उम्र के साथ हड्डियों को कमजोर होने से बचाएं, इन आसान आदतों को बनाएं अपनी दिनचर्या का हिस्सा

उम्र के साथ हड्डियों को कमजोर होने से बचाएं, इन आसान आदतों को बनाएं अपनी दिनचर्या का हिस्सा

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के बदलाव आने लगते हैं। इसका असर केवल त्वचा, मांसपेशियों या ऊर्जा के स्तर पर ही नहीं पड़ता, बल्कि हड्डियों की सेहत भी धीरे-धीरे प्रभावित हो सकती है। खासकर 35 साल की उम्र के बाद हड्डियों को लेकर लापरवाही आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकती है। इस दौरान शरीर में नई हड्डी बनने और पुरानी हड्डी के टूटकर दोबारा बनने की प्रक्रिया में धीरे-धीरे बदलाव आने लगता है। ऐसे में खानपान और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना बेहद जरूरी हो जाता है।

हड्डियां हमारे शरीर को आकार देने के साथ-साथ मांसपेशियों को सहारा देती हैं और शरीर को चलने-फिरने में मदद करती हैं। इसलिए इनकी मजबूती केवल बुजुर्गों के लिए जरूरी नहीं है। 30 और 40 की उम्र में भी बोन हेल्थ को लेकर सावधानी बरतना भविष्य में होने वाली समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, संतुलित डाइट, पर्याप्त विटामिन D, नियमित शारीरिक गतिविधि और कुछ जरूरी आदतों में बदलाव करके हड्डियों को लंबे समय तक स्वस्थ रखने की कोशिश की जा सकती है।

शरीर को दें पर्याप्त कैल्शियम

हड्डियों की मजबूती की बात होती है तो कैल्शियम का जिक्र सबसे पहले आता है। शरीर में कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा बनाए रखना हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। यदि डाइट में लंबे समय तक कैल्शियम की कमी रहती है, तो इसका असर बोन हेल्थ पर पड़ सकता है।

कैल्शियम की जरूरत पूरी करने के लिए रोजमर्रा के भोजन में दूध और दूध से बनी चीजों को शामिल किया जा सकता है। दूध, दही और पनीर इसके सामान्य स्रोत हैं। इसके अलावा रागी, तिल और कुछ हरी पत्तेदार सब्जियां भी डाइट में शामिल की जा सकती हैं। जो लोग किसी कारण से डेयरी प्रोडक्ट्स नहीं लेते, वे डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह से कैल्शियम के दूसरे खाद्य स्रोतों को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

सिर्फ कैल्शियम वाली चीजें खाना ही पर्याप्त नहीं है। शरीर इस पोषक तत्व का कितना इस्तेमाल कर पाता है, यह भी महत्वपूर्ण है। इसलिए बोन हेल्थ के लिए कैल्शियम के साथ दूसरे पोषक तत्वों और संतुलित डाइट पर भी ध्यान देना चाहिए।

विटामिन D की कमी को न करें नजरअंदाज

हड्डियों की सेहत के लिए विटामिन D भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शरीर को कैल्शियम के इस्तेमाल और अवशोषण में मदद करता है। अगर शरीर में विटामिन D पर्याप्त मात्रा में नहीं है, तो केवल कैल्शियम वाली डाइट पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं हो सकता।

विटामिन D का एक प्रमुख प्राकृतिक स्रोत सूर्य की रोशनी है। हालांकि, धूप लेने का सही तरीका और अवधि व्यक्ति की त्वचा, स्थान, मौसम और अन्य परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकती है। इसके अलावा कुछ खाद्य पदार्थों से भी विटामिन D प्राप्त किया जा सकता है।

अगर किसी व्यक्ति में विटामिन D की कमी पाई जाती है, तो डॉक्टर जरूरत के अनुसार सप्लीमेंट लेने की सलाह दे सकते हैं। बिना जांच या चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक विटामिन D या कैल्शियम सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है। किसी भी सप्लीमेंट की जरूरत व्यक्ति की डाइट, स्वास्थ्य और जांच रिपोर्ट के आधार पर तय की जानी चाहिए।

सिर्फ डाइट नहीं, शरीर को भी एक्टिव रखें

बोन हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में शारीरिक गतिविधि की भी अहम भूमिका है। लंबे समय तक बैठे रहना और शारीरिक गतिविधि बहुत कम कर देना शरीर की फिटनेस के साथ-साथ हड्डियों के लिए भी अच्छा नहीं माना जाता।

रोजाना अपनी क्षमता के अनुसार तेज चाल से चलना, सीढ़ियां चढ़ना, डांस जैसी गतिविधियां करना या नियमित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को रूटीन में शामिल किया जा सकता है। वजन उठाने वाली और मांसपेशियों को सक्रिय करने वाली एक्सरसाइज हड्डियों और शरीर की समग्र ताकत बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।

हालांकि, हर व्यक्ति के लिए एक जैसा एक्सरसाइज प्लान सही नहीं होता। अगर पहले से कोई चोट, हड्डियों की समस्या या दूसरी स्वास्थ्य संबंधी परेशानी है, तो एक्सरसाइज शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहता है। धीरे-धीरे एक्टिविटी बढ़ाना और सही तकनीक से व्यायाम करना जरूरी है।

