नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना, भक्ति और आत्मसंयम का प्रतीक माना जाता है। इन नौ दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपवास रखते हैं और अपनी दिनचर्या के साथ खानपान में भी बदलाव करते हैं। व्रत रखने वाले लोग जहां सुबह-शाम पूजा-अर्चना करते हैं, वहीं फलाहार और सात्विक भोजन को अपनी डाइट का हिस्सा बनाते हैं। हालांकि, नवरात्रि शुरू होते ही लोगों के मन में यह सवाल उठने लगता है कि उपवास के दौरान किन खाद्य पदार्थों को खाना उचित है और किन चीजों से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। खासतौर पर उन लोगों के लिए यह जानना जरूरी हो जाता है, जो पूरे नौ दिन व्रत रखते हैं और चाहते हैं कि धार्मिक नियमों का पालन करने के साथ शरीर में कमजोरी भी न आए।
नवरात्रि में भोजन के नियम अलग-अलग परिवारों, क्षेत्रों और धार्मिक परंपराओं के अनुसार कुछ हद तक बदल सकते हैं। आमतौर पर व्रत के दौरान अनाज, दालों, प्याज, लहसुन और सामान्य नमक से परहेज किया जाता है। इनकी जगह फल, दूध, दही, मेवे, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, साबूदाना और सेंधा नमक जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जाते हैं। लेकिन केवल व्रत में खाए जाने वाले खाद्य पदार्थों की जानकारी होना ही पर्याप्त नहीं है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि भोजन किस मात्रा में लिया जा रहा है और उसमें शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व मौजूद हैं या नहीं। आइए जानते हैं नवरात्रि के उपवास में क्या खाया जा सकता है, किन चीजों को थाली से बाहर रखना चाहिए और व्रत के दौरान सेहत का ध्यान कैसे रखा जा सकता है।
फल और सूखे मेवे बन सकते हैं ऊर्जा का अच्छा विकल्प
नवरात्रि के व्रत में फल सबसे लोकप्रिय खाद्य विकल्पों में शामिल हैं। सेब, केला, संतरा, पपीता, अनार, अमरूद और मौसमी जैसे फल अपनी पसंद और उपलब्धता के अनुसार खाए जा सकते हैं। फलों से शरीर को विटामिन, खनिज और फाइबर मिलता है। केला और अन्य फल उपवास के दौरान ऊर्जा देने में मदद कर सकते हैं, जबकि फाइबर युक्त फल पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में सहायक होते हैं।
इसके अलावा बादाम, अखरोट, काजू, किशमिश, मखाना और मूंगफली को भी फलाहार में शामिल किया जा सकता है। मेवों में वसा, प्रोटीन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं। हालांकि, इन्हें बहुत अधिक मात्रा में खाने से अतिरिक्त कैलोरी मिल सकती है। इसलिए मुट्ठी भर मेवे या सीमित मात्रा में मखाना खाना बेहतर विकल्प हो सकता है। यदि आप बाजार में मिलने वाले नमकीन या मसालेदार पैकेट वाले मेवे खरीद रहे हैं, तो उनके ऊपर लिखी सामग्री भी जरूर जांच लें।
कुट्टू, सिंघाड़ा और साबूदाना से तैयार कर सकते हैं व्रत का भोजन
सामान्य दिनों में इस्तेमाल होने वाले गेहूं और दूसरे अनाजों की जगह नवरात्रि में कई लोग कुट्टू और सिंघाड़े के आटे का इस्तेमाल करते हैं। इनसे रोटी, पूड़ी, चीला और अन्य व्रत के अनुकूल व्यंजन बनाए जा सकते हैं। कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बनने वाले पकवानों को सेंधा नमक और व्रत में स्वीकार्य मसालों के साथ तैयार किया जा सकता है।
साबूदाना भी उपवास के दौरान खूब खाया जाता है। साबूदाने की खिचड़ी, टिक्की और खीर इसके लोकप्रिय व्यंजन हैं। इसी तरह समा के चावल, जिन्हें कई जगह व्रत के चावल भी कहा जाता है, भोजन का विकल्प बन सकते हैं। इनसे खिचड़ी या अन्य पकवान तैयार किए जा सकते हैं। राजगिरा यानी चौलाई के आटे का उपयोग भी कई परिवारों में उपवास के भोजन के लिए किया जाता है।
