करवा चौथ पर इन 5 चीजों को घर लाना माना जाता है शुभ, सुख-समृद्धि और खुशहाली से जुड़ी हैं ये मान्यताएं

करवा चौथ पर इन 5 चीजों को घर लाना माना जाता है शुभ, सुख-समृद्धि और खुशहाली से जुड़ी हैं ये मान्यताएं

करवा चौथ का पर्व भारतीय परंपरा में प्रेम, विश्वास और वैवाहिक रिश्ते की मजबूती का प्रतीक माना जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और दांपत्य जीवन में सुख बनाए रखने की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। त्योहार नजदीक आते ही घरों में तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बाजारों में पूजा सामग्री, रंग-बिरंगी चूड़ियों, मेहंदी, साड़ियों, चुनरी और मिठाइयों की खरीदारी भी बढ़ जाती है। हालांकि, करवा चौथ पर खरीदारी का संबंध केवल त्योहार की तैयारियों से ही नहीं, बल्कि कई धार्मिक परंपराओं और शुभ-अशुभ की मान्यताओं से भी जुड़ा हुआ है।

धार्मिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र से जुड़ी परंपराओं में कुछ वस्तुओं को घर लाना शुभ माना जाता है। लोगों का विश्वास है कि इन चीजों के माध्यम से परिवार में सकारात्मकता, सुख-शांति और समृद्धि का वातावरण बना रहता है। करवा चौथ पर मिट्टी के करवे से लेकर सुहाग की सामग्री तक, कई वस्तुएं पूजा और पारंपरिक रस्मों का महत्वपूर्ण हिस्सा होती हैं। ऐसे में अगर आप भी इस बार करवा चौथ की तैयारी कर रही हैं, तो जानिए किन पांच चीजों की खरीदारी को इस अवसर पर शुभ माना जाता है और त्योहार की परंपराओं में उनका क्या महत्व है।

करवा चौथ पर खरीदारी से जुड़ी हैं खास धार्मिक मान्यताएं

करवा चौथ का व्रत पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। इस दिन महिलाएं सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत शुरू करती हैं और पूरे दिन भोजन तथा पानी से परहेज करती हैं। शाम के समय पूजा की तैयारी की जाती है। महिलाएं पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं, सोलह श्रृंगार करती हैं और परिवार की अन्य महिलाओं के साथ पूजा में हिस्सा लेती हैं।

इस अवसर पर भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा चौथ की परंपरा से जुड़ी कथाओं का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा के बाद चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है और पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत पूरा किया जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में पूजा की विधि तथा रीति-रिवाजों में कुछ अंतर हो सकता है।

लोकल 18 से बातचीत के दौरान ज्योतिषी अखिलेश पांडेय ने करवा चौथ से जुड़ी धार्मिक परंपराओं और इस दिन खरीदारी के महत्व के बारे में जानकारी दी। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ विशेष वस्तुएं इस दिन घर लाना शुभ माना जाता है। हालांकि, इन मान्यताओं को धार्मिक और सांस्कृतिक विश्वास के रूप में देखना चाहिए। इनसे सुख-समृद्धि मिलने की कोई वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।

इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस मौके पर पूजा की तैयारियों के साथ महिलाएं अपने सुहाग और परिवार से जुड़ी परंपराओं को भी निभाएंगी।

1. मिट्टी का करवा: पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा

करवा चौथ के नाम से ही स्पष्ट होता है कि इस पर्व में करवे का विशेष स्थान है। मिट्टी का करवा इस त्योहार की पूजा सामग्री में प्रमुख माना जाता है। पारंपरिक रूप से इसका इस्तेमाल जल रखने और पूजा से जुड़ी रस्मों को पूरा करने के लिए किया जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, करवा चौथ पर नया करवा खरीदना शुभ माना जाता है। कई परिवारों में मिट्टी के करवे को पूजा से पहले अच्छी तरह साफ किया जाता है और उसे सजाकर पूजा स्थल पर रखा जाता है। कुछ जगहों पर करवे पर रोली, हल्दी या अन्य पारंपरिक सामग्रियों से चिह्न बनाए जाते हैं।

करवा केवल एक बर्तन नहीं, बल्कि इस त्योहार की परंपरा और पूजा से जुड़ा प्रतीक है। इसलिए बाजार से करवा खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और उपयोगिता का ध्यान रखना चाहिए। यदि आप मिट्टी का करवा ले रही हैं, तो यह भी देख लें कि उसमें दरार न हो और वह पानी रखने के लिए उपयुक्त हो।

