सोमवती अमावस्या पर बना दुर्लभ योग, पितरों की कृपा और पुण्य फल प्राप्ति के लिए आज का दिन माना जा रहा है विशेष

सनातन परंपरा में अमावस्या तिथि को पूर्वजों के स्मरण, तर्पण और दान-पुण्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तब उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह तिथि पितृ तृप्ति, आध्यात्मिक साधना और शुभ कार्यों के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है। इस वर्ष सोमवती अमावस्या का महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि इस अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत शुभ और सिद्धिदायक योग माना जाता है। मान्यता है कि इस शुभ संयोग में किए गए जप, तप,…

अधिकमास अमावस्या पर पितृ तर्पण का विशेष संयोग, रविवार को सूर्य उपासना के साथ जानें दिनभर के शुभ-अशुभ मुहूर्त

आज का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अधिकमास की अमावस्या और रविवार का संयोग एक साथ बना है। इस अमावस्या को दर्श अमावस्या भी कहा जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों के स्मरण, तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। वहीं रविवार होने के कारण सूर्य देव की पूजा का भी विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन विधि-विधान से किए गए धार्मिक कार्यों से पितृ दोष में कमी आती है और सूर्य से संबंधित कष्टों में भी राहत मिल सकती है। मान्यता है कि अमावस्या…

14-15 जून की अधिकमास अमावस्या विशेष: पूर्वजों की कृपा पाने का शुभ अवसर, जानें तर्पण और पूजा का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या इस बार विशेष महत्व लेकर आई है। तिथियों के संयोग के कारण यह अमावस्या 14 और 15 जून, दोनों दिनों तक प्रभावी रहेगी। अधिकमास स्वयं में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है और लगभग तीन वर्ष में एक बार आता है। ऐसे में इस महीने की अमावस्या को धार्मिक दृष्टि से बहुत फलदायी माना जा रहा है। धर्मग्रंथों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए जप, तप, दान, तर्पण और पूजा-पाठ का पुण्य लंबे समय तक शुभ फल प्रदान करता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर लगभग…

अधिक मास का विशेष शुक्र प्रदोष व्रत आज, शिव-आराधना से मिलेगा पुण्य फल; जानें शुभ समय, पूजा नियम और महत्वपूर्ण मंत्र

सनातन परंपरा में भगवान शिव की उपासना के लिए प्रदोष व्रत का विशेष स्थान माना गया है। प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाने वाला यह व्रत भक्तों को आध्यात्मिक शांति और शुभ फल प्रदान करने वाला माना जाता है। जब त्रयोदशी शुक्रवार के दिन पड़ती है, तब इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। वर्ष 2026 में अधिक मास के दौरान आने वाला यह व्रत कई शुभ योगों के कारण और भी खास माना जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार अधिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जून 2026 को सायं 7 बजकर 36 मिनट…

गुरु अर्जन देव जी के शहीदी पर्व पर पाकिस्तान रवाना हुआ श्रद्धालुओं का जत्था, 541 संगतों को मिला वीजा

पांचवें सिख गुरु, श्री गुरु अर्जन देव जी के शहीदी पर्व के अवसर पर पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों की यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का एक विशेष जत्था बुधवार को रवाना हो गया। इस धार्मिक यात्रा को लेकर संगतों में गहरी श्रद्धा और उत्साह देखने को मिली। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की देखरेख में भेजे गए इस जत्थे में 541 श्रद्धालु शामिल हैं, जिन्हें पाकिस्तान सरकार की ओर से वीजा जारी किया गया है। 20 श्रद्धालुओं को नहीं मिल सका वीजा इस यात्रा के लिए एसजीपीसी ने कुल 561 श्रद्धालुओं के पासपोर्ट नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग को भेजे थे।…

कैंची धाम में 15 जून को जुटेंगे लाखों श्रद्धालु, नीम करौली बाबा के स्थापना दिवस पर तैयारियों ने पकड़ी रफ्तार

