India-Maldives Relations में नया मोड़: PM Modi की मालदीव यात्रा के दौरान 8 महत्वपूर्ण समझौते, ₹4,850 करोड़ की वित्तीय सहायता और द्विपक्षीय सहयोग को मिला नया विस्तार

भारत और मालदीव के संबंधों में वर्ष 2025 एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मालदीव यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कई ऐसे समझौतों पर हस्ताक्षर किए, जिन्हें द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने वाला कदम माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान आर्थिक सहयोग, बुनियादी ढांचा, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य, मत्स्य पालन, जलवायु अनुसंधान और व्यापार जैसे अनेक क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करने पर सहमति बनी।

माले में आयोजित आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान भारत और मालदीव के बीच आठ प्रमुख समझौते (MoUs और Agreements) किए गए। इसके साथ ही भारत ने मालदीव के विकास कार्यों के लिए 565 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹4,850 करोड़) की नई लाइन ऑफ क्रेडिट (Line of Credit) उपलब्ध कराने की घोषणा की। दोनों देशों ने कर्ज पुनर्गठन, डिजिटल भुगतान व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापारिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों के दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग को भी नई मजबूती प्रदान करती है।

भारत-मालदीव संबंधों में यह यात्रा क्यों महत्वपूर्ण मानी जा रही है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस यात्रा को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में भारत और मालदीव के संबंधों को लेकर कई राजनीतिक चर्चाएं होती रही थीं।

मालदीव में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू के सत्ता में आने के बाद दोनों देशों के संबंधों को लेकर विभिन्न स्तरों पर बहस देखने को मिली थी। हालांकि समय के साथ दोनों देशों ने संवाद और सहयोग के माध्यम से अपने संबंधों को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी रखा।

इस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि भारत और मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र में शांति, स्थिरता, विकास और पारस्परिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर कार्य करेंगे।

₹4,850 करोड़ की नई Line of Credit

यात्रा के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक भारत द्वारा मालदीव को 565 मिलियन अमेरिकी डॉलर की नई लाइन ऑफ क्रेडिट उपलब्ध कराना है।

यह वित्तीय सहायता भारत के EXIM बैंक के माध्यम से प्रदान की जाएगी।

इस राशि का उपयोग विभिन्न विकास परियोजनाओं में किया जाएगा, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • आधारभूत संरचना (Infrastructure)
  • स्वास्थ्य सेवाएं
  • शिक्षा
  • परिवहन
  • कनेक्टिविटी
  • सार्वजनिक सुविधाएं
  • सामुदायिक विकास परियोजनाएं

इस प्रकार की लाइन ऑफ क्रेडिट से मालदीव को विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध होंगे तथा दीर्घकालिक परियोजनाओं को गति मिलने की संभावना है।

कर्ज पुनर्गठन से मिलेगी आर्थिक राहत

भारत और मालदीव के बीच वित्तीय सहयोग का एक महत्वपूर्ण पहलू कर्ज पुनर्गठन (Debt Restructuring) भी रहा।

समझौते के तहत मालदीव पर मौजूदा ऋण भुगतान का वार्षिक बोझ कम करने पर सहमति बनी।

रिपोर्टों के अनुसार पहले जहां मालदीव को प्रतिवर्ष लगभग 51 मिलियन डॉलर का भुगतान करना पड़ता था, वहीं नई व्यवस्था के बाद यह राशि घटकर लगभग 29 मिलियन डॉलर रह जाएगी।

इससे मालदीव के वित्तीय प्रबंधन पर दबाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।

Free Trade Agreement (FTA) पर बातचीत शुरू करने का निर्णय

दोनों देशों ने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर औपचारिक बातचीत शुरू करने का निर्णय लिया।

यदि भविष्य में यह समझौता अंतिम रूप लेता है, तो:

  • व्यापार आसान हो सकता है।
  • निवेश बढ़ सकता है।
  • दोनों देशों के व्यवसायों को नए अवसर मिल सकते हैं।
  • आयात-निर्यात प्रक्रिया अधिक सुगम हो सकती है।

भारत और मालदीव के बीच पर्यटन, समुद्री व्यापार, खाद्य उत्पाद, निर्माण सामग्री और सेवाओं के क्षेत्र में पहले से ही आर्थिक सहयोग मौजूद है। FTA इस सहयोग को और विस्तारित कर सकता है।

डिजिटल साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के दौरान डिजिटल सहयोग पर भी विशेष जोर दिया गया।

दोनों देशों ने डिजिटल गवर्नेंस और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

इस साझेदारी के अंतर्गत भारत अपने विभिन्न डिजिटल अनुभवों को मालदीव के साथ साझा करेगा।

इनमें प्रमुख हैं:

  • UPI
  • डिजिटल भुगतान प्रणाली
  • ई-गवर्नेंस
  • डिजिटल सेवाएं
  • प्रशासनिक डिजिटलीकरण

भारत पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं के क्षेत्र में कई पहल लागू कर चुका है, जिनके अनुभवों का उपयोग मालदीव भी अपने प्रशासनिक ढांचे में कर सकता है।

