G7 के मंच पर मोदी की बड़ी कूटनीतिक पहल: ट्रम्प से बातचीत, मेलोनी संग मुलाकात और साझेदारी पर जोर

G7 के मंच पर मोदी की बड़ी कूटनीतिक पहल: ट्रम्प से बातचीत, मेलोनी संग मुलाकात और साझेदारी पर जोर

फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई अहम वैश्विक नेताओं से मुलाकात की और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भारत का दृष्टिकोण दुनिया के सामने रखा। सम्मेलन में पहुंचने के बाद मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ हुई बातचीत विशेष चर्चा का विषय बनी रही। वहीं, अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने वैश्विक सहयोग, समुद्री सुरक्षा, पश्चिम एशिया में शांति और ग्लोबल साउथ की अपेक्षाओं जैसे मुद्दों पर विस्तार से बात की।

G7 सम्मेलन में इस बार भारत को विशेष आमंत्रित देश के रूप में बुलाया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सातवीं बार इस मंच पर शामिल हुए हैं, जबकि भारत की यह 13वीं उपस्थिति है। सम्मेलन में दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं और कई साझेदार देशों के नेताओं ने भाग लिया।

सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक ही मंच पर नजर आए। दोनों नेताओं ने करीब पांच मिनट तक अनौपचारिक बातचीत की। यह मुलाकात लगभग 16 महीने बाद हुई है। इससे पहले दोनों नेता फरवरी 2025 में वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में मिले थे। G7 के आउटरीच सत्र के दौरान भी दोनों नेता एक-दूसरे के समीप बैठे दिखाई दिए।

अमेरिकी प्रशासन के सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। इस बैठक में व्यापारिक संबंधों, निवेश, टैरिफ व्यवस्था और रणनीतिक सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने के लिए इस बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इसी बीच प्रधानमंत्री मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बीच भी सौहार्दपूर्ण बातचीत हुई। दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान मेलोनी ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे और मोदी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर सबसे चर्चित नेताओं में शामिल हैं। यह टिप्पणी उस वायरल वीडियो की ओर इशारा मानी जा रही है जिसमें हाल ही में मोदी ने मेलोनी को एक खास उपहार दिया था। दोनों नेताओं के बीच की दोस्ताना केमिस्ट्री एक बार फिर चर्चा में रही।

फ्रांस पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने किया। इसके बाद सम्मेलन में शामिल सभी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों की सामूहिक तस्वीर भी ली गई। इस अवसर पर विश्व के प्रमुख नेताओं ने आपसी सहयोग और वैश्विक चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन के हाई लेवल वर्किंग सेशन में हिस्सा लिया, जिसकी थीम थी- “नई साझेदारियों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता को मजबूत बनाना।” इस सत्र में G7 देशों के अलावा आमंत्रित देशों के नेता, विश्व बैंक तथा अफ्रीकी विकास बैंक के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में शांति स्थापना की दिशा में हुई हालिया प्रगति का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लंबे समय से जारी संघर्षों के कारण कई देशों को मानवीय और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इन तनावों का असर वैश्विक व्यापार पर पड़ा है, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री मार्गों पर।

प्रधानमंत्री ने समुद्री सुरक्षा को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार का बड़ा हिस्सा समुद्री मार्गों के माध्यम से संचालित होता है, इसलिए नाविकों और समुद्री यातायात की सुरक्षा सुनिश्चित करना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। सुरक्षित समुद्री मार्ग वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए आवश्यक हैं।

मोदी ने अपने संबोधन में विश्वास की कमी को आज की दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि आधुनिक दुनिया पहले की तुलना में अधिक जुड़ी हुई है, लेकिन देशों के बीच भरोसे का संकट गहराता जा रहा है। किसी भी साझेदारी की सफलता केवल आर्थिक संसाधनों पर नहीं, बल्कि आपसी विश्वास पर निर्भर करती है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से इस भरोसे को दोबारा स्थापित करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने भारतीय संस्कृति के ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखता है। उन्होंने कहा कि विकास तभी सार्थक माना जा सकता है जब वह लोगों की वास्तविक जरूरतों और आकांक्षाओं से जुड़ा हो। यही सोच भारत की विदेश नीति और वैश्विक सहयोग की नींव भी है।

उन्होंने कहा कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय साझेदारी का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं होना चाहिए, बल्कि देशों को आत्मनिर्भर और सक्षम बनाना होना चाहिए। विकासशील देशों को अवसर, संसाधन और क्षमता निर्माण के माध्यम से आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

ग्लोबल साउथ का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों को केवल समर्थन नहीं, बल्कि बराबरी पर आधारित सहयोग चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया को लेन-देन आधारित संबंधों से आगे बढ़कर साझेदारी और साझा विकास की भावना को अपनाना होगा।

इस वर्ष G7 सम्मेलन में सदस्य देशों के अलावा कई प्रमुख देशों के नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है। इनमें भारत, ब्राजील, मिस्र, दक्षिण कोरिया और केन्या जैसे देशों के शीर्ष नेता शामिल हैं। सम्मेलन में वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक असंतुलन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक संकटों पर चर्चा की जा रही है।

G7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। इसकी स्थापना 1970 के दशक में वैश्विक आर्थिक चुनौतियों पर समन्वय बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी। समय के साथ इसके एजेंडे में राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी विषय भी शामिल हो गए।

भारत इस समूह का सदस्य नहीं है, लेकिन वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय राजनीति में उसकी बढ़ती भूमिका को देखते हुए उसे नियमित रूप से आमंत्रित किया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में भारत की भागीदारी लगातार बढ़ी है और प्रधानमंत्री मोदी लगभग हर हालिया G7 सम्मेलन में शामिल हुए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक दक्षिण की आवाज के रूप में भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर गंभीरता से सुना जा रहा है। ऐसे में G7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी न केवल भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाती है, बल्कि दुनिया की प्रमुख शक्तियों के साथ उसके मजबूत होते संबंधों का भी संकेत देती है।