हिमाचल में वोटर लिस्ट के मुद्दे पर भाजपा को घेरेगी कांग्रेस, 12 जिलों में अभियान की निगरानी के लिए तीन पर्यवेक्षक नियुक्त

हिमाचल में वोटर लिस्ट के मुद्दे पर भाजपा को घेरेगी कांग्रेस, 12 जिलों में अभियान की निगरानी के लिए तीन पर्यवेक्षक नियुक्त

‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक चलेगा, गांवों में चौपाल और जनसंवाद के जरिए मतदाताओं को करेगी जागरूक; बूथ स्तर पर नामों के सत्यापन पर रहेगा जोर

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी के आरोपों को लेकर कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ राजनीतिक अभियान तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान को प्रदेश के गांव-गांव तक पहुंचाने और इसकी निगरानी के लिए तीन वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक नियुक्त किया है। इनमें हरीश मीणा, राव दान सिंह और कमल कांत शर्मा शामिल हैं। तीनों नेताओं को प्रदेश के 12 जिलों में अभियान की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

कांग्रेस का लक्ष्य मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को राजनीतिक मुद्दा बनाने के साथ आम लोगों को मतदान के अधिकार के प्रति जागरूक करना है। पार्टी इस अभियान को केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित रखने के बजाय बूथ स्तर तक ले जाने की तैयारी कर रही है। इसके तहत कार्यकर्ता घर-घर संपर्क करेंगे, गांवों में चौपाल और जनसंवाद बैठकें आयोजित करेंगे तथा लोगों को अपनी मतदाता सूची की जांच करने के लिए प्रेरित करेंगे।

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज होने और मतदान का अधिकार सुरक्षित रहने के प्रति जागरूकता लोकतांत्रिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसी आधार पर कांग्रेस संगठन को सक्रिय करते हुए अभियान को व्यापक स्तर पर चलाना चाहती है। तीनों पर्यवेक्षकों की नियुक्ति को प्रदेश संगठन के साथ समन्वय मजबूत करने और अभियान की नियमित निगरानी से जोड़कर देखा जा रहा है।

तीन वरिष्ठ नेताओं को सौंपी गई जिलों की जिम्मेदारी

कांग्रेस ने अभियान को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने के लिए हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों को तीन पर्यवेक्षकों के बीच बांटा है। प्रत्येक पर्यवेक्षक संबंधित जिलों में पार्टी पदाधिकारियों, जिला इकाइयों और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल स्थापित करेगा।

हरीश मीणा को चंबा, कांगड़ा, हमीरपुर और ऊना जिलों का पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। इन जिलों में अभियान की गतिविधियों को आगे बढ़ाने, स्थानीय संगठन के साथ बैठकें करने और मतदाताओं तक पार्टी का संदेश पहुंचाने की जिम्मेदारी उनके पास रहेगी।

कमल कांत शर्मा को बिलासपुर, मंडी, कुल्लू, सोलन और लाहुल-स्पीति जिलों में अभियान की निगरानी सौंपी गई है। उन्हें इन क्षेत्रों में संगठनात्मक समन्वय के साथ जनसंपर्क कार्यक्रमों को प्रभावी बनाने पर काम करना होगा।

वहीं, राव दान सिंह किन्नौर, शिमला ग्रामीण, शिमला शहरी और सिरमौर जिलों में अभियान को आगे बढ़ाएंगे। इन क्षेत्रों में जिला इकाइयों और स्थानीय नेताओं के साथ मिलकर कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

तीनों पर्यवेक्षक इसी सप्ताह अपनी जिम्मेदारी संभालकर संबंधित जिला संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करेंगे। कांग्रेस की कोशिश है कि अभियान की शुरुआत से ही सभी जिलों में गतिविधियां निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चलें और मतदाता सत्यापन तथा जनजागरूकता के प्रयासों में कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो।

25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक चलेगा अभियान

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक चलाया जाएगा। लगभग एक महीने के इस कार्यक्रम में मतदाता सूचियों की जांच, बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता और ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंवाद को विशेष महत्व दिया जाएगा।

अभियान के तहत पार्टी का जोर इस बात पर रहेगा कि मतदाता समय रहते अपनी प्रविष्टियों की जांच करें। यदि किसी मतदाता को अपना नाम सूची में नहीं मिलता या उसमें किसी प्रकार की त्रुटि दिखाई देती है, तो उसे संबंधित निर्वाचन प्रक्रिया के तहत उचित कदम उठाने की जानकारी दी जाए।

