कई लोगों के होंठ प्राकृतिक रूप से गुलाबी, हल्के भूरे या थोड़े बैंगनी रंग के होते हैं। होंठों का रंग व्यक्ति की त्वचा, जेनेटिक्स और शरीर में बनने वाले मेलेनिन की मात्रा पर काफी हद तक निर्भर करता है। इसलिए हर व्यक्ति के होंठों का रंग एक जैसा होना जरूरी नहीं है। लेकिन अगर आपके होंठ पहले सामान्य या हल्के रंग के थे और अचानक धीरे-धीरे गहरे होने लगे हैं, उन पर काले या भूरे धब्बे दिखाई देने लगे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई मामलों में यह लिप पिगमेंटेशन का संकेत हो सकता है।
लिप पिगमेंटेशन कई अलग-अलग वजहों से हो सकती है। तेज धूप, स्मोकिंग, होंठों का बार-बार सूखना, उन्हें चाटने या काटने की आदत, किसी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट से एलर्जी और शरीर में होने वाले कुछ हार्मोनल बदलाव इसके पीछे जिम्मेदार हो सकते हैं। कुछ मामलों में होंठों पर लगातार जलन या सूजन रहने से भी उनका रंग गहरा पड़ सकता है। इसलिए होंठों के रंग में अचानक आए बदलाव के पीछे की वजह समझना जरूरी है।
हर गहरे रंग के होंठ पिगमेंटेशन का संकेत नहीं
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि होंठों का गहरा रंग हमेशा किसी बीमारी या समस्या का संकेत नहीं होता। कई लोगों के होंठ जन्म से ही थोड़े गहरे रंग के होते हैं। त्वचा और होंठों में मौजूद मेलेनिन की मात्रा इसके लिए जिम्मेदार हो सकती है। जेनेटिक्स के कारण भी किसी व्यक्ति के होंठ गुलाबी की बजाय भूरे या बैंगनी-भूरे रंग के हो सकते हैं।
समस्या तब मानी जाती है जब होंठों का रंग पहले से अलग होने लगे। उदाहरण के लिए, अगर लंबे समय से होंठ सामान्य रंग के थे और अब उनका रंग धीरे-धीरे गहरा हो रहा है या किसी एक हिस्से में काला-भूरा पैच बनने लगा है, तो इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए। रंग में बदलाव के साथ अगर जलन, खुजली, सूखापन, पपड़ी या सूजन जैसी परेशानी भी हो तो त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर होता है।
होंठों के काले पड़ने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं?
होंठों में भी मेलेनिन मौजूद होता है, जो उनके प्राकृतिक रंग को निर्धारित करने में भूमिका निभाता है। जब किसी कारण से इस पिगमेंट का उत्पादन या वितरण बदलता है तो होंठों का रंग पहले की तुलना में गहरा दिखाई दे सकता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं।
सूरज की तेज रोशनी भी कर सकती है असर
जिस तरह चेहरे और शरीर की त्वचा को यूवी किरणों से नुकसान पहुंच सकता है, उसी तरह होंठ भी लंबे समय तक धूप में रहने से प्रभावित हो सकते हैं। अगर होंठों को सूरज से पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती, तो यूवी एक्सपोजर के कारण पिगमेंटेशन बढ़ सकता है और उनका रंग गहरा नजर आने लगता है।
जो लोग दिन में काफी समय बाहर रहते हैं, उनके लिए होंठों की सन प्रोटेक्शन खास तौर पर जरूरी है। सिर्फ चेहरे पर सनस्क्रीन लगाने से काम पूरा नहीं होता। होंठों के लिए भी एसपीएफ वाला लिप प्रोडक्ट इस्तेमाल करना चाहिए।
स्मोकिंग और तंबाकू से बढ़ सकता है पिगमेंटेशन
सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों का असर सिर्फ फेफड़ों या मुंह के अंदरूनी हिस्से तक सीमित नहीं रहता। लगातार धूम्रपान करने से होंठों के ऊतकों पर भी असर पड़ सकता है और कुछ लोगों में होंठों का रंग गहरा दिखाई देने लगता है।
