अमेरिका में बनेगी ‘AI फोर्स’, ट्रम्प करेंगे नए AI सलाहकार की नियुक्ति: बोले- टेक्नोलॉजी की रफ्तार नहीं रोकेंगे, लेकिन गलत इस्तेमाल पर होगी नजर

अमेरिका में बनेगी ‘AI फोर्स’, ट्रम्प करेंगे नए AI सलाहकार की नियुक्ति: बोले- टेक्नोलॉजी की रफ्तार नहीं रोकेंगे, लेकिन गलत इस्तेमाल पर होगी नजर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर एक नई पहल का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका में जल्द ही एक अलग ‘AI Force’ बनाई जाएगी और इसके साथ एक नया AI Czar यानी AI मामलों का विशेष सलाहकार भी नियुक्त किया जाएगा। ट्रम्प ने यह घोषणा 19 सितंबर 2026 को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर की। हालांकि, उन्होंने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि प्रस्तावित AI फोर्स किस विभाग के तहत काम करेगी, इसमें कितने लोग होंगे, इसका बजट कितना होगा या इसकी जिम्मेदारियां किस तरह तय की जाएंगी।

ट्रम्प के मुताबिक, नई व्यवस्था का मकसद अमेरिका में AI के विकास को रोकना नहीं, बल्कि इस तेजी से बढ़ती तकनीक पर नजर रखते हुए उसके विस्तार को बढ़ावा देना है। उन्होंने AI को अमेरिका के भविष्य और आर्थिक विकास के लिए अहम बताया है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि तकनीक के गलत इस्तेमाल या किसी तरह के नुकसान से निपटने के लिए मौजूदा आपराधिक और सिविल कानून व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है।

अभी तय नहीं है AI फोर्स का पूरा ढांचा

ट्रम्प ने अपने ऐलान में AI फोर्स का नाम तो स्पष्ट कर दिया, लेकिन इसकी विस्तृत कार्यप्रणाली सामने नहीं रखी। यह भी साफ नहीं है कि यह कोई नया सरकारी संगठन होगा, अलग टास्क फोर्स होगी या कई मौजूदा एजेंसियों के बीच समन्वय करने वाला समूह होगा।

इसी तरह नए AI Czar की भूमिका को लेकर भी अभी तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ट्रम्प ने कहा है कि वह जल्द इस पद के लिए नाम की घोषणा करेंगे। इससे पहले वेंचर कैपिटलिस्ट डेविड सैक्स ट्रम्प प्रशासन में AI और क्रिप्टो से जुड़े मामलों के प्रमुख सलाहकार रह चुके हैं। इस साल उन्होंने उस भूमिका से हटकर राष्ट्रपति की विज्ञान और तकनीक संबंधी सलाहकार परिषद में जिम्मेदारी संभाली।

इसलिए फिलहाल ट्रम्प की घोषणा को एक शुरुआती प्रशासनिक पहल के तौर पर देखा जा रहा है। इसके वास्तविक अधिकार, संरचना और कामकाज का पता आगे की आधिकारिक घोषणाओं से चलेगा।

ट्रम्प ने स्पेस फोर्स का भी दिया उदाहरण

AI फोर्स की घोषणा करते हुए ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान बनाई गई Space Force का उदाहरण दिया। अमेरिका ने 2019 में स्पेस फोर्स की स्थापना की थी। यह अमेरिकी सैन्य ढांचे में एक नई शाखा के रूप में सामने आई थी।

AI फोर्स के लिए उसी तरह का नाम इस्तेमाल किए जाने से यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या प्रस्तावित संगठन सिर्फ तकनीकी निगरानी के लिए होगा या इसके पास इससे ज्यादा व्यापक अधिकार होंगे। फिलहाल ट्रम्प के बयान में ऐसी किसी सैन्य भूमिका की जानकारी नहीं दी गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उनका जोर AI उद्योग की निगरानी, विकास और संभावित गलत इस्तेमाल से निपटने पर है।

AI को रोकने के बजाय आगे बढ़ाने पर जोर

ट्रम्प ने अपने पोस्ट में AI इंडस्ट्री को लेकर अपना रुख भी स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन इस क्षेत्र की वृद्धि में बाधा डालने या इसकी रफ्तार कम करने की कोशिश नहीं करेगा। उनका कहना है कि अमेरिका को AI के क्षेत्र में आगे बढ़ने की जरूरत है और सरकार का काम इस उद्योग को समर्थन देना तथा उस पर नजर रखना होगा।

यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका में AI के विकास को लेकर दो अलग-अलग तरह की चिंताएं सामने आ रही हैं। एक तरफ बड़ी टेक कंपनियां और निवेशक AI को आर्थिक और तकनीकी प्रतिस्पर्धा के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। दूसरी तरफ कुछ AI विशेषज्ञ तेज विकास के साथ जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर ज्यादा सावधानी की मांग कर रहे हैं।

ट्रम्प ने AI और डेटा सेंटर उद्योग के खिलाफ हो रही आलोचना पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने दावा किया कि कुछ राजनीतिक समूह AI सेक्टर और डेटा सेंटरों के विस्तार को रोकना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह इस उद्योग के विकास में रुकावट नहीं आने देंगे।

अमेरिका-चीन की तकनीकी प्रतिस्पर्धा भी अहम वजह

ट्रम्प की घोषणा ऐसे वक्त हुई है जब अमेरिका और चीन के बीच AI और अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। दोनों देश AI, कंप्यूटिंग क्षमता, चिप्स और डेटा सेंटर जैसी तकनीकों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।