कांग्रेस कार्यकर्ता पर्चे बांटकर लोगों को अभियान के उद्देश्य के बारे में बताएंगे। गांवों में बैठकें आयोजित कर मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर चर्चा की जाएगी। पार्टी की योजना है कि स्थानीय स्तर पर लोगों को यह समझाया जाए कि मतदाता सूची में नाम दर्ज होना और उसका सही होना मतदान के अधिकार के इस्तेमाल के लिए आवश्यक है।

अभियान के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं को लोगों के सवाल सुनने और मतदाता सूची से जुड़ी समस्याओं को सामने लाने के लिए भी प्रेरित किया जाएगा। कांग्रेस इन गतिविधियों के जरिए गांवों और शहरी क्षेत्रों में संगठन की पहुंच बढ़ाने का प्रयास करेगी।

चार से 10 नवंबर तक बूथ स्तर पर होगा सत्यापन

अभियान के कार्यक्रम के अनुसार, चार से 10 नवंबर के बीच बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) और स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं के माध्यम से मतदाता सूची के सत्यापन पर विशेष जोर दिया जाएगा।

बूथ स्तर पर मतदाता सूची की जांच चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कांग्रेस इस अवधि में अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखकर यह सुनिश्चित करना चाहती है कि वे मतदाताओं को सूची में अपना नाम जांचने और आवश्यक होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत सुधार कराने के बारे में जागरूक कर सकें।

पार्टी की रणनीति के अनुसार, स्थानीय कार्यकर्ता अपने क्षेत्रों में मतदाताओं से संपर्क करेंगे और उन्हें सूची से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के तरीकों के बारे में बताएंगे। यदि किसी व्यक्ति को नाम दर्ज होने, हटने या विवरण में त्रुटि को लेकर संदेह है, तो उसे निर्वाचन अधिकारियों के माध्यम से स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

कांग्रेस इस कार्यक्रम को अपने राजनीतिक अभियान के साथ-साथ मतदाता जागरूकता के प्रयास के रूप में भी आगे बढ़ाना चाहती है। हालांकि, मतदाता सूची में किसी गड़बड़ी की पुष्टि संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड और निर्वाचन प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।

12 से 30 नवंबर तक गांवों में जनसंवाद बैठकें

कांग्रेस ने अभियान के अगले चरण में 12 से 30 नवंबर तक गांवों में जनसंवाद बैठकें आयोजित करने की योजना बनाई है। इन बैठकों के माध्यम से पार्टी मतदाताओं से सीधे संवाद करेगी और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर चर्चा को व्यापक बनाने का प्रयास करेगी।

जनसंवाद कार्यक्रमों में स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर रहेगा। पार्टी का उद्देश्य है कि लोग अपनी मतदाता सूची की स्थिति को लेकर जागरूक हों और किसी भी समस्या की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया का उपयोग कर सकें।

गांवों में चौपाल बैठकों के जरिए अभियान को स्थानीय मुद्दों से जोड़ने की रणनीति भी अपनाई जाएगी। कांग्रेस कार्यकर्ता लोगों को मतदान के महत्व, मतदाता सूची की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया में भागीदारी के बारे में जानकारी देंगे।

इन बैठकों के जरिए पार्टी को स्थानीय स्तर पर लोगों की प्रतिक्रिया जानने का अवसर भी मिलेगा। इसके साथ ही संगठन की सक्रियता और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

जिला मुख्यालयों पर होंगी संयुक्त प्रेस वार्ताएं

अभियान के दौरान जिला मुख्यालयों में कांग्रेस नेताओं और जिला अध्यक्षों की संयुक्त प्रेस वार्ताएं भी आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों के माध्यम से पार्टी अपने आरोपों, अभियान के उद्देश्यों और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाएगी।

प्रेस वार्ताओं में स्थानीय स्तर पर अभियान की प्रगति और मतदाता जागरूकता से संबंधित गतिविधियों की जानकारी साझा की जा सकती है। कांग्रेस की कोशिश रहेगी कि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक और सार्वजनिक चर्चा को तेज किया जाए।

