जियो प्लेटफॉर्म्स के शुरुआती सार्वजनिक निर्गम यानी IPO ने भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी का नया उदाहरण पेश किया है। कंपनी के 30,213 करोड़ रुपये के इस इश्यू को लेकर निवेशकों ने जिस स्तर पर भागीदारी दिखाई, उसने आवेदन संख्या के मामले में दुनिया भर के IPO का पिछला रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। तीन दिनों तक चली बोली प्रक्रिया समाप्त होने तक इस इश्यू के लिए 1.38 करोड़ से अधिक आवेदन दर्ज किए गए। इसके साथ ही जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO निवेशकों से सबसे ज्यादा आवेदन प्राप्त करने वाले सार्वजनिक निर्गम के रूप में चर्चा में आ गया है।
शुक्रवार, 23 अक्टूबर को शाम 7 बजे तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जियो IPO को कुल मिलाकर 22 गुना से ज्यादा सब्सक्रिप्शन मिला। एंकर और गैर-एंकर निवेशकों की ओर से लगाई गई बोलियों का कुल मूल्य लगभग 7.40 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसमें गैर-एंकर निवेशकों की करीब 4.90 लाख करोड़ रुपये की बोलियां शामिल रहीं, जबकि एंकर निवेशकों की तरफ से लगभग 2.50 लाख करोड़ रुपये की मांग आई। इन आंकड़ों ने इश्यू के आकार और निवेशकों की भागीदारी के बीच बड़े अंतर को सामने रखा है।
इस रिकॉर्डतोड़ प्रतिक्रिया के बाद अब बाजार में सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि आवेदन करने वाले निवेशकों में से कितने लोगों को कंपनी के शेयर आवंटित होंगे। हालांकि, आवेदन की कुल संख्या और सब्सक्रिप्शन का आंकड़ा देखकर किसी निवेशक के शेयर मिलने की संभावना का सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता। वास्तविक आवंटन संबंधित श्रेणी में उपलब्ध शेयरों, वैध आवेदनों, आवेदन के आकार और निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा।
रिटेल निवेशकों ने भी दिखाई मजबूत दिलचस्पी
जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में छोटे निवेशकों की भागीदारी भी काफी अधिक रही। रिटेल निवेशकों के लिए निर्धारित श्रेणी में लगभग 8.5 करोड़ शेयर उपलब्ध थे, जबकि इसके मुकाबले 23 करोड़ से अधिक शेयरों के लिए बोलियां लगाई गईं। इस तरह रिटेल श्रेणी में उपलब्ध शेयरों की तुलना में करीब 2.72 गुना मांग दर्ज की गई।
रिटेल निवेशकों की यह प्रतिक्रिया दिखाती है कि इश्यू को लेकर व्यक्तिगत निवेशकों के बीच भी खासा आकर्षण रहा। हालांकि, केवल इस आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि प्रत्येक रिटेल निवेशक को शेयर जरूर मिलेंगे या किसी खास निवेशक का आवेदन सफल होगा। आवंटन की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और पात्र आवेदनों के आधार पर पूरी की जाएगी।
IPO में आवेदन करने वाले निवेशकों के लिए यह समझना जरूरी है कि अधिक सब्सक्रिप्शन का अर्थ अधिक शेयर मिलना नहीं होता। जब किसी श्रेणी में उपलब्ध शेयरों की तुलना में कई गुना ज्यादा मांग आती है, तब आवंटन की संभावना संबंधित श्रेणी की व्यवस्था और वैध आवेदनों पर निर्भर करती है। इसलिए निवेशकों को केवल कुल आवेदन संख्या के आधार पर अपने आवंटन को लेकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
