दवा हमारे स्वास्थ्य से सीधे जुड़ी होती है, इसलिए इसे खरीदते समय छोटी-सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। हाल ही में अहमदाबाद में सामने आए मामले ने नकली दवाओं के खतरे को लेकर चिंता बढ़ा दी है। जांच के दौरान दिल और हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी बीमारी में इस्तेमाल होने वाली Nicardia Retard 10 MG की करीब 7.20 लाख नकली टैबलेट बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इतनी बड़ी मात्रा में नकली दवाओं की बरामदगी से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि कहीं बाजार में पहुंचने वाली दवाओं में कोई नकली दवा तो शामिल नहीं है।
दिल के मरीजों के लिए दवाओं की गुणवत्ता और सही मात्रा बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसी दवा अगर नकली हो या उसमें निर्धारित मात्रा में सही सक्रिय तत्व मौजूद न हो, तो मरीज को इलाज का अपेक्षित लाभ नहीं मिल सकता। गंभीर मामलों में बीमारी नियंत्रित न होने के कारण स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ सकता है। यही वजह है कि दवा खरीदने के साथ-साथ उसकी पैकिंग और दूसरे जरूरी विवरणों की जांच करना भी बेहद अहम है।
नकली दवाओं का मामला क्यों गंभीर है?
किसी भी बीमारी के इलाज में डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा का सही होना जरूरी है। खासतौर पर ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, डायबिटीज जैसी गंभीर और लंबे समय तक चलने वाली बीमारियों में मरीज नियमित रूप से दवाओं पर निर्भर रहते हैं। अगर ऐसी स्थिति में मरीज को असली दवा की जगह नकली या घटिया गुणवत्ता वाली दवा मिल जाए, तो इलाज प्रभावित हो सकता है।
नकली दवा में जरूरी सक्रिय घटक कम मात्रा में हो सकता है, बिल्कुल नहीं हो सकता या उसकी जगह कोई दूसरा पदार्थ मौजूद हो सकता है। इसके अलावा, गलत तरीके से तैयार की गई दवा में ऐसे तत्व भी हो सकते हैं जो शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हों। इसलिए नकली दवा का खतरा केवल यह नहीं है कि उससे बीमारी ठीक नहीं होगी, बल्कि गलत पदार्थ शरीर में जाने से दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।
अहमदाबाद में बड़ी संख्या में नकली टैबलेट पकड़े जाने के बाद जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन दवाओं को तैयार करने और सप्लाई करने के पीछे कौन लोग हैं और इनकी पहुंच कितनी दूर तक थी। जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह भी होगा कि नकली दवाएं किन इलाकों में भेजी गईं और क्या इनका इस्तेमाल मरीजों ने किया है।
दवा असली है या नकली, कैसे लगाएं पता?