अमेरिकी प्रशासन के लिए AI सिर्फ निजी टेक कंपनियों का विषय नहीं रह गया है। इसे आर्थिक विकास, तकनीकी क्षमता और राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा से भी जोड़ा जा रहा है। ट्रम्प की आने वाले दिनों में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक भी प्रस्तावित है। ऐसे में AI दोनों देशों के बीच बातचीत का एक महत्वपूर्ण विषय हो सकता है।

AI कंपनियों पर लगा विकास धीमा करने की सहमति का आरोप

ट्रम्प की घोषणा के साथ ही अमेरिका में AI इंडस्ट्री को लेकर एक अलग कानूनी विवाद भी सामने आया है। Anthropic, OpenAI, SpaceXAI और Google के खिलाफ अमेरिका की एक अदालत में मुकदमा दायर किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन कंपनियों ने AI के विकास की रफ्तार धीमी करने के लिए आपस में समन्वय किया।

मुकदमे में दावा किया गया है कि कंपनियों के बीच इस तरह का तालमेल अमेरिकी एंटीट्रस्ट कानूनों का उल्लंघन कर सकता है। याचिका के अनुसार, यदि प्रमुख AI कंपनियां विकास की गति को एक साथ सीमित करती हैं तो इसका असर ग्राहकों पर भी पड़ सकता है। शिकायतकर्ता का दावा है कि इससे पेड AI सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाले नए फीचर्स और तकनीकी सुधारों का लाभ कम हो सकता है।

हालांकि यह अभी आरोप हैं और मुकदमे में लगाए गए दावों का अदालत में परीक्षण होना बाकी है।

डारियो अमोडेई ने की थी AI विकास की रफ्तार पर चर्चा

इस विवाद की पृष्ठभूमि में Anthropic के CEO डारियो अमोडेई की 12 सितंबर की अपील भी महत्वपूर्ण है। अमोडेई ने AI के तेजी से आगे बढ़ने के बीच सुरक्षा उपाय मजबूत करने और फ्रंटियर AI के विकास की रफ्तार को अधिक नियंत्रित तरीके से आगे बढ़ाने की बात कही थी। उन्होंने उद्योग स्तर पर सहयोग की जरूरत बताई थी।

इसके बाद OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन, SpaceXAI के एलन मस्क और Google DeepMind के सह-संस्थापक डेमिस हासाबिस समेत कुछ प्रमुख AI नेताओं ने उनके विचारों के प्रति समर्थन जताया। अलग-अलग नेताओं की सहमति का केंद्र AI सुरक्षा और तेजी से बढ़ती तकनीक से जुड़े संभावित जोखिमों को लेकर था।

लेकिन इसी घटनाक्रम को लेकर अब अदालत में आरोप लगाया गया है कि प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच ऐसी सहमति बाजार में प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकती है। इस मामले में यह तय होना बाकी है कि कंपनियों के बीच वास्तव में कोई ऐसा कानूनी रूप से प्रतिबंधित समझौता हुआ था या नहीं।

AI सुरक्षा को लेकर बढ़ी बहस

पिछले कुछ दिनों में AI की सुरक्षा को लेकर अमेरिका में बहस तेज हुई है। कुछ विशेषज्ञों और टेक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक तेज विकास के साथ सुरक्षा परीक्षण और निगरानी की व्यवस्था भी मजबूत होनी चाहिए।

वहीं दूसरी तरफ AI उद्योग के समर्थकों का तर्क है कि बहुत ज्यादा प्रतिबंध लगाने से तकनीकी नवाचार प्रभावित हो सकता है और अमेरिका चीन जैसे देशों से पीछे रह सकता है। यही अंतर अब अमेरिकी AI नीति की बहस का प्रमुख हिस्सा बन गया है।

ट्रम्प का ताजा रुख AI के विकास को बढ़ावा देने और उसके साथ सरकारी निगरानी बनाए रखने की दिशा में है। उन्होंने अतिरिक्त रूप से यह संकेत दिया है कि सरकार गलत गतिविधियों पर नजर रखेगी, लेकिन इसके लिए नई व्यापक पाबंदियों के बजाय मौजूदा कानूनी व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा सकता है।

डेटा सेंटर भी बने बहस का हिस्सा

AI के विस्तार के साथ अमेरिका में डेटा सेंटरों की संख्या और उनकी जरूरत भी बढ़ रही है। लेकिन कई जगहों पर इन परियोजनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध देखने को मिला है। पानी, बिजली और अन्य संसाधनों की खपत के साथ-साथ स्थानीय ऊर्जा लागत और पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

ट्रम्प ने इसके बावजूद डेटा सेंटरों के विस्तार का समर्थन किया है और इन्हें अमेरिकी AI क्षमता के लिए महत्वपूर्ण माना है। उनका संदेश यह है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर को रोकने के बजाय अमेरिका को इसमें निवेश और विकास जारी रखना चाहिए।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रस्तावित AI Force और नए AI Czar की भूमिका पर अब नजर रहेगी। फिलहाल ट्रम्प ने केवल इसकी घोषणा की है। संगठन की शक्तियां, सदस्यों की संख्या, बजट, अधिकार क्षेत्र और काम शुरू करने की तारीख जैसी अहम जानकारियां अभी सामने आना बाकी हैं। इसलिए आने वाले दिनों में प्रशासन की अगली घोषणाएं यह तय करेंगी कि AI फोर्स वास्तव में किस रूप में काम करेगी।