मोबाइल फोन की स्क्रीन को खरोंच और रोजमर्रा के नुकसान से बचाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले टेम्पर्ड ग्लास और स्क्रीन प्रोटेक्टर को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा नियामकीय बदलाव किया है। सरकार ने स्मार्टफोन के स्क्रीन प्रोटेक्टर्स को अनिवार्य रजिस्ट्रेशन वाले उत्पादों की सूची में शामिल कर दिया है। यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से लागू होगी। इसके बाद संबंधित स्क्रीन प्रोटेक्टर्स को तय भारतीय मानक के अनुरूप होना जरूरी होगा।
यह फैसला इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी से जुड़े सामान के लिए लागू Compulsory Registration Order, 2021 में संशोधन के जरिए किया गया है। 21 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना S.O. 5190(E) के तहत स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर को इस व्यवस्था में नई श्रेणी के तौर पर जोड़ा गया है। अधिसूचना में इसे शेड्यूल के सीरियल नंबर 66 पर रखा गया है।
किस भारतीय मानक के तहत आएगा स्क्रीन प्रोटेक्टर?
सरकार ने स्मार्टफोन के स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए IS 19348:2025 को संबंधित भारतीय मानक बनाया है। इस मानक का नाम ‘Glass Screen Protector — Specification’ है। BIS के रिकॉर्ड के मुताबिक यह मानक 29 जुलाई 2025 को प्रकाशित हुआ था।
इस मानक का उद्देश्य स्क्रीन प्रोटेक्टर की गुणवत्ता और प्रदर्शन के लिए एक समान तकनीकी आवश्यकताएं तय करना है। BIS के उपलब्ध दस्तावेजों में स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए आयाम, ऑप्टिकल क्लैरिटी, सतह से जुड़े दोष और मैकेनिकल ड्यूरेबिलिटी जैसे पहलुओं की जांच का उल्लेख मिलता है। यानी आगे चलकर सिर्फ दिखने में अच्छा या सस्ता होना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि संबंधित उत्पाद को निर्धारित तकनीकी मानकों पर भी खरा उतरना होगा।
अभी नहीं, अगले साल से बदलेगा बाजार का नियम
सरकार ने इस व्यवस्था को तत्काल लागू नहीं किया है। कंपनियों, निर्माताओं और आयातकों को तैयारी के लिए समय दिया गया है। नई व्यवस्था की प्रभावी तारीख 1 अप्रैल 2027 तय की गई है।
इसका मतलब यह है कि 1 अप्रैल 2027 से संबंधित स्क्रीन प्रोटेक्टर पर Compulsory Registration Order की शर्तें लागू होंगी। कारोबारियों को इस तारीख तक अपने उत्पादों को संबंधित भारतीय मानक के अनुरूप करने और लागू रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी करनी होगी।
BIS के नियमों के अनुसार, जब किसी उत्पाद को Quality Control Order या अनिवार्य अनुरूपता व्यवस्था के तहत लाया जाता है, तो संबंधित उत्पाद के लिए निर्धारित मानकों का पालन जरूरी होता है। BIS के मुताबिक ऐसे उत्पादों के लिए सरकार अनिवार्य Standard Mark या लागू conformity assessment व्यवस्था निर्धारित कर सकती है।
सस्ते स्क्रीन गार्ड के कारोबार पर पड़ सकता है असर
भारत में स्मार्टफोन स्क्रीन प्रोटेक्टर का बाजार लंबे समय से अलग-अलग गुणवत्ता वाले उत्पादों से भरा रहा है। एक ही मोबाइल मॉडल के लिए दुकानों पर कुछ बेहद सस्ते ग्लास मिल जाते हैं, जबकि दूसरी ओर प्रीमियम श्रेणी के प्रोटेक्टर कई गुना महंगे होते हैं।
इन उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले ग्लास, निर्माण प्रक्रिया, फिटिंग, मजबूती और अन्य तकनीकी खूबियों में अंतर हो सकता है। उद्योग से जुड़े संगठनों ने भी पहले स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए एक समान गुणवत्ता मानक लागू करने की मांग की थी। India Cellular & Electronics Association ने अपनी सिफारिशों में स्क्रीन प्रोटेक्टर्स के लिए BIS मानक और परीक्षण व्यवस्था को अनिवार्य बनाने की बात कही थी।
नई व्यवस्था का असर खास तौर पर उन निर्माताओं और आयातकों पर पड़ सकता है जो निर्धारित मानकों के अनुरूप उत्पाद तैयार नहीं करते हैं। हालांकि, किसी खास कीमत वर्ग के सभी स्क्रीन गार्ड अपने आप प्रतिबंधित होंगे, ऐसा कहना सही नहीं होगा। मुख्य बात यह होगी कि संबंधित उत्पाद लागू भारतीय मानक और अनिवार्य रजिस्ट्रेशन व्यवस्था की शर्तों को पूरा करता है या नहीं।
ग्राहकों को क्या बदलता हुआ नजर आ सकता है?