हालांकि, यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी खाद्य पदार्थ का व्रत में इस्तेमाल किया जाना अपने आप में उसे हल्का या कम कैलोरी वाला नहीं बनाता। साबूदाना और कुट्टू से बने पकवानों में यदि ज्यादा घी, तेल, चीनी या तली हुई सामग्री डाली जाए, तो भोजन भारी हो सकता है। इसलिए उबालकर, कम तेल में या कम घी के साथ बनाए गए विकल्पों को प्राथमिकता देना उपयोगी रहेगा।
आलू से लेकर लौकी तक, इन सब्जियों का कर सकते हैं सेवन
व्रत के दौरान सब्जियों को लेकर भी कई नियम अपनाए जाते हैं। आमतौर पर आलू, शकरकंद, अरबी, रतालू, कद्दू, लौकी, खीरा और गाजर का इस्तेमाल किया जाता है। इनसे सब्जी, हल्का नाश्ता या दूसरे फलाहारी व्यंजन तैयार किए जा सकते हैं। आलू और शकरकंद से ऊर्जा मिलती है, जबकि लौकी, खीरा और कद्दू जैसी सब्जियां भोजन में विविधता लाने में मदद करती हैं।
टमाटर और अदरक का इस्तेमाल भी कई घरों में व्रत के भोजन में किया जाता है। हालांकि, सभी परिवारों में सब्जियों और मसालों को लेकर एक जैसे नियम नहीं होते। इसलिए भोजन तैयार करने से पहले अपने परिवार या जिस धार्मिक परंपरा का पालन किया जा रहा है, उसके अनुसार सामग्री का चुनाव करना उचित है।
व्रत के दौरान केवल आलू से बने पकवान खाने के बजाय अलग-अलग स्वीकार्य सब्जियों को शामिल करना बेहतर रहता है। इससे भोजन में विविधता बनी रहती है और एक ही तरह के भोजन पर निर्भरता कम होती है। तली हुई सब्जियों और ज्यादा तेल में तैयार पकवानों की जगह हल्की सब्जियां चुनना भी अच्छा विकल्प हो सकता है।
दूध, दही और पनीर से मिल सकता है प्रोटीन
नवरात्रि में डेयरी उत्पाद भी कई लोगों की डाइट का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। दूध, दही, छाछ, पनीर, मखाना-दूध, लस्सी और सीमित मात्रा में घी का सेवन किया जा सकता है, बशर्ते वे आपके व्रत के नियमों के अनुकूल हों। दूध और दही से प्रोटीन तथा कैल्शियम मिलता है। पनीर भी प्रोटीन का एक स्रोत है, जो भोजन को अधिक संतुलित बनाने में मदद कर सकता है।
यदि आप पूरे दिन उपवास रखते हैं, तो केवल फल या चाय पीकर दिन बिताने के बजाय उचित अंतराल पर पोषण देने वाले खाद्य पदार्थ लेना बेहतर है। उदाहरण के लिए, सुबह फल और दूध, दोपहर में कुट्टू या समा के चावल से बना भोजन और शाम को दही या थोड़े मेवे लिए जा सकते हैं। यह केवल एक सामान्य उदाहरण है; भोजन की मात्रा उम्र, गतिविधि और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार अलग हो सकती है।
दूध या अन्य डेयरी उत्पादों से परेशानी होने पर जबरदस्ती उनका सेवन न करें। इसी तरह मधुमेह, उच्च रक्तचाप या दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को अपने भोजन और उपवास की योजना बनाते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
सेंधा नमक और सीमित मसालों का करें इस्तेमाल
व्रत में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक इस्तेमाल करने की परंपरा है। इसके अलावा काली मिर्च, जीरा, हरी मिर्च, हरा धनिया और छोटी इलायची जैसे मसाले कई घरों में स्वीकार किए जाते हैं। इनका उपयोग भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, किसी मसाले को व्रत में स्वीकार करना या न करना पारिवारिक और क्षेत्रीय मान्यताओं पर निर्भर कर सकता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि सेंधा नमक भी सोडियम का स्रोत है। इसलिए इसे सामान्य नमक का ऐसा विकल्प नहीं समझना चाहिए जिसे बिना किसी सीमा के इस्तेमाल किया जा सके। खासतौर पर उच्च रक्तचाप वाले लोगों को नमक की कुल मात्रा पर ध्यान देना चाहिए और अपने डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए।
नवरात्रि में इन खाद्य पदार्थों से रखें दूरी
व्रत के दौरान गेहूं, चावल, सूजी, मैदा, बेसन और जई जैसे सामान्य अनाजों से परहेज किया जाता है। कई परिवार चना, उड़द, मूंग, मसूर और दूसरी दालों का सेवन भी नहीं करते। इसलिए रोजाना बनने वाली दाल, चावल, रोटी और सामान्य आटे से तैयार पकवानों की जगह व्रत के अनुकूल विकल्प चुने जाते हैं।
