उत्तर प्रदेश के संभल जिले में नवंबर 2024 में हुई हिंसा को लेकर गठित न्यायिक आयोग ने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। मंगलवार को यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रस्तुत की गई। आयोग की रिपोर्ट में हिंसा के कारणों, घटनाक्रम, सुरक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक कार्रवाई और भविष्य के लिए कई महत्वपूर्ण सुझावों का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद इस मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा को तेज कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और विकास से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी सरकार का पक्ष रखा।
नवंबर 2024 में कैसे शुरू हुआ था विवाद?
संभल में विवाद की शुरुआत नवंबर 2024 में हुई थी। 19 नवंबर 2024 को हिंदू पक्ष की ओर से जिला अदालत में एक याचिका दायर की गई, जिसमें दावा किया गया कि शाही जामा मस्जिद उस स्थान पर स्थित है जिसे मंदिर की भूमि बताया गया।
याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को संबंधित स्थल का सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए। इसके बाद सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू हुई।
24 नवंबर 2024 को दूसरे चरण के सर्वे के दौरान क्षेत्र में तनाव बढ़ गया। इसी दौरान बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और देखते ही देखते स्थिति हिंसक हो गई।
हिंसा के दौरान क्या हुआ?
घटनास्थल पर हिंसा फैलने के बाद पथराव, आगजनी और पुलिस पर हमले की घटनाएं सामने आईं। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और प्रशासन ने अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस हिंसा में चार लोगों की मृत्यु हुई, जबकि 29 पुलिसकर्मी घायल हुए। कई सरकारी और निजी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने तत्काल अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की।
न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में क्या कहा गया?
रिपोर्ट के अनुसार आयोग ने घटना से जुड़े विभिन्न पक्षों की जांच की, जिनमें प्रशासनिक अधिकारियों, पुलिस कर्मियों, स्थानीय लोगों तथा अन्य संबंधित पक्षों के बयान शामिल हैं।
रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि हिंसा पूर्व नियोजित साजिश का परिणाम हो सकती है और इसमें बाहरी तत्वों तथा कुछ कट्टरपंथी संगठनों की भूमिका की जांच का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा रिपोर्ट में अवैध हथियारों और कथित आपराधिक नेटवर्क से जुड़े पहलुओं का भी उल्लेख किया गया है। आयोग ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भविष्य में सुरक्षा तंत्र को और मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
पुलिस की कार्रवाई का भी किया गया उल्लेख
आयोग की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हिंसा फैलने के बाद पुलिस और प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई की।
रिपोर्ट के अनुसार समय पर सुरक्षा बलों की तैनाती और नियंत्रणात्मक कदम उठाए जाने से स्थिति को और अधिक गंभीर होने से रोका जा सका।
पुलिस द्वारा किए गए बचाव और नियंत्रण उपायों का भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान
रिपोर्ट मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतापगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी प्रकार की हिंसा या सामाजिक अशांति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर सख्त कार्रवाई करने की नीति पर काम कर रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार “तुष्टिकरण नहीं, संतुष्टिकरण” की नीति पर कार्य कर रही है।
जनसंख्या संबंधी आंकड़ों का भी उल्लेख
आयोग की रिपोर्ट में संभल जिले के जनसंख्या संबंधी कुछ ऐतिहासिक आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 1947 के बाद से जिले की जनसंख्या संरचना में बदलाव आया है। इन आंकड़ों का उल्लेख रिपोर्ट के ऐतिहासिक विश्लेषण के हिस्से के रूप में किया गया है।
हालांकि, जनसंख्या परिवर्तन के कारणों और उनके संबंध में अलग-अलग विशेषज्ञों तथा शोधकर्ताओं के विभिन्न दृष्टिकोण भी मौजूद हैं। इस विषय पर विस्तृत अध्ययन अलग-अलग स्रोतों में उपलब्ध हैं।
संभल के इतिहास में पहले भी हो चुके हैं तनाव
रिपोर्ट में संभल जिले के इतिहास का भी उल्लेख किया गया है।
आयोग के अनुसार विभिन्न वर्षों में यहां कई बार सांप्रदायिक या स्थानीय विवाद सामने आए थे।
रिपोर्ट में जिन प्रमुख घटनाओं का उल्लेख किया गया है, उनमें शामिल हैं—
- वर्ष 1953 में शिया-सुन्नी विवाद।
- वर्ष 1956, 1959 और 1962 के दौरान सांप्रदायिक तनाव।
- वर्ष 1962 में जनसंघ विधायक महेश गुप्ता की हत्या का उल्लेख।
- वर्ष 1966 और 1976 में धार्मिक संस्थाओं से जुड़े विवाद।
- कुछ घटनाओं के बाद कर्फ्यू लगाए जाने का भी उल्लेख किया गया है।
आयोग ने इन घटनाओं का जिक्र जिले की सामाजिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को समझाने के संदर्भ में किया है।
कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार का रुख
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार कानून का उल्लंघन करने वाले लोगों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई कर रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अपराध और संगठित अपराध पर नियंत्रण के लिए पिछले वर्षों में कई कदम उठाए गए हैं।
सरकार का कहना है कि अपराध नियंत्रण, निवेश, बुनियादी ढांचे और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने पर लगातार कार्य किया जा रहा है।
प्रतापगढ़ में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रतापगढ़ जिले में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास भी किया।
सरकारी जानकारी के अनुसार कुल 186 विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया गया, जिनकी अनुमानित लागत लगभग 570 करोड़ रुपये बताई गई।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, सिंचाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना बताया गया।
आंवला उद्योग और क्षेत्रीय विकास का उल्लेख
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में प्रतापगढ़ के आंवला उद्योग का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि जिले का आंवला उत्पादन और उससे जुड़े उत्पाद राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रहे हैं।
इसके अलावा उन्होंने क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार, मेडिकल कॉलेज और कनेक्टिविटी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया।
गंगा एक्सप्रेसवे सहित आधारभूत ढांचे पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में सड़क संपर्क और आधारभूत ढांचे के विकास के लिए कई बड़ी परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने गंगा एक्सप्रेसवे सहित अन्य सड़क परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापार, निवेश और रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी।
सरकार का मानना है कि बेहतर परिवहन व्यवस्था से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण पर सरकार का पक्ष
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में महिला सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि हाल ही में हुई पुलिस भर्ती में 60,244 अभ्यर्थियों का चयन किया गया, जिनमें 12,000 से अधिक महिलाएं शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास विभाग में 2,425 महिला पर्यवेक्षकों की नियुक्ति का भी उल्लेख किया गया।
सरकार का कहना है कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।
विभिन्न सरकारी योजनाओं का जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में केंद्र और राज्य सरकार की कई योजनाओं का उल्लेख किया, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ
- कन्या सुमंगला योजना
- प्रधानमंत्री आवास योजना
- मुख्यमंत्री आवास योजना
- पीएम-कुसुम योजना
- आयुष्मान भारत योजना
- कोविड-19 अवधि के दौरान संचालित बाल सेवा योजना
उन्होंने कहा कि इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के विभिन्न वर्गों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाना है।
विपक्ष पर भी साधा निशाना
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर भी राजनीतिक टिप्पणी की।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष समाज को जाति और धर्म के आधार पर विभाजित करने की कोशिश कर रहा है। साथ ही हाल ही में बिहार में आयोजित एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके परिवार के संबंध में की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों की भी उन्होंने आलोचना की।
ये टिप्पणियां मुख्यमंत्री के राजनीतिक वक्तव्य का हिस्सा थीं और विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से इस विषय पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
सरकार ने विकास और गरीबी उन्मूलन पर भी रखा पक्ष
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचे, कानून-व्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर विशेष ध्यान दिया है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के अनुसार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने, आवास, स्वास्थ्य बीमा, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के प्रयास किए गए हैं।
संभल हिंसा पर न्यायिक आयोग की रिपोर्ट सामने आने के बाद अब इस मामले को लेकर प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर आगे की कार्रवाई पर भी नजर रहेगी। रिपोर्ट में उल्लिखित तथ्यों, सुझावों और निष्कर्षों के आधार पर राज्य सरकार संबंधित विभागों के साथ आगे की प्रक्रिया तय कर सकती है। साथ ही, कानून-व्यवस्था बनाए रखने, संवेदनशील क्षेत्रों में शांति कायम रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासनिक स्तर पर अतिरिक्त कदम उठाए जाने की संभावना भी बनी हुई है।



