इंजीनियर से Apple के CEO तक: कौन हैं जॉन टर्नस, जिन्हें मिली टिम कुक की विरासत संभालने की जिम्मेदारी?

इंजीनियर से Apple के CEO तक: कौन हैं जॉन टर्नस, जिन्हें मिली टिम कुक की विरासत संभालने की जिम्मेदारी?

Apple में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन हो चुका है। करीब 15 साल तक कंपनी की कमान संभालने वाले टिम कुक अब CEO की भूमिका से हटकर एग्जीक्यूटिव चेयरमैन की जिम्मेदारी निभाएंगे। उनकी जगह कंपनी ने जॉन टर्नस को नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनाया है। खास बात यह है कि टर्नस कोई बाहरी चेहरा नहीं हैं। वह पिछले करीब 25 वर्षों से Apple का हिस्सा हैं और कंपनी के लगभग हर बड़े हार्डवेयर प्रोजेक्ट से उनका सीधा संबंध रहा है।

एक समय मैक कंप्यूटर की स्क्रीन से जुड़े डिजाइन पर काम करने वाले टर्नस आज दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में से एक की कमान संभाल रहे हैं। iPhone से लेकर iPad, Mac, Apple Watch, AirPods और Vision Pro जैसे प्रोडक्ट्स के हार्डवेयर विकास में उनकी टीम की अहम भूमिका रही है। यही लंबा अनुभव उन्हें Apple के लिए अगले दौर का नेतृत्व करने वाला स्वाभाविक चेहरा बनाता है।

2001 में Apple में आए, शुरुआत मैक की स्क्रीन से हुई

जॉन टर्नस का Apple के साथ सफर साल 2001 में शुरू हुआ था। उस समय वह युवा इंजीनियर थे और कंपनी में उनका काम मैक कंप्यूटरों की स्क्रीन से जुड़े डिजाइन पर था। धीरे-धीरे उन्होंने कंपनी के हार्डवेयर सिस्टम और प्रोडक्ट डेवलपमेंट को करीब से समझा।

Apple में उनका सफर किसी एक प्रोडक्ट तक सीमित नहीं रहा। समय के साथ वह अलग-अलग हार्डवेयर प्रोजेक्ट्स से जुड़े और कंपनी के महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग फैसलों का हिस्सा बनते गए। उनकी तकनीकी समझ और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें Apple की हार्डवेयर टीम के शीर्ष पद तक पहुंचाया।

Apple से पहले टर्नस करीब चार साल Virtual Research Systems में काम कर चुके थे। उन्होंने University of Pennsylvania से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। यानी उनका पूरा करियर तकनीक, इंजीनियरिंग और प्रोडक्ट निर्माण के इर्द-गिर्द रहा है।

आखिर टिम कुक के बाद टर्नस पर ही क्यों जताया भरोसा?

Apple में CEO पद के लिए जॉन टर्नस का चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कंपनी ने इस बार नेतृत्व के लिए अपने ही संगठन के अनुभवी व्यक्ति को चुना है। टर्नस को Apple के काम करने के तरीके, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और कंपनी की इंजीनियरिंग संस्कृति की गहरी समझ है।

टिम कुक का Apple में बड़ा योगदान ऑपरेशंस, सप्लाई चेन और वैश्विक कारोबार को मजबूत करने में रहा। उनके नेतृत्व में कंपनी का विस्तार और कारोबार दोनों तेजी से बढ़े। अब टेक इंडस्ट्री का फोकस AI, चिप टेक्नोलॉजी और नई पीढ़ी के कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म पर है। ऐसे समय में इंजीनियरिंग बैकग्राउंड वाले CEO को जिम्मेदारी देना Apple की रणनीति में बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है।

टर्नस 2021 से Apple की पूरी हार्डवेयर इंजीनियरिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस दौरान उन्हें कंपनी के सबसे अहम तकनीकी फैसलों और प्रोडक्ट विकास प्रक्रिया को नेतृत्व करने का अनुभव मिला।

iPhone और दूसरे Apple डिवाइस में टर्नस की भूमिका क्या रही?

