न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र की जनरल डिबेट मंगलवार, 22 सितंबर से शुरू हो रही है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से राष्ट्राध्यक्ष, सरकारों के प्रमुख और वरिष्ठ प्रतिनिधि इस दौरान संयुक्त राष्ट्र के मंच से अपनी प्राथमिकताएं और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अपना पक्ष रखेंगे। इस साल की जनरल डिबेट 22 से 26 सितंबर और फिर 28 सितंबर को आयोजित होगी।
आज के कार्यक्रम में ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा के संबोधन के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का भाषण होगा। ट्रम्प का संबोधन ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा, रूस-यूक्रेन युद्ध, गाजा, वैश्विक व्यापार और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में हैं। 2026 की UNGA को लेकर विश्लेषकों ने ईरान युद्ध, बहुपक्षीय संस्थाओं में भरोसे और वैश्विक शासन से जुड़े सवालों को भी प्रमुख विषयों में गिना है।
ट्रम्प के पुराने UN भाषणों की घटनाएं भी चर्चा में
ट्रम्प के UN भाषणों के दौरान पहले भी कुछ ऐसे मौके आए हैं, जो बाद में अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का विषय बने। सितंबर 2025 में उनके भाषण के शुरुआती हिस्से में टेलीप्रॉम्प्टर काम नहीं कर रहा था। ट्रम्प ने मंच से इसका जिक्र किया और कहा था कि वह बिना टेलीप्रॉम्प्टर के भी भाषण जारी रखेंगे। बाद में उन्होंने टेलीप्रॉम्प्टर संचालित करने वाले व्यक्ति को लेकर भी टिप्पणी की थी।
उस समय केवल टेलीप्रॉम्प्टर ही नहीं, बल्कि UN परिसर में एस्केलेटर रुकने और ऑडियो से जुड़ी परेशानियों को लेकर भी विवाद हुआ था। ट्रम्प ने इन घटनाओं को संभावित ‘सैबोटाज’ से जोड़कर जांच की बात कही थी। UN की ओर से बाद में बताया गया कि टेलीप्रॉम्प्टर व्हाइट हाउस के नियंत्रण में था, जबकि एस्केलेटर की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी वजहों पर अलग स्पष्टीकरण दिया गया था।
इससे पहले 2018 में भी UN महासभा का ट्रम्प का भाषण सुर्खियों में आया था। उस समय उन्होंने अपने प्रशासन की उपलब्धियों को लेकर बड़ा दावा किया था, जिसके बाद सभा में कुछ लोगों के हंसने की आवाज सुनाई दी। ट्रम्प ने उस प्रतिक्रिया पर कहा था कि उन्हें ऐसी प्रतिक्रिया की उम्मीद नहीं थी। अगले दिन उन्होंने इस घटना को अलग तरीके से पेश करते हुए कहा था कि लोग उनके साथ हंस रहे थे।
ब्राजील से शुरुआत, अमेरिका का नंबर उसके बाद क्यों?
UN महासभा की जनरल डिबेट में ब्राजील का सबसे पहले भाषण देना और उसके बाद अमेरिका के बोलने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। यह कोई ऐसा नियम नहीं है जिसमें लिखित रूप से ब्राजील को पहला और अमेरिका को दूसरा स्थान दिया गया हो।
UN के शुरुआती दौर में जब जनरल डिबेट की व्यवस्था विकसित हो रही थी, तब किसी देश के प्रतिनिधि के लिए सबसे पहले भाषण शुरू करना आकर्षक जिम्मेदारी नहीं मानी जाती थी। ब्राजील ने इस भूमिका को स्वीकार किया और धीरे-धीरे यह एक स्थापित परंपरा बन गई।
ब्राजील के बाद अमेरिका को बोलने का अवसर मिलने का संबंध UN मुख्यालय की मेजबानी से जोड़ा जाता है। संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय न्यूयॉर्क में है और अमेरिका मेजबान देश है। इसके बाद दूसरे देशों के वक्ताओं का क्रम UN द्वारा तय किया जाता है।
इस व्यवस्था में अलग-अलग कारकों को ध्यान में रखा जाता है, जैसे प्रतिनिधिमंडल का स्तर, पिछले सत्रों में भाषण का क्रम और सभी सदस्य देशों को मंच उपलब्ध कराने की व्यवस्था।
आखिर जनरल डिबेट क्या होती है?
नाम से ऐसा लग सकता है कि UN जनरल डिबेट किसी संसद की तरह होने वाली आमने-सामने की बहस है, लेकिन ऐसा नहीं है। यह दरअसल वह उच्चस्तरीय सत्र है जिसमें संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश महासभा के मंच से अपने विचार और प्राथमिकताएं दुनिया के सामने रखते हैं।
UN में 193 सदस्य देश हैं। हर साल सितंबर में इन देशों के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या अन्य वरिष्ठ प्रतिनिधि न्यूयॉर्क पहुंचते हैं। वे अपने देश की विदेश नीति, आर्थिक प्राथमिकताओं, सुरक्षा चिंताओं और अंतरराष्ट्रीय समस्याओं पर भाषण देते हैं।
जनरल डिबेट के दौरान अलग-अलग देशों के प्रतिनिधि औपचारिक भाषणों के अलावा द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकें भी करते हैं। इन मुलाकातों में युद्ध, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय विवादों जैसे मुद्दों पर बातचीत होती है।
यही वजह है कि UNGA का हाई-लेवल वीक केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहता। न्यूयॉर्क में एक ही समय पर बड़ी संख्या में राजनयिक बैठकें होती हैं और कई देशों के नेता आपसी संबंधों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करते हैं।
इस बार ट्रम्प के भाषण पर क्यों रहेगी नजर?
