‘BJP के एजेंडे के खिलाफ मजदूरों के साथ खड़ा है पंजाब’, हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

‘BJP के एजेंडे के खिलाफ मजदूरों के साथ खड़ा है पंजाब’, हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार पर साधा निशाना

Punjab News: मनरेगा को लेकर केंद्र सरकार पर पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का हमला, बकाया भुगतान और नई व्यवस्था पर उठाए सवाल

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। बुधवार को पार्टी कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार मनरेगा में सुधारों के नाम पर जनता को गुमराह कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर योजना से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे अब भी लंबित हैं।

उन्होंने दावा किया कि मनरेगा के तहत मजदूरी और विकास कार्यों से जुड़े हजारों करोड़ रुपये के बकाया भुगतान अभी तक जारी नहीं किए गए हैं। वित्त मंत्री के अनुसार, यदि लंबित भुगतान समय पर नहीं किया जाता तो इसका सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, मजदूरों की आय और पंचायत स्तर पर चल रहे विकास कार्यों पर पड़ सकता है।

प्रेस वार्ता के दौरान हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि पंजाब सरकार मनरेगा को ग्रामीण रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की एक महत्वपूर्ण योजना मानती है। उनका कहना था कि योजना के मूल उद्देश्य को बनाए रखना आवश्यक है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्रभावित न हों।

केंद्र सरकार की नीतियों पर जताई आपत्ति

वित्त मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा में किए जा रहे बदलावों से योजना की मूल संरचना प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि योजना का वित्तीय ढांचा बदला जाता है और राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय जिम्मेदारी डाली जाती है, तो इसका असर राज्यों की विकास योजनाओं पर भी पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का मानना है कि मनरेगा जैसी राष्ट्रीय योजना का संचालन राज्यों के सहयोग से किया जाना चाहिए और किसी भी बड़े बदलाव से पहले सभी राज्यों की राय लेना आवश्यक है।

23 हजार करोड़ रुपये से अधिक बकाया होने का दावा

हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया कि केंद्र सरकार के पास मनरेगा से संबंधित 23,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित है। उन्होंने कहा कि इसमें मजदूरों की बकाया मजदूरी के साथ-साथ पंचायतों द्वारा कराए गए विकास कार्यों के भुगतान भी शामिल हैं।

उनके अनुसार, बकाया राशि में लगभग 12,219 करोड़ रुपये मजदूरों की अवैतनिक मजदूरी तथा करीब 11,227 करोड़ रुपये ग्रामीण विकास परियोजनाओं के लिए उपयोग किए गए निर्माण सामग्री (Material Component) के भुगतान से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि इन भुगतान में देरी होने से ग्राम पंचायतों और स्थानीय विकास कार्यों पर असर पड़ रहा है।

संसदीय समिति की रिपोर्ट का किया उल्लेख

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वित्त मंत्री ने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संबंधी संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समिति ने लंबित फंड को जल्द जारी करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।

उन्होंने यह भी कहा कि समिति द्वारा योजना में धर्म के आधार पर किसी प्रकार के बदलाव या नई व्यवस्था लागू करने की सिफारिश नहीं की गई थी। उनके अनुसार, समिति का मुख्य उद्देश्य योजना के बेहतर संचालन और लंबित भुगतान के समाधान पर ध्यान देना था।

राज्यों पर वित्तीय बोझ, नई व्यवस्था और पंजाब सरकार का पक्ष

40 प्रतिशत वित्तीय हिस्सेदारी पर जताई चिंता

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि यदि मनरेगा योजना में राज्यों की वित्तीय हिस्सेदारी बढ़ाई जाती है और लगभग 40 प्रतिशत खर्च राज्यों को वहन करना पड़ता है, तो कई राज्यों के लिए यह अतिरिक्त आर्थिक दबाव का कारण बन सकता है।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर की रोजगार गारंटी योजना का वित्तीय ढांचा ऐसा होना चाहिए जिससे सभी राज्यों को समान रूप से लाभ मिले और किसी राज्य पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।

संघीय ढांचे पर असर पड़ने की आशंका

वित्त मंत्री ने कहा कि यदि किसी भी विकास योजना में राज्यों की भूमिका सीमित कर दी जाती है या प्रत्येक परियोजना के लिए केंद्र की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य कर दी जाती है, तो इससे प्रशासनिक प्रक्रिया लंबी हो सकती है।

उन्होंने इसे भारत के संघीय ढांचे से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि राज्यों को विकास कार्यों के संचालन में पर्याप्त अधिकार और लचीलापन मिलना चाहिए ताकि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

मोबाइल आधारित उपस्थिति प्रणाली पर भी उठाए सवाल

हरपाल सिंह चीमा ने मनरेगा के तहत मोबाइल लोकेशन आधारित उपस्थिति प्रणाली (Attendance System) पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई मजदूर ऐसे हैं जिनके पास आधुनिक स्मार्टफोन या बेहतर इंटरनेट सुविधा उपलब्ध नहीं है।

उन्होंने कहा कि यदि तकनीकी व्यवस्था लागू की जाती है तो उसके साथ ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए ताकि पात्र लाभार्थियों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

ग्रामीण रोजगार की अहमियत पर दिया जोर

प्रेस वार्ता के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण योजनाओं में शामिल है। यह योजना विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, भूमिहीन मजदूरों और ग्रामीण श्रमिकों के लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत रही है।

उन्होंने कहा कि समय पर मजदूरी भुगतान और विकास कार्यों के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध होना योजना की सफलता के लिए आवश्यक है। यदि भुगतान में देरी होती है तो इसका असर लाखों परिवारों की आजीविका पर पड़ सकता है।

पंजाब विधानसभा के प्रस्ताव का किया उल्लेख

हरपाल सिंह चीमा ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में पंजाब विधानसभा ने मनरेगा से जुड़े मुद्दों पर एक प्रस्ताव पारित किया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य मजदूरों के हितों की रक्षा करना और योजना को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग उठाना है।

उन्होंने कहा कि विधानसभा में पारित प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र सरकार से योजना के मूल स्वरूप को बनाए रखने तथा लंबित भुगतान शीघ्र जारी करने का आग्रह किया गया है।

विपक्षी दलों की भूमिका पर भी टिप्पणी

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वित्त मंत्री ने विभिन्न राजनीतिक दलों की भूमिका पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर सभी राजनीतिक दलों को ग्रामीण मजदूरों और किसानों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि पंजाब सरकार ने इस विषय पर स्पष्ट रुख अपनाया है और विधानसभा के माध्यम से अपना पक्ष रखा है। साथ ही उन्होंने अन्य राज्यों की सरकारों से भी इस मुद्दे पर स्पष्ट स्थिति सामने रखने की अपील की।

बकाया भुगतान जल्द जारी करने की मांग

हरपाल सिंह चीमा ने केंद्र सरकार से मांग की कि मनरेगा के तहत लंबित मजदूरी और विकास कार्यों से संबंधित सभी बकाया भुगतान शीघ्र जारी किए जाएं ताकि पंचायतों के विकास कार्य प्रभावित न हों और ग्रामीण श्रमिकों को समय पर उनका पारिश्रमिक मिल सके।

उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को रोजगार सुरक्षा प्रदान करना है, इसलिए योजना के संचालन, बजट आवंटन और भुगतान व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखना आवश्यक है। उनका कहना था कि समय पर फंड उपलब्ध होने से ग्रामीण विकास परियोजनाओं में तेजी आएगी, स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की गति भी बनी रहेगी।

Leave a Reply