हिमाचल प्रदेश में यात्रियों को बेहतर और सुगम परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) अपने बस बेड़े को बढ़ाने की तैयारी में है। निगम की ओर से 350 नई बसें खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इनमें 250 डीजल बसें और 100 मिनी-मिडी बसें शामिल हैं। बसों की खरीद से जुड़े प्रस्ताव पर 25 सितंबर को होने वाली एचआरटीसी निदेशक मंडल (बीओडी) की बैठक में चर्चा होगी और इसी बैठक में इसे मंजूरी मिलने की संभावना है।
नई बसों की खरीद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निगम के अलग-अलग रूटों पर बसों की उपलब्धता बढ़ सकती है। खासकर उन क्षेत्रों में नई बसों को लगाया जा सकता है, जहां यात्रियों की संख्या अधिक है या मौजूदा बसों की स्थिति और उपलब्धता को देखते हुए अतिरिक्त सेवाओं की जरूरत महसूस की जा रही है।
एचआरटीसी के बेड़े में लंबे समय से पुरानी बसों की संख्या अधिक रही है। ऐसे में नई बसों की खरीद के साथ पुरानी बसों को चरणबद्ध तरीके से हटाने की योजना भी तैयार की जा रही है। इससे निगम के सामने एक तरफ यात्रियों को बेहतर बसें उपलब्ध कराने का लक्ष्य होगा, वहीं दूसरी तरफ पुराने वाहनों के रखरखाव पर होने वाले खर्च को कम करने पर भी जोर रहेगा।
पहले जारी टेंडर में आई थीं आपत्तियां
एचआरटीसी ने नई बसों की खरीद के लिए पहले भी टेंडर प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि, टेंडर की कुछ शर्तों को लेकर आपत्तियां सामने आने के बाद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद निगम प्रबंधन ने टेंडर की शर्तों की समीक्षा की।
अब कुछ शर्तों में बदलाव कर दोबारा टेंडर जारी करने की तैयारी की जा रही है। निगम का प्रयास है कि संशोधित शर्तों के कारण अधिक कंपनियां निविदा प्रक्रिया में भाग ले सकें और प्रतिस्पर्धी प्रक्रिया के माध्यम से बसों की खरीद पूरी की जा सके।
बीओडी की बैठक में प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद टेंडर जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद तकनीकी और वित्तीय प्रक्रिया पूरी होने पर चयनित कंपनियों से बसों की आपूर्ति करवाई जाएगी।
250 डीजल और 100 मिनी-मिडी बसों का प्रस्ताव
प्रस्तावित 350 बसों में 250 डीजल बसें शामिल हैं। इनके अलावा 100 मिनी-मिडी बसें खरीदी जानी हैं। मिनी-मिडी बसों को खासतौर पर ऐसे मार्गों के लिए उपयोगी माना जाता है, जहां बड़े आकार की बसों का संचालन व्यावहारिक नहीं होता।
हिमाचल का भौगोलिक क्षेत्र पहाड़ी होने के कारण कई ग्रामीण और दूरदराज के मार्गों पर छोटी क्षमता वाली बसों की जरूरत रहती है। ऐसे रूटों पर मिनी-मिडी बसों के संचालन से परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
वहीं, 250 डीजल बसों को अधिक यात्री क्षमता वाले नियमित रूटों पर इस्तेमाल किया जा सकता है। नई बसों की तैनाती का अंतिम निर्णय बसों की उपलब्धता, रूट की आवश्यकता और निगम की परिचालन योजना के आधार पर किया जाएगा।
पुरानी जेएनएनयूआरएम बसों को हटाने की तैयारी
नई बसों की खरीद के साथ एचआरटीसी अपने पुराने बेड़े को कम करने की दिशा में भी कदम बढ़ाने जा रहा है। बीओडी की बैठक में जवाहरलाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीकरण मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत खरीदी गई पुरानी बसों को बेड़े से बाहर करने का प्रस्ताव रखा जाएगा।
इन बसों ने अपनी निर्धारित आयु पूरी कर ली है। उम्र बढ़ने के साथ इन बसों के रखरखाव और मरम्मत पर खर्च बढ़ रहा है। इसके अलावा पुरानी बसों से होने वाली आय की तुलना में उनके संचालन पर आने वाली लागत अधिक होने की स्थिति भी सामने आ रही है।
ऐसे में निगम प्रबंधन का मानना है कि निर्धारित आयु पूरी कर चुकी बसों को चरणबद्ध तरीके से संचालन से बाहर करना जरूरी है। बीओडी की मंजूरी के बाद इन बसों को बेड़े से हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
पुरानी बसों पर बढ़ता खर्च कम करने की कोशिश
एचआरटीसी के सामने लंबे समय से पुराने बस बेड़े को लेकर चुनौती रही है। पुरानी बसों के रखरखाव में अधिक समय और संसाधन लगते हैं। बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ने से बसों के रूट से बाहर रहने की संभावना भी बढ़ती है।
इसके अलावा पुराने वाहनों की ईंधन दक्षता नई बसों की तुलना में कम हो सकती है। इससे परिचालन लागत बढ़ने का असर निगम की वित्तीय स्थिति पर पड़ता है।
नई बसों को बेड़े में शामिल करने और निर्धारित आयु पूरी कर चुकी बसों को हटाने से निगम अपने वाहन बेड़े को धीरे-धीरे आधुनिक बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। इससे बसों की उपलब्धता और संचालन क्षमता में भी सुधार की उम्मीद है।
