अधिकमास अमावस्या पर पितृ तर्पण का विशेष संयोग, रविवार को सूर्य उपासना के साथ जानें दिनभर के शुभ-अशुभ मुहूर्त

अधिकमास अमावस्या पर पितृ तर्पण का विशेष संयोग, रविवार को सूर्य उपासना के साथ जानें दिनभर के शुभ-अशुभ मुहूर्त

आज का दिन धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अधिकमास की अमावस्या और रविवार का संयोग एक साथ बना है। इस अमावस्या को दर्श अमावस्या भी कहा जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों के स्मरण, तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है। वहीं रविवार होने के कारण सूर्य देव की पूजा का भी विशेष महत्व है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन विधि-विधान से किए गए धार्मिक कार्यों से पितृ दोष में कमी आती है और सूर्य से संबंधित कष्टों में भी राहत मिल सकती है।

मान्यता है कि अमावस्या के दिन पितृलोक से पूर्वज अपनी संतानों की ओर देखते हैं और तर्पण, पिंडदान तथा श्राद्ध के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि देने की परंपरा निभाई जाती है। ऐसे में जो लोग अपने पितरों का स्मरण कर विधिपूर्वक तर्पण करते हैं, उन्हें पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन विशेष रूप से जल अर्पित करना, ब्राह्मणों को भोजन कराना, जरूरतमंदों को दान देना तथा पितरों के नाम से पुण्य कार्य करना शुभ माना गया है।

धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि अधिकमास की अमावस्या पर पितरों के लिए किए गए कर्मों का फल कई गुना बढ़ जाता है। इसलिए अनेक श्रद्धालु इस दिन नदी, सरोवर या किसी पवित्र जल स्रोत के किनारे जाकर तर्पण करते हैं। यदि ऐसा संभव न हो तो घर पर भी श्रद्धापूर्वक जल अर्पित किया जा सकता है। शाम के समय घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाने की परंपरा भी प्रचलित है। इसे पितरों के प्रति सम्मान और स्मरण का प्रतीक माना जाता है।

रविवार व्रत रखने वाले भक्तों के लिए भी आज का दिन विशेष महत्व रखता है। सूर्य देव को जीवन, ऊर्जा, स्वास्थ्य और सफलता का कारक माना गया है। सुबह स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल लेकर सूर्य को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्रों का जाप करने से सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। इसके अलावा आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्य चालीसा और सूर्य संबंधित स्तोत्रों का पाठ भी लाभकारी माना गया है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर स्थिति में होता है या जिन्हें नौकरी, पद-प्रतिष्ठा, सरकारी कार्यों अथवा आत्मविश्वास से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हो, उन्हें रविवार के दिन सूर्य उपासना अवश्य करनी चाहिए। लाल वस्तुओं का दान भी शुभ फल प्रदान करता है। लाल पुष्प, गेहूं, गुड़, तांबे के बर्तन, लाल चंदन तथा लाल फलों का दान करने से सूर्य की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।

आज के पंचांग के अनुसार दिन की शुरुआत कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि से हुई है। दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक चतुर्दशी तिथि रहेगी, जिसके बाद अमावस्या तिथि का प्रारंभ हो जाएगा। नक्षत्रों की बात करें तो रात 10 बजकर 14 मिनट तक रोहिणी नक्षत्र रहेगा और उसके बाद मृगशिरा नक्षत्र प्रारंभ होगा। रोहिणी नक्षत्र को अत्यंत शुभ और समृद्धि प्रदान करने वाला माना जाता है।

करण की स्थिति पर नजर डालें तो दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक शकुनि करण रहेगा। इसके बाद रात 10 बजकर 21 मिनट तक चतुष्पाद करण रहेगा और फिर नाग करण का प्रभाव शुरू होगा। वहीं योग की दृष्टि से दोपहर 1 बजकर 15 मिनट तक धृति योग रहेगा, जिसके पश्चात शूल योग आरंभ होगा। चंद्रमा आज पूरे दिन वृषभ राशि में गोचर कर रहा है, जिससे स्थिरता और धैर्य से जुड़े कार्यों को बल मिलने की संभावना मानी जा रही है।

