Drugs के खिलाफ Punjab Government का बड़ा Action: Bikram Majithia को 7 दिन की Vigilance Remand, Aman Arora बोले – ‘अब पीड़ित परिवारों को मिलना शुरू हुआ न्याय’

Vigilance जांच में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप, AAP ने कहा— नशा नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी

पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान के बीच शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को विजिलेंस ब्यूरो की जांच के सिलसिले में अदालत ने 7 दिन की विजिलेंस रिमांड पर भेज दिया है। इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) पंजाब के अध्यक्ष और राज्य के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि यह कार्रवाई उन हजारों परिवारों के लिए उम्मीद की किरण है, जिन्होंने नशे की समस्या के कारण अपने प्रियजनों को खोया है।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि राज्य में कथित ड्रग नेटवर्क और उससे जुड़े आर्थिक तंत्र की निष्पक्ष जांच करना है। उन्होंने दावा किया कि सरकार नशे के खिलाफ अपनी नीति पर लगातार काम कर रही है और कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।

नोट: यह मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। लेख में उल्लिखित आरोप विजिलेंस ब्यूरो और आम आदमी पार्टी नेताओं के सार्वजनिक बयानों पर आधारित हैं। इन आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत द्वारा साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।

7 दिन की Vigilance Remand क्यों मिली?

विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज मामले में अदालत ने जांच एजेंसी की मांग पर बिक्रम सिंह मजीठिया को सात दिन की रिमांड पर भेजा है। जांच एजेंसी का कहना है कि इस दौरान वित्तीय लेनदेन, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की विस्तृत जांच की जाएगी।

रिमांड के दौरान अधिकारियों द्वारा कथित वित्तीय लेनदेन, कंपनियों के रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य संबंधित पहलुओं की जांच किए जाने की संभावना है।

540 करोड़ रुपये की कथित बेहिसाब संपत्ति का दावा

अमन अरोड़ा ने प्रेस वार्ता के दौरान दावा किया कि विजिलेंस जांच में मजीठिया से जुड़ी कंपनियों में लगभग 540 करोड़ रुपये के संदिग्ध वित्तीय लेनदेन सामने आए हैं।

उनके अनुसार—

  • लगभग 161 करोड़ रुपये बिना पर्याप्त दस्तावेजों के निवेश किए जाने का दावा किया गया है।
  • करीब 141 करोड़ रुपये कथित रूप से शेल कंपनियों के माध्यम से विभिन्न खातों में स्थानांतरित किए गए।
  • जांच एजेंसियां इन लेनदेन के स्रोत और वैधता की जांच कर रही हैं।

अमन अरोड़ा ने सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी राशि का स्रोत स्पष्ट होना चाहिए और जांच से वास्तविक तथ्य सामने आने चाहिए।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र न्यायिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और जांच जारी है।

ड्रग नेटवर्क पर कार्रवाई का दावा

अमन अरोड़ा ने कहा कि सरकार की कार्रवाई केवल किसी एक राजनीतिक नेता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य पूरे कथित ड्रग नेटवर्क और उससे जुड़े आर्थिक तंत्र की जांच करना है।

उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार राज्य को नशा मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और कानून के दायरे में रहकर सभी मामलों की जांच की जा रही है।

सरकार का दावा है कि नशे के कारोबार से जुड़े आर्थिक नेटवर्क को समाप्त करना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

2021 की FIR और पुरानी जांचों का भी किया उल्लेख

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमन अरोड़ा ने वर्ष 2021 में दर्ज एफआईआर का भी उल्लेख किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय की कार्रवाई प्रभावी तरीके से आगे नहीं बढ़ सकी। इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 2014 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई जांच का भी जिक्र करते हुए कहा कि उस जांच के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी।

अरोड़ा ने दावा किया कि उस समय जांच कर रहे अधिकारी के स्थानांतरण के बाद जांच की गति प्रभावित हुई। हालांकि इन दावों पर संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कंपनियों के नेटवर्क की जांच

विजिलेंस ब्यूरो के अनुसार जांच में कई कंपनियों के गठन और उनके वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है।

अमन अरोड़ा ने दावा किया कि वर्ष 2007 के बाद कई कंपनियां बनाई गईं और इनमें से कुछ कंपनियां एक ही दिन पंजीकृत हुई थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन कंपनियों के माध्यम से जटिल वित्तीय संरचना तैयार की गई।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन कंपनियों के बीच हुए लेनदेन का उद्देश्य क्या था और क्या इनमें किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई।

इन आरोपों की पुष्टि फिलहाल जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

विपक्षी दलों पर भी साधा निशाना

अमन अरोड़ा ने इस मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस तीनों पर राजनीतिक टिप्पणी की।

उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में नशे की समस्या के लिए पूर्व की सरकारें भी जिम्मेदार रही हैं और इस विषय पर सभी राजनीतिक दलों को जवाब देना चाहिए।

हालांकि विपक्षी दलों की ओर से समय-समय पर इन आरोपों का खंडन किया जाता रहा है और उन्होंने सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति करने के आरोप भी लगाए हैं।

‘कोई भी कानून से ऊपर नहीं’

अमन अरोड़ा ने कहा कि पंजाब सरकार की नीति स्पष्ट है कि कानून के सामने सभी नागरिक समान हैं।

उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो उसकी राजनीतिक पहचान या पद को देखते हुए कोई विशेष छूट नहीं दी जाएगी।

उन्होंने दोहराया कि सरकार का उद्देश्य निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करना है।

नशा मुक्त पंजाब अभियान पर सरकार का जोर

पंजाब सरकार लगातार राज्य में नशे के खिलाफ अभियान चलाने की बात कहती रही है।

सरकार का दावा है कि—

  • ड्रग तस्करी पर कार्रवाई तेज की गई है।
  • पुलिस और विजिलेंस एजेंसियों को जांच के लिए आवश्यक सहयोग दिया जा रहा है।
  • आर्थिक अपराधों और अवैध संपत्ति की जांच पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
  • नशे से प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने और युवाओं को सुरक्षित भविष्य देने के लिए अभियान जारी रहेगा।

मामला अभी जांच के अधीन

बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ दर्ज मामला फिलहाल जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। विजिलेंस ब्यूरो अदालत की निगरानी में जांच कर रहा है और आने वाले दिनों में पूछताछ, दस्तावेजों की जांच तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

वहीं, मजीठिया और उनके पक्ष की ओर से इन आरोपों पर कानूनी जवाब और अपना पक्ष अदालत में रखा जा सकता है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही लिया जाएगा।

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