मैहला के पीएम श्री आदर्श स्कूल में मुख्यमंत्री का विद्यार्थियों से सीधा संवाद, 40 बच्चों से पूछे उनके सपने; स्कूल भवन के लिए दो करोड़ देने और बस सेवा बहाल करवाने का दिया भरोसा
चंबा। सफलता के लिए बड़े संसाधनों और अनुकूल परिस्थितियों से ज्यादा मजबूत इरादों की जरूरत होती है। सरकारी स्कूल में टाट पर बैठकर पढ़ाई करने वाला विद्यार्थी भी अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर प्रदेश का मुख्यमंत्री बन सकता है। कभी जिस विद्यार्थी के पास पढ़ाई के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं थीं, आज उसके कंधों पर पूरे हिमाचल प्रदेश की जिम्मेदारी है। यह प्रेरक संदेश मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को पीएम श्री आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मैहला में विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान दिया।
मुख्यमंत्री ने बच्चों के बीच अपने विद्यार्थी जीवन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि जीवन में परिस्थितियां कैसी भी हों, व्यक्ति को अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटना चाहिए। सपने देखने के लिए बड़े घर, सुविधाजनक माहौल या प्रभावशाली पारिवारिक पृष्ठभूमि की जरूरत नहीं होती, बल्कि सबसे जरूरी हौसला और मेहनत करने की इच्छाशक्ति है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी बड़े पदों तक पहुंच सकते हैं और प्रदेश तथा देश की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं।
मुख्यमंत्री का यह संवाद सामान्य औपचारिक कार्यक्रम से अलग रहा। उन्होंने मंच से भाषण देने के बजाय सीधे बच्चों के बीच पहुंचकर उनसे बातचीत की। विद्यार्थियों ने भी बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं, जिज्ञासाएं और भविष्य के सपने उनके सामने रखे। किसी ने स्कूल में कमरों की कमी का मुद्दा उठाया तो किसी ने परिवहन सुविधा बहाल करने की मांग की। कुछ विद्यार्थियों ने परीक्षा के तनाव और मुख्यमंत्री की जिम्मेदारियों को लेकर सवाल पूछे। मुख्यमंत्री ने हर सवाल का सहजता से जवाब दिया और जहां जरूरत महसूस हुई, वहां सुविधाएं उपलब्ध करवाने का भरोसा भी दिया।
इस दौरान बच्चों को मुख्यमंत्री के राजनीतिक सफर और संघर्ष की कहानी जानने का अवसर मिला। वहीं, मुख्यमंत्री को भी विद्यार्थियों की वास्तविक जरूरतों और स्कूल की समस्याओं को सीधे समझने का मौका मिला।
40 विद्यार्थियों के बीच पहुंचे, पूछा- बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?
विद्यालय पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री करीब 40 विद्यार्थियों के बीच पहुंचे। उन्होंने बच्चों से हाथ मिलाया, उनका हालचाल जाना और बातचीत की शुरुआत इस सवाल से की कि वे बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं। बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ अपने सपनों के बारे में बताया।
विद्यार्थियों के जवाब सुनकर मुख्यमंत्री को उनके करियर विकल्पों और भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में जानने का अवसर मिला। करीब 10 बच्चों ने पुलिस अधिकारी बनने की इच्छा जताई, जबकि 15 विद्यार्थियों ने अध्यापक बनने का सपना बताया। 10 बच्चों ने सेना में जाकर देश की सेवा करने की बात कही। इसके अलावा दो विद्यार्थियों ने वकील, एक ने भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी, एक ने कमांडो और एक ने चिकित्सक बनने की इच्छा व्यक्त की।
बच्चों के जवाब सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए पूछा कि क्या कोई नेता भी बनना चाहता है? इस सवाल पर किसी भी विद्यार्थी ने हाथ नहीं उठाया। बच्चों की प्रतिक्रिया पर मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि वह स्वयं भी सरकारी स्कूल में पढ़े हैं और आज मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे हैं। उन्होंने बच्चों को समझाया कि किसी भी पेशे में जाने से पहले लक्ष्य तय करना और उसके लिए लगातार मेहनत करना जरूरी है।
