शिमला: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम की सराहना करते हुए इसे समाज में सकारात्मक बदलाव लाने वाले लोगों को देशव्यापी पहचान दिलाने का प्रभावी मंच बताया। विधानसभा परिसर में भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री का कार्यक्रम सुनने के बाद जयराम ठाकुर ने कहा कि ‘मन की बात’ के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में अपने स्तर पर उल्लेखनीय काम कर रहे लोगों और संस्थाओं की पहल सामने आती है। इससे न केवल उन प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान मिलती है, बल्कि दूसरे लोग भी उनसे प्रेरणा लेकर समाजहित में काम करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री अपने मासिक संवाद के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों में चल रहे सकारात्मक प्रयासों को लोगों तक पहुंचाते हैं। इनमें सामाजिक कार्य, संस्कृति, पर्यावरण, शिक्षा, स्थानीय प्रतिभा, परंपराओं और अन्य जनसरोकारों से जुड़े विषय शामिल होते हैं। उनके मुताबिक ऐसे प्रयासों को व्यापक मंच मिलने से समाज में सकारात्मक सोच और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।
उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें देश के सामान्य नागरिकों के कार्यों और उपलब्धियों को भी महत्व दिया जाता है। प्रधानमंत्री जब किसी व्यक्ति या समूह के प्रयासों का उल्लेख करते हैं तो उससे उस पहल को नई पहचान मिलती है और दूसरे लोग भी उसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं।
कार्यक्रम सुनने के बाद नेता प्रतिपक्ष ने देश और हिमाचल प्रदेश में बढ़ती नशे की समस्या पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाना मौजूदा समय की सबसे बड़ी सामाजिक चुनौतियों में से एक है। पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश भी इस समस्या से अछूता नहीं है और यहां नशे के बढ़ते प्रभाव को रोकना बेहद जरूरी है।
जयराम ठाकुर ने कहा कि नशे की समस्या का असर केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे पूरा समाज प्रभावित होता है। विशेष रूप से युवा वर्ग के नशे की चपेट में आने से परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसलिए इस चुनौती का मुकाबला व्यापक स्तर पर किए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान को केवल सरकार और पुलिस तक सीमित रखने से अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं किए जा सकते। इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आना होगा। अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, युवाओं और आम नागरिकों को मिलकर नशे के खिलाफ वातावरण तैयार करना होगा।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नशे के विरुद्ध लड़ाई को जनअभियान का स्वरूप देना समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जब पूरा समाज एकजुट होकर युवाओं को नशे से दूर रखने और उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास करेगा, तभी इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकेगा।
जयराम ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नशे के खिलाफ प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस चुनौती को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि जिस दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ देश ने अन्य गंभीर आंतरिक चुनौतियों का सामना किया है, उसी संकल्प के साथ नशे के खिलाफ भी प्रभावी लड़ाई लड़ी जाएगी।
उन्होंने कहा कि देश ने नक्सलवाद जैसी गंभीर चुनौती से निपटने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इस समस्या के खिलाफ लगातार कठोर और प्रभावी रणनीति अपनाई। जयराम ठाकुर ने उम्मीद जताई कि इसी तरह के दृढ़ संकल्प के साथ देश नशे की समस्या पर भी काबू पाने में सफल होगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में नशा देश के लिए अतीत की समस्या बन जाएगा। हालांकि इसके लिए उन्होंने सरकारी कार्रवाई के साथ सामाजिक जागरूकता और जनभागीदारी को भी जरूरी बताया। उनका कहना था कि युवाओं को नशे से बचाने के लिए उन्हें खेल, शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना होगा।
