अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। यह बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित होगी, जहां दोनों देशों के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठेंगे। इस मीटिंग को आगे की शांति प्रक्रिया के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व JD Vance करेंगे, जो शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचेंगे। उनके साथ अमेरिकी विशेष दूत Steve Witkoff और Jared Kushner भी शामिल रहेंगे। दूसरी ओर, ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf प्रतिनिधित्व करेंगे, जो पहले ही पाकिस्तान पहुंच चुके हैं।
इस हाई-प्रोफाइल मीटिंग से पहले पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा और व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए इस्लामाबाद में दो दिन की छुट्टी घोषित की है।
बातचीत के मुख्य मुद्दे
- न्यूक्लियर प्रोग्राम:
अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित करे, उच्च स्तर के यूरेनियम संवर्धन को बंद करे और संवेदनशील परमाणु सामग्री देश से बाहर भेजे। वहीं, ईरान इस पर अपनी शर्तों के साथ सहमति चाहता है। - स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का नियंत्रण:
यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है। ईरान इस पर नियंत्रण और शुल्क वसूलने की बात कर रहा है, जबकि अमेरिका इसे पूरी तरह खुला और बिना किसी रुकावट के रखना चाहता है। - मिसाइल प्रोग्राम:
अमेरिका ईरान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रहा है। - प्रतिबंधों में ढील:
ईरान की प्रमुख मांग है कि उस पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी प्रतिबंध हटाए जाएं, साथ ही उसके फंसे हुए एसेट्स वापस किए जाएं और नुकसान की भरपाई भी हो।
सैन्य दबाव भी बरकरार
सीजफायर के बावजूद अमेरिका ने साफ किया है कि उसकी सेना क्षेत्र में मौजूद है और जरूरत पड़ने पर फिर से कार्रवाई की जा सकती है। इससे पहले अमेरिका दावा कर चुका है कि उसने संघर्ष के दौरान ईरान के ठिकानों पर हजारों हमले किए हैं।
यह बैठक दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, लेकिन नतीजा पूरी तरह इन मुद्दों पर सहमति बनने पर निर्भर करेगा।




