युवाओं की बिगड़ी दिनचर्या पड़ रही सेहत पर भारी, बढ़ रहा इन बीमारियों का खतरा

बदलती जीवनशैली और युवाओं की सेहत पर बढ़ता असर आज के दौर में युवाओं की जिंदगी पढ़ाई, नौकरी, करियर और लगातार बदलती तकनीक के बीच काफी व्यस्त हो गई है। बेहतर भविष्य की दौड़ में कई लोग अपनी रोजमर्रा की सेहत पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। दिनभर कुर्सी पर बैठे रहना, घंटों मोबाइल या कंप्यूटर की स्क्रीन देखना, समय पर खाना न खाना, बाहर का भोजन ज्यादा लेना और देर रात तक जागना धीरे-धीरे जीवनशैली का हिस्सा बनता जा रहा है। इसके साथ ही काम और पढ़ाई का दबाव तनाव को भी बढ़ा रहा है। इन आदतों का असर…

मेडिकल स्टोर से दवा खरीदते समय रहें सावधान, ऐसे पहचानें नकली मेडिसिन और जानें शिकायत का तरीका

दवा हमारे स्वास्थ्य से सीधे जुड़ी होती है, इसलिए इसे खरीदते समय छोटी-सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। हाल ही में अहमदाबाद में सामने आए मामले ने नकली दवाओं के खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जांच के दौरान दिल और हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी बीमारी में इस्तेमाल होने वाली Nicardia Retard 10 MG की करीब 7.20 लाख नकली टैबलेट बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इतनी बड़ी मात्रा में नकली दवाओं की बरामदगी से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं बाजार में पहुंचने वाली दवाओं में कोई नकली दवा तो शामिल नहीं है।…

40 की उम्र से पहले स्ट्रोक का खतरा क्यों बढ़ रहा है? इन लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

आज से कुछ साल पहले अगर 30 या 40 साल की उम्र के किसी व्यक्ति को स्ट्रोक होने की खबर मिलती थी, तो परिवार और आसपास के लोगों के लिए यह बेहद चौंकाने वाली बात होती थी। आम धारणा यही थी कि स्ट्रोक बुजुर्गों की बीमारी है। लेकिन अब कम उम्र में भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें व्यक्ति अचानक बोलने, चलने या शरीर के किसी हिस्से को हिलाने में परेशानी महसूस करने लगता है। कई बार मरीज और परिवार को शुरुआती तौर पर यह समझ ही नहीं आता कि मामला कितना गंभीर है। कम उम्र में स्ट्रोक…

क्रोनिक किडनी डिजीज के मरीजों के लिए बढ़ा खतरा! कमजोर इम्युनिटी बना सकती है शिंगल्स का आसान शिकार

शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में किडनी की भूमिका बेहद अहम होती है। यह सिर्फ खून को साफ करने का काम ही नहीं करती, बल्कि शरीर में पानी, नमक, मिनरल्स और कई जरूरी तत्वों का संतुलन भी बनाए रखती है। जब किडनी ठीक तरह से काम करती है, तब शरीर के विषैले पदार्थ यूरिन के जरिए बाहर निकल जाते हैं। लेकिन यदि किडनी धीरे-धीरे अपनी कार्यक्षमता खोने लगे, तो इसका असर पूरे शरीर पर दिखाई देने लगता है। पिछले कुछ वर्षों में क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, बढ़ता तनाव,…

हेपेटाइटिस-बी को लेकर फैली गलतफहमियां बन सकती हैं खतरनाक, जानिए किन बातों पर भरोसा करें और किन पर नहीं

लिवर से जुड़ी बीमारियों में हेपेटाइटिस-बी (Hepatitis B) एक गंभीर वायरल संक्रमण माना जाता है। यह बीमारी हेपेटाइटिस-बी वायरस (HBV) के कारण होती है और दुनिया भर में करोड़ों लोग इससे प्रभावित हैं। चिकित्सा विज्ञान में इसके इलाज, रोकथाम और प्रबंधन को लेकर काफी प्रगति हुई है, लेकिन समाज में आज भी इस बीमारी को लेकर कई तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। यही कारण है कि कई मरीजों को बीमारी से ज्यादा सामाजिक भेदभाव और गलत जानकारी का सामना करना पड़ता है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों से इस संक्रमण के बारे में सही जानकारी…

सेहत की दौड़ में बढ़ता डर: सोशल मीडिया के ट्रेंड्स कैसे बना रहे हैं लोगों को ओवर-टेस्टिंग का शिकार?

आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि यह लोगों की सोच, आदतों और यहां तक कि उनके स्वास्थ्य से जुड़े फैसलों को भी गहराई से प्रभावित कर रहा है। खासकर हेल्थ और फिटनेस से जुड़े इंफ्लुएंसर्स ने एक नया ट्रेंड खड़ा कर दिया है, जिसमें लोग बिना किसी ठोस जरूरत के महंगे मेडिकल टेस्ट और हेल्थ स्कैन करवाने लगे हैं। जो चीज पहले सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर होती थी, अब वह सोशल मीडिया के “हेल्थ ट्रेंड्स” देखकर की जा रही है। नतीजा यह हो रहा है कि कई लोग असल बीमारी से…

शादी से पहले कुंडली ही नहीं, थैलेसीमिया टेस्ट भी बन रहा जरूरी, बदल रही लोगों की सोच

भारत में शादी केवल दो लोगों के बीच का रिश्ता नहीं मानी जाती, बल्कि यह दो परिवारों के जुड़ने का भी महत्वपूर्ण अवसर होता है। इसी वजह से भारतीय परिवार अक्सर विवाह तय करते समय शिक्षा, नौकरी, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक पृष्ठभूमि, स्वभाव और कई मामलों में कुंडली मिलान जैसी बातों पर ध्यान देते हैं। अब धीरे-धीरे स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं को भी विवाह से पहले की बातचीत का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इन स्वास्थ्य संबंधी विषयों में थैलेसीमिया एक महत्वपूर्ण आनुवंशिक बीमारी है, जिसके बारे में जागरूकता बढ़ाना जरूरी माना जाता है। हर साल 8 मई…