Punjab में भूजल बचाने की पहल: 15 हजार तालाबों की होगी सफाई, मान सरकार ने जारी किए ₹4573 करोड़।

Punjab में भूजल बचाने की पहल: 15 हजार तालाबों की होगी सफाई, मान सरकार ने जारी किए ₹4573 करोड़।

पंजाब सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से उपेक्षित पड़े तालाबों और छप्पड़ों की सफाई के लिए बड़े स्तर पर अभियान शुरू करने की तैयारी की है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार का उद्देश्य गांवों में जल निकासी व्यवस्था को मजबूत बनाना, भूजल स्तर में सुधार करना और मानसून के दौरान जलभराव जैसी समस्याओं को कम करना है। इसी योजना के तहत राज्यभर के लगभग 15,000 तालाबों और छप्पड़ों की सफाई कराई जाएगी।

ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग के अनुसार यह अभियान मानसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि बरसात के दौरान गांवों में पानी जमा होने, गंदे पानी के ओवरफ्लो और जलजनित बीमारियों की आशंका को कम किया जा सके। सरकार का मानना है कि लंबे समय से गाद से भरे तालाबों की सफाई होने से वर्षा जल का बेहतर संचयन होगा और भूजल रिचार्ज में भी मदद मिलेगी।

पिछले कई वर्षों से राज्य के अनेक गांवों में स्थित छप्पड़ों और तालाबों की नियमित सफाई नहीं हो पाई थी। परिणामस्वरूप कई स्थानों पर जल निकासी बाधित हो गई और बरसात के मौसम में लोगों को जलभराव, बदबू और गंदे पानी की समस्या का सामना करना पड़ता था। अब सरकार इन समस्याओं का स्थायी समाधान करने की दिशा में कार्य कर रही है।

ग्रामीण विकास के लिए 4,573 करोड़ रुपये का बजट

पंजाब सरकार ने गांवों के समग्र विकास के लिए 4,573 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। इस बजट के माध्यम से केवल तालाबों और छप्पड़ों की सफाई ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की मूलभूत सुविधाओं को भी बेहतर बनाने की योजना बनाई गई है।

सरकार का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, स्वच्छता, सीवेज प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए कई परियोजनाओं पर एक साथ कार्य किया जाएगा। इससे गांवों की आधारभूत संरचना मजबूत होगी और ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है।

भूजल स्तर सुधारने पर सरकार का विशेष फोकस

पंजाब लंबे समय से गिरते भूजल स्तर की चुनौती का सामना कर रहा है। कृषि प्रधान राज्य होने के कारण यहां भूमिगत जल का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। लगातार दोहन के कारण कई जिलों में भूजल स्तर तेजी से नीचे जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्षा जल का उचित संचयन किया जाए और तालाबों की क्षमता बढ़ाई जाए तो भूजल रिचार्ज की प्रक्रिया को मजबूती मिल सकती है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने पुराने तालाबों और छप्पड़ों की सफाई का निर्णय लिया है।

तालाबों से गाद हटाने के बाद उनमें अधिक मात्रा में वर्षा जल संग्रहित किया जा सकेगा, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भूजल स्तर को प्राकृतिक रूप से बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी।

मानसून से पहले पूरा होगा सफाई अभियान

सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मानसून शुरू होने से पहले अधिकतम तालाबों और छप्पड़ों की सफाई पूरी कर ली जाए। बारिश के मौसम में यदि तालाब पहले से साफ होंगे तो अतिरिक्त वर्षा जल को आसानी से संग्रहित किया जा सकेगा और गांवों में जलभराव की संभावना कम होगी।

इसके साथ ही जहां आवश्यकता होगी वहां गंदे पानी की निकासी की भी व्यवस्था की जाएगी ताकि ओवरफ्लो की स्थिति उत्पन्न न हो। ग्रामीण विकास विभाग ने विभिन्न जिलों में प्राथमिकता के आधार पर कार्य शुरू कर दिया है।

तरुणप्रीत सिंह सौंद ने किया परियोजनाओं का निरीक्षण

ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने फतेहगढ़ साहिब जिले के विभिन्न गांवों का दौरा कर चल रहे सफाई कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने सरहिंद ब्लॉक के गांव चनारथल कलां, खरे और डेरा मीरा मीरां सहित बस्सी पठाणां ब्लॉक के गांव रैली तथा खेड़ा ब्लॉक के गांव इसरहेल और चुनीकलां में चल रहे कार्यों की समीक्षा की।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सफाई कार्य तय समय सीमा के भीतर और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए ताकि ग्रामीणों को जल्द इसका लाभ मिल सके।

