नाइजीरिया में 32 लोगों से भरा सैन्य विमान नदी किनारे क्रैश, रेस्क्यू टीमों का सर्च ऑपरेशन जारी

नाइजीरिया में 32 लोगों से भरा सैन्य विमान नदी किनारे क्रैश, रेस्क्यू टीमों का सर्च ऑपरेशन जारी

नाइजीरिया में सोमवार सुबह एक सैन्य विमान दुर्घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। दक्षिणी नाइजीरिया के ओंडो राज्य में 32 लोगों को लेकर जा रहा सैन्य विमान अचानक रडार से गायब हो गया और कुछ समय बाद नदी के पास दुर्घटनाग्रस्त मिला। विमान में 25 यात्री और 7 क्रू सदस्य मौजूद थे। हादसा इग्बोकोंडा शहर के आसपास हुआ, जो नदी के किनारे बसा इलाका है। दुर्घटना के बाद राहत और बचाव दल मौके पर पहुंच गए और पानी तथा आसपास के क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया। हादसे में कितने लोगों की मौत या कितने लोग घायल हुए हैं, इसकी तत्काल आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी थी।

नियमित मिशन पर लागोस जा रहा था विमान

नाइजीरिया के एविएशन मिनिस्टर फेस्टस कीयामो के मुताबिक, सैन्य विमान किसी आपात अभियान पर नहीं बल्कि एक नियमित मिशन के तहत देश के आर्थिक केंद्र लागोस की ओर जा रहा था। स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 9 बजे विमान से संपर्क टूट गया। विमान के रडार से गायब होने के बाद अधिकारियों ने उसकी तलाश शुरू की। कुछ ही देर में उसके दुर्घटनाग्रस्त होने की जानकारी सामने आई।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक विमान नौसैनिक बेस के नजदीक दुर्घटनाग्रस्त हुआ। घटनास्थल नदी के पास होने के कारण राहत दलों को जमीन के साथ-साथ पानी में भी तलाशी अभियान चलाना पड़ रहा है। दुर्घटना के बाद स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और बचाव दलों ने इलाके को घेरकर संभावित पीड़ितों और मलबे की तलाश शुरू कर दी।

प्रत्यक्षदर्शियों ने सुनाई हादसे की कहानी

स्थानीय लोगों ने बताया कि विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से कुछ समय पहले इलाके में तेज आवाज सुनाई दी थी। प्रत्यक्षदर्शी अकिनबुलेजो पियस के अनुसार, आवाज इतनी तेज थी कि उन्हें शुरुआती तौर पर लगा जैसे बिजली गिरी हो। इसके बाद उन्होंने विमान को पेड़ों के ऊपर से गुजरते हुए देखा और कुछ ही क्षणों में उसे नीचे गिरते देखा।

घटनास्थल पर पहुंचने के बाद लोगों को विमान के मलबे के साथ कई सामान बिखरे हुए दिखाई दिए। स्थानीय स्तर पर शरीर के कुछ हिस्से, कपड़े और जूते मिलने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, इनसे दुर्घटना में मृतकों की अंतिम संख्या तय नहीं की जा सकती। अधिकारियों की ओर से पहचान और हताहतों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए सर्च एवं रेस्क्यू अभियान जारी रखा गया है।

राष्ट्रपति टिनुबू ने घोषित किया तीन दिन का राष्ट्रीय शोक

हादसे की गंभीरता को देखते हुए नाइजीरिया के राष्ट्रपति बोला अहमद टिनुबू ने तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। राष्ट्रपति के निर्देश के बाद सोमवार से देशभर में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुकाने का आदेश दिया गया। सरकार ने दुर्घटना में प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की है।

राष्ट्रपति टिनुबू ने कहा कि देश की सुरक्षा में तैनात एयरफोर्स के जवान लगातार अपनी जान जोखिम में डालकर जिम्मेदारियां निभाते हैं। उन्होंने सैन्यकर्मियों के बलिदान को सम्मान देते हुए कहा कि देश उनके योगदान को नहीं भूलेगा।

राष्ट्रपति ने संबंधित अधिकारियों को दुर्घटना की तत्काल और विस्तृत जांच करने का निर्देश भी दिया है। जांच का उद्देश्य हादसे की वास्तविक वजह पता लगाने के साथ-साथ ऐसी घटनाओं को भविष्य में रोकने के लिए जरूरी कदम तय करना होगा।

ATR-42 विमान का इस्तेमाल किन कामों में होता है?

नाइजीरियाई एयरफोर्स ने दुर्घटनाग्रस्त विमान की पहचान ATR-42 के रूप में की है। यह विमान नाइजीरियाई सैन्य अभियानों में अलग-अलग भूमिकाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। सेना ऐसे विमानों का उपयोग निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और परिवहन संबंधी अभियानों में करती है।

ATR-42 मूल रूप से ट्विन-टर्बोप्रॉप क्षेत्रीय विमान के तौर पर जाना जाता है। सैन्य इस्तेमाल के लिए ऐसे विमानों को अलग-अलग जरूरतों के मुताबिक इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें निगरानी से जुड़े मिशन, सैनिकों की आवाजाही और जरूरी सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाना शामिल हो सकता है।

इस दुर्घटना के बाद विमान के रखरखाव, उड़ान की परिस्थितियों, मौसम, तकनीकी स्थिति और क्रू से जुड़े पहलुओं की जांच की जा सकती है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।

