भारतीय फुटबॉल टीम ने फीफा वर्ल्ड कप में खेल चुकी पनामा की मजबूत टीम के खिलाफ शानदार प्रदर्शन करते हुए इंटरनेशनल फ्रेंडली मुकाबला 1-1 से ड्रॉ कराया। बेंगलुरु के श्री कांतीरवा स्टेडियम में खेले गए मैच में भारत ने पहले गोल करके बढ़त बनाई, लेकिन दूसरे हाफ में पनामा ने बराबरी हासिल कर ली। दोनों टीमों को जीत के लिए आखिरी मिनटों में कई मौके मिले, मगर कोई भी टीम निर्णायक गोल नहीं कर सकी।
भारत की ओर से रयान डेल विलियम्स ने 41वें मिनट में बेहतरीन फिनिश के जरिए टीम को आगे किया। दूसरे हाफ में 68वें मिनट पर उमर वालेंसिया ने बॉक्स के बाहर से शानदार लो शॉट लगाकर पनामा को मुकाबले में वापस ला दिया। इसके बाद दोनों टीमों ने आक्रमण तेज किया, लेकिन अंतिम सीटी तक स्कोर 1-1 ही रहा।
यह पुरुष सीनियर इंटरनेशनल फुटबॉल में भारत और पनामा की पहली भिड़ंत थी। पनामा की मौजूदा टीम में 2026 वर्ल्ड कप अभियान का हिस्सा रहे 14 खिलाड़ी भी शामिल थे। पनामा ने 2018 और 2026 में फीफा वर्ल्ड कप में हिस्सा लिया है। 2026 के टूर्नामेंट में उसने ग्रुप स्टेज में घाना, इंग्लैंड और क्रोएशिया का सामना किया था।
कांतीरवा में लंबे अंतराल के बाद उतरी भारतीय टीम
भारतीय टीम के लिए यह मुकाबला इसलिए भी खास था क्योंकि करीब 1,178 दिन के अंतराल के बाद सीनियर टीम ने श्री कांतीरवा स्टेडियम में वापसी की। इससे पहले भारत ने यहां 2023 SAFF चैंपियनशिप में खेला था। उस टूर्नामेंट के फाइनल में भारत ने कुवैत को पेनल्टी शूटआउट में हराकर खिताब अपने नाम किया था।
उसके बाद भारतीय फुटबॉल टीम ने कई अंतरराष्ट्रीय मुकाबले अलग-अलग मैदानों पर खेले। इस दौरान टीम 2026 फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई नहीं कर सकी और 2027 एशियन कप का टिकट भी हासिल नहीं कर पाई। फीफा रैंकिंग में भी इस अवधि के दौरान भारत को गिरावट का सामना करना पड़ा और पनामा के खिलाफ मुकाबले के समय भारतीय टीम 136वें स्थान पर थी। ऐसे समय में विश्व कप खेल चुकी टीम के खिलाफ ड्रॉ हासिल करना भारतीय खिलाड़ियों के लिए महत्वपूर्ण परिणाम रहा।
सुनील छेत्री ने स्टैंड्स से देखा मुकाबला
इस मुकाबले को देखने के लिए पूर्व भारतीय कप्तान सुनील छेत्री भी स्टेडियम पहुंचे। इंटरनेशनल फुटबॉल से संन्यास लेने के बाद कांतीरवा में पहली बार वह भारतीय टीम को दर्शक के तौर पर सपोर्ट करते दिखाई दिए।
छेत्री ने टीम को मैदान पर खेलते हुए स्टैंड्स से देखा। उन्होंने इस अनुभव को अपने लिए भावनात्मक तौर पर “खट्टा-मीठा पल” बताया। उनका कहना था कि पहले वह मैदान पर देश के लिए खेलने उतरते थे, लेकिन अब वह टीम के एक प्रशंसक के रूप में मुकाबला देख रहे हैं।
शुरुआत से पनामा के पास रहा ज्यादा कब्जा
मैच के शुरुआती हिस्से में पनामा ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण बनाए रखा। मेहमान टीम लगातार भारतीय डिफेंस पर दबाव बनाने की कोशिश करती रही। खास तौर पर बाएं हिस्से से पनामा ने कई हमले किए।
भारतीय टीम ने इस दबाव का जवाब अपनी रक्षात्मक संरचना मजबूत रखकर दिया। भारत ज्यादा आगे बढ़ने के बजाय सही मौके का इंतजार करता रहा और काउंटर अटैक के जरिए पनामा के डिफेंस को परेशान करने की कोशिश की।