उत्तराखंड की शांत वादियों में स्थित कैंची धाम एक बार फिर विशाल धार्मिक आयोजन का केंद्र बनने जा रहा है। आगामी 15 जून को आश्रम का स्थापना दिवस मनाया जाएगा, जिसके लिए प्रशासन, मंदिर ट्रस्ट और स्थानीय व्यवस्थापक पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं। हर वर्ष की तरह इस बार भी देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालुओं की बढ़ती आमद को देखते हुए आश्रम परिसर और आसपास के क्षेत्रों में विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। जून का महीना शुरू होते ही नीम करौली बाबा के अनुयायियों में उत्साह बढ़ने लगता है। स्थापना दिवस…

परमा एकादशी 11 जून को: अधिक मास में मिलने वाला दुर्लभ व्रत, तीन साल बाद 2029 में आएगा यह अवसर

11 जून, गुरुवार को अधिक ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पड़ रही है। इस विशेष एकादशी को परमा एकादशी, पुरुषोत्तमी एकादशी और कमला एकादशी के नाम से जाना जाता है। धार्मिक दृष्टि से यह तिथि अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसका संबंध अधिक मास से होता है। अधिक मास हर तीन वर्ष के आसपास आता है, इसलिए यह एकादशी भी सामान्य एकादशी की तरह हर वर्ष नहीं आती। इस बार के बाद श्रद्धालुओं को इस व्रत के लिए वर्ष 2029 तक इंतजार करना होगा, जब 9 अप्रैल को पुनः परमा एकादशी का संयोग बनेगा। हिंदू धर्मग्रंथों…

अधिक मास की कालाष्टमी और कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष संयोग: व्रत और पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान, भूलकर भी न करें ये गलतियां

सनातन धर्म में अधिक मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। इसे पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि यह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह ऐसा विशेष समय होता है जब साधना, पूजा-पाठ, जप, तप, दान और आत्मचिंतन का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इसी कारण अधिक मास में आने वाले प्रत्येक व्रत, पर्व और धार्मिक तिथि का महत्व सामान्य महीनों की तुलना में अधिक माना जाता है। इस वर्ष अधिक मास के दौरान कालाष्टमी और मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष संयोग श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का…

अधिक मास 2026: मलमास में भांजे-भांजी का सम्मान क्यों माना जाता है पुण्यकारी? जानिए धार्मिक मान्यता और परंपरा

अधिक मास 2026 में भांजे-भांजी का सम्मान क्यों माना जाता है शुभ? जानिए धार्मिक मान्यता, परंपरा और इसका महत्व हिंदू धर्म में अधिक मास को एक विशेष और आध्यात्मिक रूप से महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है। इसे अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में अधिक मास, पुरुषोत्तम मास और मलमास जैसे नामों से जाना जाता है। यह अवधि हिंदू पंचांग की गणना से जुड़ी होती है और सामान्य महीनों की तुलना में इसका धार्मिक महत्व अलग माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इस दौरान पूजा-पाठ, जप, ध्यान, व्रत, दान तथा सेवा जैसे…

शनिवार को करें ये खास उपाय, दूर होगी नकारात्मकता और परिवार में बढ़ेगा सुख-शांति का माहौल

शनिवार का महत्व और शनिदेव की कृपा पाने के लिए ज्योतिषीय उपायों की मान्यता ज्योतिष शास्त्र में शनिवार का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे विशेष रूप से न्याय के देवता तथा कर्मफल दाता शनिदेव को समर्पित किया जाता है। मान्यता है कि शनिदेव व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं और यदि कोई व्यक्ति श्रद्धा, नियम और विश्वास के साथ शनिवार के दिन कुछ विशेष उपाय करता है तो उसके जीवन में चल रही परेशानियों में कमी आने लगती है। यही कारण है कि भारत में लाखों लोग शनिवार को पूजा, व्रत और विभिन्न…

निर्जला एकादशी 2026: गुरुवार, स्वाति नक्षत्र और लक्ष्मी नारायण योग से बढ़ेगा व्रत का महत्व

