अनिल विज ने दी जानकारी, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर एक माह तक नहीं लगेगा प्रवेश शुल्क; ऑनलाइन और स्मारक परिसर में टिकट बुक कराने की सुविधा
अंबाला छावनी में 1857 की क्रांति के वीर शहीदों की स्मृति में निर्मित शहीद स्मारक अब आम लोगों के लिए खुलने जा रहा है। आगामी 15 नवंबर, 2026 से लोग इस ऐतिहासिक स्मारक को देख सकेंगे। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर शुरुआती एक महीने तक यहां प्रतिदिन 500 लोगों को निशुल्क प्रवेश दिया जाएगा। हालांकि, मुफ्त प्रवेश के लिए भी टिकट बुक कराना अनिवार्य होगा। हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने यह जानकारी देते हुए बताया कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 5 नवंबर, 2026 को इस स्मारक का उद्घाटन किया था।
अनिल विज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि स्मारक को आम जनता के लिए खोलने की तैयारियां पूरी की जा रही हैं। पहले महीने में प्रतिदिन अधिकतम 500 लोग इसे निशुल्क देख सकेंगे। इस व्यवस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को 1857 की क्रांति के इतिहास और उसमें अपना बलिदान देने वाले वीरों के योगदान से परिचित कराना है।
उन्होंने बताया कि स्मारक में प्रवेश के लिए लोगों को सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक टिकट बुक कराने की सुविधा उपलब्ध होगी। इच्छुक लोग निर्धारित वेबसाइट ambalawarmemorial.com पर जाकर ऑनलाइन टिकट आरक्षित कर सकते हैं। इसके अलावा स्मारक परिसर में भी टिकट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। निशुल्क प्रवेश पाने वाले लोगों को भी अपनी टिकट पहले से बुक करानी होगी, ताकि प्रतिदिन आने वाले आगंतुकों की संख्या निर्धारित सीमा के भीतर रखी जा सके।
एक महीने तक रोजाना 500 आगंतुकों को मिलेगा मौका
मंत्री अनिल विज ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के आदेशानुसार शुरुआती एक महीने तक स्मारक में प्रवेश के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस अवधि में प्रतिदिन केवल 500 लोगों को ही स्मारक देखने की अनुमति होगी। मुफ्त प्रवेश का लाभ लेने के लिए भी टिकट बुकिंग जरूरी रखी गई है।
ऑनलाइन टिकट व्यवस्था से लोगों को अपनी यात्रा की योजना पहले से बनाने में सुविधा मिलेगी। वहीं, स्मारक परिसर में टिकट उपलब्ध कराने का विकल्प उन लोगों के लिए रखा गया है, जो इंटरनेट के माध्यम से बुकिंग नहीं कर पाते। प्रशासन की ओर से निर्धारित संख्या के अनुसार ही आगंतुकों को प्रवेश दिया जाएगा।
विज ने लोगों से अपील की कि वे स्मारक देखने के लिए आने से पहले टिकट की व्यवस्था अवश्य कर लें। इससे प्रवेश के समय होने वाली असुविधा से बचा जा सकेगा। शुरुआती एक महीने की निशुल्क व्यवस्था के बाद प्रवेश से संबंधित आगे की व्यवस्था के बारे में निर्धारित नियमों के अनुसार जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।
1857 की क्रांति का अंबाला से जुड़ा इतिहास सामने लाने का प्रयास
अनिल विज ने कहा कि आजादी की पहली लड़ाई का बिगुल 1857 में अंबाला छावनी से फूंका गया था। उनके अनुसार, यह संघर्ष कांग्रेस की स्थापना से 28 वर्ष पहले 10 मई, 1857 को अंबाला छावनी में शुरू हुआ था। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक संघर्ष को केवल किसी एक स्थान तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि यह लड़ाई देश के अलग-अलग हिस्सों में लड़ी गई और इसमें बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।
विज ने बताया कि 1857 का विद्रोह सशस्त्र संघर्ष था। अंग्रेजी शासन के खिलाफ उठी इस लड़ाई में सैनिकों के साथ आम लोगों ने भी भागीदारी की। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के दौरान अंग्रेजों ने विद्रोहियों और उनके समर्थकों पर बेहद क्रूर अत्याचार किए। अनेक लोगों को पेड़ों से बांधकर गोलियां मारी गईं, कई लोगों को कोल्हू में पिसवाने जैसी अमानवीय सजाएं दी गईं और पूरे-पूरे गांवों को आग के हवाले कर दिया गया।
मंत्री ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में ऐसे हजारों वीरों का योगदान रहा है, जिन्हें वह सम्मान और स्थान नहीं मिल पाया जिसके वे हकदार थे। अनेक शहीदों के बलिदान की कहानियां समय के साथ इतिहास के मुख्य विमर्श से दूर होती चली गईं। अंबाला में निर्मित यह स्मारक ऐसे ही गुमनाम और उपेक्षित वीरों की स्मृति को सम्मान देने का प्रयास है।
गुमनाम शहीदों के योगदान को मिलेगी पहचान
विज के अनुसार, शहीद स्मारक का निर्माण इस उद्देश्य से किया गया है कि 1857 की क्रांति में अपने प्राण न्योछावर करने वाले हजारों लोगों के योगदान को उचित पहचान मिल सके। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष करते हुए असहनीय यातनाएं झेलीं और देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, उनकी स्मृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास केवल कुछ प्रमुख नेताओं और घटनाओं तक सीमित नहीं है। इसके पीछे असंख्य ऐसे लोगों का संघर्ष और बलिदान है, जिनके नाम आम लोगों तक नहीं पहुंच सके। अंबाला छावनी का यह स्मारक उन सभी बलिदानियों को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ नई पीढ़ी को देश के स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जोड़ने का माध्यम बनेगा।
मंत्री ने कहा कि 1857 की क्रांति के दौरान देश के विभिन्न हिस्सों में हुए संघर्षों और शहीदों के बलिदान को याद रखना राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। स्मारक के माध्यम से लोगों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि स्वतंत्रता हासिल करने के लिए देशवासियों ने कितनी कठिनाइयों और यातनाओं का सामना किया था।
5 नवंबर को अमित शाह ने किया था उद्घाटन
अंबाला छावनी में निर्मित इस शहीद स्मारक का उद्घाटन केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 5 नवंबर, 2026 को किया था। उद्घाटन के बाद अब इसे आम जनता के लिए खोलने की तैयारी पूरी की जा रही है। 15 नवंबर से लोग यहां पहुंचकर 1857 की क्रांति से जुड़े इतिहास और शहीदों के योगदान को करीब से जान सकेंगे।
हरियाणा सरकार की ओर से पहले महीने में निशुल्क प्रवेश की व्यवस्था को इस स्मारक से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। प्रतिदिन 500 आगंतुकों की सीमा और अनिवार्य टिकट बुकिंग से प्रवेश व्यवस्था को व्यवस्थित रखने का प्रयास किया गया है।
अंबाला छावनी का यह स्मारक न केवल स्वतंत्रता संग्राम के वीरों को श्रद्धांजलि देने का केंद्र बनेगा, बल्कि विद्यार्थियों, युवाओं और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण स्थान साबित हो सकता है। सरकार का प्रयास है कि यहां आने वाले लोग 1857 के संघर्ष, उसके बलिदानियों और आजादी की लड़ाई में अंबाला की भूमिका को समझ सकें।