विक्रम प्रताप सिंह, अबिषेक सिंह टेकचम, अनवर अली और बिजॉय वर्गीज ने पनामा के कई प्रयासों को समय रहते रोक दिया। गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू भी लगातार सतर्क रहे।
भारत को मैच के शुरुआती मिनटों में ही एक अच्छा अवसर मिला। 8वें मिनट में अनवर अली ने आगे की ओर गेंद भेजी। आशिके कुरुनियन ने उसे आकाश मिश्रा तक पहुंचाया। आकाश ने बॉक्स के अंदर रयान विलियम्स के लिए कटबैक किया, लेकिन विलियम्स इस मौके को गोल में नहीं बदल सके।
विलियम्स ने लगातार बनाई परेशानी
रयान विलियम्स ने इसके बाद भी पनामा की रक्षापंक्ति पर दबाव बनाए रखा। 15वें मिनट में उन्होंने भारत के लिए कॉर्नर हासिल किया। सेट पीस पर उनकी डिलीवरी पर बिजॉय वर्गीज ने हेडर लगाने की कोशिश की, लेकिन पनामा के गोलकीपर ने समय रहते गेंद को पंच करके खतरा टाल दिया।
इसके चार मिनट बाद विलियम्स ने खुद गोल की दिशा में शॉट लगाया। उनका जमीन से लगा हुआ प्रयास गोल पोस्ट से बेहद करीब से निकल गया। भारत को जल्द ही एक और मौका मिला, लेकिन 22वें मिनट में आशिके कुरुनियन का क्रॉस विलियम्स तक पहुंचने से पहले पनामा के डिफेंडरों ने रोक दिया।
26वें मिनट में विलियम्स ने बॉक्स के भीतर आशिके को गेंद उपलब्ध कराई। आशिके ने शॉट लिया, मगर गेंद गोल के अंदर जाने के बजाय साइड-नेटिंग से टकराई। लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार भारत को 41वें मिनट में सफलता मिली।
41वें मिनट में भारत ने खोला खाता
भारत का पहला गोल एक तेज और सटीक मूव का नतीजा रहा। आकाश मिश्रा से गेंद बिजॉय वर्गीज तक पहुंची। बिजॉय ने बिना ज्यादा समय गंवाए गेंद को आगे की ओर भेजा।
रयान विलियम्स ने पनामा के डिफेंस के पीछे से तेजी से रन बनाया और लंबी गेंद को अपने कब्जे में कर लिया। इसके बाद उन्होंने गोलकीपर मार्कोस रेयेस को चकमा दिया और गेंद को नेट में पहुंचा दिया।
इस गोल के साथ भारत ने 1-0 की बढ़त हासिल कर ली। पहले हाफ के बाकी समय में पनामा ने बराबरी की कोशिश की, लेकिन भारतीय डिफेंस ने बढ़त बरकरार रखी।
विलियम्स के लिए यह गोल व्यक्तिगत रूप से भी खास रहा। वह भारतीय क्लब फुटबॉल में बेंगलुरु एफसी की ओर से खेल चुके हैं और कांतीरवा स्टेडियम उनके क्लब करियर से भी जुड़ा रहा है। मार्च 2026 में भारतीय टीम के लिए डेब्यू करने वाले विलियम्स का यह पनामा के खिलाफ तीसरा अंतरराष्ट्रीय मैच था।
ब्रेक तक भारत आगे, लेकिन पनामा का दबाव कायम
पहले 45 मिनट पूरे होने पर भारतीय टीम 1-0 से आगे थी। हालांकि आंकड़ों और गेंद पर कब्जे के लिहाज से पनामा का दबदबा ज्यादा रहा। मेहमान टीम लगातार भारतीय रक्षापंक्ति को परख रही थी, लेकिन उसे गोल करने में सफलता नहीं मिली।
भारत के शुरुआती इलेवन में गुरप्रीत सिंह संधू ने गोलकीपर की जिम्मेदारी संभाली। डिफेंस में अबिषेक सिंह टेकचम, अनवर अली, बिजॉय वर्गीज और आकाश मिश्रा थे। मिडफील्ड में लालेंगमाविया, रिकी जॉन शाबोंग, विक्रम प्रताप सिंह और आशिके कुरुनियन खेले। अग्रिम पंक्ति में मनवीर सिंह के साथ रयान डेल विलियम्स को उतारा गया।