अगर होंठों के रंग में बदलाव के साथ स्मोकिंग की आदत भी है, तो इस आदत को छोड़ना त्वचा और संपूर्ण स्वास्थ्य दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
लिपस्टिक, लिप बाम या टूथपेस्ट से एलर्जी
कई बार जिस चीज को हम रोजमर्रा की देखभाल का हिस्सा समझते हैं, वही होंठों में जलन का कारण बन सकती है। लिपस्टिक, लिप बाम, टूथपेस्ट या किसी फ्लेवरिंग एजेंट में मौजूद कुछ सामग्री से संवेदनशील लोगों को एलर्जी या इरिटेशन हो सकता है।
ऐसी स्थिति में होंठों पर लालिमा, सूजन, खुजली, जलन या सूखापन दिखाई दे सकता है। लंबे समय तक जलन बनी रहने पर होंठों का रंग भी गहरा पड़ सकता है। इसलिए किसी नए प्रोडक्ट के इस्तेमाल के बाद समस्या शुरू हुई है तो उसके इस्तेमाल पर ध्यान देना चाहिए।
बार-बार होंठ चाटना और काटना भी नुकसानदायक
होंठों को बार-बार जीभ से गीला करना कई लोगों की आदत होती है। लेकिन इससे सूखापन कम होने के बजाय बढ़ सकता है। इसी तरह होंठों को दांतों से काटना, खींचना या सूखी त्वचा को नोचना भी उनके प्राकृतिक सुरक्षा कवच को नुकसान पहुंचा सकता है।
बार-बार होने वाली इस जलन और चोट के कारण होंठों की त्वचा में बदलाव आ सकता है और कुछ लोगों में पिगमेंटेशन बढ़ सकती है। इसलिए होंठों को चाटने, काटने या नोचने की आदत से बचना चाहिए।
शरीर में हार्मोनल बदलाव
कुछ स्थितियों में हार्मोन में होने वाले बदलाव भी त्वचा और होंठों के पिगमेंटेशन को प्रभावित कर सकते हैं। गर्भावस्था या किशोरावस्था जैसे समय में शरीर में कई तरह के हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जिनका असर त्वचा के रंग पर भी दिखाई दे सकता है।
हालांकि होंठों के हर तरह के पिगमेंटेशन को हार्मोनल बदलाव से जोड़ना सही नहीं है। कई बार हार्मोन से संबंधित रंग में बदलाव अस्थायी होते हैं और समय के साथ कम भी हो सकते हैं।
मौसम बदलने पर भी होंठ हो सकते हैं प्रभावित
गर्मियों में लंबे समय तक धूप में रहने और सर्दियों में होंठों की नमी कम होने से उनकी स्थिति खराब हो सकती है। ठंडी और शुष्क हवा होंठों को फटा और रूखा बना सकती है। जब व्यक्ति ऐसे होंठों को बार-बार चाटता या नोचता है, तो जलन और बढ़ सकती है।
इसलिए मौसम के अनुसार होंठों की देखभाल का तरीका बदलना भी जरूरी है।
होंठों को काला होने से बचाने के लिए क्या करें?
लिप पिगमेंटेशन से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि होंठों की नमी और उनकी प्राकृतिक सुरक्षा को बनाए रखा जाए। इसके लिए रोजाना कुछ आसान आदतों को अपनाया जा सकता है।
मॉइस्चराइजिंग लिप बाम लगाएं
अगर होंठ बार-बार सूखते और फटते हैं तो उन्हें नियमित रूप से मॉइस्चराइज रखें। पेट्रोलियम जेली, सेरामाइड और शिया बटर जैसे मॉइस्चराइजिंग इंग्रीडिएंट वाले लिप बाम मददगार हो सकते हैं। ऐसे प्रोडक्ट को प्राथमिकता दें जिनमें अनावश्यक फ्रेग्रेंस या ऐसे तत्व न हों जो आपको पहले से परेशान करते रहे हों।
पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है, हालांकि केवल पानी पीने से किसी भी प्रकार के पिगमेंटेशन का इलाज नहीं होता। होंठों को बाहर से मॉइस्चराइज रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
