33.78 करोड़ के आइस स्केटिंग रिंक प्रोजेक्ट में देरी पर मुख्यमंत्री ने लगाई फटकार, तय समय में काम पूरा करने के निर्देश; बोले—सरकारी परियोजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी
धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा जिले के एकदिवसीय दौरे के दौरान सरकारी परियोजनाओं के निर्माण कार्य में देरी को लेकर अधिकारियों के प्रति कड़ा रुख अपनाया। धर्मशाला के सकोह में 33.78 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इनडोर आइस स्केटिंग रिंक एवं रोलर स्केटिंग रिंक के निर्माण में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर मुख्यमंत्री अधिकारियों पर भड़क गए। उन्होंने सहायक अभियंता, अधिशाषी अभियंता और प्रोजेक्ट डायरेक्टर से सवाल किया कि पिछले वर्ष टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद काम में तेजी क्यों नहीं आई।
अधिकारियों को फटकार लगाते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “काम करना है ढंग से, नहीं करना तो नौकरी छोड़ दो…अगर ऐसी स्पीड से काम करना है तो सस्पेंड कर दूंगा।” इस दौरान अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री की बातचीत का वीडियो भी प्रसारित हुआ। पर्यटन निगम के अध्यक्ष एवं नगरोटा बगवां के विधायक आरएस बाली ने भी हस्तक्षेप करते हुए परियोजना में हो रही देरी का मुद्दा मुख्यमंत्री के सामने उठाया।
मुख्यमंत्री सकोह में प्रस्तावित खेल परियोजना की आधारशिला रखने पहुंचे थे। लेकिन निर्माण से संबंधित ड्राइंग सहित अन्य जरूरी कार्य पूरे नहीं होने की जानकारी सामने आने पर वह नाराज नजर आए। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक कहा कि सरकारी परियोजनाओं को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखा जा सकता। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य को गति देना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।
टेंडर के बाद भी काम में तेजी नहीं, अधिकारियों से जवाब तलब
धर्मशाला के सकोह में बनने वाला इनडोर आइस स्केटिंग रिंक एवं रोलर स्केटिंग रिंक क्षेत्र में खेल सुविधाओं के विस्तार से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजना है। इस पर 33.78 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। मुख्यमंत्री ने जब परियोजना की प्रगति की जानकारी ली तो काम की गति और जरूरी तैयारियों को लेकर सवाल उठाए।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों से पूछा कि पिछले वर्ष टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद परियोजना में अपेक्षित तेजी क्यों नहीं आई। निर्माण कार्य के लिए जरूरी ड्राइंग और अन्य प्रक्रियाओं में देरी पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। मुख्यमंत्री का कहना था कि परियोजनाओं को शुरू करने से पहले जरूरी तैयारियां पूरी होनी चाहिए, ताकि आधारशिला रखने के बाद काम में अनावश्यक विलंब न हो।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए और परियोजना को तय समयसीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने गुणवत्ता के मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं करने को भी कहा। उनके अनुसार, काम तेजी से होना चाहिए, लेकिन जल्दबाजी में निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
इस घटना के बाद परियोजना से जुड़े अधिकारियों के सामने निर्माण की गति बढ़ाने और काम को निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा करने की चुनौती है। हालांकि, परियोजना की अंतिम समयसीमा और निर्माण के अलग-अलग चरणों की विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
‘सरकारी परियोजनाओं में देरी बर्दाश्त नहीं’
मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने स्पष्ट किया कि सरकारी परियोजनाओं में अनावश्यक देरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उनका कहना था कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी यदि निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ता तो संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
सरकारी परियोजनाओं में समय पर काम पूरा होना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इन पर सार्वजनिक धन खर्च किया जाता है और इनका उद्देश्य लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना होता है। निर्माण में देरी होने से परियोजना का लाभ मिलने में भी विलंब होता है। ऐसे में अधिकारियों को काम की प्रगति पर नियमित नजर रखने और सामने आने वाली बाधाओं का समय पर समाधान करने की जरूरत होती है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह संदेश दिया कि केवल औपचारिकताएं पूरी करना पर्याप्त नहीं है। परियोजना के प्रत्येक चरण में काम की वास्तविक प्रगति दिखनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से काम रुकता है तो उसका समाधान निकालना भी संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।
सकोह की परियोजना के संदर्भ में मुख्यमंत्री की नाराजगी इसी बात को लेकर थी कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी निर्माण कार्य आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक तैयारियों में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई दी। उन्होंने अधिकारियों को कार्यप्रणाली में सुधार करने और तय समयसीमा के अनुसार काम पूरा करने के निर्देश दिए।
पहले बजट और तैयारी, फिर शिलान्यास पर जोर
मुख्यमंत्री ने इस दौरान सरकारी परियोजनाओं के शिलान्यास को लेकर अपनी नीति भी दोहराई। उन्होंने कहा कि वह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उन्हीं परियोजनाओं का शिलान्यास किया जाएगा, जिनके लिए बजट का प्रावधान हो और जिनका काम आधे तक पहुंच चुका हो।
