हवाई जहाज में सफर करने वाले यात्रियों को टेकऑफ से लेकर लैंडिंग तक कई सुरक्षा नियमों का पालन करना पड़ता है। इनमें सबसे आम और महत्वपूर्ण नियमों में से एक है विमान के भीतर धूम्रपान पर रोक। आज लगभग सभी कमर्शियल फ्लाइट्स में सिगरेट या किसी भी तरह का स्मोकिंग करना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद अगर आप कभी विमान के वॉशरूम गए हों, तो संभव है कि आपने दरवाजे के पास या वॉशरूम के किसी हिस्से में एक छोटी सी ऐशट्रे जरूर देखी हो। इसे देखकर स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि जब विमान में सिगरेट पीना ही मना है, तो फिर ऐशट्रे लगाने की जरूरत आखिर क्यों पड़ती है?
दरअसल, विमान के टॉयलेट में मौजूद यह छोटी सी ऐशट्रे यात्रियों को धूम्रपान की अनुमति देने के लिए नहीं होती। इसके पीछे विमान सुरक्षा से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण सिद्धांत काम करता है। विमान में मौजूद कई चीजें पहली नजर में सामान्य या अजीब लग सकती हैं, लेकिन उनका उद्देश्य किसी संभावित आपात स्थिति के जोखिम को कम करना होता है। टॉयलेट में लगी ऐशट्रे भी इसी तरह की एक सुरक्षा व्यवस्था है।
धूम्रपान पर रोक के बावजूद ऐशट्रे क्यों?
विमान में स्मोकिंग पर प्रतिबंध का उद्देश्य आग और धुएं से होने वाले खतरे को रोकना है। एक विमान हजारों फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा होता है और उसके अंदर आग लगने की स्थिति जमीन पर मौजूद किसी इमारत या वाहन की तुलना में कहीं अधिक गंभीर हो सकती है। यही कारण है कि यात्रियों को विमान में धूम्रपान न करने की स्पष्ट हिदायत दी जाती है।
लेकिन एविएशन सेफ्टी का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत यह भी है कि सिर्फ किसी गतिविधि पर प्रतिबंध लगा देने से यह मान लेना सही नहीं है कि हर यात्री उस नियम का पालन करेगा। यदि कोई व्यक्ति नियम तोड़कर विमान के टॉयलेट में सिगरेट जला देता है, तो उस स्थिति में सुरक्षा व्यवस्था को संभावित खतरे को कम करने के लिए तैयार रहना पड़ता है।
यही वह जगह है जहां ऐशट्रे की भूमिका सामने आती है। इसका उद्देश्य सिगरेट पीने को आसान बनाना नहीं, बल्कि यदि कोई व्यक्ति नियम तोड़ता भी है तो जलती हुई सिगरेट या उसके बचे हुए हिस्से को ऐसी जगह फेंकने से रोकना है, जहां उससे आग लग सकती है।
सबसे बड़ा खतरा सिगरेट नहीं, गलत जगह फेंका गया बट हो सकता है
कल्पना कीजिए कि कोई यात्री विमान के टॉयलेट में जाकर चोरी-छिपे सिगरेट पीता है। धूम्रपान करने के बाद उसके पास जलता हुआ सिगरेट बट बच जाता है। अगर वहां उसे बुझाने और सुरक्षित तरीके से रखने की जगह उपलब्ध नहीं है, तो वह घबराहट में उसे किसी कूड़ेदान में डाल सकता है।
यही स्थिति विमान के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। विमान के टॉयलेट में कचरा डालने के लिए इस्तेमाल होने वाले डिब्बे में कागज, टिश्यू और दूसरी ज्वलनशील चीजें मौजूद हो सकती हैं। यदि जलती हुई सिगरेट इनमें पहुंच जाए तो आग लगने की आशंका पैदा हो सकती है।
इसके मुकाबले ऐशट्रे ऐसी चीज के लिए बनाई जाती है जिसमें सिगरेट के बचे हुए हिस्से को सुरक्षित तरीके से बुझाया जा सके। यानी इसका इस्तेमाल धूम्रपान को प्रोत्साहित करने के लिए नहीं, बल्कि नियम तोड़ने की स्थिति में भी संभावित नुकसान को सीमित करने के लिए किया जाता है।
एविएशन में इसे ‘रिस्क रिडक्शन’ की सोच से समझें
विमान सुरक्षा व्यवस्था केवल इस आधार पर तैयार नहीं की जाती कि यात्री नियमों का पालन करेंगे। इसमें उस स्थिति के लिए भी तैयारी की जाती है जब कोई व्यक्ति गलती करे या जानबूझकर नियम तोड़े।
इसे आसान भाषा में ऐसे समझा जा सकता है—स्मोकिंग प्रतिबंधित है, इसलिए यात्री को सिगरेट नहीं पीनी चाहिए। लेकिन अगर कोई व्यक्ति इस नियम को तोड़ देता है, तो सुरक्षा व्यवस्था यह कोशिश करती है कि उसके इस कृत्य से आग जैसी बड़ी दुर्घटना पैदा न हो।
इसलिए टॉयलेट में लगी ऐशट्रे को विमान में स्मोकिंग की अनुमति से जोड़ना गलत होगा। यह मूल रूप से फायर सेफ्टी से संबंधित व्यवस्था है। यही कारण है कि ऐशट्रे आमतौर पर ऐसी जगह लगाई जाती है जहां उसका इस्तेमाल जलती हुई सिगरेट को सुरक्षित तरीके से बुझाने के लिए किया जा सके।
आखिर ऐशट्रे को हटाया क्यों नहीं जाता?
