हरियाली अमावस्या पर क्या करें, क्या नहीं: 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण भी, भारत में नहीं दिखेगा; नहीं लगेगा सूतक

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है और इसी पवित्र महीने में आने वाली अमावस्या का धार्मिक महत्व भी काफी बढ़ जाता है। इस बार सावन अमावस्या 12 अगस्त को पड़ रही है, जिसे हरियाली अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन पूजा-पाठ, दान, पितरों के तर्पण और पौधरोपण जैसी धार्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों का विशेष महत्व माना जाता है। इस बार की हरियाली अमावस्या एक और वजह से चर्चा में है। 12 अगस्त को सूर्य ग्रहण भी होने वाला है। हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। धार्मिक मान्यताओं के…

सोमवती अमावस्या पर बना दुर्लभ योग, पितरों की कृपा और पुण्य फल प्राप्ति के लिए आज का दिन माना जा रहा है विशेष

सनातन परंपरा में अमावस्या तिथि को पूर्वजों के स्मरण, तर्पण और दान-पुण्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है, तब उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह तिथि पितृ तृप्ति, आध्यात्मिक साधना और शुभ कार्यों के लिए विशेष फलदायी मानी जाती है। इस वर्ष सोमवती अमावस्या का महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि इस अवसर पर सर्वार्थ सिद्धि योग का भी निर्माण हो रहा है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत शुभ और सिद्धिदायक योग माना जाता है। मान्यता है कि इस शुभ संयोग में किए गए जप, तप,…

अधिकमास अमावस्या पर पितृ तर्पण का विशेष संयोग, रविवार को सूर्य उपासना के साथ जानें दिनभर के शुभ-अशुभ मुहूर्त

आज का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अधिकमास की अमावस्या और रविवार का संयोग एक साथ बना है। इस अमावस्या को दर्श अमावस्या भी कहा जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों के स्मरण, तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। वहीं रविवार होने के कारण सूर्य देव की पूजा का भी विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन विधि-विधान से किए गए धार्मिक कार्यों से पितृ दोष में कमी आती है और सूर्य से संबंधित कष्टों में भी राहत मिल सकती है। मान्यता है कि अमावस्या…

14-15 जून की अधिकमास अमावस्या विशेष: पूर्वजों की कृपा पाने का शुभ अवसर, जानें तर्पण और पूजा का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या इस बार विशेष महत्व लेकर आई है। तिथियों के संयोग के कारण यह अमावस्या 14 और 15 जून, दोनों दिनों तक प्रभावी रहेगी। अधिकमास स्वयं में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है और लगभग तीन वर्ष में एक बार आता है। ऐसे में इस महीने की अमावस्या को धार्मिक दृष्टि से बहुत फलदायी माना जा रहा है। धर्मग्रंथों में वर्णित मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए जप, तप, दान, तर्पण और पूजा-पाठ का पुण्य लंबे समय तक शुभ फल प्रदान करता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार अमावस्या तिथि 14 जून को दोपहर लगभग…