ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली से मुंबई तक प्रदर्शन, 700 से ज्यादा हिरासत में; CJP का 10 अक्टूबर को फिर जंतर-मंतर का ऐलान

ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर दिल्ली से मुंबई तक प्रदर्शन, 700 से ज्यादा हिरासत में; CJP का 10 अक्टूबर को फिर जंतर-मंतर का ऐलान

गांधी जयंती के मौके पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली और मुंबई में बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। दिल्ली में जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और अन्य प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोक दिया, जबकि मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में शिवाजी पार्क में बड़ी संख्या में लोग जुटे। दोनों शहरों में प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर उठाए जा रहे सवाल रहे। दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के दौरान 700 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर है। वहीं मुंबई में पुलिस की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद CJP ने शिवाजी पार्क में अपना कार्यक्रम आयोजित किया। प्रदर्शन के दौरान ठाणे निवासी 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें सीने में दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, वह प्रदर्शन देखने के लिए शिवाजी पार्क पहुंचे थे।

दिल्ली में जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश, कई बड़े नेता हिरासत में

दिल्ली में गांधी जयंती के दिन प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर सुबह से ही नई दिल्ली इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद विभिन्न विपक्षी दलों और छात्र संगठनों से जुड़े लोग वहां पहुंचने की कोशिश करते रहे। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस से जुड़े युवा और छात्र संगठनों के अलावा वामपंथी दलों से जुड़े कार्यकर्ता भी इस जुटान में शामिल हुए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कई जगह बैरिकेड लगाए थे।

जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को अशोका रोड सहित आसपास के इलाकों में रोका गया। इसके बाद कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 700 से अधिक रही। आम आदमी पार्टी के नेताओं सौरभ भारद्वाज, संजय सिंह, आतिशी और अन्य नेताओं के साथ वामपंथी दलों से जुड़े नेताओं और प्रदर्शनकारियों को भी पुलिस ने रोका।

दिल्ली पुलिस ने पहले ही स्पष्ट किया था कि जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के लिए अनुमति नहीं दी गई है। नई दिल्ली जिले में सार्वजनिक सभा और जुलूस को लेकर प्रतिबंध लागू किए गए थे। प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस और सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई थी। अधिकारियों ने बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की आशंका के मद्देनजर मध्य दिल्ली के कई हिस्सों में सुरक्षा बढ़ाई थी।

11 मेट्रो स्टेशन बंद किए गए, मध्य दिल्ली में ट्रैफिक पर भी असर

प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था का असर दिल्ली मेट्रो और सड़क यातायात पर भी दिखाई दिया। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने नई दिल्ली इलाके के 11 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास अस्थायी रूप से बंद कर दिया। इनमें जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, आईएनए, चावड़ी बाजार, रामकृष्ण आश्रम मार्ग और नई दिल्ली स्टेशन शामिल रहे। कुछ प्रमुख स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रखी गई थी।

प्रदर्शन के कारण कनॉट प्लेस, संसद मार्ग, टॉल्स्टॉय मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में भी यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन की ओर से लोगों को प्रभावित रास्तों से बचने तथा वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई। सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों को प्रतिबंधित क्षेत्र में पहुंचने से रोकना और मध्य दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखना था।

मुंबई में शिवाजी पार्क बना विरोध का बड़ा केंद्र

दिल्ली से अलग मुंबई में CJP ने शिवाजी पार्क को अपने प्रदर्शन के लिए चुना। पुलिस की ओर से अनुमति नहीं दिए जाने के बावजूद शुक्रवार शाम बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचे। प्रदर्शन में युवाओं की संख्या उल्लेखनीय रही। हाथों में तिरंगा, पोस्टर और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने मंच से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव और SIR प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए। संगठन का कहना है कि मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ-साथ मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी आपत्तियां सामने रखीं।

दीपके ने कहा कि मुंबई का यह कार्यक्रम आंदोलन की शुरुआत है और आने वाले दिनों में इसे दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा। उनके मुताबिक गोवा, बेंगलुरु, कोलकाता और अन्य शहरों में भी विरोध की योजना है। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अगर ज्ञानेश कुमार पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर फिर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा। CJP ने इसे ‘जंतर-मंतर 2.0’ नाम दिया है।

