भारत सरकार घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक रणनीति पर काम कर रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन पर उसके असर को देखते हुए केंद्र ने देश में एलपीजी का बड़ा रणनीतिक भंडार (Strategic LPG Reserve) तैयार करने की योजना बनाई है। इस योजना का उद्देश्य किसी भी अंतरराष्ट्रीय संकट, युद्ध या समुद्री मार्ग में रुकावट की स्थिति में भी देशभर में रसोई गैस की आपूर्ति बिना बाधा जारी रखना है।
सरकारी तेल कंपनियों के स्तर पर इस दिशा में तेजी से तैयारी शुरू हो चुकी है। योजना के अनुसार देश में एलपीजी का ऐसा स्टॉक तैयार किया जाएगा, जिससे कम से कम 30 दिनों तक गैस की जरूरत पूरी की जा सके। अभी उपलब्ध भंडारण क्षमता इस लक्ष्य से काफी कम है, इसलिए नई स्टोरेज सुविधाओं के निर्माण और मौजूदा क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
होर्मुज संकट ने बढ़ाई चिंता
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है और इन आयातों का अधिकांश भाग होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते देश तक पहुंचता है। यदि इस समुद्री मार्ग पर किसी कारण से आवाजाही प्रभावित होती है तो गैस की सप्लाई पर सीधा असर पड़ सकता है।
यही वजह है कि सरकार अब ऐसे विकल्प तैयार कर रही है, जिससे किसी एक मार्ग या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता खत्म की जा सके। रणनीतिक रिजर्व तैयार होने के बाद अचानक पैदा होने वाले संकट के दौरान घरेलू उपभोक्ताओं को गैस की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
बीपीसीएल बढ़ाएगी स्टोरेज क्षमता
इस महत्वाकांक्षी योजना में भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) बड़ी भूमिका निभाने जा रही है। कंपनी ने अपनी एलपीजी भंडारण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करने का फैसला किया है। वर्तमान में कंपनी के पास लगभग दो लाख मीट्रिक टन के आसपास भंडारण क्षमता है, जिसे बढ़ाकर करीब 3.4 लाख मीट्रिक टन तक ले जाने की योजना बनाई गई है।
इस विस्तार कार्यक्रम पर लगभग 5,000 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है। कंपनी का मानना है कि भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से यह निवेश बेहद अहम साबित होगा। बीपीसीएल के साथ-साथ इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) भी अपनी-अपनी विस्तार योजनाओं को अंतिम रूप देने में जुटी हुई हैं।
क्यों जरूरी हुआ रणनीतिक रिजर्व?
भारत में एलपीजी की मांग लगातार बढ़ रही है। उज्ज्वला योजना सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं के चलते देश के करोड़ों परिवार अब रसोई गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में आपूर्ति बाधित होने का असर सीधे आम लोगों के जीवन पर पड़ सकता है।
देश अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इनमें भी करीब 90 प्रतिशत गैस पश्चिम एशिया से होकर आने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचती है। यही कारण है कि इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा भारत की ऊर्जा व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए केवल आयात पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए अतिरिक्त भंडारण क्षमता विकसित करना समय की जरूरत बन गया है।
पहले भी सामने आ चुका है संकट
इसी वर्ष पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के दौरान भारत में एलपीजी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई थी। उस समय सरकार को हालात पर नजर रखते हुए कई त्वरित कदम उठाने पड़े थे।
घरेलू रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे ताकि आयात में संभावित कमी की भरपाई की जा सके। साथ ही कमर्शियल और औद्योगिक उपयोग के लिए गैस सिलेंडरों की बुकिंग पर भी कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगाए गए थे। इन उपायों का उद्देश्य घरेलू उपभोक्ताओं तक गैस की नियमित आपूर्ति बनाए रखना था।
स्थिति सामान्य होने के बाद ही इन प्रतिबंधों को हटाया गया। इस पूरे घटनाक्रम ने सरकार को यह एहसास कराया कि भविष्य में किसी बड़े संकट से निपटने के लिए मजबूत रणनीतिक भंडारण व्यवस्था जरूरी है।
मौजूदा स्टॉक कितना है?
