चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में बदलेगा करियर गाइडेंस का तरीका, प्रतियोगी परीक्षाओं पर छात्रों को मिलेगा विशेषज्ञ मार्गदर्शन

चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में बदलेगा करियर गाइडेंस का तरीका, प्रतियोगी परीक्षाओं पर छात्रों को मिलेगा विशेषज्ञ मार्गदर्शन

चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब स्कूली पढ़ाई के साथ-साथ भविष्य के करियर और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर व्यवस्थित मार्गदर्शन देने की तैयारी की जा रही है। शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों को निर्देश जारी कर विद्यार्थियों के लिए करियर काउंसलिंग आयोजित करने को कहा है। इस पहल के तहत निजी कोचिंग संस्थानों की मदद से छात्रों को अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं और उनके लिए जरूरी तैयारी के बारे में जानकारी दी जाएगी।

जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से स्कूलों को भेजे गए निर्देशों में कहा गया है कि विद्यार्थियों को उनकी रुचि, क्षमता और शैक्षणिक पृष्ठभूमि के अनुसार करियर के विकल्पों से अवगत कराया जाए। खासतौर पर 10वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं के संबंध में समय रहते सही जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।

काउंसलिंग के दौरान विद्यार्थियों को राष्ट्रीय रक्षा अकादमी यानी एनडीए, कंबाइंड डिफेंस सर्विसेज यानी सीडीएस, जेईई और नीट जैसी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में जानकारी दी जा सकती है। इन परीक्षाओं की पात्रता, परीक्षा का पैटर्न, विषयों का चयन, तैयारी की रणनीति और आगे उपलब्ध करियर विकल्पों को लेकर छात्रों को मार्गदर्शन देने की योजना है। इससे विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि उनकी रुचि और क्षमता के हिसाब से कौन सा क्षेत्र उनके लिए अधिक उपयुक्त हो सकता है।

शिक्षा विभाग की इस पहल के पीछे यह सोच है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भी निजी स्कूलों और महंगे कोचिंग संस्थानों के विद्यार्थियों की तरह समय पर करियर संबंधी जानकारी मिल सके। अक्सर विद्यार्थी 10वीं के बाद विषय तो चुन लेते हैं, लेकिन भविष्य में उन विषयों से जुड़े करियर विकल्पों, प्रवेश परीक्षाओं और तैयारी की प्रक्रिया के बारे में उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं मिल पाती। ऐसे में करियर काउंसलिंग विद्यार्थियों को समय रहते अपनी दिशा तय करने में मदद कर सकती है।

चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया भी विद्यार्थियों की करियर काउंसलिंग को लेकर शिक्षा विभाग को लगातार प्रोत्साहित कर रहे हैं। विभिन्न स्कूली कार्यक्रमों में वह इस बात पर जोर दे चुके हैं कि विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित रखने के बजाय उनके भविष्य को लेकर भी मार्गदर्शन दिया जाना जरूरी है। उनका कहना रहा है कि 10वीं और 12वीं कक्षा विद्यार्थियों के जीवन में महत्वपूर्ण पड़ाव होते हैं और इसी दौरान उन्हें उच्च शिक्षा तथा करियर के विकल्पों की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए।

प्रशासन की ओर से करियर काउंसलिंग पर जोर दिए जाने के बाद शिक्षा विभाग ने स्कूल स्तर पर इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। निजी कोचिंग संस्थानों के विशेषज्ञ विद्यार्थियों के साथ संवाद कर उन्हें विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के बारे में जानकारी देंगे। हालांकि इसका उद्देश्य केवल छात्रों को किसी एक परीक्षा की तैयारी के लिए प्रेरित करना नहीं, बल्कि उन्हें उपलब्ध विकल्पों की जानकारी देकर अपनी क्षमता के अनुसार निर्णय लेने में सक्षम बनाना होगा।

एनडीए और सीडीएस जैसी परीक्षाओं के जरिए विद्यार्थी रक्षा सेवाओं में करियर बना सकते हैं, जबकि जेईई इंजीनियरिंग संस्थानों में प्रवेश के लिए प्रमुख परीक्षा है। इसी तरह नीट के माध्यम से मेडिकल क्षेत्र में प्रवेश का रास्ता खुलता है। करियर काउंसलिंग में इन परीक्षाओं के बीच अंतर, पात्रता और तैयारी के लिए आवश्यक शैक्षणिक आधार जैसी जानकारियां विद्यार्थियों के लिए उपयोगी साबित हो सकती हैं।

विशेष रूप से विज्ञान विषयों की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए यह मार्गदर्शन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी मेडिकल और नॉन-मेडिकल स्ट्रीम में पढ़ाई करते हैं। ऐसे विद्यार्थियों के सामने 12वीं के बाद कई विकल्प होते हैं, लेकिन सही जानकारी के अभाव में वे कई बार सीमित विकल्पों तक ही अपनी सोच रखते हैं। काउंसलिंग के जरिए उन्हें इंजीनियरिंग, मेडिकल, डिफेंस सहित अन्य उच्च शिक्षा और रोजगार क्षेत्रों की जानकारी दी जा सकती है।

