संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका पहुंचे ईरान के दो राजनयिकों को आखिरकार देश से रवाना होना पड़ा। दोनों अधिकारी महासभा की बैठक समाप्त होने के बाद भी न्यूयॉर्क में मौजूद थे, जबकि अमेरिकी विदेश विभाग पहले ही ईरानी मिशन को अपने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों को अमेरिका से वापस भेजने का निर्देश दे चुका था। अमेरिकी अधिकारियों की ओर से दोबारा जानकारी दिए जाने और तत्काल देश छोड़ने का संदेश मिलने के बाद दोनों राजनयिकों ने न्यूयॉर्क से प्रस्थान किया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी विदेश विभाग ने सोमवार को न्यूयॉर्क स्थित ईरानी मिशन को बताया था कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने के उद्देश्य से अमेरिका आए ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्यों को बैठक खत्म होने के बाद देश से निकल जाना चाहिए। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल के ज्यादातर सदस्य अमेरिका से रवाना हो गए, लेकिन दो राजनयिक न्यूयॉर्क में ही बने रहे। कुछ दिन बाद अमेरिकी अधिकारियों को दोनों की मौजूदगी की जानकारी मिली।
इसके बाद शुक्रवार को अमेरिकी पक्ष ने ईरानी मिशन से संपर्क कर साफ कर दिया कि उसे पता है कि दोनों राजनयिक अभी भी न्यूयॉर्क में हैं। ईरानी मिशन को फिर से संदेश भेजा गया और दोनों अधिकारियों से बिना देरी किए अमेरिका छोड़ने को कहा गया। इसके बाद एक राजनयिक शुक्रवार रात न्यूयॉर्क से निकल गया, जबकि दूसरे ने शनिवार सुबह अमेरिका छोड़ा।
ईरानी राष्ट्रपति भी पहुंचे थे न्यूयॉर्क
इन दोनों राजनयिकों का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच बेहद तनावपूर्ण संबंध बने हुए हैं। इसी माहौल के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान भी संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंचे थे। उन्होंने 23 सितंबर को महासभा के मंच से ईरान का पक्ष दुनिया के सामने रखा था।
अपने संबोधन के दौरान पजशकियान ने अमेरिका और इजराइल पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने तथा गंभीर हमलों का आरोप लगाया। उन्होंने युद्ध में जान गंवाने वाले बच्चों की तस्वीरों का भी जिक्र किया और इन्हें अपने देश पर हुए हमलों के प्रभाव को दिखाने के लिए सामने रखा।
ईरानी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में कहा था कि उनका देश लंबे समय से खुद को हमलों और आतंकवाद का शिकार मानता रहा है। उनका दावा था कि पिछले 200 वर्षों में ईरान ने किसी दूसरे देश पर हमला नहीं किया है। उन्होंने अमेरिका और इजराइल की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईरान को ही लगातार निशाना बनाया गया है।
परमाणु कार्यक्रम पर ईरान ने फिर रखा अपना पक्ष
संयुक्त राष्ट्र में अपने भाषण के दौरान पजशकियान ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं कर रहा है। हालांकि, उन्होंने शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु तकनीक का इस्तेमाल करने के अपने अधिकार को छोड़ने से इनकार किया।
ईरानी राष्ट्रपति ने पश्चिमी देशों की नीतियों पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि ईरान के साथ व्यवहार में पश्चिमी देशों का रवैया दोहरा रहा है। उन्होंने प्रतिबंधों और ईरान पर लगाए गए अन्य दबावों को लेकर भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
उनके भाषण का मुख्य संदेश यह था कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण गतिविधियों तक सीमित रखने का दावा करता है, लेकिन तकनीकी और वैज्ञानिक विकास से जुड़े अपने अधिकारों से पीछे हटने को तैयार नहीं है।
महासभा में शामिल होने के बाद क्यों जरूरी है लौटना?
