भीषण गर्मी में महंगी हुई ठंडक! आइसक्रीम, चॉकलेट और ड्राई फ्रूट्स के बढ़े दाम, जानिए क्यों बढ़ रही हैं कीमतें

भीषण गर्मी में महंगी हुई ठंडक! आइसक्रीम, चॉकलेट और ड्राई फ्रूट्स के बढ़े दाम, जानिए क्यों बढ़ रही हैं कीमतें

उत्तर भारत में लगातार बढ़ती गर्मी का असर केवल लोगों की दिनचर्या पर ही नहीं, बल्कि उनकी जेब पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दिल्ली-एनसीआर सहित कई राज्यों में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंचने से ठंडे पेय, आइसक्रीम, चॉकलेट, कोल्ड डेजर्ट और अन्य ठंडक देने वाले खाद्य उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ गई है। हालांकि बढ़ती मांग के बीच इन उत्पादों की कीमतों में भी लगातार इजाफा देखने को मिल रहा है।

बाजार से जुड़े कारोबारियों और उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार केवल मौसम ही नहीं, बल्कि वैश्विक परिस्थितियां भी कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। कच्चे माल की लागत बढ़ने, आयात में देरी, समुद्री माल ढुलाई के खर्च में वृद्धि और पैकेजिंग सामग्री महंगी होने जैसे कई कारणों से कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसका असर अब सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है।

भीषण गर्मी के बीच बढ़ी ठंडे उत्पादों की मांग

गर्मी के मौसम में आइसक्रीम, कोल्ड ड्रिंक, फ्लेवर्ड मिल्क, फ्रोजन डेजर्ट, चॉकलेट और ठंडे पेय पदार्थों की बिक्री सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ जाती है। स्कूलों की छुट्टियां, बाहर घूमने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि और लगातार बढ़ते तापमान के कारण इन उत्पादों की मांग में तेजी आना स्वाभाविक माना जाता है।

दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पंजाब सहित कई राज्यों में हीटवेव जैसी परिस्थितियों के कारण लोग गर्मी से राहत पाने के लिए अधिक मात्रा में ठंडे खाद्य पदार्थ खरीद रहे हैं। लेकिन बढ़ती मांग के साथ-साथ कीमतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।

आइसक्रीम और चॉकलेट क्यों हो रही हैं महंगी?

उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार आइसक्रीम और चॉकलेट की कीमतों में वृद्धि के पीछे कई आर्थिक और वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। इन उत्पादों के निर्माण में उपयोग होने वाला कच्चा माल बड़ी मात्रा में विदेशों से आयात किया जाता है।

विशेष रूप से निम्नलिखित सामग्री की लागत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है:

  • कोको (Cocoa)
  • बादाम
  • काजू
  • पिस्ता
  • हेज़लनट
  • किशमिश
  • अन्य सूखे मेवे
  • विशेष फ्लेवर और फूड इंग्रीडिएंट्स

इन कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से उत्पादन लागत भी लगातार बढ़ रही है। कंपनियों के सामने या तो कीमतें बढ़ाने या अपने मुनाफे में कमी स्वीकार करने का विकल्प बचता है।

पश्चिम एशिया में तनाव का सप्लाई चेन पर असर

व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर वैश्विक सप्लाई चेन पर भी देखने को मिल रहा है। समुद्री व्यापार मार्गों पर बढ़ी अस्थिरता के कारण कई शिपमेंट में देरी हो रही है और माल ढुलाई का खर्च भी बढ़ गया है।

भारत अपने खाद्य उद्योग के लिए कई प्रकार का कच्चा माल अलग-अलग देशों से आयात करता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई प्रभावित होती है, तो उसका असर घरेलू बाजार में उपलब्धता और कीमत दोनों पर पड़ता है।

यही वजह है कि कई कंपनियां अब पहले की तुलना में अधिक लागत पर कच्चा माल खरीदने को मजबूर हैं।

ड्राई फ्रूट्स के दाम में 20 से 22 प्रतिशत तक बढ़ोतरी

ड्राई फ्रूट कारोबार से जुड़े व्यापारियों के अनुसार पिछले दो महीनों के दौरान कई सूखे मेवों की कीमतों में लगभग 20 से 22 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।

बादाम, पिस्ता, अखरोट, काजू और अन्य आयातित ड्राई फ्रूट्स की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। चूंकि इनका उपयोग प्रीमियम आइसक्रीम, चॉकलेट, मिठाइयों और बेकरी उत्पादों में बड़े पैमाने पर किया जाता है, इसलिए इन उत्पादों की लागत भी बढ़ गई है।

समुद्री माल ढुलाई हुई महंगी

आयात-निर्यात क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ बताते हैं कि पिछले कुछ समय में समुद्री कंटेनर परिवहन (Sea Freight) की लागत में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