चंडीगढ़ में 42 सीनियर सेकेंडरी सरकारी स्कूल हैं। इन स्कूलों में विज्ञान मेडिकल और नॉन-मेडिकल की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों की संख्या भी काफी है। बताया जा रहा है कि इन कक्षाओं के कई विद्यार्थियों को दोपहर 12 बजे के आसपास स्कूल से छुट्टी दे दी जाती है। इस व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि स्कूलों में समय से पहले छुट्टी को लेकर किसी औपचारिक लिखित आदेश के बजाय मौखिक निर्देशों की चर्चा सामने आती रही है।

शिक्षा विभाग की करियर काउंसलिंग पहल ऐसे समय में सामने आई है जब विद्यार्थियों के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को शुरुआती स्तर से ही तैयारी की जरूरत पड़ती है। वहीं रक्षा सेवाओं में जाने के इच्छुक विद्यार्थियों को शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ परीक्षा और चयन प्रक्रिया की भी जानकारी होना जरूरी है।

सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को यदि 10वीं कक्षा से ही विभिन्न विकल्पों की जानकारी मिलना शुरू हो जाए तो वे अपनी आगे की पढ़ाई को बेहतर तरीके से योजना बना सकते हैं। उदाहरण के तौर पर जेईई की तैयारी करने वाले विद्यार्थी गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान पर विशेष ध्यान दे सकते हैं, जबकि नीट की दिशा में जाने वाले विद्यार्थियों को जीव विज्ञान सहित संबंधित विषयों पर अपनी पकड़ मजबूत करनी होती है। इसी तरह एनडीए और सीडीएस की तैयारी के लिए शैक्षणिक योग्यता के अलावा सामान्य ज्ञान, तर्कशक्ति और अन्य निर्धारित क्षेत्रों की जानकारी भी आवश्यक होती है।

करियर काउंसलिंग का एक बड़ा फायदा यह भी हो सकता है कि विद्यार्थी केवल आसपास के लोकप्रिय करियर विकल्पों तक सीमित न रहें। कई बार विद्यार्थी अपने दोस्तों या परिवार के सुझाव के आधार पर विषय और करियर चुन लेते हैं। विशेषज्ञों के साथ संवाद से उन्हें अपनी रुचि, योग्यता और भविष्य की संभावनाओं को समझने का अवसर मिलेगा। इससे गलत विषय चयन या बिना जानकारी के प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी शुरू करने जैसी समस्याओं को कम किया जा सकता है।

शिक्षा विभाग के निर्देशों के बाद अब सरकारी स्कूलों में इस तरह की काउंसलिंग के आयोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। स्कूल प्रबंधन को यह सुनिश्चित करना होगा कि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिले और उन्हें केवल परीक्षा की तैयारी से संबंधित जानकारी ही नहीं, बल्कि परीक्षा के बाद उपलब्ध शैक्षणिक और करियर विकल्पों के बारे में भी बताया जाए।

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि करियर संबंधी विशेषज्ञ सलाह तक सभी विद्यार्थियों की समान पहुंच नहीं होती। निजी कोचिंग या व्यक्तिगत काउंसलिंग की सुविधा हर परिवार के लिए संभव नहीं है। ऐसे में स्कूल स्तर पर विशेषज्ञों की मदद से मार्गदर्शन उपलब्ध कराने से आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि वाले विद्यार्थियों को भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और करियर विकल्पों को समझने का अवसर मिल सकता है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि काउंसलिंग की प्रक्रिया कितनी नियमित और प्रभावी तरीके से लागू होती है। यदि विद्यार्थियों को केवल एक बार जानकारी देने के बजाय 10वीं से 12वीं तक चरणबद्ध तरीके से मार्गदर्शन दिया जाए, तो इसका असर अधिक व्यापक हो सकता है। साथ ही छात्रों की व्यक्तिगत रुचि और क्षमता को ध्यान में रखते हुए उन्हें अलग-अलग विकल्पों के बारे में जानकारी देना भी जरूरी होगा।

चंडीगढ़ प्रशासन और शिक्षा विभाग की इस पहल से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के सामने प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा के विकल्पों का दायरा बढ़ने की उम्मीद है। अब एनडीए, सीडीएस, जेईई या नीट में से कौन सा रास्ता उनके लिए बेहतर है, इसका फैसला केवल दूसरों की देखा-देखी नहीं बल्कि अपनी रुचि, क्षमता और लक्ष्य को समझने के बाद लेने की दिशा में विद्यार्थियों को प्रेरित किया जाएगा। यही करियर काउंसलिंग इस पहल का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य माना जा रहा है।