जियो IPO की प्रतिक्रिया ने यह भी दिखाया कि बड़े आकार के इश्यू में अलग-अलग प्रकार के निवेशकों की भागीदारी किस तरह कुल मांग को प्रभावित कर सकती है। संस्थागत निवेशकों, गैर-संस्थागत निवेशकों, कर्मचारियों, रिटेल निवेशकों और रिलायंस के शेयरधारकों के लिए अलग-अलग श्रेणियां निर्धारित थीं। प्रत्येक श्रेणी में सब्सक्रिप्शन का स्तर अलग रहा।
संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में 70 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन
जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में सबसे अधिक मांग योग्य संस्थागत खरीदारों यानी QIB श्रेणी में दिखाई दी। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, इस श्रेणी को 70.55 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। इसका अर्थ है कि इस श्रेणी में उपलब्ध शेयरों की तुलना में निवेशकों ने कई गुना अधिक शेयरों के लिए बोलियां लगाईं।
गैर-संस्थागत निवेशकों यानी NII की श्रेणी में भी मांग मजबूत रही। इस वर्ग को लगभग 14 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। वहीं, रिलायंस के मौजूदा शेयरधारकों के लिए निर्धारित कोटे में 7.60 गुना और कर्मचारियों के लिए आरक्षित श्रेणी में 2.93 गुना सब्सक्रिप्शन दर्ज किया गया।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि IPO में भाग लेने वाले निवेशकों की अलग-अलग श्रेणियों ने अपनी क्षमता और निर्धारित आवंटन के अनुसार बोलियां लगाईं। हालांकि, सभी श्रेणियों के सब्सक्रिप्शन को एक साथ देखकर किसी एक निवेशक के शेयर मिलने की संभावना तय नहीं की जा सकती। प्रत्येक श्रेणी के लिए लागू आवंटन नियम अलग-अलग परिणाम दे सकते हैं।
संस्थागत निवेशकों की ओर से आई बड़ी मांग IPO के कुल आंकड़ों का महत्वपूर्ण हिस्सा रही। इसके साथ ही गैर-संस्थागत और रिटेल निवेशकों की भागीदारी ने भी इश्यू को व्यापक निवेशक आधार दिया। अब बोली प्रक्रिया समाप्त होने के बाद निवेशकों की निगाहें आवंटन की घोषणा और उसके बाद शेयरों की बाजार में शुरुआत पर टिकी हैं।
अक्टूबर के आखिर में अलॉटमेंट और लिस्टिंग पर नजर
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO का शेयर आवंटन 26 अक्टूबर को होना है। इसके बाद 27 अक्टूबर को आवंटित शेयर निवेशकों के डीमैट खातों में क्रेडिट किए जाने हैं। कंपनी के शेयरों की BSE और NSE पर लिस्टिंग 28 अक्टूबर को निर्धारित है।
इस कार्यक्रम के तहत जिन निवेशकों को शेयर आवंटित होंगे, वे अपने डीमैट खाते में शेयरों के क्रेडिट होने की स्थिति देख सकेंगे। जिन निवेशकों को शेयर नहीं मिलेंगे, उनके आवेदन और भुगतान से संबंधित प्रक्रिया लागू नियमों के मुताबिक आगे बढ़ेगी। निवेशकों को आवंटन की स्थिति जानने के लिए कंपनी, रजिस्ट्रार या संबंधित एक्सचेंज की आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए।
लिस्टिंग की तारीख पर बाजार में शेयर की कीमत मांग और आपूर्ति सहित कई कारकों से प्रभावित हो सकती है। IPO में अधिक सब्सक्रिप्शन मिलना अपने आप में इस बात की गारंटी नहीं है कि शेयर लिस्टिंग के दिन किसी निश्चित कीमत पर कारोबार करेगा। वास्तविक बाजार प्रदर्शन लिस्टिंग के समय की परिस्थितियों और निवेशकों के व्यवहार पर निर्भर करेगा।
