स्वीडन की तर्ज पर बदलेंगे हरियाणा के शहर, भूमिगत कचरा प्रबंधन और वर्षा जल संरक्षण पर जोर

स्वीडन की तर्ज पर बदलेंगे हरियाणा के शहर, भूमिगत कचरा प्रबंधन और वर्षा जल संरक्षण पर जोर

शहरी विकास के लिए विदेशी मॉडल का अध्ययन कर लौटा अधिकारियों का दल; पार्कों में हरियाली बढ़ाने, कचरे से नए उत्पाद बनाने और जल संरक्षण की आधुनिक व्यवस्थाएं अपनाने की तैयारी

हरियाणा के शहरों को स्वच्छ, आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए प्रदेश सरकार शहरी विकास के क्षेत्र में स्वीडन में अपनाई जा रही व्यवस्थाओं का अध्ययन कर उन्हें स्थानीय जरूरतों के अनुसार लागू करने की संभावनाएं तलाश रही है। सरकार का जोर केवल शहरों की सुंदरता बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कचरा प्रबंधन, वर्षा जल संरक्षण, अपशिष्ट जल के बेहतर उपयोग, पार्कों के विकास और संसाधनों के पुनर्चक्रण को भी शहरी योजनाओं का हिस्सा बनाने पर है। इसके लिए शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों का एक दल स्वीडन का दौरा कर वहां की आधुनिक तकनीकों और व्यवस्थाओं की जानकारी लेकर लौटा है।

अधिकारियों ने स्टॉकहोम के रॉयल सीपोर्ट और हम्मारबी शोस्टाड जैसे शहरी क्षेत्रों में विकसित व्यवस्थाओं का अध्ययन किया। दौरे के दौरान कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में एकत्र करने, भूमिगत संग्रहण केंद्रों तक पहुंचाने, अनुपयोगी वस्तुओं से नए उत्पाद तैयार करने और बारिश के पानी को सुरक्षित रखने के तरीकों की जानकारी हासिल की गई। अब विभाग इन व्यवस्थाओं को हरियाणा के शहरों में लागू करने की व्यवहारिकता पर विचार कर रहा है।

कचरा प्रबंधन के लिए अपनाई जाएगी आधुनिक तकनीक

शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय के आयुक्त एवं सचिव अशोक मीणा के अनुसार, यूरोप के कई शहरों में स्वच्छता और हरियाली को शहरी विकास की योजना का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। स्वीडन में कचरे के निस्तारण के लिए ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनसे खुले में कचरा जमा होने और आसपास गंदगी फैलने की समस्या को कम किया जा सकता है।

स्वीडन में घरों से निकलने वाले कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में एकत्र करने की व्यवस्था है। इसके लिए नागरिकों को विशेष कार्ड उपलब्ध कराए जाते हैं। जब कोई व्यक्ति कचरा डालने के लिए निर्धारित केंद्र पर पहुंचता है तो कार्ड स्वाइप करने के बाद संबंधित कूड़ेदान खुल जाता है। व्यक्ति अपनी श्रेणी के अनुसार कचरा उसमें डालता है। इसके बाद कंटेनर एक विशेष व्यवस्था के माध्यम से कचरे को भूमिगत संग्रहण केंद्र तक पहुंचाता है और फिर अपनी निर्धारित जगह पर वापस आ जाता है।

इस प्रणाली का उद्देश्य कचरे को सड़कों और खुले स्थानों पर जमा होने से रोकना तथा संग्रहण की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाना है। हरियाणा के शहरों में भी ऐसी व्यवस्था लागू करने की संभावनाएं देखी जा रही हैं। यदि इसे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अपनाया जाता है तो कचरा संग्रहण के पारंपरिक तरीकों में बदलाव आ सकता है और सफाई व्यवस्था को अधिक तकनीक आधारित बनाया जा सकता है।