पार्टी इस अभियान को भाजपा के खिलाफ राजनीतिक घेराबंदी के तौर पर भी आगे बढ़ा रही है। कांग्रेस का आरोप है कि मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित रिकॉर्ड और निर्वाचन अधिकारियों की जांच से ही स्पष्ट होगी।

दिल्ली की रैली को भी अभियान से जोड़ने की तैयारी

कांग्रेस एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित इंडिया गठबंधन की राष्ट्रीय रैली को भी इस अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है। पार्टी इस रैली में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रयास करेगी।

कांग्रेस नेतृत्व इस आयोजन को मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के अवसर के रूप में देख रहा है। पार्टी की योजना है कि हिमाचल प्रदेश से भी कार्यकर्ता और समर्थक इसमें भाग लें, ताकि अभियान का संदेश प्रदेश से बाहर भी पहुंचे।

राष्ट्रीय रैली के माध्यम से कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मतदाता सूची की पारदर्शिता, चुनावी प्रक्रिया और मतदान के अधिकार जैसे विषयों को व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाने का प्रयास कर सकते हैं।

हिमाचल में चलने वाला अभियान और दिल्ली की प्रस्तावित रैली मिलकर कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत पार्टी स्थानीय संगठन को सक्रिय करने के साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे को प्रमुखता देना चाहती है।

हिमाचल के छह नेता दूसरे राज्यों में संभालेंगे जिम्मेदारी

कांग्रेस ने केवल हिमाचल प्रदेश में ही अभियान को मजबूत करने की तैयारी नहीं की है, बल्कि प्रदेश के नेताओं को दूसरे राज्यों में भी जिम्मेदारी दी गई है। कुलदीप सिंह राठौर, केवल सिंह पठानिया, आरएस बाली, मलेंद्र राजन, मनमोहन कटोच और दीपक राठौर को अन्य राज्यों में अभियान के लिए पर्यवेक्षक बनाया गया है।

इन नेताओं को सौंपे गए दायित्वों के माध्यम से पार्टी दूसरे राज्यों में भी संगठनात्मक गतिविधियों और मतदाता जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने में सहयोग लेगी। इससे हिमाचल कांग्रेस के नेताओं की भूमिका प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी बढ़ेगी।

दूसरे राज्यों में जिम्मेदारी मिलने से पार्टी के संगठनात्मक नेटवर्क और अनुभव का उपयोग व्यापक स्तर पर किया जा सकेगा। वहीं, हिमाचल में नियुक्त तीन पर्यवेक्षकों के सामने राज्य के सभी 12 जिलों में अभियान को निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रभावी ढंग से चलाने की चुनौती होगी।

बूथ स्तर पर संगठन की ताकत परखेगी कांग्रेस

‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ अभियान कांग्रेस के लिए केवल मतदाता सूची का मुद्दा उठाने तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए पार्टी बूथ स्तर पर अपने संगठन की सक्रियता, कार्यकर्ताओं के समन्वय और जनसंपर्क की क्षमता को भी परख सकेगी।

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती होगी कि अभियान के कार्यक्रम कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों और शहरी क्षेत्रों में वास्तविक भागीदारी दिखाई दे। तीन पर्यवेक्षकों की नियुक्ति इसी उद्देश्य से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

आने वाले दिनों में जिला स्तर की बैठकों, बूथ एजेंटों की सक्रियता और जनसंवाद कार्यक्रमों से अभियान की दिशा स्पष्ट होगी। यदि कांग्रेस अपने निर्धारित कार्यक्रम को प्रभावी तरीके से लागू कर पाती है, तो मतदाता सूची और मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर सार्वजनिक चर्चा बढ़ सकती है।

फिलहाल, कांग्रेस ने हिमाचल में भाजपा के खिलाफ राजनीतिक अभियान को तेज करने के लिए संगठनात्मक तैयारियां शुरू कर दी हैं। 25 अक्टूबर से 25 नवंबर तक चलने वाले इस अभियान में मतदाता सत्यापन, गांवों में जनसंवाद, चौपाल बैठकें और प्रेस वार्ताएं प्रमुख गतिविधियां रहेंगी। अब यह देखना होगा कि पार्टी इन कार्यक्रमों के माध्यम से कितनी प्रभावी ढंग से मतदाताओं तक पहुंच बनाती है और मतदाता सूची से जुड़े अपने आरोपों को किस तरह सार्वजनिक विमर्श में आगे बढ़ाती है।