चंडीगढ़, 3 सितंबर: चंडीगढ़ के भविष्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर आज दिल्ली में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में निर्णायक चर्चा हो सकती है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में प्रस्तावित बैठक में शहर के मास्टर प्लान-2031 में संशोधन, पुनर्वास कॉलोनियों के निवासियों को स्थायी मालिकाना अधिकार देने, व्यावसायिक एवं औद्योगिक संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड करने और नगर निगम के मेयर का कार्यकाल बढ़ाने जैसे प्रस्तावों पर विचार किया जाएगा।
इन प्रस्तावों को लेकर लंबे समय से प्रशासन और शहर के विभिन्न वर्गों के बीच चर्चा चल रही है। यदि केंद्र से इन पर सैद्धांतिक सहमति मिलती है तो चंडीगढ़ में भवन निर्माण, जमीन के इस्तेमाल, संपत्ति अधिकार और नगर निगम की राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े कई नियमों में बदलाव का रास्ता खुल सकता है।
बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से गृह सचिव रामनदीप बराड़, मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद, वित्त सचिव दीपर्वा लाकरा और उपायुक्त निशांत कुमार यादव के शामिल होने की संभावना है। प्रशासनिक अधिकारी संबंधित प्रस्तावों की जानकारी और उनकी जरूरत को लेकर प्रस्तुति दे सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में केवल प्रस्तावों पर हरी झंडी ही नहीं, बल्कि उनमें संशोधन या अतिरिक्त सुझाव भी सामने आ सकते हैं। ऐसे में आज की बैठक को चंडीगढ़ के शहरी विकास और प्रशासनिक ढांचे के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मास्टर प्लान में बदलाव से निर्माण गतिविधियों को मिल सकता है विस्तार
चंडीगढ़ के मास्टर प्लान-2031 में प्रस्तावित संशोधन बैठक के प्रमुख एजेंडों में शामिल रहेगा। प्रशासन पहले ही संशोधन का ड्राफ्ट अधिसूचित कर आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव मांग चुका है। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य शहर में बदलती आवासीय और व्यावसायिक जरूरतों के अनुरूप भूमि उपयोग तथा निर्माण संबंधी नियमों में बदलाव करना है।
संशोधन प्रस्ताव में शहर के कुछ चिन्हित परिधीय क्षेत्रों और फेज-3 क्षेत्रों में फ्लोर एरिया रेशियो यानी एफएआर को बढ़ाकर 3.0 करने की बात कही गई है। एफएआर बढ़ने का सीधा अर्थ यह होगा कि निर्धारित भूखंड पर मौजूदा नियमों की तुलना में अधिक निर्मित क्षेत्र उपलब्ध हो सकेगा।
इसके साथ ही चयनित बाहरी सेक्टरों, फेज-3 और औद्योगिक क्षेत्रों में 30 मीटर तक ऊंची इमारतों को अनुमति देने का प्रस्ताव रखा गया है। यदि यह प्रावधान लागू होता है तो चंडीगढ़ में ऊंची इमारतों के निर्माण को लेकर मौजूदा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकता है।
प्रशासन का तर्क है कि शहर की आबादी, आवासीय जरूरतों और उपलब्ध भूमि पर बढ़ते दबाव को देखते हुए विकास के नए विकल्प तलाशना जरूरी है। हाईराइज निर्माण और मिश्रित भू-उपयोग के जरिए सीमित भूमि में अधिक प्रभावी तरीके से आवासीय तथा अन्य जरूरतों को पूरा करने की योजना पर विचार किया जा रहा है।
औद्योगिक क्षेत्रों में प्लॉट विभाजन का भी प्रस्ताव
मास्टर प्लान में संशोधन के प्रस्ताव केवल ऊंची इमारतों तक सीमित नहीं हैं। औद्योगिक क्षेत्र फेज-1 और फेज-2 में बड़े आकार के प्लॉटों को विभाजित करने की अनुमति देने का प्रस्ताव भी इसमें शामिल है।
इसके अलावा फेज-1 से बाहर स्कूलों, कॉलेजों और सांस्कृतिक संस्थानों के लिए एफएआर तथा भवनों की ऊंचाई से संबंधित नियमों में राहत देने का प्रावधान प्रस्तावित है। प्रशासन का मानना है कि इससे शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े संस्थानों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
चिन्हित इलाकों में मिश्रित भू-उपयोग को बढ़ावा देने का प्रस्ताव भी महत्वपूर्ण है। इसके तहत आवासीय जरूरतों के साथ अन्य गतिविधियों के लिए भूमि के इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
हालांकि, मास्टर प्लान में किसी भी बदलाव को लागू करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया पूरी करनी होगी। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक गृह मंत्रालय से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद संशोधनों को हेरिटेज कंजर्वेशन कमेटी के समक्ष रखा जाएगा। कमेटी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लीजहोल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड करने से कारोबारियों को बड़ी राहत की उम्मीद