इसी वजह से IPO में आवेदन करने वाले निवेशकों के लिए आवंटन और लिस्टिंग को दो अलग-अलग चरणों के रूप में समझना महत्वपूर्ण है। पहले यह निर्धारित होगा कि किन निवेशकों को शेयर मिलते हैं। उसके बाद एक्सचेंज पर कारोबार शुरू होने पर बाजार में शेयर की कीमत तय होगी।
वारी एनर्जीज का पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छूटा
जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO ने सिर्फ बोली के कुल मूल्य और सब्सक्रिप्शन के स्तर के कारण ही सुर्खियां नहीं बटोरीं, बल्कि आवेदनों की संख्या में भी नया रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले किसी IPO में सबसे ज्यादा आवेदन मिलने का रिकॉर्ड वारी एनर्जीज के नाम था। अक्टूबर 2024 में कंपनी के सार्वजनिक निर्गम को लगभग 97.34 लाख आवेदन प्राप्त हुए थे।
इसके मुकाबले जियो IPO में 1.38 करोड़ से ज्यादा आवेदन दर्ज किए गए। यानी आवेदन संख्या के लिहाज से जियो ने वारी एनर्जीज के पुराने रिकॉर्ड को बड़े अंतर से पीछे छोड़ दिया। उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर यह बढ़ोतरी लगभग 42 प्रतिशत के आसपास बैठती है।
जियो IPO की बोली प्रक्रिया के दौरान भी आवेदन संख्या तेजी से बढ़ती रही। पहले दिन करीब 30.5 लाख आवेदन दर्ज किए गए थे। दूसरे दिन के अंत तक इनकी संख्या 75 लाख से अधिक हो गई। तीसरे दिन निवेशकों की भागीदारी और बढ़ी तथा प्रक्रिया बंद होने तक आवेदन संख्या 1.38 करोड़ के पार पहुंच गई।
इस क्रमिक वृद्धि से पता चलता है कि इश्यू के अंतिम चरण में भी निवेशकों की भागीदारी बनी रही। हालांकि, आवेदन संख्या में वृद्धि के पीछे किसी एक कारण को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। निवेशकों की उम्मीदें, कंपनी को लेकर धारणा, बाजार की परिस्थितियां और IPO की संरचना जैसे कई पहलू भागीदारी को प्रभावित कर सकते हैं।
आकाश अंबानी के जन्मदिन पर पूरी हुई ऐतिहासिक बोली प्रक्रिया
जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO की क्लोजिंग का दिन एक अन्य वजह से भी उल्लेखनीय रहा। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी का जन्मदिन था। इसी दिन IPO की बोली प्रक्रिया समाप्त हुई और आवेदन संख्या के मामले में नया वैश्विक रिकॉर्ड सामने आया।
हालांकि, जन्मदिन और IPO की क्लोजिंग का एक ही दिन पड़ना एक संयोग है। रिकॉर्ड का मुख्य आधार प्राप्त आवेदनों की संख्या और निवेशकों की ओर से लगाई गई बोलियां हैं। कंपनी के इस सार्वजनिक निर्गम ने भारतीय पूंजी बाजार में बड़े इश्यू को लेकर निवेशकों की भागीदारी पर ध्यान आकर्षित किया है।
30,213 करोड़ रुपये के IPO के लिए लगभग 7.40 लाख करोड़ रुपये की कुल बोलियां और 1.38 करोड़ से अधिक आवेदन इस इश्यू की प्रमुख विशेषताएं रहीं। इसके साथ ही संस्थागत निवेशकों की 70.55 गुना मांग और रिटेल श्रेणी में 2.72 गुना सब्सक्रिप्शन ने अलग-अलग निवेशक वर्गों की दिलचस्पी को रेखांकित किया।
अब निवेशकों के लिए अगला महत्वपूर्ण पड़ाव शेयर आवंटन और एक्सचेंज पर लिस्टिंग है। 26 अक्टूबर को आवंटन, 27 अक्टूबर को डीमैट खातों में शेयरों का क्रेडिट और 28 अक्टूबर को प्रस्तावित लिस्टिंग के साथ IPO की प्रक्रिया अगले चरण में पहुंचेगी। फिलहाल, रिकॉर्ड आवेदन संख्या ने जियो प्लेटफॉर्म्स के इस निर्गम को भारतीय शेयर बाजार की प्रमुख घटनाओं में शामिल कर दिया है।