मालदीव में UPI लागू करने की दिशा में सहमति

दोनों देशों के बीच डिजिटल भुगतान को सरल बनाने के उद्देश्य से मालदीव में Unified Payments Interface (UPI) को लागू करने की दिशा में भी सहमति बनी।

इससे संभावित रूप से:

  • भारतीय पर्यटकों को भुगतान में सुविधा मिलेगी।
  • सीमा पार डिजिटल भुगतान आसान हो सकते हैं।
  • पर्यटन क्षेत्र को लाभ मिल सकता है।
  • डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा मिलेगा।

मालदीव भारतीय पर्यटकों के पसंदीदा अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों में शामिल है, इसलिए डिजिटल भुगतान प्रणाली दोनों देशों के नागरिकों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर समझौता

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के उद्देश्य से भारत और मालदीव के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ।

इस समझौते के तहत:

Indian Pharmacopoeia Commission और Maldives Food and Drug Authority के बीच सहयोग स्थापित किया जाएगा।

इसका उद्देश्य दवाओं की गुणवत्ता, मानकों और नियामकीय प्रक्रियाओं को बेहतर बनाना है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में दोनों देशों के बीच पहले से सहयोग जारी है और इस नए समझौते से चिकित्सा सेवाओं तथा औषधि नियमन में अतिरिक्त सहयोग मिलने की संभावना है।

मत्स्य पालन और Aquaculture में सहयोग

मालदीव की अर्थव्यवस्था में मत्स्य पालन (Fisheries) का महत्वपूर्ण स्थान है।

इस क्षेत्र को और मजबूत बनाने के लिए दोनों देशों ने मत्स्य पालन तथा एक्वाकल्चर में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया।

इस साझेदारी के अंतर्गत संभावित रूप से:

  • तकनीकी सहयोग
  • अनुसंधान
  • समुद्री संसाधन प्रबंधन
  • आधुनिक मत्स्य तकनीक
  • प्रशिक्षण कार्यक्रम

जैसे क्षेत्रों में कार्य किया जा सकता है।

मौसम विज्ञान और जलवायु अनुसंधान

जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए दोनों देशों ने मौसम विज्ञान और पर्यावरणीय अनुसंधान में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

इसके अंतर्गत:

  • Indian Institute of Tropical Meteorology
  • Maldives Meteorological Service

के बीच सहयोग विकसित किया जाएगा।

इस साझेदारी का उद्देश्य मौसम पूर्वानुमान, समुद्री अध्ययन, जलवायु अनुसंधान तथा पर्यावरण संबंधी वैज्ञानिक सहयोग को मजबूत करना है।

डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में भारत का अनुभव साझा होगा

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण पहलें लागू की हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • आधार
  • डिजिलॉकर
  • UPI
  • डिजिटल पहचान प्रणाली
  • ऑनलाइन सरकारी सेवाएं

मालदीव ने इन क्षेत्रों में भारत के अनुभवों से सीखने और डिजिटल प्रशासन को मजबूत बनाने में सहयोग की इच्छा व्यक्त की है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण भी किया।

इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • हनीमाधू एयरपोर्ट विस्तार परियोजना
  • अद्दू सिटी सड़क परियोजना
  • ड्रेनेज परियोजनाएं

इन परियोजनाओं का उद्देश्य मालदीव में आधारभूत ढांचे और सार्वजनिक सुविधाओं को मजबूत करना है।

आवास और सार्वजनिक सुविधाओं में भारत का सहयोग

भारत ने मालदीव को:

  • लगभग 3,300 आवास इकाइयों (Housing Units)
  • विभिन्न सरकारी विभागों के लिए 72 वाहन

भी उपलब्ध कराए।

इनका उपयोग आवासीय विकास तथा प्रशासनिक कार्यों को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए BHISHM Units की सौगात

भारत ने मालदीव को दो आरोग्य मैत्री हेल्थ क्यूब (BHISHM Units) भी प्रदान किए।

ये आपातकालीन स्वास्थ्य सहायता प्रणाली के रूप में विकसित मोबाइल चिकित्सा इकाइयां हैं।

इनका उपयोग प्राकृतिक आपदा, आपात स्थिति अथवा स्वास्थ्य सेवाओं की त्वरित आवश्यकता के दौरान किया जा सकता है।

पर्यावरण संरक्षण का साझा संदेश

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने संयुक्त रूप से पौधारोपण कार्यक्रम में भी भाग लिया।

यह कार्यक्रम भारत की “एक पेड़ मां के नाम” पहल तथा मालदीव के वृक्षारोपण अभियान के साथ जोड़ा गया।

दोनों नेताओं ने पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।

हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक महत्व

भारत और मालदीव के संबंध केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं हैं। हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

मालदीव समुद्री व्यापार मार्गों के निकट स्थित है और क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, मानवीय सहायता तथा समुद्री सहयोग जैसे विषयों पर भारत और मालदीव लंबे समय से साथ कार्य करते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा के दौरान हुए समझौते दोनों देशों के बीच विश्वास, आर्थिक सहयोग, डिजिटल साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं। आने वाले समय में इन समझौतों के क्रियान्वयन के साथ व्यापार, निवेश, आधारभूत ढांचा, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और जन-जन के संबंधों को नई गति मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

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