दिन में SPF वाला लिप बाम इस्तेमाल करें
अगर आप रोजाना बाहर निकलते हैं तो होंठों को धूप से बचाना जरूरी है। इसके लिए SPF 30 या इससे अधिक वाला ब्रॉड-स्पेक्ट्रम लिप बाम इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे दिन में नियमित रूप से लगाएं और खाने-पीने के बाद दोबारा लगाने की जरूरत हो सकती है।
होंठों को छीलना और चाटना बंद करें
सूखी त्वचा को खींचकर हटाना या होंठों को बार-बार चाटना बंद करें। ऐसा करने से होंठों में जलन और सूखापन दोनों बढ़ सकते हैं। अगर होंठ रूखे हैं तो उन्हें छीलने के बजाय मॉइस्चराइजिंग बाम लगाएं।
जिस प्रोडक्ट से समस्या हो उसे पहचानें
अगर किसी नए लिप बाम, लिपस्टिक, टूथपेस्ट या दूसरे प्रोडक्ट के बाद होंठों में जलन या रंग में बदलाव शुरू हुआ है, तो उसके इस्तेमाल पर ध्यान दें। बार-बार अलग-अलग प्रोडक्ट बदलने के बजाय त्वचा विशेषज्ञ से सलाह लेकर संभावित कारण की पहचान करना ज्यादा बेहतर है।
पिगमेंटेशन हटाने के चक्कर में ये गलती न करें
होंठों का रंग हल्का करने के लिए इंटरनेट या सोशल मीडिया पर बताए गए घरेलू नुस्खे आजमाना नुकसानदायक हो सकता है। नींबू का रस, बेकिंग सोडा, कंसंट्रेटेड एसेंशियल ऑयल या टूथपेस्ट जैसी चीजें होंठों की संवेदनशील त्वचा को इरिटेट कर सकती हैं।
चीनी, नमक और टूथपेस्ट से स्क्रब करने जैसे नुस्खों से भी बचना चाहिए। ज्यादा रगड़ने से होंठों की ऊपरी परत को नुकसान हो सकता है और जलन बढ़ सकती है।
इसी तरह चेहरे के लिए बनाए गए ब्लीचिंग प्रोडक्ट, रेटिनॉल, हार्श एक्सफोलिएटर या हाइड्रोक्विनोन जैसे एक्टिव को बिना डॉक्टर की सलाह के होंठों पर लगाना उचित नहीं है। होंठों की त्वचा चेहरे की त्वचा से अलग और अधिक संवेदनशील होती है, इसलिए किसी भी एक्टिव प्रोडक्ट का इस्तेमाल सावधानी से किया जाना चाहिए।
इन संकेतों को नजरअंदाज न करें
हर तरह का लिप पिगमेंटेशन गंभीर नहीं होता, लेकिन कुछ बदलावों को लेकर डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी हो सकता है। अगर होंठ पर नया काला या भूरा पैच दिखाई दे और वह लगातार बड़ा हो रहा हो, तो विशेषज्ञ की सलाह लें। इसी तरह अगर पिगमेंटेशन अचानक शुरू हुआ है और तेजी से बढ़ रहा है, तो भी जांच जरूरी है।
होंठों में लगातार खुजली, जलन, सूजन, पपड़ी या क्रैकिंग रहना भी ध्यान देने योग्य लक्षण हैं। अगर किसी हिस्से में घाव, अल्सर या गांठ बन गई है, बार-बार खून निकलता है या घाव ठीक नहीं हो रहा है, तो इसे सामान्य मानकर न छोड़ें।
अगर होंठ का कोई हिस्सा लंबे समय से खुरदुरा या पपड़ीदार बना हुआ है और उसके रंग में भी बदलाव है, तो त्वचा विशेषज्ञ से जांच कराना बेहतर है। इसके अलावा पिगमेंटेशन के साथ शरीर में कोई दूसरा असामान्य बदलाव दिखाई दे रहा हो, तब भी डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
डॉक्टर आपकी त्वचा, होंठों की स्थिति, पिगमेंटेशन के पैटर्न और आपकी जीवनशैली से जुड़ी आदतों को देखकर कारण समझने की कोशिश करते हैं। जरूरत के अनुसार उपचार में क्रीम या अन्य दवाएं शामिल की जा सकती हैं। कुछ मामलों में डॉक्टर लेजर जैसे उपचार की सलाह भी दे सकते हैं। इसलिए होंठों का रंग अचानक बदलने पर खुद से इलाज करने के बजाय पहले सही कारण का पता लगाना ज्यादा जरूरी है।




