जर्जर सड़कें, बिजली कटौती और फायर एनओसी में परेशानी को बताया औद्योगिक विकास में बाधा, मुख्यमंत्री पर उद्योगपतियों से संवाद नहीं करने का लगाया आरोप
शिमला। हिमाचल प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) की समस्याओं को लेकर भाजपा के वरिष्ठ प्रवक्ता राजेंद्र राणा ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के नकारात्मक रवैये के कारण औद्योगिक क्षेत्र में निवेशकों की चिंता बढ़ रही है और उद्योगपतियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राणा ने कहा कि बद्दी केवल एक औद्योगिक केंद्र नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के हजारों परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। इसके बावजूद यहां बुनियादी सुविधाओं और औद्योगिक जरूरतों से जुड़े मुद्दों का प्रभावी समाधान नहीं हो पा रहा है।
उन्होंने कहा कि बीबीएन क्षेत्र में दवा निर्माण सहित सैकड़ों उद्योग स्थापित हैं, जो प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में सड़कों की खराब स्थिति, बिजली की कथित अनियमित आपूर्ति और अग्निशमन अनापत्ति प्रमाणपत्र (फायर एनओसी) जैसी प्रक्रियाओं में आ रही दिक्कतें उद्योगों के संचालन को प्रभावित कर सकती हैं। राणा ने दावा किया कि इन समस्याओं के कारण उद्योगपति परेशान हैं और निवेशक प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
भाजपा प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में उद्योगपतियों के साथ संवाद की कमी रही है और नए निवेश को आकर्षित करने के लिए स्पष्ट दृष्टिकोण दिखाई नहीं दे रहा है।
जर्जर सड़कों से उद्योगों और कारोबार पर असर
राजेंद्र राणा ने बीबीएन क्षेत्र की सड़कों की खराब हालत को प्रमुख समस्या बताते हुए कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में आवागमन प्रभावित होने से लोगों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है। बद्दी और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयां होने के कारण यहां रोजाना कर्मचारियों, मालवाहक वाहनों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ा यातायात रहता है।
उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में सड़कें केवल आवागमन का साधन नहीं होतीं, बल्कि कच्चे माल की आपूर्ति, तैयार उत्पादों की ढुलाई और कर्मचारियों की आवाजाही के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। यदि सड़कों की हालत खराब हो और यातायात व्यवस्था बाधित रहे, तो इससे उद्योगों के दैनिक कामकाज पर असर पड़ सकता है।
राणा ने सरकार से सवाल किया कि प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति सुधारने के लिए पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए जा रहे हैं। उनके अनुसार, औद्योगिक विकास को गति देने के लिए केवल निवेश प्रस्ताव आमंत्रित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उद्योगों को सुचारु रूप से चलाने के लिए बेहतर सड़कें और प्रभावी यातायात व्यवस्था भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बीबीएन की समस्याओं का समाधान नहीं होने से उद्योगपतियों के सामने अतिरिक्त चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। सरकार को इस क्षेत्र की जरूरतों को समझते हुए सड़क सुधार और यातायात प्रबंधन के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करनी चाहिए।
बिजली कटौती से उद्योगपतियों की परेशानी का आरोप
भाजपा प्रवक्ता ने औद्योगिक क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि बद्दी में दिन के दौरान कई-कई घंटे बिजली कटौती हो रही है और सप्ताह में एक दिन पूर्ण शटडाउन किया जा रहा है। उनके अनुसार, इससे उद्योगों के नियमित संचालन में बाधा आती है और उत्पादन संबंधी गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका रहती है।
राणा ने कहा कि उद्योगों को लगातार बिजली उपलब्ध होना औद्योगिक विकास की बुनियादी जरूरत है। विशेष रूप से दवा निर्माण और अन्य उत्पादन इकाइयों के लिए बिजली आपूर्ति में व्यवधान से कामकाज की योजना प्रभावित हो सकती है। ऐसे में बिजली कटौती की अवधि, उसके कारण और आपूर्ति बहाल करने की व्यवस्था को लेकर उद्योगपतियों को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश में बिजली उत्पादन की क्षमता होने के बावजूद औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही, जबकि सरकार बाहर बिजली बेच रही है। यह आरोप लगाते हुए उन्होंने सवाल किया कि जब राज्य में बिजली उपलब्ध है, तो उद्योगों को निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई जा रही।
हालांकि, बिजली की उपलब्धता, बाहरी राज्यों को आपूर्ति और बीबीएन में कटौती के कारणों को लेकर संबंधित विभागों के आंकड़ों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। राणा ने सरकार से मांग की कि औद्योगिक क्षेत्र की बिजली संबंधी शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए और उद्योगपतियों को राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
फायर एनओसी की प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
राजेंद्र राणा ने अग्निशमन अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी फायर एनओसी प्राप्त करने की प्रक्रिया को लेकर भी उद्योगपतियों की परेशानियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने के लिए भी उद्योगपतियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि उद्योगों के लिए सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन करना जरूरी है, लेकिन संबंधित प्रक्रियाएं पारदर्शी, समयबद्ध और सुविधाजनक भी होनी चाहिए। यदि प्रमाणपत्र जारी करने में अनावश्यक देरी होती है या आवेदकों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तो इससे उद्योगों के संचालन और विस्तार की योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
राणा ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि फायर एनओसी सहित अन्य जरूरी अनुमतियों की प्रक्रिया स्पष्ट हो और निर्धारित मानकों को पूरा करने वाले उद्योगों को समय पर प्रमाणपत्र उपलब्ध करवाए जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि बीबीएन में पहले से स्थापित उद्योगों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें प्रशासनिक दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है।