अमेरिकी राष्ट्रपति का भाषण इस बार कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों की पृष्ठभूमि में हो रहा है। इनमें ईरान से जुड़ा संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति, यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा बाजार और अमेरिका की UN नीति शामिल हैं।
अमेरिकी प्रशासन की ओर से संकेत दिए गए हैं कि ट्रम्प अपने संबोधन में अमेरिकी नीतियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका की भूमिका पर जोर दे सकते हैं। UN में अमेरिकी भूमिका, संस्थागत सुधार और बजट से जुड़े सवाल भी इस सत्र में चर्चा का विषय हैं।
ईरान का मुद्दा विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ट्रम्प और ईरानी नेतृत्व के बीच संभावित संपर्क को लेकर अटकलें रही हैं, लेकिन किसी व्यक्तिगत मुलाकात को निश्चित मानना उचित नहीं है। दोनों देशों के बीच जारी तनाव और उसके क्षेत्रीय प्रभाव इस समय अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के बड़े विषयों में शामिल हैं।
15 मिनट का समय, लेकिन कास्त्रो ने 269 मिनट तक बोला
UN महासभा की जनरल डिबेट में सामान्य तौर पर नेताओं से लगभग 15 मिनट के भीतर अपनी बात रखने की अपेक्षा की जाती है। इसका उद्देश्य यह है कि 193 सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को बोलने का अवसर मिल सके।
हालांकि, इतिहास में कुछ भाषण निर्धारित समय से कई गुना लंबे रहे हैं। UN के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक, 26 सितंबर 1960 को क्यूबा के तत्कालीन नेता फिदेल कास्त्रो ने 269 मिनट यानी करीब 4 घंटे 29 मिनट तक भाषण दिया था। यह महासभा की जनरल डिबेट में दर्ज सबसे लंबा भाषण है।
भारत के संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2014 का UN महासभा का भाषण भी उल्लेखनीय रहा है। 27 सितंबर 2014 को दिए गए उनके संबोधन की अवधि करीब 35 मिनट 38 सेकंड बताई जाती है।
भारत की नजर किन मुद्दों पर?
UN महासभा में भारत के लिए कई ऐसे विषय महत्वपूर्ण रहते हैं जिनका सीधा संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और विदेश नीति से है।
पहला बड़ा मुद्दा आतंकवाद है। भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, आतंकवादी नेटवर्क पर कार्रवाई और सीमा पार आतंकवाद से जुड़े मुद्दों को उठाता रहा है।
दूसरा विषय पश्चिम एशिया की स्थिति है। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। वहां संघर्ष बढ़ने की स्थिति में भारतीयों की सुरक्षा, उनकी वापसी और क्षेत्रीय स्थिरता भारत के लिए महत्वपूर्ण हो जाती है।
ऊर्जा सुरक्षा भी भारत के लिए अहम है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। इसलिए पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतों, सप्लाई रूट और वैश्विक ऊर्जा बाजार में होने वाले बदलावों का भारत की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
चौथा मुद्दा ग्लोबल साउथ से जुड़ा है। विकासशील देशों की ओर से कर्ज, खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, विकास के लिए वित्त और तकनीक तक पहुंच जैसे विषय लगातार उठाए जाते रहे हैं। भारत इन देशों की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सामने रखने की बात करता रहा है।
पांचवां महत्वपूर्ण विषय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार है। भारत लंबे समय से UNSC के विस्तार और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बहुपक्षीय संस्थाओं में बदलाव की मांग करता रहा है।
UNGA में भाषण से ज्यादा अहम होती हैं पर्दे के पीछे की बैठकें
जनरल डिबेट का मंच भले ही भाषणों के लिए जाना जाता हो, लेकिन UNGA के दौरान होने वाली निजी और द्विपक्षीय बैठकें भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती हैं। एक ही सप्ताह में अलग-अलग देशों के नेता कई मुद्दों पर सीधे बातचीत करते हैं।
इन बैठकों में युद्ध और संघर्ष से लेकर व्यापार, ऊर्जा, निवेश, तकनीक और सुरक्षा तक कई विषय शामिल होते हैं। 2026 के हाई-लेवल वीक में भी बड़ी संख्या में द्विपक्षीय बैठकों की योजना बनाई गई है।
इसलिए 22 से 28 सितंबर के बीच न्यूयॉर्क केवल संयुक्त राष्ट्र के औपचारिक भाषणों का केंद्र नहीं रहेगा। यह वैश्विक कूटनीति का ऐसा मंच होगा जहां दुनिया के प्रमुख देशों के प्रतिनिधि अपने हितों, चिंताओं और संभावित सहयोग पर बातचीत करेंगे। इस पूरे घटनाक्रम में आज ट्रम्प का भाषण खास तौर पर इसलिए देखा जाएगा क्योंकि अमेरिका की नीतियों का असर सुरक्षा, ऊर्जा और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के कई मोर्चों पर पड़ता है।