नकली दवा को केवल देखकर पहचान लेना हमेशा संभव नहीं होता। कई बार नकली दवाओं की पैकिंग भी इस तरह तैयार की जाती है कि वह पहली नजर में बिल्कुल सामान्य दिखाई दे। फिर भी कुछ चीजों की जांच करके संदिग्ध दवा को लेकर सावधानी बरती जा सकती है।
सबसे पहले दवा के पैकेट और प्रिंटिंग पर नज़र डालें। असली दवा की पैकिंग पर कंपनी का नाम, दवा का नाम और अन्य जानकारी सामान्य तौर पर स्पष्ट रूप से छपी होती है। अगर पैकेट पर प्रिंट धुंधला है, अक्षरों में असामान्य अंतर है, स्पेलिंग गलत है या पैकिंग की गुणवत्ता पहले खरीदी गई दवा से अलग दिखाई देती है, तो सावधान हो जाएं।
दवा की पैकिंग पर मौजूद बैच नंबर, निर्माण की तारीख और एक्सपायरी डेट को जरूर देखें। इन जानकारियों का स्पष्ट रूप से दर्ज होना जरूरी है। अगर बैच नंबर मिटा हुआ दिखाई दे, तारीख में छेड़छाड़ का शक हो या कोई जरूरी जानकारी गायब हो, तो ऐसी दवा इस्तेमाल करने से पहले उसकी पुष्टि करना बेहतर है।
इसके साथ ही दवा का MRP, निर्माता का नाम और लाइसेंस से संबंधित जानकारी भी देखी जा सकती है। पैकेट पर लिखी जानकारी को ध्यान से पढ़ें और अगर किसी चीज को लेकर संदेह हो तो फार्मासिस्ट या संबंधित कंपनी से जानकारी लें।
पैकिंग में मामूली बदलाव को भी नजरअंदाज न करें
अगर आप किसी दवा का नियमित इस्तेमाल करते हैं, तो उसकी पैकिंग में अचानक आया बदलाव भी ध्यान देने योग्य है। उदाहरण के लिए, पहले खरीदी गई दवा के पैकेट का रंग, फॉन्ट, लोगो या टैबलेट की पैकिंग अलग थी और इस बार उसमें असामान्य बदलाव दिख रहा है, तो दवा की पुष्टि किए बिना उसे इस्तेमाल न करें।
हालांकि केवल पैकेट का अलग दिखना अपने आप में नकली दवा होने का प्रमाण नहीं है, क्योंकि कंपनियां समय-समय पर पैकेजिंग बदल सकती हैं। लेकिन अगर बदलाव के साथ प्रिंटिंग खराब हो, जानकारी अधूरी हो या पैकेट की सील संदिग्ध लगे, तो अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
कुछ दवा कंपनियां अपने उत्पादों की सुरक्षा के लिए QR कोड, बारकोड, होलोग्राम या दूसरे सुरक्षा फीचर भी इस्तेमाल करती हैं। जहां ऐसी सुविधा उपलब्ध हो, वहां दिए गए निर्देशों के अनुसार उसकी जांच की जा सकती है। हालांकि किसी भी सुरक्षा फीचर को देखकर ही दवा को पूरी तरह सुरक्षित मान लेना उचित नहीं है।
बहुत कम कीमत पर मिल रही दवा से रहें सतर्क
दवा खरीदते समय कीमत भी एक संकेत हो सकती है। अगर कोई व्यक्ति या दुकान सामान्य कीमत से बहुत कम दाम पर किसी महंगी दवा को बेचने की पेशकश कर रही है, तो तुरंत खरीदने के बजाय इसकी वजह समझना जरूरी है। केवल सस्ती कीमत का मतलब नकली दवा नहीं होता, क्योंकि अलग-अलग दुकानों पर छूट या कीमत में अंतर हो सकता है। लेकिन असामान्य रूप से कम कीमत और संदिग्ध पैकिंग साथ-साथ दिखाई दें तो सतर्क होना चाहिए।
दवाएं हमेशा विश्वसनीय और अधिकृत मेडिकल स्टोर से खरीदना बेहतर है। खरीदारी के बाद बिल लेना भी जरूरी है। बिल में दवा का नाम, मात्रा और दुकान की जानकारी दर्ज होने पर भविष्य में किसी समस्या की स्थिति में यह खरीद का प्रमाण बन सकता है।
दवा खाने के बाद अजीब प्रतिक्रिया हो तो क्या करें?
किसी दवा को लेने के बाद अगर मरीज को असामान्य प्रतिक्रिया महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि हर साइड इफेक्ट का मतलब यह नहीं होता कि दवा नकली है। कई दवाओं के सामान्य दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं और हर मरीज में प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।
अगर दवा लेने के बाद कोई गंभीर या असामान्य समस्या दिखाई देती है, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। दवा का पैकेट, स्ट्रिप और खरीद का बिल अपने पास रखें। इससे डॉक्टर और संबंधित अधिकारियों को दवा की पहचान और जांच में मदद मिल सकती है।
खास तौर पर हृदय रोग या ब्लड प्रेशर की दवा लेने वाले मरीजों को अपनी तरफ से जरूरी दवा अचानक बंद करने का फैसला नहीं करना चाहिए। दवा संदिग्ध लगने पर डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लेकर आगे की कार्रवाई करनी चाहिए।
नकली दवा मिलने पर शिकायत कहां करें?