जयराम ठाकुर ने ‘मन की बात’ में इतिहास, भारतीय संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों को स्थान दिए जाने की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री देश की विविधता और अलग-अलग क्षेत्रों में हो रहे सकारात्मक कार्यों को सामने लाते हैं। इससे लोगों को अपनी स्थानीय परंपराओं, संस्कृति और विरासत को संरक्षित करने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में कई लोग बिना किसी प्रचार की अपेक्षा के समाज के लिए काम कर रहे हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय मंच देना अपने आप में महत्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री द्वारा उनके कार्यों का उल्लेख किए जाने से न केवल संबंधित व्यक्ति का उत्साह बढ़ता है, बल्कि उनके कार्य को व्यापक स्तर पर अपनाने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
जयराम ठाकुर ने जन्माष्टमी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘लोकल फॉर वोकल’ को बढ़ावा देने की अपील का भी स्वागत किया। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों, कारीगरों, उद्यमियों और प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना आत्मनिर्भर भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि जब लोग स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए उत्पादों को प्राथमिकता देंगे तो इसका सीधा लाभ स्थानीय कारोबारियों और उत्पादकों को मिलेगा। इससे स्थानीय बाजार मजबूत होंगे और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि छोटे उद्यमों और स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने से ग्रामीण और छोटे शहरों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
नेता प्रतिपक्ष के अनुसार ‘लोकल फॉर वोकल’ केवल खरीदारी से जुड़ा अभियान नहीं है, बल्कि यह स्थानीय कौशल, परंपरागत उद्योगों और प्रतिभाओं को संरक्षण देने का माध्यम भी बन सकता है। हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य में हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद, कृषि आधारित वस्तुएं और पारंपरिक कला से जुड़े लोगों को इसका विशेष लाभ मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता, पैकेजिंग और विपणन पर भी ध्यान देने की जरूरत है, ताकि हिमाचल सहित देश के विभिन्न हिस्सों के उत्पाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना सकें।
जयराम ठाकुर ने कहा कि ‘मन की बात’ समय के साथ केवल रेडियो के माध्यम से प्रसारित होने वाला कार्यक्रम नहीं रह गया है। यह देश के करोड़ों लोगों को जोड़ने वाला ऐसा मंच बन गया है, जहां समाज के विभिन्न क्षेत्रों में असाधारण काम करने वाले सामान्य नागरिकों की कहानियां सामने आती हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का यह प्रयास समाज में सकारात्मक उदाहरणों को सामने लाने का काम करता है। जब किसी गांव, कस्बे या छोटे शहर में रहने वाले व्यक्ति की पहल को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलती है तो इससे उस व्यक्ति के साथ-साथ उसके क्षेत्र के अन्य लोगों का भी उत्साह बढ़ता है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि आज के दौर में समाज में सकारात्मक कहानियों और प्रेरणादायक उदाहरणों को सामने लाना बेहद आवश्यक है। युवाओं को ऐसी उपलब्धियों से जोड़कर उनमें यह विश्वास पैदा किया जा सकता है कि वे भी अपने स्तर पर बदलाव ला सकते हैं।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लोगों से भी नशे के खिलाफ सामूहिक रूप से आगे आने की अपील की। जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश की युवा शक्ति को नशे से बचाना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार और समाज की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से युवाओं की गतिविधियों पर ध्यान देने, उन्हें रचनात्मक कार्यों में प्रोत्साहित करने और नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
जयराम ठाकुर ने कहा कि यदि समाज एकजुट होकर नशे के खिलाफ काम करता है तो इस चुनौती को हराना संभव है। उन्होंने विश्वास जताया कि राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक कार्रवाई और सामाजिक भागीदारी के संयुक्त प्रयासों से हिमाचल समेत पूरे देश को नशामुक्ति की दिशा में आगे ले जाया जा सकता है।
उन्होंने ‘मन की बात’ के माध्यम से स्थानीय उपलब्धियों, भारतीय संस्कृति और सामाजिक पहलों को देश के सामने लाने के प्रधानमंत्री के प्रयास को सकारात्मक बताया। साथ ही कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज में बदलाव के लिए काम करने वाले लोगों को प्रोत्साहन देते हैं और आम नागरिकों को भी अपने आसपास सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित करते हैं।