कचरे को बोझ नहीं, संसाधन के रूप में देखने की तैयारी

स्वीडन के शहरी मॉडल की एक महत्वपूर्ण विशेषता कचरे का दोबारा उपयोग है। वहां कचरे को केवल नष्ट करने या हटाने की वस्तु नहीं माना जाता, बल्कि उसमें से उपयोगी सामग्री अलग करके नए उत्पाद तैयार करने पर भी ध्यान दिया जाता है। ऐसी वस्तुएं जिनका फिर से इस्तेमाल संभव है, उन्हें अलग श्रेणी में रखा जाता है। इससे कचरे की कुल मात्रा घटाने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने में मदद मिलती है।

अशोक मीणा के अनुसार, हरियाणा में भी इस तरह की तकनीक और व्यवस्था अपनाने की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसका उद्देश्य ऐसी प्रणाली विकसित करना है, जिसमें घरों से निकलने वाले कचरे को शुरुआती स्तर पर ही अलग किया जाए और उपयोगी सामग्री को पुनर्चक्रण के लिए भेजा जा सके।

इस दिशा में नागरिकों की भागीदारी भी महत्वपूर्ण होगी। यदि लोग घरों में ही गीले और सूखे कचरे सहित अलग-अलग श्रेणियों की सामग्री को अलग रखना शुरू करें तो आगे की प्रक्रिया आसान हो सकती है। इसके लिए जागरूकता और व्यवस्थित संग्रहण व्यवस्था की जरूरत होगी। आधुनिक तकनीक के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही कचरा प्रबंधन को प्रभावी बनाया जा सकता है।

पार्कों में भूमिगत टैंक से होगा वर्षा जल का संग्रहण

स्वीडन के शहरी विकास मॉडल में वर्षा जल संरक्षण को भी विशेष महत्व दिया गया है। वहां पार्कों के भीतर बड़े भूमिगत टैंक बनाए जाते हैं, जिनमें बारिश का पानी एकत्र किया जाता है। बाद में इस पानी का जरूरत के अनुसार उपयोग किया जा सकता है। इससे वर्षा जल को सीधे नालों के माध्यम से बाहर बहने देने के बजाय उसे संरक्षित करने का अवसर मिलता है।

हरियाणा के शहरों में भी बारिश के पानी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ऐसी व्यवस्थाओं पर विचार किया जा रहा है। शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल का संग्रहण भूजल संरक्षण और पानी की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में उपयोगी हो सकता है। पार्कों में भूमिगत टैंक बनाने की व्यवस्था अपनाने से हरियाली के रखरखाव और पौधों की सिंचाई के लिए भी पानी उपलब्ध कराया जा सकता है।

इसके साथ ही शहरों में पार्कों के विकास और उनके बीच उचित दूरी बनाए रखने पर भी ध्यान दिया गया है। अधिकारियों के अध्ययन के अनुसार, स्वीडन के कुछ शहरी क्षेत्रों में लगभग हर 200 मीटर पर पार्क की सुविधा उपलब्ध है। इस तरह लोगों को अपने आसपास खुले और हरित स्थान मिलते हैं। हरियाणा में भी शहरी क्षेत्रों में पार्कों की उपलब्धता और हरियाली बढ़ाने के लिए ऐसे मॉडल पर विचार किया जा रहा है।

14 से 17 अक्टूबर तक स्वीडन में रहा अधिकारियों का दल

शहरी विकास की इन व्यवस्थाओं का अध्ययन करने के लिए शहरी स्थानीय निकाय निदेशालय के आयुक्त एवं सचिव अशोक मीणा, निदेशक शरणदीप कौर और मिशन निदेशक शाश्वत सांगवान सहित अधिकारियों के दल ने 14 से 17 अक्टूबर तक स्वीडन का दौरा किया।