यह सवाल भी काफी दिलचस्प है कि अगर विमान में धूम्रपान पूरी तरह प्रतिबंधित है, तो एयरलाइंस ऐशट्रे को निकाल क्यों नहीं देतीं?
इसका जवाब भी सुरक्षा से जुड़ा है। यदि किसी यात्री के पास जलती हुई सिगरेट है और उसे बुझाने के लिए विमान के टॉयलेट में कोई निर्धारित सुरक्षित स्थान नहीं है, तो वह उसे गलत जगह फेंक सकता है। खासतौर पर कूड़ेदान में जलती हुई वस्तु डालना आग का जोखिम बढ़ा सकता है।
इसलिए सुरक्षा व्यवस्था में कभी-कभी ऐसी चीज मौजूद रखी जाती है जिसका इस्तेमाल सामान्य परिस्थितियों में नहीं होना चाहिए, लेकिन आपात या नियम-उल्लंघन की स्थिति में वह बड़े खतरे को कम कर सकती है।
यानी ऐशट्रे का विमान में होना इस बात का संकेत नहीं है कि एयरलाइंस यात्रियों को स्मोकिंग की छूट देती हैं। इसके उलट, इसका संबंध उस स्थिति से है जब कोई व्यक्ति प्रतिबंध के बावजूद धूम्रपान कर ले।
1970 के दशक की एक घटना से जुड़ा है मामला
विमान के टॉयलेट और धूम्रपान से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था की चर्चा करते समय 1970 के दशक की एक बड़ी विमान दुर्घटना का भी उल्लेख किया जाता है। 1973 में एक विमान दुर्घटना के दौरान विमान में आग लगने की घटना हुई थी। रिपोर्टों में इस बात पर ध्यान दिया गया कि टॉयलेट में लगी आग और सिगरेट से जुड़े संभावित जोखिम को लेकर विमानन सुरक्षा नियमों को और गंभीरता से देखा गया।
इस दौर की घटनाओं ने विमानन उद्योग को यह समझने पर मजबूर किया कि विमान के अंदर छोटी सी लापरवाही भी गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। खासतौर पर टॉयलेट में कचरा और उसमें मौजूद ज्वलनशील सामग्री आग फैलने का कारण बन सकती है।
ऐसे हादसों के बाद विमान के टॉयलेट में फायर सेफ्टी से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर नियम और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए। ऐशट्रे को भी इसी व्यापक सुरक्षा सोच के हिस्से के रूप में देखा जाता है।
विमान में आग से बचाव के लिए कई स्तरों पर होती है तैयारी
हवाई जहाज में फायर सेफ्टी केवल एक ऐशट्रे तक सीमित नहीं होती। विमान के अंदर कई ऐसी व्यवस्थाएं होती हैं जिनका उद्देश्य आग लगने की स्थिति में उसे जल्द से जल्द नियंत्रित करना है। टॉयलेट में स्मोक डिटेक्टर और अग्निशमन उपकरणों की मौजूदगी इसी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है।
विमान के टॉयलेट में धूम्रपान करना इसलिए भी गंभीर नियम उल्लंघन है क्योंकि वहां धुआं उठने पर स्मोक डिटेक्टर सक्रिय हो सकता है। क्रू को अलर्ट मिल सकता है और संबंधित यात्री के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
इसलिए टॉयलेट में ऐशट्रे देखकर यह बिल्कुल नहीं समझना चाहिए कि वहां जाकर सिगरेट पीना स्वीकार्य है। ऐशट्रे केवल एक संभावित जोखिम को नियंत्रित करने वाली व्यवस्था है।
स्मोकिंग करने पर कार्रवाई भी हो सकती है
विमान में धूम्रपान प्रतिबंधित होने के बावजूद अगर कोई यात्री टॉयलेट में जाकर सिगरेट पीता है, तो उसे एयरलाइन और संबंधित विमानन नियमों के तहत कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा विमान में धूम्रपान के कारण स्मोक अलार्म सक्रिय होने पर क्रू को स्थिति की जांच करनी पड़ सकती है।
किसी यात्री की यह हरकत केवल व्यक्तिगत नियम उल्लंघन नहीं मानी जाती, क्योंकि इससे विमान में मौजूद सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। खासकर अगर जलती हुई सिगरेट गलत जगह फेंक दी जाए और उससे आग लग जाए, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।
ऐशट्रे देखकर न हों कन्फ्यूज
अब अगली बार जब आप विमान के टॉयलेट में ऐशट्रे देखें तो इसे लेकर भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। इसका मतलब यह नहीं है कि विमान में स्मोकिंग की अनुमति है। विमान में धूम्रपान पर प्रतिबंध अपनी जगह पूरी तरह लागू रहता है।
टॉयलेट में ऐशट्रे का मकसद एक संभावित खतरनाक स्थिति में आग का जोखिम कम करना है। सुरक्षा के नजरिए से इसे एक ऐसी व्यवस्था माना जा सकता है जो नियम तोड़ने वाले यात्री की वजह से पैदा होने वाले बड़े खतरे को सीमित करने के लिए मौजूद है।
यानी विमान के टॉयलेट में लगी यह छोटी सी ऐशट्रे देखने में भले ही सामान्य चीज लगे, लेकिन इसके पीछे एविएशन सेफ्टी की सोच जुड़ी हुई है। विमान में नियमों का पालन करना यात्रियों की जिम्मेदारी है और ऐशट्रे उस नियम का विकल्प नहीं है। इसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंध के बावजूद सिगरेट पीता है, तो जलते हुए सिगरेट बट को कूड़ेदान जैसी खतरनाक जगह पर फेंककर आग का बड़ा खतरा पैदा न कर दे।