Apple के ज्यादातर लोकप्रिय डिवाइसों को सिर्फ सॉफ्टवेयर के नजरिए से नहीं देखा जा सकता। उनके डिजाइन, बॉडी, इंटरनल कंपोनेंट्स, थर्मल सिस्टम, बैटरी और दूसरे हार्डवेयर हिस्सों के पीछे लंबी इंजीनियरिंग प्रक्रिया होती है।

जॉन टर्नस और उनकी टीम इस पूरी प्रक्रिया के अहम हिस्से रहे हैं। iPhone, iPad, Mac, Apple Watch और AirPods जैसे प्रोडक्ट्स के हार्डवेयर विकास में उनका योगदान रहा है। हाल के वर्षों में Vision Pro जैसे नए प्रोडक्ट के विकास में भी हार्डवेयर इंजीनियरिंग टीम की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

यही कारण है कि टर्नस को केवल एक प्रशासक या बिजनेस लीडर के तौर पर नहीं देखा जा रहा। वह ऐसे CEO हैं, जिन्होंने Apple के प्रोडक्ट्स को इंजीनियरिंग के स्तर पर लंबे समय तक समझा और विकसित किया है।

अब नई जिम्मेदारी के साथ सामने होंगी बड़ी चुनौतियां

CEO की कुर्सी मिलना जॉन टर्नस के लिए उपलब्धि जरूर है, लेकिन उनके सामने कई कठिन चुनौतियां भी हैं। सबसे बड़ा सवाल Apple की AI रणनीति को लेकर है। टेक्नोलॉजी की दुनिया में Google, Microsoft और दूसरी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। ऐसे में Apple को AI की दौड़ में अपनी स्थिति मजबूत करनी होगी।

दूसरी चुनौती कंपनी के बिजनेस मॉडल और रेगुलेटरी दबाव से जुड़ी है। अमेरिका और यूरोप में Apple की बाजार स्थिति, App Store से जुड़े नियमों और प्रतिस्पर्धा संबंधी मुद्दों पर लगातार बहस होती रही है। नए CEO के सामने कंपनी के कारोबार को आगे बढ़ाने के साथ इन कानूनी और नियामकीय सवालों से निपटने की जिम्मेदारी भी होगी।

तीसरी बड़ी चुनौती चीन से जुड़ी है। वैश्विक व्यापार और अमेरिका-चीन संबंधों में तनाव के बीच Apple अपनी सप्लाई चेन को चीन से बाहर दूसरे देशों में बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। भारत और वियतनाम जैसे देशों में उत्पादन बढ़ाना इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस बदलाव को बिना लागत और गुणवत्ता पर बड़ा असर डाले आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा।

इसके अलावा Apple पर इनोवेशन को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। आलोचकों का मानना है कि कंपनी के मौजूदा प्रोडक्ट्स में वह क्रांतिकारी बदलाव कम दिखाई देता है, जिसके लिए Apple को जाना जाता था। टर्नस को यह साबित करना होगा कि कंपनी आने वाले वर्षों में भी नई तकनीक और नए प्रोडक्ट्स के मामले में सबसे आगे रह सकती है।

टिम कुक ने नए CEO की जमकर तारीफ की

टिम कुक और जॉन टर्नस लंबे समय से साथ काम करते रहे हैं। ऐसे में कुक का उनके चयन को लेकर भरोसा खास महत्व रखता है। कुक ने टर्नस की इंजीनियरिंग क्षमता, उनकी सोच और नेतृत्व शैली की सराहना की है।

कुक के मुताबिक टर्नस में इंजीनियर की तकनीकी समझ के साथ आविष्कारक की सोच और नेतृत्व की ईमानदारी मौजूद है। Apple में उनके करीब 25 साल के अनुभव को देखते हुए उन्हें कंपनी को आगे ले जाने के लिए मजबूत उम्मीदवार माना गया।

इस बदलाव से यह भी स्पष्ट है कि Apple नेतृत्व में निरंतरता बनाए रखना चाहता है। बाहर से किसी नए CEO को लाने के बजाय कंपनी ने ऐसे व्यक्ति को चुना है, जो उसके प्रोडक्ट्स और आंतरिक कार्यप्रणाली से लंबे समय से परिचित है।

कितनी होगी टर्नस की कमाई?