देश में फिलहाल एलपीजी स्टोरेज की स्थिति सीमित मानी जाती है। पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) के आंकड़ों के अनुसार भारत में 214 एलपीजी बॉटलिंग प्लांट संचालित हैं।
इन संयंत्रों में सामान्य परिस्थितियों में केवल चार से सात दिनों तक का स्टॉक मौजूद रहता है। औसतन इसे पांच दिन का बैकअप माना जाता है। यदि आयात टर्मिनलों और अन्य स्टोरेज सुविधाओं को भी इसमें शामिल कर लिया जाए, तब भी देश के पास लगभग 18 दिनों की जरूरत पूरी करने लायक एलपीजी उपलब्ध रहती है।
सरकार का लक्ष्य इस अवधि को बढ़ाकर सीधे 30 दिन तक पहुंचाना है, ताकि किसी भी आपूर्ति संकट के दौरान देश को पर्याप्त समय मिल सके और आम लोगों पर उसका असर कम से कम हो।
कई स्तरों पर होगी तैयारी
रणनीतिक रिजर्व तैयार करने के लिए सरकार केवल एक प्रकार की स्टोरेज व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना चाहती। योजना के तहत अलग-अलग तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
सबसे पहले जमीन के ऊपर बड़े-बड़े आधुनिक भंडारण टैंक बनाए जाएंगे, जहां बड़ी मात्रा में एलपीजी सुरक्षित रखी जा सकेगी। इसके अलावा भूमिगत विशाल गुफाओं या कैवर्न में भी गैस स्टोर करने का विकल्प तैयार किया जा रहा है। यह तरीका कई देशों में पहले से अपनाया जा चुका है और इसे सुरक्षित माना जाता है।
सरकार समुद्री क्षेत्र में तैरते हुए विशेष जहाजों पर भी एलपीजी का भंडारण करने की संभावनाओं पर काम कर रही है। इससे जरूरत पड़ने पर विभिन्न तटीय क्षेत्रों में तेजी से गैस पहुंचाई जा सकेगी।
आयात के नए स्रोत तलाशने की कवायद
सिर्फ स्टोरेज क्षमता बढ़ाना ही सरकार की रणनीति का हिस्सा नहीं है। आयात के स्रोतों में विविधता लाने पर भी बराबर ध्यान दिया जा रहा है।
अब सरकारी तेल कंपनियां मध्य पूर्व पर निर्भरता कम करने के लिए अमेरिका के साथ दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति समझौते करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा यूरोप और रूस से भी गैस आयात बढ़ाने की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है।
इस रणनीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि किसी एक क्षेत्र में राजनीतिक या सैन्य संकट पैदा हो जाए तो दूसरे स्रोतों से गैस की आपूर्ति जारी रखी जा सके।
ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगा नया आधार
विशेषज्ञों का मानना है कि रणनीतिक एलपीजी रिजर्व केवल आपातकालीन स्थिति से निपटने का उपाय नहीं है, बल्कि यह देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक कीमतें बढ़ने या आपूर्ति बाधित होने जैसी परिस्थितियों का असर सीमित किया जा सकेगा।
इसके अलावा घरेलू बाजार में गैस की उपलब्धता स्थिर रहने से उपभोक्ताओं और उद्योग दोनों को राहत मिलेगी। सरकार का उद्देश्य भविष्य में ऐसी व्यवस्था विकसित करना है, जिसमें वैश्विक संकटों का असर भारतीय परिवारों की रसोई तक न पहुंचे।
आम उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?
यदि 30 दिन का रणनीतिक एलपीजी रिजर्व तैयार हो जाता है तो किसी भी वैश्विक संकट के दौरान गैस सिलेंडर की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका काफी कम हो जाएगी। अचानक सप्लाई रुकने या जहाजों की आवाजाही बाधित होने की स्थिति में भी सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक रहेगा, जिससे वितरण सामान्य रूप से जारी रखा जा सकेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम भविष्य के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करेगा। बढ़ती घरेलू मांग, आयात पर निर्भरता और बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए भारत अब ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सुरक्षा दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना चाहता है। इसी दिशा में 30 दिन का रणनीतिक एलपीजी रिजर्व तैयार करने की योजना को एक महत्वपूर्ण और दूरगामी पहल माना जा रहा है।