मुख्यमंत्री के इस रुख का उद्देश्य परियोजनाओं की घोषणा और वास्तविक निर्माण के बीच अंतर को कम करना है। कई बार परियोजनाओं की आधारशिला रखे जाने के बाद भी अलग-अलग प्रक्रियाओं, वित्तीय व्यवस्था या निर्माण संबंधी तैयारियों के कारण काम आगे बढ़ने में समय लगता है। ऐसे में सरकार का जोर इस बात पर है कि परियोजनाओं की तैयारी और वित्तीय प्रावधानों को प्राथमिकता दी जाए।
सुक्खू ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य केवल आधारशिला रखना नहीं है, बल्कि निर्माण कार्य को आगे बढ़ाकर परियोजनाओं को पूरा करना और जनता को उनका लाभ देना है। इस दृष्टिकोण के तहत विभागों को कार्य की प्रगति, निर्माण की गुणवत्ता और समयसीमा पर ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
सकोह में आइस स्केटिंग रिंक एवं रोलर स्केटिंग रिंक का मामला भी इसी संदर्भ में सामने आया। मुख्यमंत्री ने आधारशिला रखने के अवसर पर ही अधिकारियों से काम की गति को लेकर जवाब मांगा और आगे देरी नहीं होने देने की हिदायत दी।
खेल सुविधाओं के विस्तार से जुड़ेगी परियोजना
धर्मशाला के सकोह में 33.78 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला इनडोर आइस स्केटिंग रिंक एवं रोलर स्केटिंग रिंक खेल सुविधाओं के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके माध्यम से स्केटिंग से जुड़ी गतिविधियों के लिए आधुनिक सुविधा विकसित करने की योजना है।
इनडोर खेल सुविधाओं का महत्व इसलिए भी है कि इनके माध्यम से खिलाड़ियों को मौसम की परिस्थितियों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होने वाला प्रशिक्षण और अभ्यास का स्थान उपलब्ध कराया जा सकता है। स्केटिंग जैसी गतिविधियों में उपयुक्त सतह, सुरक्षित वातावरण और निर्धारित तकनीकी मानकों का विशेष महत्व होता है।
परियोजना पूरी होने के बाद क्षेत्र में स्केटिंग से जुड़ी खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं बनेंगी। हालांकि, इसके वास्तविक लाभ निर्माण पूरा होने, सुविधाओं के संचालन और खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध कराई जाने वाली व्यवस्थाओं पर निर्भर करेंगे।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि परियोजना के निर्माण में तेजी लाने के साथ-साथ गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि काम को केवल जल्द पूरा करने के लिए निर्माण मानकों से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
आरएस बाली ने भी उठाया देरी का मामला
परियोजना की प्रगति को लेकर मुख्यमंत्री की अधिकारियों से बातचीत के दौरान पर्यटन निगम के अध्यक्ष और नगरोटा बगवां के विधायक आरएस बाली ने भी हस्तक्षेप किया। उन्होंने निर्माण कार्य में हो रही देरी का मुद्दा मुख्यमंत्री के समक्ष उठाया।
इस दौरान अधिकारियों से परियोजना की स्थिति और अब तक हुई प्रगति को लेकर सवाल किए गए। मुख्यमंत्री की नाराजगी का केंद्र यह था कि पिछले वर्ष टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद काम में अपेक्षित तेजी क्यों नहीं आई और जरूरी तकनीकी तैयारियां समय पर क्यों पूरी नहीं हुईं।
अधिकारियों को दिए गए निर्देशों के बाद अब परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए कार्य में तेजी लाने और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर ध्यान देना होगा। सरकारी परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन को लेकर मुख्यमंत्री की सख्ती से विभागीय स्तर पर जवाबदेही का संदेश भी गया है।
9.82 करोड़ की सीवरेज और सेप्टेज सुविधा का लोकार्पण
अपने कांगड़ा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने केवल खेल परियोजना की आधारशिला ही नहीं रखी, बल्कि 982 लाख रुपये की लागत से निर्मित अत्याधुनिक सीवरेज एवं सेप्टेज प्रबंधन सुविधा का लोकार्पण भी किया। 982 लाख रुपये की राशि 9.82 करोड़ रुपये के बराबर है।
सीवरेज और सेप्टेज प्रबंधन शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता तथा अपशिष्ट के उचित निपटान से जुड़ा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा है। ऐसी सुविधाओं का उद्देश्य गंदे पानी और सेप्टेज के प्रबंधन को बेहतर बनाना तथा स्वच्छता व्यवस्था को अधिक प्रभावी करना होता है।
इस सुविधा के लोकार्पण के साथ मुख्यमंत्री के दौरे में एक तरफ शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजना को जनता के लिए समर्पित किया गया, वहीं दूसरी तरफ सकोह की खेल परियोजना के निर्माण में हो रही देरी पर अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया गया।
निर्माण की गति और गुणवत्ता पर रहेगी नजर
सकोह में इनडोर आइस स्केटिंग रिंक एवं रोलर स्केटिंग रिंक की आधारशिला रखने के साथ ही मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के सामने स्पष्ट लक्ष्य रखा कि परियोजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। इसके लिए जरूरी तकनीकी तैयारियों और निर्माण संबंधी प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाना होगा।
मुख्यमंत्री की नाराजगी से यह स्पष्ट हुआ कि सरकार अब परियोजनाओं की प्रगति को केवल औपचारिक घोषणाओं के आधार पर नहीं, बल्कि वास्तविक काम के आधार पर देखने पर जोर दे रही है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगना इसी दिशा में उठाया गया कदम है।
अब संबंधित विभाग के सामने चुनौती है कि निर्माण कार्य को गति देते हुए तकनीकी मानकों और गुणवत्ता को बनाए रखा जाए। परियोजना का समय पर पूरा होना न केवल सरकारी कार्यप्रणाली की जवाबदेही से जुड़ा है, बल्कि इससे क्षेत्र के लोगों और खिलाड़ियों को प्रस्तावित सुविधा का लाभ मिलने का रास्ता भी साफ होगा।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी देकर स्पष्ट कर दिया कि सरकारी परियोजनाओं में लापरवाही और अनावश्यक देरी को लेकर सरकार का रुख सख्त है। सरकार की प्राथमिकता आधारशिला रखने से आगे बढ़कर योजनाओं को धरातल पर उतारने और जनता को समय पर सुविधाएं उपलब्ध कराने की है।




