NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती नजर आ रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) इस मामले में एक सप्ताह के भीतर दूसरी और अंतिम चार्जशीट अदालत में दाखिल कर सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स में जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि एजेंसी की अंतिम चार्जशीट में राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी NTA के अधिकारियों या केंद्र सरकार के किसी अधिकारी को आरोपी नहीं बनाया जाएगा। जांच में सामने आए आरोपों का दायरा मुख्य रूप से परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कुछ विषय विशेषज्ञों, कोचिंग सेंटर संचालकों, बिचौलियों और परीक्षार्थियों तक सीमित रहने की बात कही जा रही है।
इस मामले में CBI अब तक राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र से कुल 13 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद इन्हीं गिरफ्तार लोगों को पेपर लीक की साजिश और उससे जुड़े नेटवर्क का मुख्य आरोपी माना जा रहा है। एजेंसी ने इन आरोपियों के खिलाफ आर्थिक लेनदेन और संपत्तियों से जुड़े सबूतों को भी जांच के दायरे में लिया है। आरोपियों के बैंक खातों और लॉकरों को फ्रीज करने के साथ-साथ एक डीमैट अकाउंट पर भी कार्रवाई की गई है।
जांच में 13 गिरफ्तार आरोपी, सरकारी अधिकारियों पर नहीं आएगा आरोप
CBI की प्रस्तावित अंतिम चार्जशीट को लेकर सामने आ रही जानकारी के मुताबिक, जांच एजेंसी ने पेपर लीक की पूरी कड़ी को समझने के लिए परीक्षा से जुड़े अलग-अलग लोगों की भूमिका की पड़ताल की है। इसमें उन विषय विशेषज्ञों पर भी ध्यान दिया गया है जिन्हें NTA की ओर से प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया में नियुक्त किया गया था। इसके अलावा कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों, बिचौलियों और उन परीक्षार्थियों की भूमिका की भी जांच की गई, जिन पर कथित तौर पर लीक हुए पेपर से फायदा लेने या उसे आगे पहुंचाने से जुड़े आरोप हैं।
रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया जा रहा है कि जांच पूरी होने के बाद CBI को ऐसा पर्याप्त आधार नहीं मिला है जिसके आधार पर NTA अथवा केंद्र सरकार के किसी अधिकारी को आरोपी के तौर पर अंतिम चार्जशीट में शामिल किया जा सके। हालांकि, अंतिम कानूनी स्थिति चार्जशीट अदालत में दाखिल होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
इससे पहले जांच एजेंसी ने अदालत के सामने यह स्पष्ट किया था कि मामले में सामने आए अन्य संभावित साजिशकर्ताओं की भूमिका की जांच जारी रखी जाएगी। अब दूसरी चार्जशीट के जरिए जांच में सामने आए बाकी तथ्यों और आरोपियों की भूमिका को रिकॉर्ड पर रखा जाएगा।
जुलाई में दाखिल हुई थी पहली चार्जशीट
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI ने 28 जुलाई को पहली चार्जशीट दाखिल की थी। उस समय एजेंसी ने संकेत दिया था कि जांच पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और अन्य संभावित साजिशकर्ताओं की भूमिका की पड़ताल आगे भी जारी रहेगी। पहली चार्जशीट के बाद जांच एजेंसी को कई महत्वपूर्ण विशेषज्ञ रिपोर्टों का इंतजार था।
इनमें केंद्रीय फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी यानी CFSL की रिपोर्ट, गवर्नमेंट एग्जामिनर ऑफ क्वेश्चन्ड डॉक्यूमेंट्स (GEQD) की विशेषज्ञ राय और दिल्ली यूनिवर्सिटी से जुड़े विशेषज्ञों की रिपोर्ट शामिल थी। इन रिपोर्टों का इस्तेमाल कथित प्रश्नपत्र लीक से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच में किया जाना था।
अब जांच के इस हिस्से को पूरा करने के बाद CBI अंतिम चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इस चार्जशीट में पहली जांच के बाद सामने आए अतिरिक्त सबूतों और संदिग्धों की भूमिका का विस्तृत उल्लेख किया जाएगा।
एक ही विषय विशेषज्ञों की दोबारा ली गई थी मदद
CBI की पहली चार्जशीट में परीक्षा के प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया से जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, NTA ने NEET-UG 2026 का प्रश्नपत्र तैयार करने के अलग-अलग चरणों में उन्हीं तीन विषय विशेषज्ञों को दोबारा जिम्मेदारी दी थी।