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान दुनिया के अलग-अलग देशों से राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, राजनयिक और सरकारी प्रतिनिधि न्यूयॉर्क पहुंचते हैं। इन प्रतिनिधियों को अमेरिका में प्रवेश और प्रवास के लिए संबंधित वीजा तथा राजनयिक नियमों का पालन करना पड़ता है।
किसी प्रतिनिधिमंडल को संयुक्त राष्ट्र के कार्यक्रम में भाग लेने की अनुमति मिलना इस बात की स्वत: अनुमति नहीं देता कि उसके सदस्य बैठक समाप्त होने के बाद अनिश्चित अवधि तक अमेरिका में रह सकते हैं। उनके प्रवास की अवधि और स्थिति अमेरिकी प्रशासन द्वारा लागू नियमों के अधीन रहती है।
इसी वजह से अमेरिकी विदेश विभाग ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को महासभा की कार्यवाही समाप्त होने के बाद अमेरिका छोड़ने का निर्देश दिया था। अधिकांश सदस्य समय पर लौट गए, लेकिन दो राजनयिक न्यूयॉर्क में रुक गए। अमेरिकी अधिकारियों के दोबारा संपर्क करने के बाद उन्हें भी अपना प्रवास समाप्त करना पड़ा।
नेतन्याहू ने ईरानी प्रतिनिधियों को स्टारलिंक देने की पेशकश की
संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान अमेरिका-ईरान तनाव के बीच इजराइल की ओर से भी एक अलग घटनाक्रम सामने आया था। इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के लोगों को इंटरनेट से जोड़ने के लिए स्टारलिंक डिवाइस उपलब्ध कराने की पेशकश की थी।
नेतन्याहू के भाषण के बाद एक इजराइली अधिकारी स्टारलिंक डिवाइस लेकर ईरानी प्रतिनिधियों के पास पहुंचा। अधिकारी ने ईरानी पक्ष से इसे स्वीकार करने की अपील की और संकेत दिया कि इससे ईरान के लोगों को इंटरनेट के माध्यम से अपनी बात दुनिया तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, ईरानी प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने स्टारलिंक डिवाइस लेने में रुचि नहीं दिखाई और इसे लेने से मना कर दिया। इस घटनाक्रम ने महासभा के दौरान दोनों देशों के बीच चल रहे राजनीतिक और कूटनीतिक तनाव को भी उजागर किया।
युद्ध का ईरान पर भारी मानवीय असर
ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध का असर सिर्फ सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष में ईरान में लगभग 7,300 लोगों की मौत हुई है, जबकि 32,314 लोग घायल बताए गए हैं।
लगातार हमलों के कारण बड़ी संख्या में इमारतों को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई। मीडिया रिपोर्ट्स में लगभग 1.49 लाख इमारतों के क्षतिग्रस्त होने का दावा किया गया है। इससे करीब चार लाख लोग प्रभावित हुए। युद्ध की परिस्थितियों के कारण लगभग 32 लाख लोगों को अपने घरों से विस्थापित होना पड़ा।
इस संघर्ष का असर ईरान के स्वास्थ्य ढांचे पर भी पड़ा। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 229 स्वास्थ्य केंद्र और 49 अस्पताल क्षतिग्रस्त हुए। ऐसे समय में जब बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और इलाज की जरूरत बढ़ी, स्वास्थ्य सुविधाओं को नुकसान पहुंचने से स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई।
अरबों रुपये के नुकसान का दावा
ईरान ने युद्ध के आर्थिक प्रभाव को लेकर भी बड़ा दावा किया था। अप्रैल में सामने आई जानकारी के अनुसार, ईरानी पक्ष ने संघर्ष के कारण करीब 24.8 लाख करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान बताया था। इसमें बुनियादी ढांचे, इमारतों और अन्य क्षेत्रों को हुए नुकसान को शामिल किया गया था।
इस युद्ध ने ईरान में बड़े पैमाने पर विस्थापन और बुनियादी सुविधाओं पर दबाव पैदा किया है। बड़ी संख्या में लोगों के घर छोड़ने, स्वास्थ्य संस्थानों को नुकसान पहुंचने और इमारतों के प्रभावित होने से आम नागरिकों पर संघर्ष का सीधा असर पड़ा है।
न्यूयॉर्क से दो राजनयिकों की वापसी ने बढ़ाया सवाल
ईरानी राजनयिकों को अमेरिका से रवाना किए जाने की घटना दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव के बीच हुई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दोनों अधिकारियों के खिलाफ किसी नई आपराधिक कार्रवाई का उल्लेख नहीं है। मामला मुख्य रूप से अमेरिकी प्रशासन के उस निर्देश से जुड़ा है, जिसमें महासभा में शामिल होने आए ईरानी प्रतिनिधिमंडल को बैठक खत्म होने के बाद अमेरिका छोड़ने को कहा गया था।
ज्यादातर ईरानी प्रतिनिधियों ने निर्देश का पालन किया, लेकिन दो राजनयिक कुछ समय और न्यूयॉर्क में रुके रहे। अमेरिकी अधिकारियों को इसकी जानकारी मिलने के बाद ईरानी मिशन को दोबारा सूचित किया गया। इसके बाद दोनों ने क्रमशः शुक्रवार रात और शनिवार सुबह न्यूयॉर्क छोड़ दिया।
यह घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है, जब संयुक्त राष्ट्र का मंच अमेरिका और ईरान के बीच आरोप-प्रत्यारोप का एक अहम केंद्र बना हुआ है। एक तरफ ईरान अपने खिलाफ सैन्य कार्रवाई और प्रतिबंधों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने अपनी स्थिति रख रहा है, वहीं अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के परमाणु कार्यक्रम तथा क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर लगातार सवाल उठाते रहे हैं।
इस पूरे मामले से यह भी स्पष्ट होता है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए किसी देश के प्रतिनिधियों को अमेरिका आने की अनुमति मिलने के बावजूद उनका प्रवास तय नियमों के अनुसार ही होता है। महासभा समाप्त होने के बाद ईरानी मिशन के दो सदस्यों का न्यूयॉर्क में रुकना अमेरिकी प्रशासन के निर्देश के खिलाफ माना गया और अंततः दोनों को देश से रवाना होना पड़ा।