स्कूल की समस्याएं सुनकर दो करोड़ रुपये देने की घोषणा
विद्यार्थियों के साथ बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने केवल उनके सपनों और करियर के बारे में ही जानकारी नहीं ली, बल्कि स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं और विद्यार्थियों को पेश आ रही परेशानियों को भी गंभीरता से सुना।
12वीं कक्षा की छात्रा सुहानी ने विद्यालय में कमरों की कमी का मुद्दा उठाया। उसने मुख्यमंत्री को बताया कि विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में स्कूल में पर्याप्त कक्षाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण पढ़ाई और अन्य शैक्षणिक गतिविधियों में परेशानी होती है।
छात्रा की बात सुनकर मुख्यमंत्री ने अपने विद्यार्थी जीवन को याद किया। उन्होंने बताया कि प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाई के दौरान उन्हें भी कई बार टाट पर बैठना पड़ता था। उस समय स्कूलों में आज जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं, लेकिन उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे।
मुख्यमंत्री ने स्कूल में नए भवन के निर्माण के लिए जगह उपलब्ध होने और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने पर दो करोड़ रुपये देने की घोषणा की। इस घोषणा से विद्यार्थियों और स्कूल प्रबंधन को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिलने की उम्मीद जगी है।
पांचवीं कक्षा के छात्र गोविंद ने स्कूल में प्रतियोगिताओं और अन्य सामूहिक गतिविधियों के आयोजन के लिए बड़े हॉल की आवश्यकता का मुद्दा उठाया। उसने बताया कि स्कूल में ऐसा पर्याप्त स्थान होना चाहिए, जहां विद्यार्थी एक साथ बैठकर कार्यक्रमों और प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले सकें। मुख्यमंत्री ने इस मांग पर भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए स्कूल में बड़ा हॉल बनवाने का भरोसा दिया।
पैदल स्कूल पहुंचने वाले बच्चों की परेशानी पर बस सेवा का भरोसा
11वीं कक्षा के छात्र परम चौहान ने स्कूल आने-जाने में विद्यार्थियों को होने वाली परेशानी मुख्यमंत्री के सामने रखी। उसने बताया कि आसपास के कई विद्यार्थी रोजाना तीन से चार किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचते हैं। पहले विद्यार्थियों के लिए बस सेवा उपलब्ध थी, लेकिन अब यह सुविधा बंद हो गई है। इसके कारण बच्चों को लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है।
विद्यार्थी की बात सुनकर मुख्यमंत्री ने बस सुविधा दोबारा शुरू करवाने का आश्वासन दिया। उन्होंने विद्यार्थियों की इस समस्या को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षा हासिल करने के रास्ते में परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी बाधा नहीं बननी चाहिए।
इस संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि स्कूलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अनुकूल वातावरण मिलना चाहिए, ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ सकें।
परीक्षा का तनाव हो तो कुछ समय पढ़ाई से हटाएं ध्यान
बातचीत के दौरान विद्यार्थियों ने पढ़ाई और व्यक्तिगत जीवन से जुड़े सवाल भी पूछे। 11वीं कक्षा की छात्रा तमत्ना कपूर ने मुख्यमंत्री से परीक्षा के दौरान होने वाले तनाव से निपटने का तरीका पूछा।
मुख्यमंत्री ने छात्रा को सलाह दी कि जब परीक्षा के समय मानसिक दबाव महसूस हो तो कुछ समय के लिए किताबों से नजर हटाकर दोस्तों, सहपाठियों और परिवार के सदस्यों से बातचीत करनी चाहिए। लगातार पढ़ाई करने के बजाय बीच-बीच में थोड़ा समय अपने लिए निकालना भी जरूरी है। हंसने-बोलने और अपनों के साथ समय बिताने से तनाव कम करने में मदद मिलती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल फोन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नहीं करने की सलाह भी दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को अपना समय पढ़ाई, खेलकूद और रचनात्मक गतिविधियों के बीच संतुलित तरीके से बांटना चाहिए। मोबाइल का अनावश्यक इस्तेमाल पढ़ाई और एकाग्रता दोनों को प्रभावित कर सकता है।
