टाटा ग्रुप के भीतर चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के दूसरे कार्यकाल को लेकर उठे मतभेद अब शेयर बाजार में भी नजर आने लगे हैं। टाटा संस के बोर्ड की ओर से चंद्रशेखरन को लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए चुने जाने के फैसले पर टाटा ट्रस्ट्स ने आपत्ति जताई है। इसके बाद शुक्रवार को टाटा ग्रुप से जुड़ी कई सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों में दबाव देखने को मिला।
कारोबारी सत्र के दौरान टाटा केमिकल्स में सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई। इसके शेयर करीब 8 फीसदी तक नीचे चले गए। वहीं टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), टाटा मोटर्स, टाटा एलेक्सी और टाटा टेक्नोलॉजीज जैसे शेयर भी गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार में निवेशकों का ध्यान अब इस बात पर है कि टाटा संस के भीतर चेयरमैन पद को लेकर पैदा हुआ विवाद किस दिशा में जाता है।
पांच साल के नए कार्यकाल पर उठे सवाल
विवाद की शुरुआत टाटा संस के बोर्ड के उस फैसले से हुई, जिसमें एन. चंद्रशेखरन को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए चेयरमैन बनाए रखने को मंजूरी दी गई। बोर्ड ने यह निर्णय अपनी बैठक में लिया था। चंद्रशेखरन लंबे समय से टाटा ग्रुप की कमान संभाल रहे हैं और उनके नेतृत्व में ग्रुप की अलग-अलग कंपनियां कई बड़े कारोबारी क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
हालांकि, बोर्ड की मंजूरी के बाद मामला पूरी तरह आसान नहीं रहा। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया। बैठक में मौजूद निदेशकों में से चार ने चंद्रशेखरन के पक्ष में मतदान किया, जबकि नोएल टाटा ने इसके खिलाफ वोट डाला।
इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स की ओर से इस नियुक्ति को लेकर कानूनी आपत्ति दर्ज कराई गई। ट्रस्ट का कहना है कि टाटा संस के एसोसिएशन के आर्टिकल्स में मौजूद कुछ प्रावधानों को देखते हुए चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का प्रस्ताव कानूनी रूप से प्रभावी नहीं माना जा सकता।
इस तरह मामला सिर्फ बोर्ड के भीतर मतभेद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि टाटा संस के संचालन और उसके सबसे महत्वपूर्ण पद को लेकर अधिकारों तथा नियमों की चर्चा भी शुरू हो गई है।
शुक्रवार को बाजार में क्या हुआ?
टाटा ट्रस्ट्स की आपत्ति सामने आने के बाद निवेशकों की नजर टाटा ग्रुप की सूचीबद्ध कंपनियों पर रही। कारोबार के दौरान टाटा केमिकल्स में लगभग 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और इसका शेयर 719 रुपये के आसपास दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया।
टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन का शेयर भी लगभग 5 फीसदी तक टूट गया। कारोबार के दौरान इसकी कीमत करीब 683 रुपये तक पहुंच गई। इसके अलावा TCS में भी बिकवाली का दबाव रहा। देश की प्रमुख IT सर्विस कंपनियों में शामिल TCS का शेयर लगभग 3.5 फीसदी गिरकर 2,118 रुपये के आसपास आ गया।
ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़े टाटा ग्रुप के अन्य शेयरों में भी कमजोरी दिखाई दी। टाटा मोटर्स, टाटा एलेक्सी और टाटा टेक्नोलॉजीज के शेयरों में कारोबार के दौरान करीब 3 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई।
शेयरों में आई इस कमजोरी को बाजार में टाटा ग्रुप के नेतृत्व और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े घटनाक्रम से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, अलग-अलग कंपनियों के शेयरों में गिरावट के पीछे उनके अपने कारोबारी और बाजार संबंधी कारण भी हो सकते हैं।
टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका क्यों महत्वपूर्ण है?