नदी में गिरा विमान, बचाव अभियान बना बड़ी चुनौती

दुर्घटना स्थल की सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि विमान नदी के किनारे गिरा और उसका कुछ हिस्सा पानी में जाने की बात सामने आई है। जमीन पर होने वाले विमान हादसे की तुलना में पानी में या पानी के बेहद करीब हुए क्रैश में राहत एवं बचाव कार्य अधिक जटिल हो सकता है।

रेस्क्यू टीम को एक साथ कई मोर्चों पर काम करना पड़ता है। उन्हें विमान के मलबे की सही स्थिति का पता लगाने, संभावित रूप से पानी में फंसे लोगों तक पहुंचने और नदी के बहाव के कारण मलबे के दूसरी जगह चले जाने की संभावना से निपटना पड़ता है।

तेज बहाव से बदल सकती है मलबे की लोकेशन

नदी का पानी लगातार बहता रहता है। ऐसे में विमान का कोई हिस्सा या दुर्घटना के बाद पानी में मौजूद सामान घटनास्थल से दूर जा सकता है। अगर नदी का बहाव तेज हो, तो संभावित पीड़ितों या मलबे की तलाश का क्षेत्र भी बढ़ सकता है।

इसी वजह से बचाव दल को केवल उस स्थान की जांच नहीं करनी पड़ती जहां विमान पहली बार दिखाई दिया था, बल्कि आसपास के जलक्षेत्र में भी सर्च अभियान चलाना पड़ सकता है।

गंदे पानी में तलाशी सबसे कठिन

पानी के अंदर दृश्यता कम होना रेस्क्यू टीम के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। नदी का पानी साफ न होने की स्थिति में गोताखोरों के लिए मलबे और विमान के हिस्सों को आंखों से पहचानना मुश्किल होता है। ऐसी परिस्थितियों में उन्हें उपकरणों और प्रशिक्षित टीमों की मदद लेनी पड़ सकती है।

पानी के भीतर काम करते समय गोताखोरों को सीमित दृश्यता के बावजूद अपनी दिशा बनाए रखनी होती है। यही वजह है कि ऐसे ऑपरेशन में योजना और तकनीकी उपकरणों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

विमान का हिस्सा पानी में डूबने से बढ़ती है मुश्किल

क्रैश के बाद विमान का कोई हिस्सा धीरे-धीरे पानी के अंदर जा सकता है। इससे रेस्क्यू टीम के सामने नई चुनौती पैदा होती है। उन्हें पहले यह निर्धारित करना पड़ता है कि विमान या उसका मलबा किस जगह और कितनी गहराई में मौजूद है।

अगर केबिन या विमान का कोई महत्वपूर्ण हिस्सा पानी में फंसा हो, तो गोताखोरों को वहां तक सुरक्षित तरीके से पहुंचने का रास्ता तलाशना पड़ता है। खराब दृश्यता और सीमित जगह के कारण यह काम और मुश्किल हो सकता है।

मलबे के बीच गोताखोरी में खतरा

दुर्घटनाग्रस्त विमान के टूटे हुए हिस्से पानी के भीतर रेस्क्यू टीम के लिए खतरा बन सकते हैं। धातु के टुकड़े, सीटें, तार और विमान के दूसरे हिस्सों में गोताखोरों के उपकरण फंसने की आशंका रहती है।

इसलिए पानी के अंदर तलाशी के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी होता है। रेस्क्यू टीम को मलबे के आसपास सावधानी से आगे बढ़ना पड़ता है ताकि बचाव अभियान में शामिल लोगों की सुरक्षा भी बनी रहे।

नदी की गहराई और तल की स्थिति भी अहम

पानी की गहराई और नदी के तल की प्रकृति भी ऑपरेशन की गति को प्रभावित कर सकती है। कीचड़, रेत, पत्थर या अन्य प्राकृतिक बाधाएं गोताखोरों के लिए आवाजाही मुश्किल बना सकती हैं। ज्यादा गहराई होने पर अतिरिक्त उपकरणों और विशेषज्ञ टीम की जरूरत पड़ सकती है।

इसके अलावा पानी के अंदर मलबा एक जगह जमा होने के बजाय अलग-अलग हिस्सों में फैला हो सकता है। इससे पूरे क्षेत्र की व्यवस्थित तलाशी आवश्यक हो जाती है।

ईंधन और दूसरे पदार्थों से अतिरिक्त जोखिम

विमान दुर्घटना के बाद उसमें मौजूद ईंधन या अन्य पदार्थ पानी में फैलने की आशंका भी रहती है। ऐसी स्थिति में रेस्क्यू टीम को केवल लोगों और मलबे की तलाश ही नहीं करनी होती, बल्कि संभावित पर्यावरणीय और सुरक्षा जोखिमों का भी ध्यान रखना पड़ता है।

सोनार जैसे उपकरण बन सकते हैं मददगार

जब पानी के अंदर दृश्यता बहुत कम हो, तो आधुनिक खोजी उपकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। सोनार तकनीक की मदद से पानी के भीतर मौजूद वस्तुओं या मलबे की स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है। इसके आधार पर गोताखोरों को अधिक सटीक स्थान पर भेजा जा सकता है।

नाइजीरियाई अधिकारी फिलहाल दुर्घटना के बाद की स्थिति का आकलन कर रहे हैं और सर्च ऑपरेशन जारी है। हादसे की वजह, विमान में मौजूद लोगों की अंतिम स्थिति और दुर्घटना से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण सवालों के जवाब विस्तृत जांच तथा बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

फिलहाल पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी है कि नदी के आसपास चल रहे अभियान में रेस्क्यू टीमों को क्या सफलता मिलती है और दुर्घटना में प्रभावित लोगों की वास्तविक स्थिति क्या सामने आती है।