माल ढुलाई के बढ़ते खर्च के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • समुद्री मार्गों पर सुरक्षा चुनौतियां
  • जहाजों के मार्ग में बदलाव
  • कंटेनर उपलब्धता की समस्या
  • ईंधन लागत में वृद्धि
  • बीमा प्रीमियम का बढ़ना

जब आयातकों को अधिक परिवहन लागत चुकानी पड़ती है, तो उसका असर अंततः उपभोक्ता कीमतों पर भी दिखाई देता है।

बीमा लागत बढ़ने से आयात हुआ महंगा

अंतरराष्ट्रीय व्यापार में केवल माल ढुलाई ही नहीं, बल्कि शिपमेंट का बीमा भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

यदि किसी क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो बीमा कंपनियां जोखिम को देखते हुए प्रीमियम बढ़ा देती हैं। इससे आयात की कुल लागत और बढ़ जाती है। यही अतिरिक्त लागत बाद में उत्पाद की अंतिम कीमत में शामिल हो जाती है।

तेल की कीमतों का भी पड़ रहा असर

कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर केवल पेट्रोल और डीजल तक सीमित नहीं रहता। प्लास्टिक, पैकेजिंग सामग्री और परिवहन लागत भी तेल की कीमतों से प्रभावित होती है।

आइसक्रीम, चॉकलेट और अन्य खाद्य उत्पादों की पैकेजिंग में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक आधारित सामग्री का उपयोग किया जाता है। जब प्लास्टिक महंगा होता है, तो कंपनियों की उत्पादन लागत भी बढ़ जाती है।

इसके अलावा फैक्ट्री से गोदाम और गोदाम से दुकानों तक उत्पाद पहुंचाने का परिवहन खर्च भी ईंधन महंगा होने से बढ़ जाता है।

पैकेजिंग सामग्री की लागत में वृद्धि

खाद्य उद्योग में पैकेजिंग एक महत्वपूर्ण लागत होती है। आइसक्रीम कप, रैपर, प्लास्टिक कंटेनर, कार्डबोर्ड बॉक्स और अन्य पैकेजिंग सामग्री की कीमतों में वृद्धि से कंपनियों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पैकेजिंग महंगी होती है तो उसका सीधा असर उत्पाद की खुदरा कीमत पर पड़ता है।

आइसक्रीम कंपनियों ने बढ़ाए दाम

बाजार रिपोर्ट्स के अनुसार कई आइसक्रीम कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतों में लगभग 10 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की है। कुछ कंपनियों ने कीमत बढ़ाने के बजाय उत्पाद का आकार थोड़ा छोटा किया है, जबकि कुछ अन्य कंपनियां आने वाले समय में नई मूल्य सूची लागू करने की तैयारी कर रही हैं।

कंपनियों का कहना है कि लगातार बढ़ती लागत के बीच मूल्य संशोधन करना आवश्यक हो गया है।

चॉकलेट उद्योग पर भी बढ़ा दबाव

चॉकलेट निर्माण में कोको सबसे महत्वपूर्ण कच्चा माल होता है। पिछले कुछ समय में वैश्विक स्तर पर कोको की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

इसके अलावा दूध, चीनी, ड्राई फ्रूट्स और पैकेजिंग सामग्री की लागत बढ़ने से चॉकलेट उद्योग पर भी दबाव बढ़ा है। कई ब्रांड पहले ही अपने कुछ उत्पादों की कीमतों में बदलाव कर चुके हैं, जबकि कुछ कंपनियां पैक साइज़ में बदलाव का विकल्प अपना रही हैं।

उपभोक्ताओं पर क्या होगा असर?

बढ़ती कीमतों का सबसे अधिक असर उन परिवारों पर पड़ सकता है, जो गर्मियों के दौरान नियमित रूप से आइसक्रीम, चॉकलेट और अन्य ठंडे खाद्य उत्पाद खरीदते हैं।

विशेष रूप से बच्चों की छुट्टियों के दौरान इन उत्पादों की मांग अधिक रहती है। ऐसे में कीमतें बढ़ने से मासिक घरेलू खर्च में भी वृद्धि हो सकती है।

इसके अलावा होटल, रेस्टोरेंट, कैफे और बेकरी उद्योग पर भी लागत बढ़ने का असर पड़ सकता है, क्योंकि ये व्यवसाय बड़ी मात्रा में डेयरी उत्पाद, चॉकलेट, ड्राई फ्रूट्स और अन्य आयातित सामग्री का उपयोग करते हैं।

क्या आने वाले महीनों में और बढ़ सकते हैं दाम?

उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं और समुद्री परिवहन लागत में कमी नहीं आती, तो आने वाले महीनों में कुछ अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

हालांकि यह स्थिति कई वैश्विक कारकों पर निर्भर करेगी, जिनमें अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कच्चे तेल की कीमतें, सप्लाई चेन की स्थिति और आयात लागत शामिल हैं। यदि इन क्षेत्रों में सुधार होता है, तो भविष्य में कीमतों पर दबाव कुछ कम हो सकता है।