संसद के मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और भारत की प्रतिक्रिया को लेकर हुई चर्चा में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार का पक्ष विस्तार से रखा। बहस का प्रमुख विषय हाल ही में हुए पहलगाम आतंकी हमले और उसके बाद भारत द्वारा की गई कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर था। विपक्षी दलों ने सरकार से कई सवाल पूछे, जिनमें सबसे प्रमुख सवाल यह था कि यदि हमला इतना गंभीर था तो भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ पूर्ण युद्ध (War) क्यों नहीं किया।
इस प्रश्न का उत्तर देते हुए अमित शाह ने कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति के अनुसार कार्रवाई की और आतंकियों के खिलाफ लक्षित अभियान चलाया। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े निर्णय परिस्थितियों, रणनीतिक आवश्यकताओं और देशहित को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। अपने संबोधन के दौरान गृह मंत्री ने कांग्रेस की पूर्व सरकारों की नीतियों, भारत-पाकिस्तान संबंधों के इतिहास और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय समझौतों का भी उल्लेख किया।
बहस के दौरान अमित शाह ने कई ऐतिहासिक घटनाओं का हवाला देते हुए विपक्ष की आलोचना की तथा कहा कि वर्तमान सरकार आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट और निर्णायक नीति पर काम कर रही है।
संसद में पूरा मुद्दा क्या था?
संसद में हुई चर्चा के दौरान विपक्षी सांसदों ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए। विपक्ष का तर्क था कि यदि भारत पर इतना बड़ा आतंकी हमला हुआ, तो सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध जैसी व्यापक सैन्य कार्रवाई क्यों नहीं की।
इस पर जवाब देते हुए अमित शाह ने कहा कि किसी भी सरकार का उद्देश्य केवल युद्ध करना नहीं होता, बल्कि देश की सुरक्षा सुनिश्चित करना और आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करना होता है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आवश्यक सैन्य और सुरक्षा कदम उठाए तथा आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया।
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध कार्रवाई का स्वरूप परिस्थितियों और रणनीतिक आवश्यकताओं के अनुसार तय किया जाता है।
कांग्रेस की नीतियों पर अमित शाह का हमला
अपने भाषण के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस की पूर्व सरकारों की नीतियों की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान संबंधों से जुड़े कई ऐतिहासिक निर्णयों का प्रभाव आज भी दिखाई देता है। गृह मंत्री के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियों को समझने के लिए अतीत में लिए गए राजनीतिक और कूटनीतिक निर्णयों पर भी नजर डालना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष वर्तमान सरकार से प्रश्न पूछ रहा है, लेकिन उसे अपने शासनकाल के दौरान लिए गए फैसलों की भी समीक्षा करनी चाहिए।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) पर टिप्पणी
अमित शाह ने अपने भाषण में पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (PoK) का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि यदि आज यह क्षेत्र भारत के नियंत्रण में नहीं है, तो इसके पीछे ऐतिहासिक घटनाओं और तत्कालीन राजनीतिक निर्णयों की भूमिका रही है।
गृह मंत्री ने इस संदर्भ में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा से जुड़े मुद्दों पर अलग दृष्टिकोण के साथ कार्य कर रही है।
इंडस वॉटर ट्रीटी का भी किया उल्लेख
भाषण के दौरान अमित शाह ने इंडस वॉटर ट्रीटी (Indus Waters Treaty) का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1960 में हुए इस समझौते को लेकर उनकी पार्टी लंबे समय से अपनी अलग राय रखती रही है।
गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि उस समय हुए समझौते में भारत के हितों को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी गई।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार राष्ट्रीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभिन्न नीतियों की समीक्षा करती रहती है।
शिमला समझौते पर भी उठाए सवाल
अमित शाह ने वर्ष 1971 के बाद हुए शिमला समझौते का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि उस समय हुए राजनीतिक निर्णयों का प्रभाव आज भी भारत-पाकिस्तान संबंधों पर दिखाई देता है।
गृह मंत्री ने कहा कि इतिहास से सीख लेकर वर्तमान सरकार सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े मामलों में अधिक स्पष्ट और रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने का प्रयास कर रही है।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की सदस्यता पर टिप्पणी
