सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI योजना से भी जोड़कर देखा जाता है। स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग के लिए लागू इस योजना के पांच साल के दौरान देश में iPhone का उत्पादन करीब 71 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
इस अवधि में Apple के साथ उसकी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर कंपनियों ने भारत में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाई। इससे न सिर्फ घरेलू असेंबली बढ़ी, बल्कि भारत से दूसरे देशों में स्मार्टफोन एक्सपोर्ट का स्तर भी बढ़ा।
अब iPhone 18 Pro और Pro Max की ग्लोबल लॉन्च सप्लाई में भारतीय यूनिट्स की भूमिका इस बदलाव का अगला चरण मानी जा रही है। भारत में तैयार फोन को लॉन्च के शुरुआती दिनों में ही अमेरिका जैसे बड़े बाजार में भेजना इस बात की ओर इशारा करता है कि स्थानीय उत्पादन नेटवर्क अब सिर्फ भारतीय मांग तक सीमित नहीं है।
बढ़ती क्षमता के साथ और तेज हो सकती है सप्लाई
Apple की योजना अगर असेंबली लाइनों की संख्या बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ती है तो भारत से प्रीमियम iPhone की उत्पादन क्षमता और बढ़ सकती है। ग्लोबल डिमांड के आधार पर कंपनी उत्पादन लाइन और शिफ्ट बढ़ाने जैसे विकल्पों पर काम कर सकती है।
हालांकि Apple, Foxconn और Tata Electronics ने रिपोर्ट तैयार होने तक इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी थी। इसलिए असेंबली लाइनों की अंतिम संख्या और अतिरिक्त उत्पादन क्षमता को लेकर अभी कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल तस्वीर यह है कि iPhone 18 Pro और Pro Max के लॉन्च से पहले भारत में उत्पादन इकाइयां पूरी क्षमता के साथ सप्लाई तैयार करने में जुटी हैं। चेन्नई से चार्टर्ड फ्लाइट्स के जरिए अमेरिका भेजी जा रही खेपें भारत की भूमिका को केवल स्थानीय बाजार के लिए फोन बनाने वाले देश से आगे ले जाती दिख रही हैं। आने वाले समय में बेस iPhone 18 का उत्पादन और स्थानीय बाजार में उसकी उपलब्धता इस कहानी का अगला अहम चरण हो सकता है।