उनके अनुसार, औद्योगिक विकास के लिए ऐसी व्यवस्था आवश्यक है जिसमें सुरक्षा मानकों से समझौता किए बिना प्रक्रियाओं को सरल बनाया जा सके। इससे उद्योगपतियों का भरोसा बढ़ेगा और नए निवेश के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार होगा।
मुख्यमंत्री से उद्योगपतियों की बैठक नहीं होने का आरोप
राजेंद्र राणा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे पहले भाजपा और कांग्रेस, दोनों दलों की सरकारों के दौरान मुख्यमंत्री वर्ष में एक या दो बार बीबीएन का दौरा करते थे। उनके अनुसार, इन दौरों के दौरान औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें होती थीं और उनकी समस्याओं को सुना जाता था।
राणा ने आरोप लगाया कि वर्तमान मुख्यमंत्री के कार्यकाल में करीब चार वर्ष बीत जाने के बावजूद उद्योगपतियों और औद्योगिक संगठनों के साथ ऐसी बैठक करना उचित नहीं समझा गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के इतने महत्वपूर्ण औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं को समझने और उनका समाधान निकालने के लिए मुख्यमंत्री तथा संबंधित विभागों के अधिकारियों को उद्योग प्रतिनिधियों के साथ नियमित संवाद करना चाहिए।
उनका कहना है कि उद्योगों से जुड़ी समस्याओं का समाधान केवल सरकारी कार्यालयों में बैठकर नहीं किया जा सकता। इसके लिए औद्योगिक संगठनों से बातचीत करना, मौके पर मौजूद परिस्थितियों को समझना और संबंधित विभागों को जवाबदेह बनाना जरूरी है।
राणा ने आरोप लगाया कि उद्योगपतियों के साथ संवाद की कमी से उनकी समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बीबीएन के औद्योगिक संगठनों के साथ बैठक कर सड़क, बिजली, प्रशासनिक मंजूरियों और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाए।
नए निवेश को लेकर सरकार की नीति पर सवाल
भाजपा प्रवक्ता ने प्रदेश में नए निवेश को आकर्षित करने की रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास के लिए स्पष्ट दृष्टिकोण, बेहतर बुनियादी ढांचा और निवेशकों के अनुकूल नीतियां आवश्यक हैं। उनके अनुसार, पड़ोसी राज्य उद्योगों को आकर्षित करने के लिए नई नीतियां और सुविधाएं पेश कर रहे हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश में निवेश को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त सक्रियता दिखाई नहीं दे रही।
राणा ने दावा किया कि यदि उद्योगों को सड़क, बिजली और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, तो निवेशकों का भरोसा कमजोर हो सकता है। ऐसे में सरकार को मौजूदा उद्योगों की समस्याएं हल करने के साथ नए निवेशकों के लिए भी अनुकूल माहौल बनाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बीबीएन जैसे औद्योगिक क्षेत्र में पहले से मौजूद उद्योगों को सुविधाएं उपलब्ध करवाना और उनके विस्तार में मदद करना भी आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उद्योगों के सुचारु संचालन से रोजगार के अवसर बने रहते हैं और स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिलता है।
राणा के अनुसार, सरकार को निवेश संबंधी नीति को केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि औद्योगिक इकाइयों की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखकर योजनाएं लागू करनी चाहिए।
कर्ज और औद्योगिक विकास को लेकर भी सरकार पर निशाना
राजेंद्र राणा ने हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि राज्य पर हजारों करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सरकार को आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने औद्योगिक क्षेत्र में कथित तौर पर चहेते लोगों को लाभ पहुंचाने की नीति अपनाए जाने का आरोप भी लगाया। हालांकि, इस आरोप के समर्थन में उन्होंने कोई विशिष्ट मामला या आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया। इन आरोपों पर सरकार का पक्ष सामने आने पर ही संबंधित नीतियों और उनके क्रियान्वयन का समग्र आकलन किया जा सकता है।
राणा ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और युवाओं को रोजगार उपलब्ध करवाने में अहम भूमिका निभाता है। इसलिए सरकार को उद्योगपतियों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करना चाहिए। उनके अनुसार, यदि मौजूदा उद्योगों को ही बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होंगी, तो नए निवेश को आकर्षित करने की कोशिशों पर भी सवाल उठेंगे।
पंचायत चुनावों का हवाला देकर सरकार को दी चेतावनी
राजेंद्र राणा ने अपने बयान में पंचायत चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि जनता ने अपने फैसले के माध्यम से सरकार को संकेत दे दिया है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले विधानसभा चुनाव में भी जनता अपना निर्णय सुनाएगी।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि सरकार को जनता और उद्योग जगत की अपेक्षाओं को गंभीरता से लेना चाहिए। बीबीएन जैसे औद्योगिक क्षेत्र में सड़क, बिजली और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना जरूरी है, क्योंकि इनका प्रभाव केवल उद्योगपतियों पर ही नहीं, बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों और उनसे जुड़े परिवारों पर भी पड़ता है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि बीबीएन की समस्याओं को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रखने के बजाय उनके समाधान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। साथ ही, औद्योगिक संगठनों के साथ नियमित संवाद स्थापित कर उनकी शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
कुल मिलाकर, बीबीएन की औद्योगिक व्यवस्था को लेकर राजेंद्र राणा के आरोपों ने प्रदेश में निवेश, बुनियादी सुविधाओं और उद्योगपतियों के साथ सरकारी संवाद जैसे मुद्दों को फिर चर्चा में ला दिया है। अब इन आरोपों पर राज्य सरकार और संबंधित विभागों की प्रतिक्रिया के साथ यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि औद्योगिक क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।