प्याज और लहसुन को भी नवरात्रि के दौरान कई धार्मिक परंपराओं में तामसिक भोजन से जोड़कर देखा जाता है। इसी कारण व्रत रखने वाले लोग इन्हें अपने भोजन में शामिल नहीं करते। सामान्य नमक, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, गरम मसाला, राई और हींग जैसी सामग्रियों को लेकर भी अलग-अलग घरों में अलग नियम हो सकते हैं। कुछ लोग इनमें से कई चीजों से परहेज करते हैं, जबकि कुछ परिवार कुछ मसालों का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए किसी एक सूची को सभी परंपराओं के लिए अनिवार्य नियम नहीं मानना चाहिए।
नवरात्रि के दौरान मांस, मछली, अंडे और शराब से भी परहेज किया जाता है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु आमतौर पर शाकाहारी और सात्विक भोजन को प्राथमिकता देते हैं। धार्मिक नियमों का पालन करने के लिए भोजन की सामग्री और उसे तैयार करने के तरीके पर ध्यान देना जरूरी होता है।
पैकेट वाले स्नैक्स और मीठे पेय पदार्थों से भी रहें सावधान
उपवास के दिनों में बाजार में मिलने वाले व्रत स्पेशल चिप्स, नमकीन, मिठाइयां और दूसरे पैकेज्ड उत्पाद आकर्षक विकल्प लग सकते हैं। लेकिन इन सभी चीजों को बिना जांचे खाना सही नहीं है। कई उत्पादों में सामान्य नमक, अतिरिक्त चीनी, अधिक तेल या ऐसी सामग्री हो सकती है जो आपके व्रत के नियमों के अनुरूप न हो। इसलिए पैकेट पर लिखी सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी पढ़ना जरूरी है।
डिब्बाबंद जूस, मीठे पेय और ज्यादा चीनी वाली लस्सी या शरबत का सेवन भी सीमित रखना बेहतर है। घर पर तैयार ताजे फल, सादा दही, कम चीनी वाले पेय और साफ पानी अधिक उपयोगी विकल्प हो सकते हैं। इसके साथ ही बाहर से खरीदे गए व्रत के पकवानों में इस्तेमाल होने वाले आटे, नमक और मसालों के बारे में जानकारी लेना भी अच्छा रहेगा।
उपवास में कमजोरी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
नवरात्रि में व्रत रखने का मतलब यह नहीं है कि पूरे दिन बहुत कम खाना खाया जाए। लंबे समय तक खाली पेट रहने, पर्याप्त पानी न पीने या केवल तले हुए खाद्य पदार्थों पर निर्भर रहने से थकान, सिरदर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है। इसलिए अपनी शारीरिक जरूरत के अनुसार भोजन करें और दिनभर पर्याप्त तरल पदार्थ लेते रहें, यदि आपके स्वास्थ्य के कारण तरल पदार्थों पर कोई विशेष प्रतिबंध नहीं है।
भोजन में फल, स्वीकार्य सब्जियां, डेयरी उत्पाद, मेवे और व्रत के अनुकूल आटे जैसे अलग-अलग विकल्प शामिल करने से पोषण में विविधता आ सकती है। बहुत अधिक तला हुआ भोजन खाने के बजाय हल्के पकवानों को प्राथमिकता दें। यदि उपवास के दौरान चक्कर आना, अत्यधिक कमजोरी या अस्वस्थ महसूस होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें नजरअंदाज न करें।
मधुमेह, उच्च रक्तचाप, किडनी संबंधी समस्याओं या नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं और अन्य विशेष स्वास्थ्य जरूरतों वाले लोगों के लिए भी सामान्य व्रत संबंधी सलाह पर्याप्त नहीं हो सकती।
नवरात्रि में खानपान का चुनाव धार्मिक मान्यताओं, परिवार की परंपराओं और अपनी सेहत को ध्यान में रखकर करना चाहिए। फल, मेवे, दूध-दही, स्वीकार्य सब्जियां और व्रत में इस्तेमाल होने वाले आटे भोजन के उपयोगी विकल्प हो सकते हैं। वहीं सामान्य अनाज, दालें, प्याज-लहसुन और दूसरी निषिद्ध सामग्री से परहेज करने की परंपरा कई घरों में निभाई जाती है। सही योजना के साथ उपवास करने से धार्मिक नियमों का पालन करना आसान हो सकता है और शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों का ध्यान भी रखा जा सकता है।




