Operation Mahadev: श्रीनगर के जंगलों में सुरक्षाबलों की बड़ी कार्रवाई, तीन आतंकवादी ढेर; पहलगाम हमले से जुड़े संदिग्ध मास्टरमाइंड के मारे जाने का दावा

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों के बीच भारतीय सुरक्षा बलों ने एक महत्वपूर्ण संयुक्त ऑपरेशन में तीन आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है। श्रीनगर के हरवन क्षेत्र के पास लिडवास (Lidwas) के घने जंगलों में हुई इस मुठभेड़ को “ऑपरेशन महादेव” नाम दिया गया। सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में यह अभियान कई घंटों तक चला, जिसमें सुरक्षा एजेंसियों ने आधुनिक तकनीक, खुफिया सूचना और ड्रोन निगरानी का उपयोग किया।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मारे गए तीनों आतंकवादी पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े बताए जा रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इनमें से एक आतंकी का संबंध अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले से होने की आशंका है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अंतिम पुष्टि पहचान, फॉरेंसिक जांच और अन्य जांच प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही की जाएगी।

यह ऑपरेशन घाटी में सक्रिय विदेशी आतंकियों के खिलाफ चल रहे इंटेलिजेंस-आधारित अभियानों की श्रृंखला का हिस्सा माना जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल आतंकियों को निष्क्रिय करना ही नहीं, बल्कि उनके नेटवर्क, लॉजिस्टिक सपोर्ट और भविष्य की संभावित साजिशों को भी विफल करना है।

खुफिया सूचना के आधार पर शुरू किया गया ऑपरेशन

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार ऑपरेशन महादेव की शुरुआत एक विशेष खुफिया इनपुट मिलने के बाद की गई।

बताया गया कि तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को कुछ ऐसे इलेक्ट्रॉनिक संकेत प्राप्त हुए, जिनके आधार पर आतंकियों की मौजूदगी का संदेह हुआ। इसके बाद संबंधित एजेंसियों ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई और संदिग्ध गतिविधियों की पुष्टि होने पर संयुक्त अभियान शुरू किया।

सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी करते हुए आतंकियों को भागने का मौका नहीं दिया। ऑपरेशन के दौरान जंगल के कई हिस्सों में तलाशी अभियान भी चलाया गया।

हरवन के लिडवास जंगलों में हुई मुठभेड़

यह मुठभेड़ श्रीनगर के हरवन इलाके के समीप स्थित लिडवास के जंगलों में हुई।

यह क्षेत्र दाचीगाम राष्ट्रीय उद्यान के नजदीक स्थित है और घने जंगल, ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र तथा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सुरक्षा अभियानों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है।

सुरक्षा बलों ने इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाया। जंगल के विभिन्न हिस्सों को घेरकर आतंकियों की संभावित आवाजाही पर निगरानी रखी गई।

सेना, CRPF और जम्मू-कश्मीर पुलिस की संयुक्त कार्रवाई

ऑपरेशन महादेव में भारतीय सेना की 24 राष्ट्रीय राइफल्स (Rashtriya Rifles) तथा 4 पैरा यूनिट ने शुरुआती कार्रवाई की।

बाद में अभियान में:

केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और जम्मू-कश्मीर पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की टीमें भी शामिल हुईं।

संयुक्त अभियान के दौरान सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके को घेरकर तलाशी अभियान चलाया और संभावित भागने के रास्तों को भी बंद कर दिया।

इस प्रकार के संयुक्त अभियान में विभिन्न एजेंसियां अपने-अपने विशेष अनुभव और संसाधनों का उपयोग करती हैं, जिससे ऑपरेशन की सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

मारे गए आतंकियों की पहचान

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मारे गए आतंकवादियों की पहचान निम्नलिखित नामों से की जा रही है:

  • सुलेमान शाह (उर्फ हाशिम मूसा / आसिफ)
  • जिब्रान
  • हमज़ा अफगानी (उर्फ अबू हमज़ा / यासिर)

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार तीनों विदेशी आतंकवादी बताए जा रहे हैं और उनका संबंध पाकिस्तान आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से होने की आशंका है।

हालांकि अधिकारियों ने कहा है कि पहचान की अंतिम पुष्टि दस्तावेजों, फॉरेंसिक जांच, डीएनए परीक्षण तथा अन्य जांच प्रक्रियाओं के बाद ही की जाएगी।

पहलगाम आतंकी हमले से संभावित संबंध

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में मारे गए आतंकियों में से एक का संबंध अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले से होने की संभावना व्यक्त की गई है।

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसरन क्षेत्र में हुए आतंकी हमले में कई लोगों की जान गई थी, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने व्यापक जांच शुरू की थी।

अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन महादेव में मारे गए आतंकियों और उस हमले के बीच संबंधों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही आधिकारिक रूप से की जाएगी।

आईजीपी कश्मीर का बयान

कश्मीर जोन के पुलिस महानिरीक्षक (IGP) ने मीडिया से बातचीत में बताया कि यह एक लंबा और सुनियोजित अभियान था।

उन्होंने कहा कि मुठभेड़ के बाद तीन आतंकवादियों के शव बरामद किए गए हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम पहचान और उनके आपराधिक रिकॉर्ड की पुष्टि सभी जांच प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद ही की जाएगी।

सुरक्षा एजेंसियां घटना से जुड़े सभी तथ्यों का विस्तृत विश्लेषण कर रही हैं।

ड्रोन और आधुनिक तकनीक का हुआ उपयोग

ऑपरेशन महादेव के दौरान सुरक्षा बलों ने आधुनिक तकनीकी संसाधनों का भी व्यापक उपयोग किया।

घने जंगल और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण ड्रोन निगरानी (Drone Surveillance) का सहारा लिया गया, जिससे संदिग्ध गतिविधियों पर वास्तविक समय (Real-Time) में नजर रखी जा सके।

इसके अलावा तकनीकी निगरानी, संचार विश्लेषण और अन्य आधुनिक उपकरणों का उपयोग भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।

हाल के वर्षों में आतंकवाद विरोधी अभियानों में आधुनिक तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ी है।

मुठभेड़ स्थल से हथियार बरामद

सुरक्षा एजेंसियों ने मुठभेड़ स्थल से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किया।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बरामद सामग्री में शामिल हैं:

  • एक M4 कार्बाइन
  • दो AK-47 राइफलें
  • 17 राइफल ग्रेनेड
  • बड़ी मात्रा में गोला-बारूद
  • अन्य सैन्य उपयोग की सामग्री (War-like Stores)

बरामद हथियारों की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इनका उपयोग किन गतिविधियों में किया जाना था तथा उनका स्रोत क्या था।

सेना और पुलिस ने क्या कहा?

भारतीय सेना की श्रीनगर स्थित चिनार कोर ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि संयुक्त अभियान के दौरान तीन आतंकवादियों को मार गिराया गया है।

सेना ने यह भी बताया कि पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान जारी रखा गया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वहां कोई अन्य आतंकी मौजूद न हो।

वहीं श्रीनगर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पुष्टि की कि मारे गए आतंकियों के विदेशी होने की संभावना है और जांच एजेंसियां सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।

पहलगाम हमले के बाद बढ़ाए गए सुरक्षा अभियान

पहलगाम आतंकी हमले के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकवाद विरोधी अभियानों की तीव्रता बढ़ा दी थी।

घाटी के विभिन्न संवेदनशील क्षेत्रों में:

  • तलाशी अभियान
  • इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन
  • सीमा पार से घुसपैठ रोकने के प्रयास
  • तकनीकी निगरानी
  • ड्रोन सर्विलांस

जैसी गतिविधियों को और मजबूत किया गया।

सुरक्षा एजेंसियों का उद्देश्य आतंकी नेटवर्क, उनके सहयोगियों और लॉजिस्टिक सपोर्ट सिस्टम को कमजोर करना है।

इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन पर बढ़ा जोर

हाल के वर्षों में जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियां पारंपरिक कॉम्बिंग ऑपरेशन के साथ-साथ इंटेलिजेंस आधारित अभियानों पर अधिक ध्यान दे रही हैं।

इस रणनीति के तहत पहले संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी की जाती है, उसके बाद सटीक सूचना के आधार पर सीमित क्षेत्र में कार्रवाई की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के अभियानों से आम नागरिकों पर प्रभाव कम पड़ता है तथा सुरक्षा बलों को अधिक सटीक सफलता मिलने की संभावना रहती है।

आतंकवाद विरोधी अभियान लगातार जारी

सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार ऑपरेशन महादेव किसी एक घटना तक सीमित अभियान नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी व्यापक रणनीति का हिस्सा है।

सुरक्षा एजेंसियां लगातार सीमा पार से होने वाली घुसपैठ, आतंकी नेटवर्क, हथियारों की तस्करी और स्थानीय सहयोग तंत्र पर निगरानी बनाए हुए हैं। आधुनिक तकनीक, बेहतर खुफिया समन्वय और विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के संयुक्त अभियानों के माध्यम से आतंकवादी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने के प्रयास जारी हैं। अधिकारियों का कहना है कि क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए भविष्य में भी ऐसे इंटेलिजेंस-आधारित अभियान आवश्यकता के अनुसार जारी रहेंगे तथा प्रत्येक कार्रवाई तथ्यों, जांच और सुरक्षा मूल्यांकन के आधार पर की जाएगी।

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