आम ग्राहक के लिए सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि स्क्रीन प्रोटेक्टर खरीदते समय केवल कीमत, ब्रांड या दुकान की सलाह पर निर्भर रहने के बजाय नियामकीय अनुपालन की जानकारी भी महत्वपूर्ण हो जाएगी।
BIS के पास उपभोक्ताओं के लिए BIS Care ऐप और अन्य सत्यापन सुविधाएं उपलब्ध हैं। BIS के अनुसार, इस ऐप के जरिए ISI मार्क वाले उत्पादों के लाइसेंस की जानकारी और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के लिए लागू रजिस्ट्रेशन विवरण की जांच की जा सकती है।
हालांकि, स्क्रीन प्रोटेक्टर के मामले में उपभोक्ताओं को 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाली अंतिम व्यवस्था और उस समय सरकार/BIS की ओर से जारी मार्किंग एवं रजिस्ट्रेशन संबंधी निर्देशों को देखना चाहिए। केवल पैकेट पर कोई भी BIS जैसा चिन्ह देखकर उत्पाद को प्रमाणित मान लेना उचित नहीं होगा।
दुकानदारों और आयातकों के लिए क्या बदलेगा?
नए नियम का असर सिर्फ निर्माता कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा। स्क्रीन प्रोटेक्टर का आयात, वितरण और बिक्री करने वाले कारोबारियों के लिए भी यह देखना जरूरी होगा कि उनके पास आने वाला उत्पाद लागू नियमों के अनुरूप है।
BIS के मुताबिक किसी उत्पाद को अनिवार्य गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था के तहत लाए जाने के बाद बिना निर्धारित Standard Mark या लागू अनुरूपता आवश्यकताओं के उसे बनाना, आयात करना, वितरित करना या बेचना नियमों का उल्लंघन हो सकता है।
BIS बाजार में नियमों के उल्लंघन और Standard Mark के गलत इस्तेमाल के खिलाफ प्रवर्तन कार्रवाई भी करता है। उसकी वेबसाइट के अनुसार शिकायतों के आधार पर भी जांच और कार्रवाई की जा सकती है।
इसलिए 2027 में नियम लागू होने के बाद दुकानदारों और वितरकों के लिए अपने सप्लायर और उत्पाद के दस्तावेजों की जांच पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो सकती है।
स्क्रीन प्रोटेक्टर की गुणवत्ता क्यों मायने रखती है?
स्क्रीन प्रोटेक्टर का मुख्य काम स्मार्टफोन के डिस्प्ले को रोजमर्रा के इस्तेमाल में होने वाली खरोंच और कुछ परिस्थितियों में होने वाले नुकसान से बचाना है। लेकिन हर स्क्रीन गार्ड की क्षमता एक जैसी नहीं होती।
कम गुणवत्ता वाले उत्पादों में फिटिंग सही नहीं हो सकती, किनारे जल्दी उठ सकते हैं, सतह पर खरोंच जल्दी आ सकती है या स्क्रीन की स्पष्टता प्रभावित हो सकती है। कुछ मामलों में टच का अनुभव भी खराब हो सकता है, खासकर जब प्रोटेक्टर फोन की स्क्रीन के साथ ठीक से फिट न हो।
इसी वजह से एक तय तकनीकी मानक होने का उद्देश्य सिर्फ उत्पाद की कीमत नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उसके निर्माण और प्रदर्शन के लिए न्यूनतम आवश्यकताओं को निर्धारित करना है। BIS के स्क्रीन प्रोटेक्टर मानक में इसी तरह की तकनीकी आवश्यकताओं पर जोर दिया गया है।
बाजार में मिलने वाले स्क्रीन गार्ड कितने तरह के होते हैं?