मुख्य कोच खालिद जमील ने फॉर्म में चल रहे एडमंड लालरिंदिका को शुरुआती लाइनअप में जगह नहीं दी। वहीं सहल अब्दुल समद की जगह रिकी शाबोंग को मिडफील्ड में मौका मिला।
वालेंसिया के शॉट से पनामा ने की बराबरी
दूसरे हाफ में पनामा ने गोल की तलाश और तेज कर दी। भारतीय टीम अपनी बढ़त को बचाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन 68वें मिनट में मेहमान टीम को आखिरकार बराबरी मिल गई।
उमर वालेंसिया को भारतीय बॉक्स के बाहर गेंद मिली। उन्होंने लालेंगमाविया के सामने से ही दूर से शॉट लगाने का फैसला किया। गेंद जमीन से तेज गति से आगे बढ़ी और गुरप्रीत सिंह संधू के सामने से निकलते हुए गोल के टॉप-राइट कॉर्नर में जा लगी। इस गोल के साथ स्कोर 1-1 हो गया और भारत की शुरुआती बढ़त समाप्त हो गई।
बराबरी के तुरंत बाद भारतीय टीम ने अपने दो खिलाड़ियों को बदला। रयान विलियम्स और विक्रम प्रताप सिंह की जगह सहल अब्दुल समद तथा एडमंड लालरिंदिका को मैदान पर भेजा गया।
आखिरी 20 मिनट में दोनों टीमों ने लगाया जोर
स्कोर बराबर होने के बाद मुकाबला और खुल गया। पनामा ने 71वें मिनट में एक और खतरनाक हमला किया। कॉर्नर के बाद मिले मौके पर पनामा के खिलाड़ी का शॉट सीधे क्रॉसबार से टकरा गया और भारत ने राहत की सांस ली। तीन मिनट बाद फिर मेहमान टीम ने दूर से प्रयास किया, लेकिन इस बार गुरप्रीत सिंह संधू ने शानदार बचाव करते हुए गेंद को गोल में जाने से रोक दिया।
भारत ने भी मैच के अंतिम हिस्से में आक्रमण बढ़ाया। 81वें मिनट में एडमंड लालरिंदिका ने अच्छी मेहनत से गेंद अपने कब्जे में ली और मनवीर सिंह को मौका दिया। मनवीर ने बैकहील के जरिए गेंद को गोल की दिशा में भेजने की कोशिश की, मगर उनका प्रयास लक्ष्य से बाहर निकल गया। 84वें मिनट में मनवीर ने भारत के लिए कॉर्नर हासिल किया। इसके बाद अबिषेक सिंह टेकचम ने फॉलो-अप शॉट लगाने की कोशिश की, लेकिन वह भी गोल के निशाने पर नहीं था।
इसके बाद 85वें मिनट में आशिके कुरुनियन को हटाकर जे गुप्ता को मैदान में उतारा गया। आखिरी मिनटों में सहल अब्दुल समद ने तेजी से आगे बढ़ते हुए जे गुप्ता को थ्रू बॉल दी, लेकिन पनामा की डिफेंस ने क्रॉस को रोक दिया।
अंतिम सीटी बजने तक दोनों टीमों की कोशिशें जारी रहीं, लेकिन कोई निर्णायक गोल नहीं हुआ। इस तरह भारत और पनामा का पहला सीनियर इंटरनेशनल मुकाबला 1-1 की बराबरी पर समाप्त हुआ।
अब भारत के सामने दो वर्ल्ड चैंपियन टीमें
पनामा के खिलाफ मुकाबला भारत की तीन मैचों वाली इंटरनेशनल विंडो की शुरुआत थी। अब भारतीय टीम के सामने इससे भी बड़ी चुनौती है। भारत 3 अक्टूबर को कोलकाता में पांच बार की विश्व चैंपियन ब्राजील का सामना करेगा। इसके बाद 6 अक्टूबर को दो बार की विश्व चैंपियन उरुग्वे के खिलाफ मुकाबला होगा।
इस लिहाज से पनामा के खिलाफ हासिल ड्रॉ के बाद भारतीय टीम के लिए अगले दोनों मुकाबले काफी महत्वपूर्ण होंगे। इन मैचों में टीम को विश्व फुटबॉल की दो दिग्गज टीमों के खिलाफ अपनी क्षमता परखने का मौका मिलेगा।