297 ई-बसों की कमाई का भी होगा आकलन
एचआरटीसी की बीओडी बैठक में केवल नई बसों की खरीद और पुरानी बसों को हटाने का मुद्दा ही नहीं होगा। निगम की ओर से पहले से संचालित 297 इलेक्ट्रिक बसों के प्रदर्शन का आकलन भी बैठक में रखा जाएगा।
इन बसों से होने वाली आय और डीजल बसों की तुलना में ईंधन खर्च में होने वाली बचत का विस्तृत आंकड़ा तैयार किया जा रहा है। प्रबंधन ने संबंधित अधिकारियों को ई-बसों के संचालन से जुड़े आंकड़े जुटाने और उनका विश्लेषण तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
इस आकलन के जरिए यह देखा जाएगा कि ई-बसों के संचालन से निगम को किस स्तर पर आर्थिक लाभ मिल रहा है और डीजल बसों की तुलना में परिचालन लागत में कितना अंतर है।
ई-बसों की खरीद और संचालन को लेकर भविष्य की नीति तैयार करने में भी यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि संचालन से जुड़े आंकड़े सकारात्मक रहते हैं तो आने वाले समय में इलेक्ट्रिक बसों के बेड़े को बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।
नई और पुरानी बसों के बीच बनेगा संतुलन
एचआरटीसी की योजना में एक साथ दो स्तरों पर काम किया जा रहा है। एक ओर नई बसों को बेड़े में शामिल करने की तैयारी है, वहीं दूसरी ओर अपनी निर्धारित आयु पूरी कर चुकी पुरानी बसों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
इससे निगम के कुल बस बेड़े की औसत आयु को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। नई बसों के आने से जहां यात्रियों को बेहतर वाहन उपलब्ध होंगे, वहीं पुरानी बसों को हटाने से रखरखाव संबंधी खर्च और बार-बार होने वाली तकनीकी समस्याओं को कम करने का प्रयास किया जा सकेगा।
हालांकि, नई बसों की खरीद और पुरानी बसों को हटाने की पूरी प्रक्रिया बीओडी के फैसले के बाद ही आगे बढ़ेगी।
25 सितंबर की बैठक पर टिकी नजर
एचआरटीसी की निदेशक मंडल की बैठक 25 सितंबर को प्रस्तावित है। बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री करेंगे। एचआरटीसी के प्रबंध निदेशक शिवम प्रताप सिंह सहित निगम के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहेंगे।
बैठक में 350 नई बसों की खरीद के प्रस्ताव के साथ टेंडर की संशोधित शर्तों और आगे की प्रक्रिया पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा जेएनएनयूआरएम की पुरानी बसों को बेड़े से बाहर करने और 297 ई-बसों के संचालन के आर्थिक आकलन को भी सामने रखा जाएगा।
यदि नई बसों की खरीद को मंजूरी मिलती है तो संशोधित शर्तों के आधार पर टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद कंपनियों से निविदाएं आमंत्रित कर तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।
यात्रियों की सुविधा पर रहेगा फोकस
एचआरटीसी के लिए नई बसों की खरीद का सबसे बड़ा उद्देश्य यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। हिमाचल के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन का बड़ा महत्व है। कई इलाकों में लोगों की आवाजाही के लिए एचआरटीसी की बस सेवाओं पर निर्भरता रहती है।
ऐसे में नई बसों के आने से उन रूटों पर अतिरिक्त सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है, जहां वर्तमान में बसों की संख्या कम है। छोटी बसों के जरिए कम यात्री क्षमता वाले और संकरे पहाड़ी मार्गों पर भी सेवा विस्तार की संभावना बनेगी।
नई बसों की तैनाती के साथ निगम को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि बसों का उपयोग उन रूटों पर प्राथमिकता से हो, जहां यात्रियों की जरूरत और परिवहन सुविधा की मांग अधिक है।
खरीद के साथ वित्तीय स्थिति पर भी नजर
एचआरटीसी की वित्तीय स्थिति को देखते हुए नई बसों की खरीद के साथ परिचालन लागत का प्रबंधन भी महत्वपूर्ण रहेगा। डीजल बसों के लिए ईंधन खर्च, रखरखाव और कर्मचारियों से संबंधित लागत का असर निगम के बजट पर पड़ता है। वहीं इलेक्ट्रिक बसों के मामले में ईंधन लागत कम होने के साथ चार्जिंग और अन्य परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखना होता है।
इसी वजह से 297 ई-बसों के वास्तविक संचालन आंकड़ों का आकलन किया जा रहा है। इससे निगम को भविष्य में बसों की खरीद और विभिन्न तकनीकों के इस्तेमाल को लेकर निर्णय लेने में मदद मिल सकती है।
फिलहाल 25 सितंबर की बीओडी बैठक को एचआरटीसी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में 350 नई बसों की खरीद, पुरानी जेएनएनयूआरएम बसों को हटाने और ई-बसों के संचालन की समीक्षा से जुड़े प्रस्तावों पर निर्णय होने के बाद निगम के बस बेड़े को लेकर आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।