अगर किसी व्यक्ति को दवा की गुणवत्ता या उसके असली होने को लेकर गंभीर संदेह है, तो मामले को केवल मेडिकल स्टोर तक सीमित न रखें। संबंधित सरकारी दवा नियामक विभाग को इसकी जानकारी दी जा सकती है।
राज्य स्तर पर Food and Drug Control Administration (FDCA) या संबंधित ड्रग कंट्रोल विभाग नकली, मिलावटी और घटिया दवाओं से जुड़ी शिकायतों की जांच करता है। इसके अलावा केंद्र स्तर पर Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) भी दवाओं की गुणवत्ता और नियमन से जुड़ी महत्वपूर्ण संस्था है। शिकायत दर्ज करते समय दवा का नाम, बैच नंबर, निर्माता की जानकारी, खरीद की तारीख और दुकान का विवरण उपलब्ध कराना उपयोगी हो सकता है।
अगर आपके पास दवा का बिल है तो उसे सुरक्षित रखें। साथ ही दवा की स्ट्रिप, बॉक्स और अन्य पैकेजिंग को भी बिना वजह नष्ट न करें, क्योंकि जांच के दौरान ये चीजें महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती हैं।
संदिग्ध दवा को फेंकने की बजाय सुरक्षित रखें
किसी दवा पर शक होने के बाद उसे सामान्य कूड़े में फेंक देना हमेशा सही कदम नहीं है। यदि शिकायत या जांच करनी है तो संबंधित अधिकारियों को दवा का नमूना दिखाने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए डॉक्टर या संबंधित ड्रग कंट्रोल अधिकारी से संपर्क कर यह समझना बेहतर है कि संदिग्ध दवा को कैसे सुरक्षित रखा जाए और आगे क्या करना है।
अगर नकली दवा बेचने या सप्लाई करने का मामला सामने आता है, तो इसकी जानकारी पुलिस को भी दी जा सकती है। ऐसे मामलों में खरीद का बिल, दवा की पैकिंग और अन्य उपलब्ध जानकारी जांच में मदद कर सकती है।
दवा खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
दवा लेते समय केवल डॉक्टर की पर्ची देखकर दुकान से पैकेट लेना पर्याप्त नहीं है। दवा का नाम, उसकी ताकत यानी MG, पैकिंग, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट को एक बार जरूर जांचें। विशेष रूप से उन दवाओं में अतिरिक्त सावधानी बरतें जिनका इस्तेमाल लंबे समय से चल रही गंभीर बीमारी के इलाज के लिए किया जा रहा है।
दवा खरीदने के बाद बिल लेना अपनी आदत बनाएं। पैकेट को तब तक संभालकर रखें जब तक दवा का पूरा कोर्स समाप्त न हो जाए। अगर पैकेट की सील टूटी हुई है, टैबलेट का रंग या आकार सामान्य से अलग है या दवा की पैकिंग में कोई संदिग्ध बदलाव नजर आता है, तो उसे लेकर तुरंत डॉक्टर या फार्मासिस्ट से सलाह लें।
अहमदाबाद में नकली Nicardia Retard 10 MG की बड़ी खेप पकड़े जाने का मामला यह याद दिलाता है कि दवाओं की खरीद में सावधानी कितनी जरूरी है। मरीजों को घबराने के बजाय जागरूक रहना चाहिए। दवा केवल भरोसेमंद स्रोत से खरीदें, पैकिंग और जरूरी विवरणों की जांच करें, बिल संभालकर रखें और किसी भी संदिग्ध दवा की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाएं। थोड़ी-सी सतर्कता किसी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम से बचाने में मदद कर सकती है।