15 से 20 वर्षों से नहीं हुई थी कई छप्पड़ों की सफाई

मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने बताया कि राज्य के अनेक गांवों में ऐसे छप्पड़ मौजूद हैं जिनकी पिछले 15 से 20 वर्षों से सफाई नहीं हुई थी। कई स्थानों पर गाद जमा होने के कारण उनकी जल संग्रहण क्षमता काफी कम हो चुकी थी।

ऐसी स्थिति में बरसात के दौरान छप्पड़ ओवरफ्लो होकर आसपास के घरों, गलियों और खेतों तक गंदा पानी पहुंचा देते थे। इससे ग्रामीणों को काफी परेशानी होती थी और कई जगहों पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आती थीं।

सरकार का कहना है कि अब ऐसे सभी छप्पड़ों की पहचान कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से साफ किया जा रहा है ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं से बचा जा सके।

1062 छप्पड़ों में शुरू हुआ सुधार कार्य

सरकार द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार राज्य के 1062 चिन्हित छप्पड़ों में गंदे पानी की निकासी का कार्य शुरू किया जा चुका है। इनमें से बड़ी संख्या में जल निकासी पूरी हो चुकी है।

इसके अतिरिक्त लगभग 400 छप्पड़ों से गाद निकालने का कार्य भी पूरा किया जा चुका है। जहां आवश्यकता महसूस की जा रही है वहां नालों की डीसिल्टिंग और रिसिल्टिंग का कार्य भी कराया जा रहा है ताकि पानी का प्रवाह बाधित न हो।

अधिकारियों का कहना है कि शेष स्थानों पर भी कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है और आने वाले समय में अधिक गांवों को इस अभियान में शामिल किया जाएगा।

थापर और सीचेवाल मॉडल को अपनाने की तैयारी

ग्रामीण क्षेत्रों में सीवेज प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए पंजाब सरकार थापर मॉडल और सीचेवाल मॉडल को अपनाने की योजना बना रही है। इन मॉडलों का उद्देश्य गंदे पानी के वैज्ञानिक प्रबंधन और प्राकृतिक तरीके से उसके उपचार को बढ़ावा देना है।

यदि इन मॉडलों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो गांवों में सीवेज की समस्या कम होगी और उपचारित पानी का उपयोग अन्य आवश्यक कार्यों में भी किया जा सकेगा। इससे पर्यावरण संरक्षण और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग को बढ़ावा मिलेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की समस्या होगी कम

बरसात के मौसम में पंजाब के कई गांवों में जलभराव की समस्या सामने आती है। तालाबों और छप्पड़ों में गाद जमा होने के कारण अतिरिक्त पानी बाहर निकलकर गलियों और रिहायशी क्षेत्रों में पहुंच जाता है।

सरकार का मानना है कि समय पर सफाई होने से पानी का उचित संग्रहण संभव होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में जलभराव की घटनाओं में कमी आएगी। इससे सड़कें, गलियां और सार्वजनिक स्थान भी लंबे समय तक सुरक्षित रहेंगे।

जल संरक्षण और पर्यावरण को मिलेगा लाभ

तालाबों और छप्पड़ों की सफाई केवल जल निकासी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण से भी है। साफ जलाशयों में वर्षा जल का बेहतर संचयन संभव होता है, जिससे भूजल पुनर्भरण की प्रक्रिया मजबूत होती है।

इसके अलावा गंदे पानी का ठहराव कम होने से मच्छरों के पनपने की संभावना भी घटती है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

ग्रामीण विकास अभियान में जनभागीदारी पर भी जोर

राज्य सरकार का प्रयास है कि तालाबों और छप्पड़ों की सफाई केवल सरकारी अभियान तक सीमित न रहे, बल्कि ग्रामीण समुदाय भी इसमें सक्रिय भागीदारी निभाए। स्थानीय पंचायतों, ग्रामीण विकास समितियों और संबंधित विभागों के सहयोग से इन जल स्रोतों के नियमित रखरखाव पर भी जोर दिया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि यदि सफाई के बाद इन जलाशयों का नियमित रखरखाव किया जाए तो भविष्य में दोबारा गाद जमा होने और जल निकासी संबंधी समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

अधिकारियों को समयबद्ध कार्य पूरा करने के निर्देश

ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सफाई कार्य की नियमित निगरानी की जाए और जहां भी आवश्यकता हो वहां अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ समयबद्ध तरीके से परियोजनाओं को पूरा करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य है कि मानसून शुरू होने से पहले अधिक से अधिक गांवों में तालाबों और छप्पड़ों की सफाई पूरी कर ली जाए, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में जल प्रबंधन व्यवस्था अधिक प्रभावी बन सके और भविष्य में आने वाली चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना किया जा सके।

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