स्मार्टफोन बाजार में आम तौर पर कई प्रकार के स्क्रीन प्रोटेक्टर दिखाई देते हैं। इनमें 2D और 2.5D टेम्पर्ड ग्लास सामान्य स्क्रीन के लिए इस्तेमाल होते हैं। कर्व्ड डिस्प्ले वाले फोन के लिए 3D या कर्व्ड ग्लास भी बाजार में उपलब्ध हैं।
इसके अलावा मैट स्क्रीन प्रोटेक्टर चमक और रिफ्लेक्शन को कम करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं, जबकि प्राइवेसी ग्लास स्क्रीन को बगल से देखने पर जानकारी छिपाने के उद्देश्य से बनाए जाते हैं। प्लास्टिक और TPU आधारित प्रोटेक्टर भी उपलब्ध हैं, जो मुख्य रूप से स्क्रैच से सुरक्षा देने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।
हालांकि, सरकार की नई अधिसूचना में स्मार्टफोन के “Screen Protectors” को IS 19348:2025 ‘Glass Screen Protector — Specification’ से जोड़ा गया है। इसलिए अलग-अलग प्रकार के प्रोटेक्टर पर नियमों की सटीक लागू सीमा समझने के लिए अंतिम तकनीकी और कार्यान्वयन निर्देशों को देखना जरूरी होगा।
कंपनियों को अब क्या तैयारी करनी होगी?
निर्माताओं और आयातकों के लिए सबसे अहम काम अपने उत्पादों को निर्धारित भारतीय मानक के अनुरूप तैयार करना होगा। इसके बाद लागू BIS रजिस्ट्रेशन और परीक्षण संबंधी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
BIS की सामान्य अनुरूपता व्यवस्था में उत्पादों की जांच के साथ निर्माण और परीक्षण क्षमता का आकलन तथा बाजार से लिए गए उत्पादों की निगरानी जैसी प्रक्रियाएं भी शामिल हो सकती हैं। हालांकि, स्क्रीन प्रोटेक्टर के लिए लागू सटीक प्रक्रिया संबंधित Compulsory Registration framework और उसके तहत जारी निर्देशों के अनुसार होगी।
इस बदलाव से कंपनियों को अपने सप्लाई चेन, आयातित कच्चे माल, तैयार उत्पाद और पैकेजिंग से जुड़े अनुपालन की भी समीक्षा करनी पड़ सकती है।
क्या स्क्रीन गार्ड महंगे हो जाएंगे?
इस सवाल का अभी निश्चित जवाब देना जल्दबाजी होगी। कंपनियों को परीक्षण, रजिस्ट्रेशन, गुणवत्ता नियंत्रण और नियमों के अनुपालन से जुड़े खर्च उठाने पड़ सकते हैं, लेकिन इन लागतों का अंतिम असर ग्राहकों को मिलने वाली कीमत पर कितना पड़ेगा, यह उत्पाद, निर्माता, आयात लागत और बाजार प्रतिस्पर्धा समेत कई बातों पर निर्भर करेगा।
इसलिए अभी स्क्रीन प्रोटेक्टर की कीमत में किसी निश्चित प्रतिशत बढ़ोतरी का दावा करना उचित नहीं होगा।
1 अप्रैल 2027 के बाद क्या ध्यान रखें?
नए नियम लागू होने के बाद ग्राहक को स्क्रीन प्रोटेक्टर खरीदते समय उत्पाद की पैकेजिंग, संबंधित मानक और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारी देखनी चाहिए। वहीं दुकानदारों को अपने सप्लायर से जरूरी अनुपालन दस्तावेज हासिल करके रखना होगा।
कुल मिलाकर सरकार का यह कदम स्मार्टफोन एक्सेसरीज के उस हिस्से को औपचारिक गुणवत्ता व्यवस्था में लाने की दिशा में है, जो अब तक काफी हद तक कीमत और बाजार की मांग के आधार पर चलता रहा है। 1 अप्रैल 2027 से IS 19348:2025 के तहत लागू होने वाली अनिवार्य व्यवस्था के बाद स्क्रीन प्रोटेक्टर निर्माताओं और आयातकों के लिए गुणवत्ता मानकों का पालन पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा।
(Photo : AI Generated)