निर्जला एकादशी 2026: महत्व, तिथि और शुभ संयोग का धार्मिक महत्व सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष स्थान माना गया है और इसे भगवान विष्णु की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र दिन के रूप में देखा जाता है। प्रत्येक मास के शुक्ल और कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन इनमें से निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और सबसे अधिक फलदायी व्रतों में गिना जाता है। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में आता है और इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें जल ग्रहण किए बिना उपवास रखा जाता है,…

अबू धाबी के BAPS हिंदू मंदिर को वैश्विक सम्मान, ‘Tolerance Award 2026’ से बढ़ी अंतरराष्ट्रीय पहचान

अबू धाबी के BAPS हिंदू मंदिर को मिला Tolerance Award 2026, वैश्विक स्तर पर सहिष्णुता और सांस्कृतिक एकता के प्रयासों को मिली नई पहचान संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी में स्थित BAPS हिंदू मंदिर ने एक और महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि अपने नाम की है। मंदिर को ‘तीसरे अंतरराष्ट्रीय सभ्यता एवं सहिष्णुता संवाद सम्मेलन’ (Third International Dialogue of Civilizations & Tolerance Conference) के दौरान प्रतिष्ठित Tolerance Award 2026 से सम्मानित किया गया। यह सम्मान केवल एक धार्मिक स्थल की उपलब्धि नहीं माना जा रहा, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों, धर्मों और समुदायों के बीच संवाद, सहिष्णुता, सामाजिक सद्भाव और वैश्विक…

केदारनाथ यात्रा पर मौसम की मार, प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनज़र लगाया अस्थायी विराम

खराब मौसम के चलते केदारनाथ यात्रा पर अस्थायी रोक उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश और मौसम के तेजी से बिगड़ते हालात को देखते हुए केदारनाथ धाम की यात्रा को फिलहाल अस्थायी रूप से रोक दिया गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) की ओर से कई जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किए जाने के बाद राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए यह निर्णय लिया। अधिकारियों का कहना है कि मौसम सामान्य होने और यात्रा मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित किए जाने के बाद ही श्रद्धालुओं को आगे बढ़ने की अनुमति…

राहु का नक्षत्र परिवर्तन बना शुभ संकेत, जून की शुरुआत में इन 5 राशियों के खुल सकते हैं तरक्की के नए रास्ते

राहु का ज्योतिष में क्या महत्व माना जाता है? वैदिक ज्योतिष में राहु को नौ ग्रहों में एक छाया ग्रह माना जाता है। हालांकि राहु का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं है, लेकिन जन्म कुंडली में इसकी स्थिति को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहु व्यक्ति की महत्वाकांक्षा, अचानक होने वाले बदलाव, विदेश यात्रा, आधुनिक तकनीक, राजनीति, शोध, रहस्यमयी विषयों और अप्रत्याशित अवसरों से जुड़ा हुआ माना जाता है। आमतौर पर राहु का नाम सुनते ही लोगों के मन में अशुभ प्रभाव की धारणा बन जाती है, लेकिन ज्योतिष के अनुसार ऐसा हमेशा नहीं होता। यदि राहु…

8 साल बाद बना दुर्लभ पूर्णिमा योग, आज के दिन दान-पुण्य से खुल सकते हैं समृद्धि के द्वार

ज्येष्ठ अधिक मास पूर्णिमा 2026: 8 साल बाद बना विशेष संयोग, ब्लू मून और माइक्रोमून के साथ धार्मिक आस्था का दुर्लभ संगम हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। प्रत्येक पूर्णिमा किसी न किसी देवी-देवता की आराधना, दान-पुण्य, स्नान और व्रत से जुड़ी होती है। वर्ष 2026 की ज्येष्ठ अधिक मास पूर्णिमा कई कारणों से विशेष मानी जा रही है। इस बार न केवल अधिकमास का दुर्लभ संयोग बना है, बल्कि खगोलीय दृष्टि से भी यह दिन बेहद खास है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पूर्णिमा पर स्नान, भगवान विष्णु और माता…

गुरु अर्जुन देव जी की शहादत से जुड़ी है छबील की परंपरा, जानिए मीठे पानी की सेवा का प्रेरक इतिहास