2. लाल चुनरी: सुहाग और पारंपरिक श्रृंगार का प्रतीक

भारतीय परंपराओं में लाल रंग को शुभता, प्रेम और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है। विवाह से संबंधित कई रस्मों में लाल रंग के कपड़ों का विशेष महत्व होता है। इसी कारण करवा चौथ पर लाल चुनरी खरीदना भी शुभ माना जाता है।

महिलाएं इस दिन पूजा के लिए लाल या अन्य पारंपरिक रंगों की चुनरी पहन सकती हैं। कुछ परिवारों में माता पार्वती को चुनरी अर्पित करने की परंपरा भी निभाई जाती है। पूजा के बाद चुनरी को सुरक्षित रखा जा सकता है या परिवार की परंपरा के अनुसार उसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

लाल चुनरी के अलावा महिलाएं अपनी पसंद और सुविधा के अनुसार साड़ी, सूट या अन्य पारंपरिक परिधान भी खरीद सकती हैं। जरूरी नहीं कि हर महिला लाल रंग ही चुने। त्योहार का मुख्य उद्देश्य श्रद्धा और पारिवारिक परंपराओं का सम्मान करना है। इसलिए कपड़ों की खरीदारी अपनी पसंद और बजट के अनुसार करना बेहतर रहता है।

3. चूड़ियां, सिंदूर और बिछिया: सुहाग की सामग्री का महत्व

करवा चौथ पर सुहाग से जुड़ी वस्तुओं की खरीदारी का भी खास महत्व माना जाता है। चूड़ियां, सिंदूर, बिछिया और मेहंदी जैसी चीजें भारतीय विवाहित महिलाओं के पारंपरिक श्रृंगार का हिस्सा हैं। कई महिलाएं इस अवसर पर नई चूड़ियां पहनती हैं और हाथों में मेहंदी लगवाती हैं।

धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ पर सुहाग का सामान खरीदना शुभ माना जाता है। कई घरों में इन वस्तुओं को पूजा की तैयारी में शामिल किया जाता है या सास तथा परिवार की अन्य महिलाओं को उपहार के रूप में दिया जाता है।

हालांकि, सुहाग की इन वस्तुओं का महत्व हर क्षेत्र और परिवार में एक जैसा नहीं होता। कुछ जगहों पर विशेष प्रकार की चूड़ियां या श्रृंगार सामग्री पहनने की परंपरा है, जबकि अन्य स्थानों पर अलग-अलग रीति-रिवाज अपनाए जाते हैं।

खरीदारी करते समय अपनी जरूरत और पसंद को प्राथमिकता दें। यदि आपके घर में कोई विशेष परंपरा निभाई जाती है, तो उसी के अनुसार सामग्री तैयार कर सकती हैं। त्योहार को खास बनाने के लिए महंगे आभूषण खरीदना जरूरी नहीं है।

4. पूजा की थाली और दीपक: व्रत की तैयारियों में जरूरी सामान

करवा चौथ की पूजा में थाली और दीपक का इस्तेमाल किया जाता है। इसलिए पूजा की थाली खरीदना भी इस पर्व की तैयारियों का एक अहम हिस्सा है। बाजार में स्टील, पीतल और अन्य धातुओं की थालियां अलग-अलग आकार और डिजाइन में उपलब्ध होती हैं। कई महिलाएं पारंपरिक सजावटी थाली खरीदती हैं, जबकि कुछ घर पर ही पुरानी थाली को साफ करके और सजाकर इस्तेमाल करती हैं।

पूजा की थाली में परिवार की परंपरा के अनुसार रोली, चावल, दीपक, फूल और अन्य आवश्यक सामग्री रखी जा सकती है। करवा चौथ की पूजा के लिए चंद्रमा को अर्घ्य देने में इस्तेमाल होने वाले पात्र की भी व्यवस्था की जाती है।

दीपक को धार्मिक परंपराओं में प्रकाश और शुभता का प्रतीक माना जाता है। पूजा के दौरान दीपक जलाने की प्रथा कई हिंदू त्योहारों में देखने को मिलती है। करवा चौथ पर भी महिलाएं पूजा स्थल पर दीपक जलाकर आराधना करती हैं।

यदि आपके घर में पूजा की थाली पहले से मौजूद है, तो नई थाली खरीदना अनिवार्य नहीं है। साफ-सुथरे बर्तनों और उपलब्ध सामग्री से भी पूजा की तैयारी की जा सकती है। खरीदारी करते समय केवल उन्हीं चीजों को चुनें जिनकी वास्तव में आवश्यकता हो।