प्रदर्शन में फिल्म जगत की कई हस्तियां भी पहुंचीं

मुंबई के प्रदर्शन को राजनीतिक और सामाजिक हलकों के साथ-साथ फिल्म जगत से जुड़े कुछ लोगों की मौजूदगी से भी काफी चर्चा मिली। अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और संगीतकार विशाल ददलानी समेत कई चर्चित हस्तियां शिवाजी पार्क पहुंचीं। शबाना आजमी ने मतदान को लोकतांत्रिक अधिकार बताते हुए प्रदर्शन में शामिल लोगों को संबोधित किया। विशाल ददलानी ने भी चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़े सवालों पर अपनी बात रखी।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक प्रदर्शन में अन्य फिल्मी हस्तियों की मौजूदगी भी रही। इस वजह से सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में मुंबई के आंदोलन की चर्चा और तेज हुई। हालांकि, प्रदर्शन में शामिल सभी लोगों की राजनीतिक राय एक जैसी नहीं थी। कुछ प्रतिभागियों ने कहा कि वे संगठन के सभी दावों से पूरी तरह सहमत नहीं हैं, लेकिन वे आंदोलन में शामिल होकर मुद्दों को समझना चाहते हैं।

प्रदर्शन के दौरान बुजुर्ग की मौत से माहौल हुआ गंभीर

शिवाजी पार्क में प्रदर्शन के बीच एक दुखद घटना भी हुई। ठाणे निवासी 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई शाम करीब साढ़े चार बजे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे थे। करीब आधे घंटे बाद उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की। उनके साथ मौजूद लोगों और वहां तैनात पुलिसकर्मियों ने मदद की। मौके पर मौजूद डॉक्टर ने शुरुआती उपचार दिया, जिसके बाद उन्हें शिवाजी पार्क स्थित सुश्रुषा अस्पताल ले जाया गया।

पुलिस के अनुसार अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई और डॉक्टरों ने इसकी वजह हार्ट अटैक बताई। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट दर्ज की है और शव परिवार को सौंप दिया गया। यह घटना उस समय हुई जब प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

शिवाजी पार्क में तनाव रहा, लेकिन बड़ा टकराव नहीं हुआ

मुंबई में प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था काफी कड़ी रही। पुलिस ने पहले ही CJP को शिवाजी पार्क में कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी थी, इसके बावजूद संगठन ने वहां जुटने और ‘जेल भरो आंदोलन’ का ऐलान किया था। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौके पर तैनात रहे। इसके बावजूद दिल्ली की तरह बड़े पैमाने पर हिरासत या हिंसक टकराव की स्थिति सामने नहीं आई।

प्रदर्शन के समानांतर मुंबई के कुछ अन्य हिस्सों में CJP के खिलाफ भी विरोध देखने को मिला। कुछ लोगों ने संगठन और उसके आंदोलन के खिलाफ नारे लगाए। स्थानीय स्तर पर यह भी कहा गया कि बड़े जमावड़े से आसपास की सामान्य गतिविधियों और कारोबार पर असर पड़ रहा है। इस तरह मुंबई में एक तरफ CJP का मुख्य प्रदर्शन जारी रहा, तो दूसरी तरफ उसके विरोध में भी आवाजें उठीं।

राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया

कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बीच सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि गांधी जयंती के दिन हजारों युवा शांतिपूर्ण तरीके से सड़कों पर उतरे और अपने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए ‘वोट चोरी’ के मुद्दे पर सवाल उठा रहे हैं।

राहुल गांधी ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों की मांग स्पष्ट है और वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर भी सवाल उठाया और कहा कि युवाओं को हिरासत में लिया जा रहा है। राहुल गांधी ने अपने संदेश में महात्मा गांधी के सत्य और शांतिपूर्ण संघर्ष के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि सवाल उठाने से लोगों को नहीं रोका जा सकता।

10 अक्टूबर को फिर दिल्ली में जुटने का ऐलान

मुंबई के शिवाजी पार्क से CJP ने अपने अगले बड़े कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। अभिजीत दीपके ने कहा है कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को देशभर से समर्थकों को दिल्ली बुलाया जाएगा। उनका कहना है कि जंतर-मंतर पर दोबारा प्रदर्शन किया जाएगा और यदि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां पहुंचने से रोका तो जिस जगह उन्हें रोका जाएगा, वहीं विरोध जारी रखा जाएगा।

इस घोषणा के साथ ही ज्ञानेश कुमार को लेकर चल रहा विवाद अब केवल एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है। दिल्ली और मुंबई के बाद CJP ने अन्य शहरों में भी आंदोलन फैलाने की बात कही है। दूसरी ओर, दिल्ली में पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा प्रतिबंधों ने प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। फिलहाल आंदोलन के केंद्र में मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा, मतदाता सूची में बदलाव और SIR प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवाल हैं।