क्रोनिक किडनी डिजीज के मरीजों के लिए बढ़ा खतरा! कमजोर इम्युनिटी बना सकती है शिंगल्स का आसान शिकार

शरीर को स्वस्थ बनाए रखने में किडनी की भूमिका बेहद अहम होती है। यह सिर्फ खून को साफ करने का काम ही नहीं करती, बल्कि शरीर में पानी, नमक, मिनरल्स और कई जरूरी तत्वों का संतुलन भी बनाए रखती है। जब किडनी ठीक तरह से काम करती है, तब शरीर के विषैले पदार्थ यूरिन के जरिए बाहर निकल जाते हैं। लेकिन यदि किडनी धीरे-धीरे अपनी कार्यक्षमता खोने लगे, तो इसका असर पूरे शरीर पर दिखाई देने लगता है। पिछले कुछ वर्षों में क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। बदलती जीवनशैली, अनियमित खानपान, बढ़ता तनाव,…

हेपेटाइटिस-बी को लेकर फैली गलतफहमियां बन सकती हैं खतरनाक, जानिए किन बातों पर भरोसा करें और किन पर नहीं

लिवर से जुड़ी बीमारियों में हेपेटाइटिस-बी (Hepatitis B) एक गंभीर वायरल संक्रमण माना जाता है। यह बीमारी हेपेटाइटिस-बी वायरस (HBV) के कारण होती है और दुनिया भर में करोड़ों लोग इससे प्रभावित हैं। चिकित्सा विज्ञान में इसके इलाज, रोकथाम और प्रबंधन को लेकर काफी प्रगति हुई है, लेकिन समाज में आज भी इस बीमारी को लेकर कई तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। यही कारण है कि कई मरीजों को बीमारी से ज्यादा सामाजिक भेदभाव और गलत जानकारी का सामना करना पड़ता है। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार लोगों से इस संक्रमण के बारे में सही जानकारी…

सेहत की दौड़ में बढ़ता डर: सोशल मीडिया के ट्रेंड्स कैसे बना रहे हैं लोगों को ओवर-टेस्टिंग का शिकार?

आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया सिर्फ मनोरंजन का साधन नहीं रहा, बल्कि यह लोगों की सोच, आदतों और यहां तक कि उनके स्वास्थ्य से जुड़े फैसलों को भी गहराई से प्रभावित कर रहा है। खासकर हेल्थ और फिटनेस से जुड़े इंफ्लुएंसर्स ने एक नया ट्रेंड खड़ा कर दिया है, जिसमें लोग बिना किसी ठोस जरूरत के महंगे मेडिकल टेस्ट और हेल्थ स्कैन करवाने लगे हैं। जो चीज पहले सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर होती थी, अब वह सोशल मीडिया के “हेल्थ ट्रेंड्स” देखकर की जा रही है। नतीजा यह हो रहा है कि कई लोग असल बीमारी से…

शादी से पहले कुंडली ही नहीं, थैलेसीमिया टेस्ट भी बन रहा जरूरी, बदल रही लोगों की सोच

भारत में शादी केवल दो लोगों के बीच का रिश्ता नहीं मानी जाती, बल्कि यह दो परिवारों के जुड़ने का भी महत्वपूर्ण अवसर होता है। इसी वजह से भारतीय परिवार अक्सर विवाह तय करते समय शिक्षा, नौकरी, आर्थिक स्थिति, पारिवारिक पृष्ठभूमि, स्वभाव और कई मामलों में कुंडली मिलान जैसी बातों पर ध्यान देते हैं। अब धीरे-धीरे स्वास्थ्य से जुड़े पहलुओं को भी विवाह से पहले की बातचीत का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इन स्वास्थ्य संबंधी विषयों में थैलेसीमिया एक महत्वपूर्ण आनुवंशिक बीमारी है, जिसके बारे में जागरूकता बढ़ाना जरूरी माना जाता है। हर साल 8 मई…