5. मिठाई और फल: पूजा तथा पारंपरिक रस्मों में उपयोग

करवा चौथ पर मिठाई और फल खरीदने की परंपरा भी कई परिवारों में प्रचलित है। इनका इस्तेमाल पूजा, प्रसाद और परिवार के सदस्यों के बीच उपहार देने के लिए किया जाता है। कुछ घरों में पूजा के बाद मिठाई बांटी जाती है, जबकि कई जगहों पर फल और अन्य खाद्य सामग्री को पारंपरिक रस्मों में शामिल किया जाता है।

मिठाई खरीदते समय उसकी ताजगी और गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। फल भी साफ और अच्छे होने चाहिए। यदि घर में बुजुर्ग या बच्चे हैं, तो उनकी पसंद के अनुसार मिठाई और फल लिए जा सकते हैं।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि हर परिवार में पूजा की सामग्री और प्रसाद की परंपरा अलग हो सकती है। इसलिए खरीदारी की सूची बनाते समय अपने घर के रीति-रिवाजों को ध्यान में रखना उपयोगी रहेगा। जरूरत से ज्यादा सामान खरीदने के बजाय सीमित और उपयोगी वस्तुओं को प्राथमिकता देना भी अच्छा विकल्प है।

पूजा के बाद सास को दिया जाता है बायना

करवा चौथ की परंपराओं में बायना देने की रस्म का भी महत्वपूर्ण स्थान है। कई परिवारों में पूजा के बाद सास को बायना दिया जाता है। यदि सास मौजूद न हों, तो परिवार की किसी अन्य बड़ी महिला को यह भेंट देने की परंपरा भी निभाई जा सकती है।

बायना में परिवार की रीति के अनुसार मिठाई, फल, कपड़े, सुहाग का सामान और दक्षिणा शामिल की जा सकती है। कुछ महिलाएं इसके लिए अलग से थाली तैयार करती हैं, जिसमें सभी वस्तुओं को व्यवस्थित तरीके से रखा जाता है। कई जगहों पर बायना देने के बाद सास से आशीर्वाद लेने की परंपरा भी है।

इसके अतिरिक्त महिलाएं अपनी रिश्तेदारों, पड़ोसियों या परिचित सुहागिन महिलाओं को भी मिठाई अथवा अन्य उपहार दे सकती हैं। इस तरह त्योहार परिवार और समाज के बीच मेलजोल तथा अपनापन बढ़ाने का अवसर बनता है।

हालांकि, बायना में क्या देना है और किसे देना है, यह परिवार की परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। इसे निभाने के लिए महंगे उपहार खरीदना जरूरी नहीं है। अपनी क्षमता के अनुसार छोटा-सा उपहार भी दिया जा सकता है।

करवा चौथ की खरीदारी करते समय इन बातों का रखें ध्यान

करवा चौथ पर बाजारों में भीड़ बढ़ने की संभावना रहती है, इसलिए पूजा सामग्री की खरीदारी समय रहते कर लेना सुविधाजनक हो सकता है। सबसे पहले आवश्यक वस्तुओं की सूची तैयार करें, ताकि कोई जरूरी सामान छूट न जाए। मिट्टी का करवा, पूजा की थाली, दीपक, रोली, चावल, चुनरी, सुहाग सामग्री, फल और मिठाई जैसी चीजें अपनी जरूरत के अनुसार शामिल की जा सकती हैं।

खरीदारी के दौरान बजट का ध्यान रखना भी जरूरी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी वस्तु को शुभ माना जाना इस बात पर निर्भर नहीं करता कि वह कितनी महंगी है। घर में पहले से मौजूद साफ और उपयोगी सामग्री का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि करवा चौथ को श्रद्धा, आपसी सम्मान और परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय के रूप में देखें। इस पर्व का उद्देश्य केवल नई वस्तुएं खरीदना नहीं, बल्कि पारंपरिक रीति-रिवाजों को निभाना और रिश्तों में प्रेम बनाए रखना भी है।

इस प्रकार मिट्टी का करवा, लाल चुनरी, सुहाग की सामग्री, पूजा की थाली और मिठाई-फल जैसी पांच श्रेणियों की वस्तुओं की खरीदारी करवा चौथ पर शुभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं में इन्हें सुख-समृद्धि और सकारात्मकता से जोड़ा जाता है, लेकिन इन परंपराओं को निभाना पूरी तरह व्यक्तिगत आस्था और पारिवारिक रीति-रिवाजों पर निर्भर करता है।