टाटा संस टाटा ग्रुप की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और इसमें टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी करीब 66 फीसदी बताई जाती है। इसी वजह से टाटा ट्रस्ट्स का प्रभाव टाटा संस के महत्वपूर्ण फैसलों में काफी अहम माना जाता है।
दूसरी ओर, शापूरजी पल्लोनजी ग्रुप के पास टाटा संस में करीब 18.37 फीसदी हिस्सेदारी है। ऐसे में टाटा संस के बोर्ड और शेयरहोल्डर्स से जुड़े फैसलों में अलग-अलग प्रमुख हिस्सेदारों की भूमिका पर भी नजर बनी हुई है।
चंद्रशेखरन को लेकर सामने आया मौजूदा विवाद इसी वजह से ज्यादा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ टाटा संस का बोर्ड उनके अगले पांच साल के कार्यकाल को मंजूरी दे चुका है, वहीं दूसरी ओर टाटा ट्रस्ट्स ने इस फैसले की वैधता पर सवाल खड़े किए हैं।
अब आगे की प्रक्रिया में यह देखना अहम होगा कि बोर्ड के फैसले और टाटा ट्रस्ट्स की आपत्ति के बीच किस तरह स्थिति स्पष्ट होती है।
RBI के फैसले ने भी बढ़ाई हलचल
टाटा ग्रुप में यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब टाटा संस की कॉरपोरेट संरचना को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा चल रही है। भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने टाटा संस के निजी और गैर-सूचीबद्ध कंपनी के रूप में बने रहने की मांग को स्वीकार नहीं किया है।
RBI के रुख के बाद टाटा संस पर बड़े गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) से संबंधित लिस्टिंग नियम लागू होने का मुद्दा फिर चर्चा में आया है। इसका सीधा संबंध टाटा संस के संभावित IPO से भी जोड़ा जा रहा है।
टाटा संस लंबे समय से भारतीय कॉरपोरेट जगत की सबसे महत्वपूर्ण होल्डिंग कंपनियों में शामिल रही है। ऐसे में उसके लिस्टिंग स्टेटस में बदलाव की संभावना बाजार के लिए भी अहम मानी जाती है। RBI के फैसले के बाद टाटा संस के संभावित सार्वजनिक निर्गम यानी IPO को लेकर भी अटकलें और चर्चा तेज हुई है।
इसी पृष्ठभूमि में चेयरमैन के कार्यकाल को लेकर टाटा ट्रस्ट्स की आपत्ति सामने आने से टाटा संस से जुड़े कई कॉरपोरेट मुद्दे एक साथ चर्चा में आ गए हैं।
अब AGM पर टिकी नजर
चंद्रशेखरन के नए कार्यकाल को लेकर आगे की प्रक्रिया में टाटा संस की वार्षिक आम बैठक यानी AGM की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। चेयरमैन के तौर पर आगे बने रहने के लिए उन्हें कंपनी के बोर्ड में निदेशक के रूप में दोबारा चुना जाना आवश्यक होगा।
यही वजह है कि आगामी AGM को लेकर बाजार और टाटा ग्रुप से जुड़े पक्षों की नजर बनी हुई है। बैठक में शेयरहोल्डर्स की भूमिका महत्वपूर्ण होगी और टाटा ट्रस्ट्स की बड़ी हिस्सेदारी के कारण उसका रुख खास महत्व रखेगा।
फिलहाल बोर्ड की ओर से चंद्रशेखरन के पांच साल के नए कार्यकाल को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन टाटा ट्रस्ट्स की कानूनी आपत्ति ने इस फैसले पर नया सवाल खड़ा कर दिया है। आने वाले समय में AGM और इससे जुड़े कॉरपोरेट कदम यह स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण होंगे कि चेयरमैन पद को लेकर आगे की स्थिति क्या रहती है।
निवेशकों के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
टाटा ग्रुप की कई बड़ी कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध हैं। इसलिए टाटा संस के स्तर पर होने वाले बड़े कॉरपोरेट फैसलों का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है। शुक्रवार को टाटा समूह की अलग-अलग कंपनियों में हुई गिरावट ने भी इस घटनाक्रम को बाजार के नजरिए से महत्वपूर्ण बना दिया।
हालांकि, टाटा ग्रुप की सभी कंपनियों का कारोबार अलग-अलग क्षेत्रों में है और उनके शेयरों की कीमतें केवल होल्डिंग कंपनी से जुड़े घटनाक्रम पर निर्भर नहीं करतीं। बाजार में व्यापक उतार-चढ़ाव, सेक्टर से जुड़े कारक और संबंधित कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन जैसे पहलू भी शेयरों की चाल को प्रभावित करते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल टाटा संस के चेयरमैन पद को लेकर है। बोर्ड ने जहां चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने का फैसला किया है, वहीं टाटा ट्रस्ट्स ने इस पर असहमति जताते हुए कानूनी आधार पर आपत्ति दर्ज की है। अब AGM और आगे की कॉरपोरेट प्रक्रिया इस पूरे मामले में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगी।
इस घटनाक्रम के कारण टाटा ग्रुप की कॉरपोरेट गवर्नेंस, टाटा संस की संरचना और संभावित IPO से जुड़े मुद्दे एक साथ सुर्खियों में हैं। आने वाले दिनों में टाटा ट्रस्ट्स, टाटा संस के बोर्ड और शेयरहोल्डर्स के स्तर पर होने वाली कार्रवाई से तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।