इस दौरान अधिकारियों ने स्टॉकहोम के रॉयल सीपोर्ट और हम्मारबी शोस्टाड में विकसित शहरी व्यवस्थाओं को देखा और संबंधित तकनीकों की जानकारी हासिल की। दौरे में अपशिष्ट जल प्रबंधन, कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण, वर्षा जल संग्रहण, शहरी हरियाली के विकास और अनुपयोगी वस्तुओं के पुनः उपयोग जैसे विषयों पर अध्ययन किया गया।

अधिकारियों ने वहां अपनाई जा रही प्रणालियों को समझने के साथ यह भी देखा कि आधुनिक तकनीक की मदद से शहरी सुविधाओं को किस तरह अधिक व्यवस्थित और पर्यावरण के अनुकूल बनाया जा सकता है। दौरे से प्राप्त जानकारी के आधार पर अब हरियाणा के शहरी क्षेत्रों के लिए संभावित योजनाओं पर विचार किया जा रहा है।

स्थानीय जरूरतों के अनुसार लागू होंगे मॉडल

अशोक मीणा ने बताया कि स्वीडन में देखी गई व्यवस्थाओं के आधार पर हरियाणा के शहरों के लिए योजनाएं तैयार करने का विचार है। उन्होंने कहा कि इनका उद्देश्य स्वच्छता व्यवस्था में सुधार, जल संरक्षण को बढ़ावा देना, हरियाली का विस्तार करना और आधुनिक तकनीक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है।

हालांकि, किसी दूसरे देश में सफल रही व्यवस्था को उसी रूप में हरियाणा में लागू करना जरूरी नहीं होगा। यहां के शहरों की आबादी, उपलब्ध भूमि, मौजूदा आधारभूत ढांचे, जलवायु और स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखकर उपयुक्त मॉडल तैयार करना होगा। इसी आधार पर विभाग विभिन्न व्यवस्थाओं की उपयोगिता और उन्हें लागू करने की संभावनाओं का आकलन कर रहा है।

उदाहरण के तौर पर भूमिगत कचरा संग्रहण प्रणाली के लिए विशेष ढांचे और तकनीकी सुविधाओं की जरूरत होगी। इसी तरह वर्षा जल संग्रहण के लिए पार्कों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर उपयुक्त जगह तलाशनी होगी। कचरे के पुनः उपयोग के लिए अलग-अलग श्रेणियों में सामग्री एकत्र करने और उसे प्रसंस्करण केंद्रों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी विकसित करनी होगी।

स्वच्छ और हरित शहरों की दिशा में नई पहल

हरियाणा के तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण और हरियाली का विस्तार महत्वपूर्ण जरूरत बनते जा रहे हैं। आबादी बढ़ने के साथ घरेलू कचरे की मात्रा में भी वृद्धि होती है। वहीं, बारिश के पानी का समुचित संग्रहण नहीं होने से उपलब्ध जल संसाधनों का पूरा उपयोग नहीं हो पाता। ऐसे में आधुनिक तकनीक और बेहतर शहरी नियोजन के माध्यम से इन चुनौतियों से निपटने की जरूरत है।

स्वीडन के मॉडल का अध्ययन इसी दिशा में एक प्रयास है। यदि इन व्यवस्थाओं को हरियाणा की परिस्थितियों के अनुरूप लागू किया जाता है तो शहरों में कचरे के संग्रहण और निस्तारण को अधिक व्यवस्थित बनाने, उपयोगी सामग्री का पुनर्चक्रण करने और वर्षा जल को संरक्षित करने में मदद मिल सकती है।

फिलहाल शहरी स्थानीय निकाय विभाग का ध्यान अध्ययन के आधार पर उपयुक्त व्यवस्थाओं की पहचान करने और उनके क्रियान्वयन की संभावनाओं पर काम करने पर है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि किन शहरों में कौन-सी तकनीक पहले अपनाई जाएगी। सरकार की प्रस्तावित पहल का व्यापक उद्देश्य हरियाणा के शहरी क्षेत्रों को स्वच्छता, जल संरक्षण और हरियाली के मामले में अधिक टिकाऊ बनाना है।