भीषण गर्मी के मौसम में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सड़कों, बाजारों, चौकों और सार्वजनिक स्थानों पर सिख समाज द्वारा ठंडे और मीठे शरबत की छबीलें लगाई जाती हैं। इन छबीलों में राहगीरों, यात्रियों और आम लोगों को बिना किसी भेदभाव के शरबत और ठंडा पानी वितरित किया जाता है। पहली नजर में यह केवल गर्मी से राहत देने वाला सेवा कार्य प्रतीत हो सकता है, लेकिन वास्तव में इसके पीछे सिख इतिहास, आध्यात्मिक परंपरा और मानव सेवा की गहरी भावना जुड़ी हुई है। छबील लगाने की यह परंपरा सिखों के पांचवें गुरु, श्री गुरु अर्जुन…

ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 30-31 मई को, दो दिन रहेगा पुण्यकाल: विष्णु-चंद्र पूजा और दान का खास महत्व

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। प्रत्येक माह आने वाली पूर्णिमा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, चंद्र देव और सत्यनारायण भगवान की आराधना के लिए शुभ मानी जाती है। वहीं जब पूर्णिमा अधिक मास में पड़ती है तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अधिक मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है, इसलिए इस महीने में किए गए जप, तप, दान, व्रत और पूजा को विशेष फलदायी माना जाता है। इस वर्ष ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा दो दिनों तक रहने के कारण श्रद्धालुओं के मन में यह…

ईद-उल-अजहा पर देशभर में रौनक, नमाज के बाद लोगों ने दी मुबारकबाद

ईद-उल-अजहा 2026: देशभर में अकीदत और भाईचारे के साथ मनाई गई बकरीद, मस्जिदों और ईदगाहों में अदा की गई नमाज देशभर में ईद-उल-अजहा (बकरीद) का पर्व धार्मिक आस्था, भाईचारे और सामाजिक सौहार्द के साथ मनाया गया। सुबह से ही विभिन्न राज्यों के शहरों, कस्बों और गांवों में स्थित मस्जिदों और ईदगाहों में बड़ी संख्या में लोग नमाज अदा करने पहुंचे। नमाज के दौरान देश में शांति, अमन, खुशहाली और सभी नागरिकों के बेहतर भविष्य के लिए विशेष दुआएं की गईं। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी और पारंपरिक तरीके से त्योहार की खुशियां…

पद्मिनी एकादशी व्रत का पारण आज नहीं, जानिए 28 मई का शुभ समय और नियम

पद्मिनी एकादशी हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखने वाली एकादशी तिथियों में से एक मानी जाती है। यह सामान्य एकादशी व्रतों से अलग है, क्योंकि इसका संबंध अधिकमास यानी पुरुषोत्तम मास से होता है। अधिकमास हर वर्ष नहीं आता और इसी कारण इस अवधि में पड़ने वाली पद्मिनी एकादशी भी नियमित रूप से प्रत्येक वर्ष नहीं आती। वैष्णव परंपरा में इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना, उपवास, मंत्र जाप, ध्यान, दान और सेवा को विशेष पुण्यदायी माना गया है। पद्मिनी एकादशी को कई क्षेत्रों में कमला एकादशी या पुरुषोत्तम एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। श्रद्धालु इस…

मक्का में गूंज रही इबादत की आवाजें, हज 2026 का आगाज़; मीना की ओर बढ़े लाखों जायरीन

दुनिया की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में शामिल हज 2026 की शुरुआत हो चुकी है। सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का और उसके आसपास स्थित धार्मिक स्थलों पर इस समय दुनिया के विभिन्न देशों से पहुंचे लाखों मुस्लिम श्रद्धालु इबादत में जुटे हुए हैं। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार ज़िलहिज्जा महीने की 8वीं तारीख से हज की मुख्य रस्मों की शुरुआत होती है। इस दिन को यौम-ए-तरवियाह (Yawm al-Tarwiyah) कहा जाता है और श्रद्धालु मक्का से मीना की ओर रवाना होते हैं। मीना पहुंचने के बाद हाजी पूरे दिन नमाज, तिलावत, जिक्र और दुआ में समय बिताते हैं। यह दिन हज…