पूरे हिमाचल को परिवार मानकर चलना पड़ता है
छठी कक्षा की छात्रा शिवाया ने मुख्यमंत्री से पूछा कि प्रदेश का मुखिया बनने के बाद उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या होती है? इस पर सुक्खू ने कहा कि पूरे हिमाचल प्रदेश को एक परिवार की तरह लेकर चलना पड़ता है और आर्थिक संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश के हर क्षेत्र, हर वर्ग और अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखकर फैसले लेने होते हैं। सरकार को उपलब्ध संसाधनों के भीतर रहकर विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं और लोगों की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। यही जिम्मेदारी इस पद को चुनौतीपूर्ण बनाती है।
मुख्यमंत्री के इस जवाब से बच्चों को शासन व्यवस्था और प्रदेश चलाने की जिम्मेदारियों को समझने का अवसर मिला। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि किसी भी बड़े पद के साथ केवल अधिकार नहीं आते, बल्कि जिम्मेदारियां भी उतनी ही बड़ी होती हैं।
मुख्यमंत्री को भी नहीं मिलती रविवार की छुट्टी
विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान सबसे दिलचस्प सवाल सातवीं कक्षा के छात्र आयुष ने पूछा। उसने मुख्यमंत्री से जानना चाहा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद क्या रविवार को छुट्टी मिलती है?
इस सवाल पर सुक्खू ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ‘मुख्यमंत्री दूसरों को छुट्टी दे सकता है, लेकिन खुद छुट्टी नहीं ले सकता।’ मुख्यमंत्री का यह जवाब सुनकर बच्चे भी मुस्कुरा उठे। उन्होंने सहज अंदाज में बताया कि मुख्यमंत्री की जिम्मेदारियां लगातार चलती रहती हैं। एक दिन विद्यार्थियों के बीच संवाद होता है तो अगले दिन दूसरे बच्चों और आम लोगों की समस्याएं सुननी होती हैं।
उन्होंने कहा कि लोगों की सेवा करते हुए ही उनका अधिकतर समय गुजरता है। मुख्यमंत्री के रूप में हर दिन अलग-अलग विषयों पर निर्णय लेने और लोगों की समस्याओं का समाधान करने की जिम्मेदारी रहती है।
संघर्ष की कहानी से बच्चों को मिला आगे बढ़ने का संदेश
मैहला के विद्यार्थियों के साथ मुख्यमंत्री का संवाद केवल सवाल-जवाब तक सीमित नहीं रहा। इस दौरान उनके जीवन के संघर्ष, सरकारी स्कूल में पढ़ाई के अनुभव और मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने के सफर ने बच्चों को प्रेरित किया।
सुक्खू ने अपने अनुभवों के माध्यम से बताया कि सफलता का रास्ता हमेशा आसान नहीं होता, लेकिन निरंतर प्रयास और आत्मविश्वास से मुश्किल परिस्थितियों को बदला जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं पर भरोसा रखने और किसी भी परिस्थिति में पढ़ाई तथा लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया।
कार्यक्रम में बच्चों को अपनी समस्याएं सीधे प्रदेश के मुखिया तक पहुंचाने का अवसर मिला। स्कूल भवन के लिए दो करोड़ रुपये की घोषणा, बड़े हॉल के निर्माण का भरोसा और बस सेवा दोबारा शुरू करवाने के आश्वासन ने विद्यार्थियों की उम्मीदों को बढ़ाया।
कुल मिलाकर मैहला का यह संवाद विद्यार्थियों के लिए एक यादगार अनुभव बन गया। एक ओर उन्हें स्कूल की सुविधाओं में सुधार की उम्मीद मिली तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री के जीवन से यह सीख मिली कि सफलता किसी खास पृष्ठभूमि की मोहताज नहीं होती। टाट पर बैठकर पढ़ाई करने वाला विद्यार्थी भी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर प्रदेश की सबसे बड़ी जिम्मेदारी संभाल सकता है। मुख्यमंत्री का यही संदेश बच्चों के लिए अपने सपनों को बड़ा देखने और उन्हें पूरा करने के लिए पूरी ईमानदारी से जुट जाने की प्रेरणा बना।