अपने भाषण में अमित शाह ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (United Nations Security Council) में भारत की स्थायी सदस्यता का मुद्दा भी उठाया।
उन्होंने कहा कि भारत आज वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक शक्ति के रूप में उभर रहा है।
गृह मंत्री के अनुसार सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की भूमिका मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत लंबे समय से सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग करता रहा है और सरकार इस दिशा में कूटनीतिक प्रयास जारी रखे हुए है।
राहुल गांधी पर राजनीतिक टिप्पणी
बहस के दौरान अमित शाह ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का भी उल्लेख किया।
उन्होंने डोकलाम विवाद के समय राहुल गांधी और चीन के राजनयिकों के बीच हुई मुलाकात को लेकर राजनीतिक टिप्पणी की।
गृह मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में सरकार का दृष्टिकोण स्पष्ट और राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।
इस मुद्दे पर संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
पी. चिदंबरम पर लगाए आरोप
अमित शाह ने पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम की भी आलोचना की।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष सरकार से आतंकवाद से जुड़े मामलों में ऐसे प्रश्न पूछ रहा है, जिनसे पाकिस्तान को लाभ मिल सकता है।
गृह मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के मामलों में देश को एकजुट रहना चाहिए और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर विचार करना चाहिए।
विपक्ष ने इन आरोपों का विरोध भी किया और सरकार के दावों पर सवाल उठाए।
पहलगाम हमले के आरोपियों को लेकर क्या कहा?
अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि सुरक्षा एजेंसियों की जांच के आधार पर पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों के पाकिस्तान से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए विभिन्न तथ्यों और सबूतों के आधार पर सरकार ने अपनी कार्रवाई की।
गृह मंत्री ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों के पास उपलब्ध जानकारी के आधार पर आतंकियों की पहचान और उनके नेटवर्क का विश्लेषण किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार आतंकवाद के मामलों में तथ्यों और जांच के आधार पर ही कार्रवाई करती है।
ऑपरेशन सिंदूर का भी किया उल्लेख
अपने भाषण में अमित शाह ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की।
उन्होंने कहा कि सरकार की नीति स्पष्ट है कि देश पर हमला करने वाले आतंकवादी संगठनों और उनके ढांचे के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
गृह मंत्री के अनुसार भारत की सुरक्षा एजेंसियां और सशस्त्र बल राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार सतर्क हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है।
युद्ध और आतंकवाद विरोधी कार्रवाई में क्या अंतर है?
बहस के दौरान उठे प्रश्नों के संदर्भ में यह भी चर्चा हुई कि किसी आतंकी हमले के बाद सरकार के पास केवल युद्ध ही एकमात्र विकल्प नहीं होता।
रक्षा और विदेश नीति के विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी देश के पास कई प्रकार के विकल्प हो सकते हैं, जैसे:
- कूटनीतिक कार्रवाई
- आर्थिक कदम
- सीमित सैन्य अभियान
- आतंकवादी ढांचे पर लक्षित कार्रवाई
- अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दबाव
- खुफिया एवं सुरक्षा अभियान
सरकार परिस्थितियों, सुरक्षा आकलन और रणनीतिक आवश्यकताओं के आधार पर उपयुक्त विकल्प चुनती है।
इसी कारण विभिन्न देशों की आतंकवाद विरोधी प्रतिक्रियाएं अलग-अलग परिस्थितियों में अलग स्वरूप की हो सकती हैं।
संसद में राजनीतिक माहौल रहा गर्म
अमित शाह के संबोधन के दौरान संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
भाजपा सांसदों ने गृह मंत्री के वक्तव्यों का समर्थन किया, जबकि विपक्षी दलों ने कई बिंदुओं पर अपनी असहमति दर्ज कराई। राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, भारत-पाकिस्तान संबंध, ऐतिहासिक समझौते और विदेश नीति से जुड़े विषयों पर दोनों पक्षों ने अपने-अपने राजनीतिक और वैचारिक दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। संसद में हुई यह चर्चा राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक बहस का हिस्सा रही, जिसमें विभिन्न ऐतिहासिक घटनाओं, वर्तमान नीतियों और सुरक्षा रणनीतियों का उल्लेख करते हुए अपने-अपने पक्ष रखे गए।