आज सूर्योदय सुबह 5 बजकर 23 मिनट पर हुआ है, जबकि सूर्यास्त का समय शाम 7 बजकर 20 मिनट निर्धारित है। चंद्रमा का उदय 15 जून की सुबह 5 बजकर 10 मिनट पर होगा और चंद्रास्त शाम 6 बजकर 44 मिनट पर होगा। धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा-पाठ की योजना बनाने वाले लोगों के लिए ये समय विशेष महत्व रखते हैं।

यदि शुभ मुहूर्तों की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 2 मिनट से 4 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। इस अवधि को ध्यान, जप और आध्यात्मिक साधना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। किसी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत के लिए यह समय अनुकूल माना जाता है।

दोपहर 2 बजकर 41 मिनट से 3 बजकर 37 मिनट तक विजय मुहूर्त रहेगा। यह मुहूर्त सफलता और उपलब्धि से जुड़े कार्यों के लिए शुभ माना जाता है। शाम 7 बजकर 26 मिनट से रात 8 बजकर 50 मिनट तक अमृत काल रहेगा, जो विशेष रूप से मांगलिक और शुभ कार्यों के लिए लाभकारी माना गया है। इसके अलावा 15 जून की मध्यरात्रि 12 बजकर 1 मिनट से 12 बजकर 42 मिनट तक निशिता मुहूर्त रहेगा।

दिन के शुभ चौघड़िया में सुबह 7 बजकर 7 मिनट से 8 बजकर 52 मिनट तक चर चौघड़िया रहेगा। इसके बाद 8 बजकर 52 मिनट से 10 बजकर 37 मिनट तक लाभ चौघड़िया और 10 बजकर 37 मिनट से 12 बजकर 21 मिनट तक अमृत चौघड़िया रहेगा। दोपहर 2 बजकर 6 मिनट से 3 बजकर 51 मिनट तक शुभ चौघड़िया रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए अच्छा समय माना जाता है।

रात्रि के चौघड़िया मुहूर्त भी काफी महत्वपूर्ण हैं। सूर्यास्त के बाद शाम 7 बजकर 20 मिनट से 8 बजकर 35 मिनट तक शुभ चौघड़िया रहेगा। इसके बाद 8 बजकर 35 मिनट से 9 बजकर 51 मिनट तक अमृत चौघड़िया रहेगा। रात 9 बजकर 51 मिनट से 11 बजकर 6 मिनट तक चर चौघड़िया का प्रभाव रहेगा। 15 जून की रात 1 बजकर 37 मिनट से 2 बजकर 52 मिनट तक लाभ चौघड़िया और सुबह 4 बजकर 8 मिनट से 5 बजकर 23 मिनट तक शुभ चौघड़िया रहेगा।

दूसरी ओर कुछ अशुभ समय भी हैं, जिनमें महत्वपूर्ण कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। यमगण्ड काल दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से 2 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 51 मिनट से शाम 5 बजकर 35 मिनट तक रहेगा। राहुकाल शाम 5 बजकर 35 मिनट से 7 बजकर 20 मिनट तक रहेगा, इसलिए इस दौरान नए कार्यों की शुरुआत से बचना उचित माना जाता है।

आज दुर्मुहूर्त का समय शाम 5 बजकर 28 मिनट से 6 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। पंचांग के अनुसार आज पश्चिम दिशा में दिशाशूल है। इसलिए यदि अत्यंत आवश्यक न हो तो पश्चिम दिशा की यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यात्रा करनी पड़े तो संबंधित उपाय करके ही निकलना बेहतर माना जाता है।

शिववास की स्थिति भी आज विशेष है। दोपहर 12 बजकर 19 मिनट तक शिववास श्मशान में माना गया है, जबकि उसके बाद गौरी के साथ शिववास का योग बन रहा है। धार्मिक दृष्टि से इसे भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

कुल मिलाकर अधिकमास अमावस्या, पितृ तर्पण और रविवार व्रत का यह संयोग श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक साधना, दान-पुण्य, पूर्वजों के स्मरण और सूर्य उपासना का विशेष अवसर लेकर आया है। उचित मुहूर्त में किए गए धार्मिक कार्य जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, पारिवारिक सुख-समृद्धि और पितरों के आशीर्वाद का माध्यम बन सकते हैं।

(Photo : AI Generated)