जांच के दौरान इसी प्रक्रिया को भी करीब से देखा गया। एजेंसी ने यह समझने की कोशिश की कि प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसके सुरक्षित रखे जाने और परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के बीच किन-किन लोगों की भूमिका रही। कथित पेपर लीक की जांच में प्रश्नपत्र से जुड़े दस्तावेज, संपर्क और आर्थिक लेनदेन भी महत्वपूर्ण साक्ष्य माने गए।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, NTA के इन अधिकारियों या केंद्र सरकार के अधिकारियों को आरोपी बनाए जाने की बात सामने नहीं आई है। CBI की कार्रवाई मुख्य रूप से उन लोगों पर केंद्रित रही है, जिन पर पेपर लीक की साजिश में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होने का आरोप है।
आरोपियों की आर्थिक गतिविधियों पर भी नजर
मामले की जांच केवल प्रश्नपत्र तक सीमित नहीं रही। CBI ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों से जुड़े वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की है। एजेंसी ने 13 आरोपियों के बैंक खातों और बैंक लॉकरों को फ्रीज किया है। इसके साथ ही एक डीमैट अकाउंट पर भी रोक लगाने की कार्रवाई की गई है।
जांच एजेंसी को संदेह था कि पेपर लीक से जुड़े नेटवर्क में पैसे का लेनदेन हुआ हो सकता है। इसी वजह से आरोपियों की संपत्तियों और वित्तीय गतिविधियों से संबंधित जानकारी भी जुटाई गई। बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय दस्तावेजों को जांच के दौरान संभावित सबूत के तौर पर देखा गया।
CBI ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और सबूत मिटाने जैसे आरोप लगाए हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की धाराओं के तहत भी कार्रवाई की गई है।
परीक्षा रद्द होने के बाद दोबारा आयोजित हुआ था NEET
NEET-UG 2026 की परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित की गई थी। परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आने लगे थे। विवाद बढ़ने के बाद परीक्षा की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे और सरकार तथा NTA ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया।
इसके बाद 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने देशभर में मेडिकल प्रवेश परीक्षा की व्यवस्था, प्रश्नपत्र की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को लेकर बहस छेड़ दी थी। बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक परीक्षा प्रक्रिया को लेकर चिंतित नजर आए थे।
पेपर लीक विवाद के दौरान छात्रों पर पड़े दबाव को लेकर भी कई तरह की रिपोर्टें सामने आई थीं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस अवधि में देशभर में 20 से अधिक छात्रों की आत्महत्या की घटनाएं सामने आई थीं। हालांकि, इन सभी घटनाओं को सीधे परीक्षा विवाद से जोड़कर देखना अलग-अलग मामलों के तथ्यों पर निर्भर करेगा।
अब अंतिम चार्जशीट से साफ होगी जांच की तस्वीर
CBI की दूसरी और अंतिम चार्जशीट दाखिल होने के बाद NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच की तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो सकती है। इसमें यह बताया जाएगा कि कथित पेपर लीक की साजिश किस तरह आगे बढ़ी, इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे और उनके बीच किस तरह के संपर्क या लेनदेन हुए।
सबसे अहम बात यह होगी कि क्या जांच एजेंसी अपनी अंतिम रिपोर्ट में NTA या केंद्र सरकार के किसी अधिकारी को आरोपी बनाएगी या नहीं। फिलहाल मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि सरकारी अधिकारियों और NTA के अधिकारियों को आरोपी नहीं बनाया जाएगा।
CBI की ओर से अंतिम चार्जशीट अदालत में दाखिल होने के बाद ही इस दावे की आधिकारिक पुष्टि होगी। इसके साथ ही अदालत के सामने यह भी स्पष्ट होगा कि एजेंसी ने 13 गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ कौन-कौन से सबूत पेश किए हैं और कथित पेपर लीक की पूरी साजिश को लेकर उसकी अंतिम जांच किस निष्कर्ष तक पहुंची है।