जॉन टर्नस ने Apple में लंबा करियर बनाया है और उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा वेतन, बोनस और कंपनी के शेयरों से जुड़ा बताया जाता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार उनकी कुल संपत्ति करीब 7.5 करोड़ डॉलर यानी लगभग ₹700 करोड़ बताई गई है।

CEO बनने के बाद उनके कुल मुआवजे में भी बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है। उनका पैकेज करीब ₹600 करोड़ के आसपास बताया जा रहा है। तुलना करें तो टिम कुक को पिछले साल लगभग ₹700 करोड़ का कुल पैकेज मिला था।

हालांकि टिम कुक की व्यक्तिगत संपत्ति इससे काफी ज्यादा बताई जाती है। लंबे समय तक Apple के CEO रहने और कंपनी के शेयरों से जुड़े लाभ के कारण उनकी कुल संपत्ति करीब 3 अरब डॉलर यानी लगभग ₹28 हजार करोड़ बताई जाती है।

ऑफिस के बाहर रेसिंग और साइकिलिंग का शौक

जॉन टर्नस की सार्वजनिक छवि काफी हद तक प्रोफेशनल और टेक्निकल व्यक्ति की रही है। वह अपनी निजी जिंदगी को मीडिया से काफी दूर रखते हैं। उनकी पारिवारिक जिंदगी और निजी रिश्तों को लेकर सार्वजनिक रूप से बहुत ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है।

हालांकि उनके शौक काफी दिलचस्प हैं। टर्नस को साइकिलिंग पसंद है और वह ऑफ-रोड रैली कार रेसिंग में भी रुचि रखते हैं। बताया जाता है कि वह कभी-कभी अपने सहयोगियों के साथ वीकेंड पर ऑफ-रोड ड्राइविंग और रेसिंग का आनंद लेते हैं।

इससे उनकी निजी पसंद का एक अलग पहलू सामने आता है। दिनभर अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग से जुड़े रहने वाले टर्नस खाली समय में एडवेंचर और मोटरस्पोर्ट्स का आनंद लेना पसंद करते हैं।

टिम कुक के कार्यकाल में Apple कहां पहुंचा?

टिम कुक 1998 में Apple से जुड़े थे और 2011 में उन्होंने CEO का पद संभाला था। उनके कार्यकाल में Apple ने कारोबार, बाजार मूल्य और वैश्विक पहुंच के मामले में जबरदस्त विस्तार किया।

कुक के नेतृत्व की सबसे बड़ी उपलब्धियों में कंपनी के ऑपरेशनल सिस्टम और सप्लाई चेन को मजबूत करना शामिल रहा। उनके कार्यकाल में Apple की मार्केट वैल्यू लगभग 350 अरब डॉलर से बढ़कर करीब 4 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। कंपनी का सालाना राजस्व भी 108 अरब डॉलर के आसपास से बढ़कर 2025 में 416 अरब डॉलर से अधिक बताया गया।

आज Apple की मौजूदगी दुनिया के 200 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में है। कंपनी के 500 से अधिक रिटेल स्टोर्स हैं और उसके 2.5 अरब से ज्यादा डिवाइस दुनियाभर में एक्टिव बताए जाते हैं।

अब यही विशाल विरासत जॉन टर्नस के सामने है। उन्हें एक ऐसे दौर में Apple की कमान मिली है, जब कंपनी को AI, चिप्स, सप्लाई चेन, रेगुलेशन और इनोवेशन जैसे कई मोर्चों पर एक साथ काम करना होगा। आने वाला समय बताएगा कि मैक की स्क्रीन डिजाइन से करियर शुरू करने वाला यह इंजीनियर Apple को अगली बड़ी तकनीकी छलांग दिलाने में कितना सफल होता है।