बैठक में व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों को लीजहोल्ड से फ्रीहोल्ड में बदलने का प्रस्ताव भी खासा अहम होगा। चंडीगढ़ में बड़ी संख्या में संपत्तियां अभी लीजहोल्ड व्यवस्था के तहत हैं। फ्रीहोल्ड का दर्जा मिलने से संपत्ति मालिकों के अधिकार और संपत्ति के हस्तांतरण से जुड़े मामलों में आसानी आने की उम्मीद है।
प्रशासन का आकलन है कि इस कदम से लंबे समय से विभिन्न प्रक्रियाओं में फंसी करोड़ों रुपये की संपत्तियों का आर्थिक उपयोग बढ़ सकता है। संपत्तियों को फ्रीहोल्ड किए जाने से उनके मालिकों को अधिक स्पष्ट और व्यापक अधिकार मिल सकते हैं। साथ ही प्रशासन को भी इससे अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने की संभावना है।
इस प्रस्ताव को चंडीगढ़ प्रशासन मई में मंजूरी देकर केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेज चुका है। अब दिल्ली में होने वाली बैठक में इस पर आगे की दिशा तय होने की उम्मीद है।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो औद्योगिक और व्यावसायिक संपत्तियों के मालिकों के लिए यह बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। इससे संपत्ति से जुड़े लेन-देन, निवेश और कारोबारी गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना जताई जा रही है।
पुनर्वास कॉलोनियों के हजारों परिवारों की नजर फैसले पर
पुनर्वास कॉलोनियों के अलॉटियों को स्थायी मालिकाना हक देने का मुद्दा भी लंबे समय से लंबित है। प्रशासन की ओर से इस संबंध में प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है।
मालिकाना अधिकार मिलने की स्थिति में इन कॉलोनियों में रहने वाले हजारों परिवारों की संपत्ति से जुड़ी स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल अलॉटमेंट और संपत्ति अधिकारों को लेकर जो सीमाएं हैं, उनमें बदलाव की उम्मीद की जा रही है।
प्रशासन की ओर से इस प्रस्ताव को लंबे समय से विचाराधीन विषयों में रखा गया है। इसलिए आज होने वाली चर्चा को इन परिवारों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। केंद्र से सकारात्मक संकेत मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
मेयर के कार्यकाल पर भी अहम फैसला संभव
चंडीगढ़ नगर निगम से जुड़ा एक अन्य महत्वपूर्ण प्रस्ताव मेयर के कार्यकाल को लेकर है। प्रशासन की ओर से मेयर का कार्यकाल मौजूदा एक वर्ष से बढ़ाकर ढाई वर्ष करने का प्रस्ताव रखा गया है।
वर्तमान व्यवस्था में हर वर्ष मेयर का चुनाव होने के कारण नगर निगम की राजनीतिक गतिविधियों में लगातार बदलाव देखने को मिलता है। कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव के पीछे निगम के कामकाज में निरंतरता लाने और दीर्घकालिक योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने का तर्क दिया जा रहा है।
हालांकि, इस बदलाव का असर नगर निगम की राजनीतिक व्यवस्था पर भी पड़ेगा। मौजूदा सदन का कार्यकाल समाप्ति की ओर बढ़ रहा है और आने वाले समय में चुनावी गतिविधियां शुरू होने की संभावना है। ऐसे में मेयर के कार्यकाल को लेकर लिया जाने वाला निर्णय आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
केंद्र की मंजूरी के बाद बदलेगा अगला रोडमैप
चंडीगढ़ प्रशासन की नजर अब दिल्ली में होने वाली बैठक के नतीजे पर टिकी है। जिन प्रस्तावों को प्रशासन ने लंबे विचार-विमर्श के बाद केंद्र के समक्ष रखा है, उन पर गृह मंत्रालय की राय आगे की प्रक्रिया निर्धारित करने में अहम भूमिका निभाएगी।
यदि प्रस्तावों को सैद्धांतिक मंजूरी मिलती है तो संबंधित विभागों को नियमों और प्रक्रियाओं में आवश्यक बदलाव करने होंगे। वहीं, केंद्र की ओर से किसी प्रस्ताव में संशोधन का सुझाव दिए जाने पर प्रशासन को उसे नए सिरे से तैयार करना पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, आज की बैठक चंडीगढ़ के लिए केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं बल्कि शहर के आने वाले वर्षों के विकास की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है। मास्टर प्लान में संभावित बदलाव से निर्माण और भूमि उपयोग के नए अवसर खुलने, संपत्तियों को फ्रीहोल्ड किए जाने से आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और पुनर्वास कॉलोनियों के लोगों को मालिकाना हक मिलने से संपत्ति विवादों को कम करने की उम्मीद है। वहीं, मेयर के कार्यकाल में बदलाव नगर निगम की कार्यप्रणाली और राजनीतिक व्यवस्था पर सीधा प्रभाव डाल सकता है।