बैलेंस एक्सरसाइज भी जरूरी है

बोन हेल्थ के साथ शरीर का संतुलन बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। उम्र बढ़ने पर गिरने की स्थिति में फ्रैक्चर का खतरा बढ़ सकता है, खासकर तब जब हड्डियां कमजोर हों। इसलिए ऐसी गतिविधियां भी की जा सकती हैं जो शरीर के बैलेंस और मांसपेशियों के नियंत्रण को बेहतर बनाने में मदद करें।

बैलेंस से जुड़ी एक्सरसाइज व्यक्ति की उम्र और शारीरिक क्षमता के अनुसार चुनी जानी चाहिए। योग के कुछ अभ्यास, हल्की बैलेंस ट्रेनिंग या विशेषज्ञ द्वारा सुझाई गई गतिविधियां इसमें मददगार हो सकती हैं। किसी भी ऐसी एक्सरसाइज को करते समय सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है, जिसमें गिरने का जोखिम हो सकता है।

स्मोकिंग से दूरी और शराब का सेवन सीमित रखें

हड्डियों की मजबूती केवल खाने और एक्सरसाइज पर निर्भर नहीं करती। रोजमर्रा की कुछ आदतें भी बोन हेल्थ को प्रभावित कर सकती हैं। धूम्रपान ऐसी ही आदतों में शामिल है, जिनसे बचना बेहतर है। इसी तरह शराब का अधिक सेवन भी स्वास्थ्य के लिए कई तरह से नुकसानदायक हो सकता है और हड्डियों की सेहत पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से स्मोकिंग करता है या नियमित रूप से अधिक शराब का सेवन करता है, तो इन आदतों को कम करने या छोड़ने की दिशा में कदम उठाना स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है। हड्डियों को स्वस्थ रखने के साथ-साथ इससे शरीर के दूसरे हिस्सों के स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

कुछ दवाओं के लंबे इस्तेमाल पर डॉक्टर से करें बात

कुछ लोगों में हड्डियों की कमजोरी का संबंध उनकी दवाओं या किसी दूसरी स्वास्थ्य समस्या से भी हो सकता है। उदाहरण के लिए, लंबे समय तक कुछ प्रकार की स्टेरॉयड दवाओं का इस्तेमाल बोन हेल्थ को प्रभावित कर सकता है। इसलिए अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से ऐसी दवाएं ले रहा है, तो उसे अपनी मर्जी से दवा बंद नहीं करनी चाहिए, बल्कि डॉक्टर से इसके संभावित प्रभावों के बारे में चर्चा करनी चाहिए।

इसी तरह कुछ बीमारियों की वजह से भी हड्डियों पर असर पड़ सकता है। ऐसे मामलों में नियमित मेडिकल फॉलोअप और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच कराना महत्वपूर्ण हो सकता है।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?

हर व्यक्ति में हड्डियों के कमजोर होने का जोखिम एक जैसा नहीं होता। कुछ लोगों को अपनी बोन हेल्थ को लेकर विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत हो सकती है। यदि परिवार में किसी करीबी सदस्य को ऑस्टियोपोरोसिस रहा है, तो डॉक्टर से इस बारे में चर्चा करना उपयोगी हो सकता है।

इसी तरह जिन लोगों को पहले कम उम्र में फ्रैक्चर हो चुका है, उन्हें भी बोन हेल्थ को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। महिलाओं में कम उम्र में मेनोपॉज होने की स्थिति में भी हड्डियों की सेहत पर विशेष ध्यान देने की जरूरत हो सकती है। इसके अलावा यदि डॉक्टर ने पहले से हड्डियों से जुड़े किसी जोखिम की जानकारी दी है, तो समय पर उचित सलाह लेना जरूरी है।

35 के बाद बनाएं बोन हेल्थ को प्राथमिकता

35 साल की उम्र के बाद हड्डियों के प्रति जागरूक होना किसी एक दिन या एक खास डाइट तक सीमित नहीं होना चाहिए। यह लंबे समय तक चलने वाली स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा होना चाहिए। संतुलित भोजन, पर्याप्त कैल्शियम और विटामिन D, नियमित एक्सरसाइज, स्वस्थ वजन बनाए रखना और धूम्रपान जैसी आदतों से दूरी बोन हेल्थ के लिए उपयोगी कदम हो सकते हैं।

इसके साथ ही शरीर में किसी तरह के असामान्य लक्षण, बार-बार चोट लगना या फ्रैक्चर होना अथवा हड्डियों से जुड़े किसी जोखिम की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर व्यक्ति की उम्र, लक्षण, मेडिकल हिस्ट्री और जोखिम कारकों को देखते हुए उपयुक्त जांच की सलाह दे सकते हैं।

हड्डियों की मजबूती पर ध्यान देने की शुरुआत बहुत देर होने का इंतजार किए बिना की जा सकती है। 35 की उम्र के बाद अपनी डाइट और लाइफस्टाइल में छोटे लेकिन लगातार बदलाव करके लंबे समय तक हड्डियों की सेहत को बनाए रखने की दिशा में काम किया जा सकता है।